उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा

किसी भी राज्य का वास्तविक वैभव उसकी गगनचुंबी इमारतों में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य में बसता है। एक दौर था जब उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं के हाशिए पर खड़ा था, लेकिन आज यह राज्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कायाकल्प का गवाह बन रहा है। पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस के खौफ को खत्म करने से लेकर 'एक जनपद, एक मेडिकल कॉलेज' के संकल्प और गोरखपुर में प्रदेश के प्रथम आयुष विश्वविद्यालय के उदय तक यूपी की यह स्वास्थ्य यात्रा किसी संजीवनी से कम नहीं है। इस सारगर्भित लेख में आप उत्तर प्रदेश की नवीनतम स्वास्थ्य नीति, डिजिटल डॉक्टर क्लीनिक, आयुष्मान भारत की सफलता और राज्य के संपूर्ण चिकित्सा ढांचे के बदलते परिदृश्य की विस्तृत व प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करेंगे।
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किसी भी राज्य में विकास का स्तर इस बात से निर्धारित होता है कि वहां स्वास्थ्य सेवाएं कैसी हैं। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में कुछ वर्ष पूर्व तक तमाम खामियां एवं कठिनाइयां गिनाई जाती थीं, लेकिन हाल के दिनों में इसमें सुधार हुआ है। नये चिकित्सा विश्वविद्यालय एवं मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं, साथ ही निचले स्तर तक दवाएं पहुंचाने का प्रयास भी किया जा रहा है, जो काफी हद तक सफल है।
उत्तर प्रदेश में आज 80 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें 44 सरकारी मेडिकल कॉलेज, 2 एम्स (AIIMS), 2 केन्द्रीय चिकित्सा विश्वविद्यालय, 36 निजी मेडिकल कॉलेज तथा 1 डीम्ड विश्वविद्यालय शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश मेडिकल एजुकेशन कौंसिल ने प्रदेश में 13 नये मेडिकल कालेज खोलने की घोषणा की है। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में एम.बी.बी.एस. की 100 सीटें होंगी।
उच्च स्वास्थ्य सुविधाओं तक आम व्यक्ति की पहुंच बनाने हेतु डिजीटल डाक्टर योजना आरम्भ की गयी है।

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा (नवीनतम परिदृश्य)

नई स्वास्थ्य नीति 2025: 3-स्तरीय मॉडल

मॉडल A (17 नगर निगम)

कम से कम 200 बेड वाले 3 सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल (निजी निवेश)। न्यूरो, कार्डियो, यूरोलॉजी सुविधाएं।

मॉडल B (57 जिला मुख्यालय)

राज्य के 57 जिला मुख्यालयों पर 200 बेड के आधुनिक चिकित्सालयों की स्थापना।

मॉडल C (75 जिले - ग्रामीण)

ग्रामीण व पिछड़े क्षेत्रों में 100 बेड वाले चिकित्सालय। सामान्य चिकित्सा, शल्य एवं प्रसूति रोग सुविधाएं।

🏥 मेडिकल कॉलेज (एक जनपद, एक मेडिकल कॉलेज)

  • वर्तमान में कुल 80 मेडिकल कॉलेज
  • 44 सरकारी, 36 निजी, 2 AIIMS (गोरखपुर, रायबरेली)।
  • 13 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा।
  • प्रत्येक कॉलेज में 20 KL ऑक्सीजन टैंक अनिवार्य।

🩺 डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक

  • ग्रामीण/सुदूर क्षेत्रों में सस्ती टेलीमेडिसिन सेवा।
  • पायलट प्रोजेक्ट: लखनऊ और बुलंदशहर (20 केंद्र)।
  • AI और ब्लॉकचेन आधारित तकनीक।
  • वीडियो परामर्श, लैब और दवाइयों की सुविधा।

🌿 प्रथम आयुष विश्वविद्यालय

  • स्थान: गोरखपुर (भटहट के पिपरी में)।
  • उद्घाटन: 2 जुलाई, 2025 (राष्ट्रपति द्वारा)।
  • नाम: महायोगी गुरू गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय।
  • प्रदेश के 19 आयुष महाविद्यालयों को संबद्धता।

प्रति लाख जनसंख्या पर एलोपैथिक चिकित्सालय एवं शैय्या

आर्थिक सम्भाग एलोपैथिक चिकित्सालयों की संख्या चिकित्सालयों में शैय्या (Beds) की संख्या
पूर्वी सम्भाग 2.39 36.44
बुन्देलखण्ड 2.01 32.94
पश्चिमी सम्भाग 2.01 42.58
केन्द्रीय सम्भाग 3.08 45.58
उत्तर प्रदेश (औसत) 2.21 36.97

प्रमुख स्वास्थ्य योजनाएं एवं सफलताएं

🛡️ आयुष्मान भारत योजना

  • गरीब परिवारों को ₹5 लाख तक का निःशुल्क बीमा।
  • यूपी में 5.14 करोड़ से अधिक परिवारों को लाभ।
  • आयुष्मान कार्ड बनाने में यूपी देश में प्रथम
  • 22,681 आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत।

🚑 एंबुलेंस सेवाएं

  • 102 सेवा: गर्भवती महिलाओं व शिशुओं हेतु निःशुल्क।
  • 108 सेवा: आकस्मिक परिस्थितियों हेतु (टोल फ्री)।
  • ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतम समय: 30 मिनट।
  • शहरी क्षेत्र में अधिकतम समय: 20 मिनट।

👩‍👧 मातृ एवं शिशु कल्याण

  • जननी सुरक्षा: संस्थागत प्रसव पर आर्थिक सहायता (ग्रामीण ₹1400, शहरी ₹1000)।
  • मातृ वन्दना: प्रथम जीवित बच्चे पर 3 किश्तों में ₹5000।
  • जननी शिशु सुरक्षा: कैशलेस डिलीवरी सेवा।

⚠️ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां एवं सांख्यिकी (2024-25 रिपोर्ट)

