उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा (नवीनतम परिदृश्य)
नई स्वास्थ्य नीति 2025: 3-स्तरीय मॉडल
मॉडल A (17 नगर निगम)
कम से कम 200 बेड वाले 3 सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल (निजी निवेश)। न्यूरो, कार्डियो, यूरोलॉजी सुविधाएं।
मॉडल B (57 जिला मुख्यालय)
राज्य के 57 जिला मुख्यालयों पर 200 बेड के आधुनिक चिकित्सालयों की स्थापना।
मॉडल C (75 जिले - ग्रामीण)
ग्रामीण व पिछड़े क्षेत्रों में 100 बेड वाले चिकित्सालय। सामान्य चिकित्सा, शल्य एवं प्रसूति रोग सुविधाएं।
🏥 मेडिकल कॉलेज (एक जनपद, एक मेडिकल कॉलेज)
- वर्तमान में कुल 80 मेडिकल कॉलेज।
- 44 सरकारी, 36 निजी, 2 AIIMS (गोरखपुर, रायबरेली)।
- 13 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा।
- प्रत्येक कॉलेज में 20 KL ऑक्सीजन टैंक अनिवार्य।
🩺 डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक
- ग्रामीण/सुदूर क्षेत्रों में सस्ती टेलीमेडिसिन सेवा।
- पायलट प्रोजेक्ट: लखनऊ और बुलंदशहर (20 केंद्र)।
- AI और ब्लॉकचेन आधारित तकनीक।
- वीडियो परामर्श, लैब और दवाइयों की सुविधा।
🌿 प्रथम आयुष विश्वविद्यालय
- स्थान: गोरखपुर (भटहट के पिपरी में)।
- उद्घाटन: 2 जुलाई, 2025 (राष्ट्रपति द्वारा)।
- नाम: महायोगी गुरू गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय।
- प्रदेश के 19 आयुष महाविद्यालयों को संबद्धता।
प्रति लाख जनसंख्या पर एलोपैथिक चिकित्सालय एवं शैय्या
| आर्थिक सम्भाग | एलोपैथिक चिकित्सालयों की संख्या | चिकित्सालयों में शैय्या (Beds) की संख्या |
|---|---|---|
| पूर्वी सम्भाग | 2.39 | 36.44 |
| बुन्देलखण्ड | 2.01 | 32.94 |
| पश्चिमी सम्भाग | 2.01 | 42.58 |
| केन्द्रीय सम्भाग | 3.08 | 45.58 |
| उत्तर प्रदेश (औसत) | 2.21 | 36.97 |
प्रमुख स्वास्थ्य योजनाएं एवं सफलताएं
🛡️ आयुष्मान भारत योजना
- गरीब परिवारों को ₹5 लाख तक का निःशुल्क बीमा।
- यूपी में 5.14 करोड़ से अधिक परिवारों को लाभ।
- आयुष्मान कार्ड बनाने में यूपी देश में प्रथम।
- 22,681 आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत।
🚑 एंबुलेंस सेवाएं
- 102 सेवा: गर्भवती महिलाओं व शिशुओं हेतु निःशुल्क।
- 108 सेवा: आकस्मिक परिस्थितियों हेतु (टोल फ्री)।
- ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतम समय: 30 मिनट।
- शहरी क्षेत्र में अधिकतम समय: 20 मिनट।
👩👧 मातृ एवं शिशु कल्याण
- जननी सुरक्षा: संस्थागत प्रसव पर आर्थिक सहायता (ग्रामीण ₹1400, शहरी ₹1000)।
- मातृ वन्दना: प्रथम जीवित बच्चे पर 3 किश्तों में ₹5000।
- जननी शिशु सुरक्षा: कैशलेस डिलीवरी सेवा।
⚠️ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां एवं सांख्यिकी (2024-25 रिपोर्ट)
- बाल मृत्यु दर: 1000 में 43 बच्चे (5 वर्ष की आयु से पूर्व)। यूपी देश में दूसरे स्थान पर है।
- शिशु मृत्यु दर (IMR): 1000 जीवित जन्मों पर 38।
- नवजात मृत्यु दर (NMR): 1000 जीवित जन्मों पर 28।
- मातृ मृत्यु दर (MMR): 1 लाख जीवित जन्मों पर 167।
- इंसेफेलाइटिस (JE/AES): 2018 में संक्रमण दर 11.25% थी, जो 2025 तक घटकर 2% से नीचे आ गई है।
स्वास्थ्य सुविधाओं में समस्या
- मई, 2025 में लिये गए निर्णय के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नई स्वास्थ्य नीति तैयार कर रही है। नयी स्वास्थ्य नीति निजी निवेशकों को आकर्षित कर शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी उन्नत स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य पर आधारित होगी।
- नई स्वास्थ्य नीति पर प्रदेश कैबिनेट द्वारा शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की संभावना है। यह नीति अगले पांच वर्षों में लागू होगी।
- नई स्वास्थ्य नीति में निजी क्षेत्र को भागीदार बनाने पर जोर दिया गया है, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार, निवेश और समावेशन को बढ़ावा दिया जा सके।
- प्रदेश सरकार नई स्वास्थ्य नीति के माध्यम से प्रदेश में सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाओं, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, ऑन्कोलॉजी जैसी उच्चस्तरीय उपचार व्यवस्था हर जिले में उपलब्ध कराना चाहती है। इसके अन्तर्गत निजी अस्पतालों को सरकारी योजनाओं, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, आयुष्मान भारत डिजिटल आदि से जोड़ा जाएगा।