  • बाल मृत्यु दर: 1000 में 43 बच्चे (5 वर्ष की आयु से पूर्व)। यूपी देश में दूसरे स्थान पर है।
  • शिशु मृत्यु दर (IMR): 1000 जीवित जन्मों पर 38।
  • नवजात मृत्यु दर (NMR): 1000 जीवित जन्मों पर 28।
  • मातृ मृत्यु दर (MMR): 1 लाख जीवित जन्मों पर 167।
  • इंसेफेलाइटिस (JE/AES): 2018 में संक्रमण दर 11.25% थी, जो 2025 तक घटकर 2% से नीचे आ गई है।

स्वास्थ्य सुविधाओं में समस्या

कुछ समय पहले तक उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सुविधाओं और सेहत के मामले में देश में सबसे निचले पायदान पर था। इसका मुख्य कारण प्रदेश में स्वास्थ्य केन्द्रों एवं डॉक्टरों की कमी के अतिरिक्त प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर कम खर्च को माना जाता है। इन्हीं कारणों से नीति आयोग द्वारा जारी स्वास्थ्य सम्बन्धी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को देश के अन्य राज्यों में सबसे नीचे का स्थान प्राप्त हुआ, जबकि केरल इस सूची में सबसे ऊपर था।
प्रदेश में जनसंख्या के अनुपात में डॉक्टरों की कमी इस सम्बन्ध में एक बड़ी समस्या मानी जाती है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों तक एक पंजीकृत डॉक्टर पर 19,962 रोगियों को देखने का दायित्व था। इस प्रकार एक डॉक्टर पर 3,812 मरीजों को देखने की जिम्मेदारी आती है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मानक प्रत्येक एक हजार रोगी पर एक डॉक्टर की उपलब्धता का है।
प्रदेश शासन के अंतर्गत कार्य करने वाले राजकीय चिकित्सालयों में प्रांतीय चिकित्सा संवर्ग (PMS) के डॉक्टरों की नियुक्ति होती है। इस संवर्ग में प्रदेश में 18,732 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं किंतु इनमें से लगभग 5 हजार पद रिक्त चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त जिला चिकित्सालयों में तैनात डॉक्टरों को मरीज देखने के अतिरिक्त पोस्टमार्टम और इमरजेंसी से लगाय वीआईपी ड्यूटी तक करनी पड़ती है। इन स्थितियों के कारण चिकित्सालयों में डॉक्टरों की अनुपलब्धता बनी रहती है और मरीज परेशान होते हैं। लोकसभा में प्रस्तुत एक रिपोर्ट में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि प्रदेश के 942 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (PHC) बिजली, पानी की नियमित आपूर्ति, सभी मौसमों में पहुंचने लायक सड़क के बगैर काम कर रहे हैं। गरीब मरीजों को इलाज देने के लिए बुनियादी सुविधाएं बेहद खराब हैं।

उत्तर प्रदेश की नयी स्वास्थ्य नीति निजी क्षेत्र की सहायता से सुधरेगी राज्य की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा व्यवस्था
  • मई, 2025 में लिये गए निर्णय के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नई स्वास्थ्य नीति तैयार कर रही है। नयी स्वास्थ्य नीति निजी निवेशकों को आकर्षित कर शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी उन्नत स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य पर आधारित होगी।
  • नई स्वास्थ्य नीति पर प्रदेश कैबिनेट द्वारा शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की संभावना है। यह नीति अगले पांच वर्षों में लागू होगी।
  • नई स्वास्थ्य नीति में निजी क्षेत्र को भागीदार बनाने पर जोर दिया गया है, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार, निवेश और समावेशन को बढ़ावा दिया जा सके।
  • प्रदेश सरकार नई स्वास्थ्य नीति के माध्यम से प्रदेश में सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाओं, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, ऑन्कोलॉजी जैसी उच्चस्तरीय उपचार व्यवस्था हर जिले में उपलब्ध कराना चाहती है। इसके अन्तर्गत निजी अस्पतालों को सरकारी योजनाओं, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, आयुष्मान भारत डिजिटल आदि से जोड़ा जाएगा।
  • प्रदेश की नई स्वास्थ्य नीति तीन स्तरीय, क्रमशः ए, बी और सी, मॉडल पर आधारित होगी।
  • मॉडल ए में 17 नगर निगम क्षेत्र शामिल होंगे। इन क्षेत्रों में कम से कम 200 बेड वाले तीन सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों की स्थापना के लिए निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। इन चिकित्सालयों में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी तथा यूरोलॉजी के विभाग स्थापित किए जाएंगे।
  • मॉडल बी के अंतर्गत राज्य के 57 जिला मुख्यालयों पर 200 बेड के चिकित्सालयों की स्थापना की जाएगी।
  • मॉडल सी के अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जिलों के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में 100 बेड वाले चिकित्सालयों की स्थापना की जाएगी। यहां पर मरीजों को सामान्य चिकित्सा, सामान्य शल्य प्रक्रिया और प्रसूति एवं स्त्री रोग आदि से जुड़ी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी।
  • नई स्वास्थ्य नीति में निवेशकों/निजी क्षेत्र को भूमि खरीदने हेतु स्टाम्प ड्यूटी में 100 प्रतिशत तक की छूट, बिजली कनेक्शन में प्राथमिकता, अस्पतालों को जल्द अनुमोदन (एनओसी) की सुविधा प्रदान की जाएगी।
  • सरकार की नई नीति राज्य में न सिर्फ स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार लाएगी, बल्कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में भी सहायक होगी।

स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास

प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली जनता को अच्छी स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्राथमिक एवं सामुदायिक केन्द्रों (PHC-CHC) की स्थापना की गयी है। यह केन्द्र वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर स्थापित किये जाते हैं, जिसके अनुसार तीस हजार की जनसंख्या पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा एक लाख की जनसंख्या पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के निर्माण का निर्णय लिया जाता है। प्रदेश में मौजूदा समय में 67 जिला अस्पताल, 873 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 3,650 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 20,551 स्वास्थ्य उपकेन्द्र (सब सेन्टर) संचालित हैं। इनकी संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।
एलोपैथिक चिकित्सालयों के अतिरिक्त प्रदेश में आयुष चिकित्सा पद्धति को भी पर्याप्त प्रोत्साहन दिया जा रहा है। राज्य के विभिन्न जनपदों में आज (2025-26) 2,110 आयुर्वेदिक, 254 यूनानी तथा 1,585 होम्योपैथिक चिकित्सालयों के साथ ही 8 आयुर्वेदिक कॉलेज एव उनसे संबद्ध चिकित्सालय, दो यूनानी कॉलेज एवं 9 होम्योपैथिक कॉलेज कार्य कर रहे हैं।
2 जुलाई, 2025 को प्रदेश के प्रथम आयुष विश्वविद्यालय ने राष्ट्रपति द्वारा उद्घाटन किये जाने के साथ ही गोरखपुर में अधिकृत रूप से कार्य करना आरंभ कर दिया।
प्रदेश में बीते चार वर्षों के भीतर स्वास्थ्य सुविधाओं में तेजी से सुधार हुआ है। अनेक मेडिकल कॉलेज और चिकित्सालयों की स्थापना की गयी है। स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु (11.4 प्रतिशत) तथा उत्तर प्रदेश (10.9 प्रतिशत), सरकारी तथा निजी स्नातक मेडिकल कॉलेजों के संदर्भ में शीर्ष पर हैं। डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने का क्रम जारी है।
वर्ष 2025 तक उत्तर प्रदेश में एमबीबीएस (MBBS) की कुल 12,475 सीटें विद्यमान हैं जिसमें से 4,303 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेज में हैं। वहीं प्रदेश में कुल 4,028 स्नातकोत्तर (P.G) सीटें हैं।
प्रदेश की स्थापना के बाद के सात दशक में जहां मात्र 12 राजकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना हो सकी थी, वहीं 2025 में यहां मेडिकल कॉलेजों की संख्या 80 हो चुकी है, जबकि 8 मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं।

प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर चिकित्सालयों एवं शैय्या की संख्या

उत्तर प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर एलोपैथिक चिकित्सालयों की सर्वाधिक संख्या 3.08 केन्द्रीय संभाग में तथा सबसे कम 2.01 बुन्देलखण्ड एवं पश्चिमी क्षेत्र में है। प्रति लाख जनसंख्या पर एलोपैथिक चिकित्सालयों में उपलब्ध शैय्याओं की संख्या सर्वाधिक 45.58 पश्चिमी एवं केन्द्री संभाग में एवं सबसे कम 32.97 बुंदेलखण्ड क्षेत्र में है।
प्रति लाख जनसंख्या पर आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथिक चिकित्सालयों एवं औषधालयों की संख्या सर्वाधिक 2.79 केन्द्रीय संभाग में एवं सबसे कम 1.76 पश्चिमी क्षेत्र में स्थित हैं। प्रति लाख जनसंख्या पर आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथिक चिकित्सालयों एवं औषधालयों में शैय्या की संख्या सर्वाधिक 8.46 केन्द्रीय संभाग में तथा सबसे कम 4.13 बुन्देलखण्ड क्षेत्र में पायी गयी है।

आर्थिक सम्भाग एलोपैथिक चिकित्सालयों की संख्या चिकित्सालयों में शैय्या की संख्या
1. पूर्वी सम्भाग 2.39 36.44
2. बुन्देलखण्ड 2.01 32.94
3. पश्चिमी सम्भाग 2.01 42.58
4. केन्द्रीय सम्भाग 3.08 45.58
उत्तर प्रदेश 2.21 36.97

वर्ष 2024-25 में राज्य में 13 स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय एवं पीपीपी मोड पर 3 जनपदों महराजगंज, संभल तथा शामली में नये मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गयी है। बलरामपुर एवं बलिया में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना हेतु क्रमशः 27 करोड़ एवं 25 करोड़ की व्यवस्था की गई है।
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 मे यूजी और पीजी की 1500 सीटें उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजो में जोडने की घोषणा की गयी है।
प्रदेश सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के अनेक महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं-

आरोग्य मेला में उपचार

प्रदेश में 2 फरवरी, 2020 से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रत्येक रविवार मुख्यमंत्री आरोग्य मेला का आयोजन किया जा रहा है, जिससे समाज के पिछड़े और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित लोगों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य परीक्षण, विशेषज्ञ डॉक्टरों के परामर्श एवं इलाज की सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार योजना आरम्भ होने के कुछ ही माह के भीतर इस योजना के अंतर्गत दस लाख से अधिक रोगियों का उपचार किया गया जबकि 25 हजार से अधिक रोगियों को चिकित्सालयों में भर्ती कराया गया।

आयुष्मान भारत

भारत सरकार के 'आयुष्मान भारत' के अंतर्गत गरीब परिवारों को ₹5 लाख तक की निःशुल्क चिकित्सा बीमा की सुविधा प्रदान की जा रही है। प्रदेश में वर्ष 2025 तक 5.14 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को इस योजना का लाभ प्राप्त हो रहा है। प्रदेश के 5,834 चिकित्सालयों में लोगों को योजना का लाभ मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश आयुष्मान कार्ड बनाने में पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य इकाइयों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में उच्चीकृत किया जा रहा है।
राज्य में वर्तमान में 22,681 आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्य कर रहे हैं। बजट 2025-26 में सरकार द्वारा इनके विस्तार की घोषणा की गयी है।

इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों में कमी
कुछ वर्ष पूर्व तक उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतें बड़ी समस्या थीं। लगभग प्रत्येक वर्ष इससे सैकड़ों बच्चों की मौत होती थी, जबकि उससे अधिक बच्चे विकलांग हो जाते थे। बीते कुछ वर्षों में सरकार द्वारा किये गये प्रयासों से इस बीमारी के प्रभाव में कमी आई है। वर्ष 2018 में इसका संक्रमण दर 11.25 प्रतिशत था, जो घटकर अब 2025 तक 2 प्रतिशत से नीचे आ चुका है। इस बीमारी से पूर्वांचल, विशेषकर गोरखपुर क्षेत्र, में प्रतिवर्ष हजारों बच्चों की मौत होती रही है और विगत कई वर्षों से प्रदेश की समूची स्वास्थ्य सेवाओं पर इससे सवाल उठता रहा है।

स्वास्थ्य केन्द्रों पर सुविधाओं में वृद्धि

प्रदेश में चिकित्सा कर्मियों की घटती संख्या को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गयी है।
इसके अतिरिक्त 11,522 स्टॉफ नर्स, 6,916 ए.एन.एम. एवं 1,596 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसरों की हाल में विभिन्न केन्द्रों पर तैनाती की गयी है।
शहरी क्षेत्र की मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को गुणवत्तापरक निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 592 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इनमें से 405 नगरीय स्वास्थ्य केन्द्रों को बीते तीन वर्षों में हेल्थ एण्ड वेलनेस केन्द्र के रूप में परिवर्तित किया गया है।

डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक

  • राज्य के ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य एवं चिकित्सा से संबंधित एक नई योजना ले कर आ रही है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 'डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक' की स्थापना की जाएगी।
  • डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक का उद्देश्य गांवों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारना है, जिससे किफायती दरों पर लोगों को गंभीर से गंभीर बीमारियों में चिकित्सीय परामर्श के साथ ही दवाइयां और पैथोलॉजी टेस्ट की सुविधा दी जा सके।
  • 'डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक' एक तरह से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (PHC) की तरह काम करेंगे, जहां मरीजों को न सिर्फ ऑनलाइन वीडियों कॉन्फ्रेंस के माध्यम से डॉक्टर्स का परामर्श प्राप्त होगा, बल्कि हेल्थ केयर असिस्टेंस के साथ ही लैबोरेटरी की भी सुविधा मिलेगी।
  • डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक एक टेलीमेडिसिन प्रणाली की दोनों शाखाओं (परामर्श केंद्र और स्पेशिलिटी सेंटर) के कांबिनेशन पर कार्य करेगी।
  • डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक पायलट प्रोजेक्ट के तहत सर्वप्रथम लखनऊ और बुलंदशहर के 20 केंद्रों में सेवाएं आरंभ की जा रही है, जिसके बाद इसे पूरे प्रदेश में शुरू किया जाएगा।
  • प्रदेश सरकार यह योजना निजी निवेश के माध्यम से संचालित करेगी। ब्लॉकचेन और आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस टेक्नोलॉजी पर बेस्ड डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक पर एमबीबीएस चिकित्सक गांवों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों तक टेक्नोलॉजी के माध्यम से पहुंचेंगे और उनका सही उपचार कर जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध करवाएंगे।
  • राज्य में डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक के लिए प्रदेश सरकार ने ओबदु ग्रुप के साथ ₹350 करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। योजना के विस्तार हेतु कुछ अन्य इन्वेस्टर्स से भी बातचीत हो रही हैं। सरकार का उद्देश्य एमओयू के आकार को एक हजार करोड़ रुपए तक ले जाना है।

उत्तर प्रदेश बजट 2025-26 में स्वास्थ्य क्षेत्र
  • कुल बजट : 50,550 करोड़ रुपये।
  • निजी क्षेत्र के लिए इंसेंटिव- ₹22 करोड़ 91 लाख 59 हजार।
  • स्टेट एलाइड एंड हेल्थ केयर काउंसिल के गठन हेतु आवंटन: ₹4 करोड़।
  • बलरामपुर में नये मेडिकल कॉलेज हेतु ₹25 करोड़।
  • बलिया में नया मेडिकल कॉलेज: ₹27 करोड़।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
  • एलोपैथी-₹12,817 करोड़ 83 लाख 12 हजार।
  • परिवार कल्याण-₹16354 करोड़।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य-₹1458 करोड़ 62 लाख।

नई योजनाएं
  • विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षा बोर्ड का गठन-₹3 करोड़ 34 लाख।
  • प्रदेश की सभी सीएचसी में ऑनलाइन स्वास्थ्य सुविधाएं आरंभ करना: ₹5 करोड़।
  • सीएचसी पर एडवांस्ड पैथॉलाजी: ₹25 करोड़।
  • टेलीमेडिसिन व टेली कंसल्टेशन: ₹5 करोड़।
  • हेल्थ एटीएम कियोस्क मशीनों के लिए इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर: ₹25 करोड़।
  • हेल्थ फेसिलिटी को पीपीपी मोड पर चलाने के लिए: ₹15 करोड़।

आयुष विभाग
  • आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा: ₹1920 करोड़।
  • होम्योपैथी: ₹814 करोड़ 54 लाख।

मोबाइल मेडिकल यूनिट

प्रदेश में पहली बार नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से 53 जिलों में मोबाइल मेडिकल यूनिट को सक्रिय किया गया है। इस योजना से प्रतिमाह लाखों व्यक्तियों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं।
प्रदेश में पहली बार एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस सेवा द्वारा गंभीर रोगियों को आवश्यकतानुसार एडवांस स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ चिकित्सालयों तक पहुंचाने का काम शुरू किया गया है। वर्तमान में संचालित 250 से अधिक एंबुलेंस द्वारा प्रतिमाह हजारों रोगियों को निःशुल्क परिवहन एवं आपातकालीन चिकित्सा सेवा प्रदान की जा रही है।

102 नेशनल एंबुलेंस सेवा
प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा नेशनल एंबुलेंस सेवा "102" एन.ए. एस. प्रारम्भ किया गया है। यह सुविधा पूरे प्रदेश में गर्भवती महिलाओं एवं एक वर्ष की आयु तक के शिशुओं को निःशुल्क घर से चिकित्सालय तथा चिकित्सालय से घर तक तथा एक चिकित्सा इकाई से दूसरी चिकित्सा इकाई तक लाभार्थी को परिवहित करने में प्रयोग की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में एंबुलेंस पहुंचने का अधिकतम समय 30 मिनट तथा शहरी क्षेत्रों में 20 मिनट निर्धारित किया गया है।

108 एंबुलेंस सेवा
बीमार व्यक्ति को आकस्मिक परिस्थितियों में निकटवर्ती चिकित्सा इकाई तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेश में यह निःशुल्क एंबुलेंस सेवा आरम्भ की गयी है। प्रदेश के किसी भी स्थान से निःशुल्क टोल फ्री नंबर '108' पर कॉल कर शहरी क्षेत्र में 20 मिनट में तथा ग्रामीण क्षेत्र में 30 मिनट में एंबुलेंस को रोगी तक पहुंचाने की व्यवस्था की गयी है।

'एक जनपद, एक मेडिकल कालेज'

  • उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 तक मात्र 42 मेडिकल कॉलेज थे। इनमें सरकारी क्षेत्र के 17 और निजी क्षेत्र के 25 मेडिकल कालेज थे। नयी स्वास्थ्य नीति के क्रम में सरकार ने 'एक जनपद, एक मेडिकल कालेज' (वन डिस्ट्रिक, वन मेडिकल कॉलेज) कार्यक्रम आरंभ किया है। 'एक जनपद, एक मेडिकल कॉलेज' के अन्तर्गत राज्य सरकार पांच वर्षों के अंदर प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रही है। अब तक 50 जिलों में मेडिकल कॉलेज आरंभ किये जा चुके हैं, जबकि 16 जिलों में सार्वजनिक-निजी क्षेत्र भागीदारी (PPP) के तहत मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया चल रही है। इनमें छह जिलों में निजी क्षेत्र की संस्थाओं का चयन किया जा चुका है।
  • वर्ष 2025-26 से प्रदेश के बुलंद शहर, बिजनौर, पीलीभीत, कुशीनगर, सुल्तानपुर, ललितपुर, कानपुर देहात, औरैया, चंदौली, गोंडा, सोनभद्र, लखीमपुर खीरी तथा कौशांबी में स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में कार्य आरंभ हो चुके हैं। पीपीपी मॉडल पर महराजगंज, शामली तथा संभल में भी मेडिकल कॉलेजों को आरंभ किया जा चुका है।
  • प्रदेश के बागपत, हाथरस और कासगंज में मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया आरंभ की जा रही है।
  • प्रदेश में दो एम्स, दो केंद्रीय चिकित्सा संस्थान तथा 33 निजी मेडिकल कॉलेज भी संचालित हो रहे हैं।
  • राज्य के समस्त अस्पतालों एवं मेडिकल कालेजों को आक्सीजन उपलब्धता में आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। जनवरी, 2021 तक प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में लिक्विड मेडिकल आक्सीजन की क्षमता मात्र 241 किलोलीटर थी, जिसे 2024 में बढ़ाकर 1,444 किलोलीटर किया जा चुका है।
  • प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में 20 किलोलीटर का आक्सीजन टैंक भर कर रखना अनिवार्य कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नीति, 2018

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने 22 जून, 2018 को राज्य की प्रथम स्वास्थ्य नीति जारी की। इस तरह उत्तर प्रदेश कर्नाटक के बाद देश दूसरा ऐसा राज्य बन गया, जिसके पास अपनी स्वास्थ्य नीति है।
  • प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में स्वास्थ्य क्षेत्र पर होने वाला कुल व्यय वर्तमान में लगभग 1.4 प्रतिशत है, जबकि आवश्यकता इसके दोगुने से अधिक की है।
  • उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नीति 2018 में स्वास्थ्य क्षेत्र पर होने वाले व्यय को 2.5 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • प्रदेश की नयी स्वास्थ्य नीति में गांवों से लगाय शहरों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को इस तरह विकसित करने की बात की गयी है कि चिकित्सा अथवा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु लोगों को महानगरों तक दौड़ न लगानी पड़े।
  • राज्य का स्वास्थ्य बजट बढ़ने से सर्वाधिक लाभ गरीबों और वंचितों को होगा। ब्लाक स्तर पर स्थापित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (PHC) एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (CHC) से लगाय जनपद स्तरीय जिला अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, आपरेशन थियेटर एवं जांच केन्द्रों की स्थापना से गरीबों एवं साधनहीन व्यक्तियों को स्थानीय स्तर पर निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होनी आरंभ हुई हैं, जिससे असमय होने वाली मृत्युओं में कमी आयी है।
  • उत्तर प्रदेश के अनेक भाग, विशेषकर पूर्वांचल में, जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) तथा एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) से प्रतिवर्ष सैकड़ों बच्चों की मृत्यु हो जाती रही है। चिकित्सा के परिणामस्वरूप जो पीड़ित बच्चे इस बीमारी के पश्चात मृत्यु से बच जाते थे, वह प्राय: विकलांग हो जाते थे। पूर्वांचल के मेडिकल कॉलेज तथा जिला अस्पताल इंसेफेलाइटिस पीड़ित बच्चों से महीनों भरे रहते थे। राज्य की नयी स्वास्थ्य नीति के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश को इस समस्या से लगभग छुटकारा प्राप्त हो चुका है।
  • नयी स्वास्थ्य नीति के अन्तर्गत प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर होने वाले व्यय में निरन्तर वृद्धि की जा रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने बजट 2024-25 में अपने कुल व्यय का 6.2 प्रतिशत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटित किया है, जो देश में राज्यों द्वारा स्वास्थ्य के लिए किये गये औसत आवंटन (6.2 प्रतिशत) के समकक्ष है।

जननी सुरक्षा योजना (JSY)

इस योजना के अंतर्गत प्रदेश में गरीब गर्भवती महिलाओं का राजकीय चिकित्सा केन्द्रों पर संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव कराने एवं जच्चा-बच्चा को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता दी जाती है। चिकित्सालयों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड की स्थापना की गयी है।

प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 65 हुई
  • उत्तर प्रदेश बजट 2023-24 के अनुसार, 'एक जनपद एक मेडिकल कॉलेज' योजना के अन्तर्गत प्रदेश के 45 जनपद मेडिकल कॉलेज से आच्छादित किये जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 14 जनपदों में मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं।
  • असेवित 16 जनपदों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना पी.पी.पी. मॉडल पर की जा रही है।
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्तमान में कुल 65 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जिसमें 35 राज्य सरकार के हैं।

लखनऊ में नया चिकित्सा विश्वविद्यालय

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। 50 एकड़ भूमि में फैले इस चिकित्सा विश्वविद्यालय की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसम्बर, 2019 को रखी। सम्पूर्ण प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के पाठ्यक्रमों व परीक्षाओं में एकरूपता लाने एवं प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृत शैक्षिक मार्गदर्शन तथा संचालित पाठ्यक्रमों को सम्बद्धता प्रदान करने के उद्देश्य से इस चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है।

गोरखपुर एवं रायबरेली में एम्स

गोरखपुर और रायबरेली में एम्स निर्माण का कार्य तेजी पर है। दोनों एम्स में ओपीडी एवं सर्जरी कार्य आरम्भ हो चुका है और एमबीबीएस की क्रमशः 125 एवं 100 सीटों पर शिक्षण कार्य भी हो रहा है।
  • जौनपुर में राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना प्रक्रियाधीन है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में स्थापित 25 जिला चिकित्सालयों को उच्चीकृत करते हुए स्वायत्तशासी स्टेट मेडिकल कॉलेज बनाये जाने की योजना है। इसके प्रथम चरण में बस्ती, बहराइच, शाहजहांपुर, फैजाबाद एवं फिरोजाबाद में निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। यहां प्रत्येक कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटों का संचालन प्रस्तावित है।
  • योजना के द्वितीय चरण में जनपद एटा, मिर्जापुर, गाजीपुर, सिद्धार्थनगर, हरदोई, प्रतापगढ़, फतेहपुर तथा देवरिया के स्वास्थ्य केन्द्रों को उच्चीकृत कर मेडिकल कॉलेज बनाये जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
  • प्रदेश सरकार के अधीन संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ में स्थापित है, जहां गंभीर रोगियों को अति विशिष्ट चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। यहां स्नातकोत्तर एवं अतिविशिष्टता की डिग्री भी प्रदान की जाती है।
  • हृदय एवं कैंसर रोग से पीड़ित गंभीर रोगियों के इलाज के लिए प्रदेश में हृदय रोग संस्थान कानपुर एवं जे.के. कैंसर संस्थान, कानपुर की स्थापना की गयी है। नर्सिंग का विशेष प्रशिक्षण देने हेतु कॉलेज ऑफ नर्सिंग कानपुर इसी विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
  • प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बलरामपुर चिकित्सालय कार्यरत है। यहां 10 शैय्या युक्त सुपर स्पेशालिटी विंग की स्थापना की गयी है।
  • डॉ. राममनोहर लोहिया चिकित्सालय लखनऊ तथा यू.एच.एम. चिकित्सालय कानपुर नगर में एम.आर.आई. मशीन लगाई गयी है। इसके अतिरिक्त डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय लखनऊ में कैथ लैब स्थापित है, जहां हृदय रोगियों का उपचार किया जाता है।
  • प्रदेश के वाराणसी और बरेली में राजकीय मानसिक चिकित्सालय कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त आगरा मानसिक चिकित्सालय स्वायत्त पोषित संस्थान के रूप में कार्य कर रहा है।

उत्तर प्रदेश में बाल मृत्यु दर चिंताजनक स्थिति में

  • तमाम सुधारों और दावों के बावजूद उत्तर प्रदेश में बाल मृत्यु दर की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बाल मृत्यु दर के मामले में उत्तर प्रदेश देश के राज्यों में द्वितीय स्थान पर है।
  • केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी वार्षिक स्वास्थ्य रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार उत्तर प्रदेश में जन्म लेने वाले प्रत्येक 1,000 बच्चों में से 43 बच्चे पाँच वर्ष की आयु तक पहुँचने से पहले ही मर जाते हैं।
  • राज्य में शिशु मृत्यु दर (IMR) 1,000 जीवित जन्मों में 38 है, जबकि नवजात मृत्यु दर (NMR), अर्थात जीवन के पहले 28 दिनों के भीतर मृत्यु 1,000 में 28 है। यह आँकड़े राष्ट्रीय औसत शिशु मृत्यु दर (IMR) 28 और नवजात मृत्यु दर (NMR) 20 से काफी अधिक हैं।
  • उत्तर प्रदेश बाल मृत्यु दर में देश के एकमात्र राज्य मध्य प्रदेश से पीछे है, जहां शिशु मृत्यु दर 43 और नवजात मृत्यु दर 31 है।

सुधार के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सुरक्षित प्रसव पद्धतियों एवं देख-रेख से बाल एवं नवजात मौतों को कम किया जा सकता है। नवजात शिशु में सेप्सिस (सेप्टिसीमिया) जैसे संक्रमण, जो प्राय: प्रसव के दौरान खराब स्वच्छता के कारण होते हैं, नवजात शिशुओं की मृत्यु का प्रमुख कारण हैं। यह संक्रमण अस्वास्थ्यकर वातावरण में तेजी से फैलते हैं, खासकर उस समय जब प्रशिक्षित चिकित्सा सहायता के बिना घर पर प्रसव कराया जाता है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी वार्षिक स्वास्थ्य रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार उत्तर प्रदेश में बाल मृत्यु दर तथा शिशु मृत्यु दर की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है- 
  • बाल मृत्युदर : 1000 में 43 बच्चे जन्म से पांच दिनों के भीतर मर जाते हैं।
  • शिशु मृत्यु (IMR) 1000 जीवित बच्चों पर 38
  • नवजात मृत्यु दर (NMR) 1000 जीवित जन्मों पर 28
  • मातृ मृत्यु दर (MMR) 1 लाख जीवित जन्मों पर 167
  • उत्तर प्रदेश में 35 प्रतिशत बच्चे समय से पूर्व पैदा होते हैं, जो उनके अस्वस्थ होने का कारण बनता है।
  • प्रदेश में 33 प्रतिशत नवजात में संक्रमण पाया गया, जो असावधानी का परिणाम होता है।
  • 20 प्रतिशत नवजात में सांस न ले पाने की समस्या पायी गयी है।

ब्लड बैंक

प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 85 रक्तकोष (Blood Bank) स्थापित हैं। 18 जनपदों में क्षेत्रीय निदान केन्द्र सक्रिय हैं। इन निदान केन्द्रों में सी.टी. स्कैन तथा आधुनिक एक्स-रे मशीन जैसे विशिष्ट चिकित्सा उपकरण स्थापित हैं। इन केन्द्रों में उन्नति स्तर के पैथालॉजी लैब भी क्रियाशील हैं।
प्रदेश के राजकीय चिकित्सालयों में 19 सी.टी. स्कैन मशीन तथा 687 एक्स-रे मशीनें लगाई गयी हैं।

आयुष

भारतीय चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद/यूनानी) के माध्यम से प्रदेश के जन सामान्य तक स्वास्थ्य सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा आयुर्वेदिक एवं यूनानी पद्धतियों के विकास से सम्बन्धित योजनाओं पर बल दिया जा रहा है। इन योजनाओं के तीन आयाम हैं-
  1. चिकित्सीय क्रियाकलाप
  2. औषधि निर्माण एवं गुणवत्ता नियंत्रण
  3. शिक्षा एवं प्रशिक्षण

ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश
  • 12 जनवरी, 2023 को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 'ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22' रिपोर्ट जारी की गयी।
  • रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में कुल 20,778 स्वास्थ्य उपकेन्द्र, 3,516 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (PHC), 765 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (CHC) तथा 168 जिला अस्पताल हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में उपकेन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या में कुल आवश्यकता से क्रमशः 41 प्रतिशत, 50 प्रतिशत तथा 49 प्रतिशत की कमी है।

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य केन्द्रों की वर्तमान स्थिति

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य केन्द्रों की वर्तमान स्थिति
केन्द्र ग्रामीण शहरी
उपकेन्द्र 20,778 0
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र 753 12
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र 2,923 593
स्रोत: ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22
  • उत्तर प्रदेश के ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर सर्जन डॉक्टर के पदों में 571 रिक्तियां हैं। प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए कुल 753 सर्जन डॉक्टरों की आवश्यकता है, जबकि मात्र 182 डॉक्टर कार्यरत हैं। वहीं बाल रोग विशेषज्ञ तथा प्रसूति विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में भी कुल 565 डॉक्टरों के संदर्भ में 421 डॉक्टरों की कमी है।
  • उत्तर प्रदेश के जिला अस्पतालों में 4,497 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 3,261 डॉक्टर कार्य कर रहे हैं।
  • प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 839 स्वास्थ्य कर्मियों (ANM) की कमी है।
  • रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 140 चिकित्सकों की कमी है, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कुल 2 विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है।
  • उत्तर प्रदेश में औसत रूप से 60,413 व्यक्तियों पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (PHC) तथा औसतन 2,34,513 व्यक्तियों पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (CHC) है, जबकि औसतन 8,499 व्यक्तियों पर एक उप-केन्द्र है।
  • उत्तर प्रदेश में औसतन 5 ग्रामों पर एक उप-केन्द्र, 37 ग्राम पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 145 ग्राम पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र है।

होम्योपैथिक चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा

प्रदेश में 1981 में अलग होम्योपैथी चिकित्सा विभाग की स्थापना की गयी। उस समय प्रदेश में मात्र 329 राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय थे, जिनकी संख्या वर्तमान में बढ़कर 1536 हो चुकी है। इनमें 121 चिकित्सालय शहरी क्षेत्र में तथा शेष 1455 चिकित्सालय सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हैं।
प्रदेश में कुल 7 होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय संचालित हैं, जो लखनऊ, प्रयागराज, अयोध्या, कानपुर, गाजीपुर, आजमगढ़ एवं मुरादाबाद में स्थित हैं। यह सभी होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से सम्बद्ध हैं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संबंधी प्रमुख योजनाएं

आयुष्मान भारत

यह योजना सस्ती और समावेशी स्वास्थ्य सेवा के लिए संचालित की जा रही है इसका उद्देश्य वर्ष 2025 तक समस्त नागरिकों को रोगमुक्त कर प्रदेश को विकास के पथ पर आगे ले जाना है।
आयुष्मान भारत पर आने वाले व्यय को केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा 60:40 के अनुपात में वहन किया जाता है।
योजनान्तर्गत आने वाले सभी परिवारों को पांच लाख रुपये तक प्रतिवर्ष चिकित्सा बीमा कवर दिया जाता है।

मुख्यमंत्री जन-आरोग्य योजना

आयुष्मान भारत योजना के दायरे में नहीं आने वाले गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले नागरिकों के लिए मुख्यमंत्री जनआरोग्य अभियान की शुरुआत मार्च, 2019 में की गई। इसमें हीमोग्लोबीन, मूत्र द्वारा गर्भ की जांच, यूरिन डिपस्टिक द्वारा एल्बुमिन एवं ग्लूकोज, ग्लूकोमीटर द्वारा ब्लड ग्लूकोज आदि जाँच की सुविधा मिलती है।

राष्ट्रीय अन्धता नियन्त्रण कार्यक्रम

इस कार्यक्रम के अन्तर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों को मुफ्त चश्मा और मोतियाबिन्द ऑपरेशन के लिए आई.ओ.एल. विधि द्वारा शल्य-क्रिया (आपरेशन) की जाती है। मोतियाबिन्द के अतिरिक्त होने वाले नेत्र रोगों (डायबिटिक, रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा मैनेजमेंट, लेजरटेक्निक, कॉर्निया ट्रान्सप्लान्टेशन, विट्रियोरेटिनल सर्जरी तथा ट्रीटमेंट आफॅ चाइल्डहुड ब्लाइंडनेस) के ऑपरेशन एवं इलाज की सुविधा भी प्रदान की जाती है।
वर्तमान में यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत समायोजित कर चलाया जा रहा है। कार्यक्रम का लक्ष्य प्रदेश की अंधता दर 1.58 प्रतिशत से घटाकर 0.3 प्रतिशत पर लाना है।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम

कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य का ज्ञान, सामान्य स्वास्थ्य देखभाल में कुशलता और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है।
गम्भीर मानसिक विकारों में सीजोफ्रेनिया बाई पोलर विकार, आर्गेनिक साइकोसिस और गहन अवसाद से प्रति 1 हजार की संख्या में 20  व्यक्ति पीड़ित हैं, जिनके उपचार के लिए प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में उपचार और संदर्भन की व्यवस्था की गयी है।

उत्तर प्रदेश का प्रथम आयुष विश्वविद्यालय
  • उत्तर प्रदेश के प्रथम आयुष विश्वविद्यालय का लोकार्पण 2 जुलाई, 2025 को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने किया। गोरखपुर जनपद अंतर्गत भटहट के पिपरी में उत्तर प्रदेश के प्रथम आयुष विश्वविद्यालय ने कार्य आरंभ कर दिया है। लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में ₹300 करोड़ की लागत से निर्मित इस विश्वविद्यालय का नाम 'महायोगी गुरू गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय' है। माना जा रहा है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से उत्तर प्रदेश संपूर्ण देश में नये मेडिकल हब तथा चिकित्सा पर्यटन केन्द्र के रूप में स्थापित होगा।
  • आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास 28 अगस्त, 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था।
  • विश्वविद्यालय का उद्देश्य आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथ, नेचुरोपैथी आदि) को प्रोत्साहित कर इसका लाभ प्रदेश वासियों एवं अन्य लोगों तक पहुंचाना है। इसका लाभ उत्तर प्रदेश से बाहर नेपाल एवं बिहार तक के निवासियों को प्राप्त होगा।
  • महायोगी गुरू गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय ने प्रदेश के 19 आयुष महाविद्यालयों को संबद्धता प्रदान कर दी है। इसमें आयुर्वेद के आठ, होम्योपैथ के नौ तथा यूनानी के दो महाविद्यालय शामिल हैं। अभी तक यह महाविद्यालय अन्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध थे। प्रदेश के अन्य 88 महाविद्यालयों को आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध करने की प्रक्रिया जारी है।
  • यहां आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, नर्सिंग, फार्मेसी, सिद्ध आदि सभी विधाओं का अध्ययन एवं शोध किया जाएगा।
  • विश्वविद्यालय का मुख्य कार्य संबद्ध कॉलेजों का नियंत्रण, पर्यवेक्षण और विनियमित करने के साथ-साथ त्वरित एवं कुशल परीक्षाएं आयोजित करने और एआईएमएमस, मदन मोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) और बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के साथ पूर्ण डिजटलीकरण और सहयोग करके पारंपरिक तथा गतिशील क्षेत्रों में अनुसंधान की सुविधा प्रदान करना है।

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी)

भारत सरकार के दिशा निर्देश एवं आर्थिक सहयोग से प्रदेश के समस्त 75 जनपदों में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश में रोगियों के पंजीकरण, जांच से लेकर उपचार तक की सभी सुविधाएं समस्त सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं।

राष्ट्रीय तम्बाकू नियन्त्रण कार्यक्रम

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय तम्बाकू नियन्त्रण कार्यक्रम एवं सीओटीपीए-2023 का संचालन सामान्य जनता, विशेषकर युवा पीढ़ी, को तम्बाकू से होने वाली हानियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
प्रदेश के समस्त जनपदों में 'यलो लाइन कैम्पेन' तथा 'तम्बाकू से आजादी' अभियान वित्तीय वर्ष 2022-23 में समस्त सरकारी प्रतिष्ठानों, विशेषकर विकास खण्डों एवं ग्राम पंचायतों में, जागरूकता हेतु विस्तारित किया जा चुका है।

बधिरता बचाव एवं रोकथाम कार्यक्रम

प्रदेश में माह मार्च, 2022 तक कुल 56 जनपद राष्ट्रीय बधिरता बचाव एवं रोकथाम कार्यक्रम से आच्छादित हो चुके थे।
स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित इस कार्यक्रम में बधिरता की जाँच एवं जिला चिकित्सालय स्तर पर कान की बीमारियों की जटिल एवं नाजुक माइक्रोसर्जरी द्वारा उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है।

टीकाकरण कार्यक्रम

प्रदेश के समस्त जनपदों में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को 10 जानलेवा बीमारियों (पोलियो टी.बी., गलाघोंटू, टिटनेस, काली खांसी, हेपेटाइटिस-बी, निमोनिया, जे.ई., खसरा एवं डायरिया) से बचाव तथा गर्भवती महिलाओं को टिटनेस से बचाव हेतु नियमित रूप से निःशुल्क टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।

राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन

प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जिला मुख्यालय तथा 50,000 से अधिक शहरी जनसंख्या वाले कुल 131 शहरों/कस्बों को स्वास्थ्य सेवाओं से आच्छादित करने का प्रयास किया जा रहा है। 50,000 से कम जनसंख्या वाले शहरों/कस्बों को राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत आच्छादित किया जा रहा है।

जननी सुरक्षा योजना

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत वर्ष 2005 से जननी सुरक्षा योजना प्रदेश के समस्त जनपदों में संचालित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय राजकीय चिकित्सालय के जनरल वार्ड में संस्थागत प्रसव कराने वाली महिलाओं को ग्रामीण क्षेत्र में ₹1400 व शहरी क्षेत्र में ₹1000 एवं बीपीएल श्रेणी के घरेलू प्रसव हेतु ₹500 सहायता प्रदान की जा रही है।

जननी शिशु सुरक्षा

जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम प्रदेश के समस्त जनपदों में अगस्त, 2011 से लागू है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रसव हेतु आने वाली गर्भवती महिलाओं को गारण्टेड कैशलेस डिलीवरी सेवा प्रदान करना है।

प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना

प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना जनवरी, 2017 से लागू की गयी है। इसके अन्तर्गत आच्छादित गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को पहले जीवित बच्चे के जन्म के लिए तीन किश्तों में क्रमशः गर्भावस्था का शीघ्र पंजीकरण करने पर प्रथम किश्त ₹1000, कम-से-कम एक प्रसव पूर्व जाँच (गर्भावस्था के 6 माह बाद) पर द्वितीय किश्त ₹2000 एवं बच्चे के जन्म का पंजीकरण, बच्चे के प्रथम चक्र का टीकाकरण पूर्ण होने पर तृतीय किश्त ₹2000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UPPSC, UPSSSC, UP Police, UP Lekhpal, RO/ARO और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।