- प्रदेश की नई स्वास्थ्य नीति तीन स्तरीय, क्रमशः ए, बी और सी, मॉडल पर आधारित होगी।
- मॉडल ए में 17 नगर निगम क्षेत्र शामिल होंगे। इन क्षेत्रों में कम से कम 200 बेड वाले तीन सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों की स्थापना के लिए निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। इन चिकित्सालयों में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी तथा यूरोलॉजी के विभाग स्थापित किए जाएंगे।
- मॉडल बी के अंतर्गत राज्य के 57 जिला मुख्यालयों पर 200 बेड के चिकित्सालयों की स्थापना की जाएगी।
- मॉडल सी के अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जिलों के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में 100 बेड वाले चिकित्सालयों की स्थापना की जाएगी। यहां पर मरीजों को सामान्य चिकित्सा, सामान्य शल्य प्रक्रिया और प्रसूति एवं स्त्री रोग आदि से जुड़ी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी।
- नई स्वास्थ्य नीति में निवेशकों/निजी क्षेत्र को भूमि खरीदने हेतु स्टाम्प ड्यूटी में 100 प्रतिशत तक की छूट, बिजली कनेक्शन में प्राथमिकता, अस्पतालों को जल्द अनुमोदन (एनओसी) की सुविधा प्रदान की जाएगी।
- सरकार की नई नीति राज्य में न सिर्फ स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार लाएगी, बल्कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में भी सहायक होगी।
स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास
प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर चिकित्सालयों एवं शैय्या की संख्या
| आर्थिक सम्भाग | एलोपैथिक चिकित्सालयों की संख्या | चिकित्सालयों में शैय्या की संख्या |
|---|---|---|
| 1. पूर्वी सम्भाग | 2.39 | 36.44 |
| 2. बुन्देलखण्ड | 2.01 | 32.94 |
| 3. पश्चिमी सम्भाग | 2.01 | 42.58 |
| 4. केन्द्रीय सम्भाग | 3.08 | 45.58 |
| उत्तर प्रदेश | 2.21 | 36.97 |
आरोग्य मेला में उपचार
आयुष्मान भारत
स्वास्थ्य केन्द्रों पर सुविधाओं में वृद्धि
डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक
- राज्य के ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य एवं चिकित्सा से संबंधित एक नई योजना ले कर आ रही है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 'डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक' की स्थापना की जाएगी।
- डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक का उद्देश्य गांवों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारना है, जिससे किफायती दरों पर लोगों को गंभीर से गंभीर बीमारियों में चिकित्सीय परामर्श के साथ ही दवाइयां और पैथोलॉजी टेस्ट की सुविधा दी जा सके।
- 'डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक' एक तरह से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (PHC) की तरह काम करेंगे, जहां मरीजों को न सिर्फ ऑनलाइन वीडियों कॉन्फ्रेंस के माध्यम से डॉक्टर्स का परामर्श प्राप्त होगा, बल्कि हेल्थ केयर असिस्टेंस के साथ ही लैबोरेटरी की भी सुविधा मिलेगी।
- डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक एक टेलीमेडिसिन प्रणाली की दोनों शाखाओं (परामर्श केंद्र और स्पेशिलिटी सेंटर) के कांबिनेशन पर कार्य करेगी।
- डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक पायलट प्रोजेक्ट के तहत सर्वप्रथम लखनऊ और बुलंदशहर के 20 केंद्रों में सेवाएं आरंभ की जा रही है, जिसके बाद इसे पूरे प्रदेश में शुरू किया जाएगा।
- प्रदेश सरकार यह योजना निजी निवेश के माध्यम से संचालित करेगी। ब्लॉकचेन और आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस टेक्नोलॉजी पर बेस्ड डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक पर एमबीबीएस चिकित्सक गांवों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों तक टेक्नोलॉजी के माध्यम से पहुंचेंगे और उनका सही उपचार कर जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध करवाएंगे।
- राज्य में डिजिटल डॉक्टर क्लिनिक के लिए प्रदेश सरकार ने ओबदु ग्रुप के साथ ₹350 करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। योजना के विस्तार हेतु कुछ अन्य इन्वेस्टर्स से भी बातचीत हो रही हैं। सरकार का उद्देश्य एमओयू के आकार को एक हजार करोड़ रुपए तक ले जाना है।
- कुल बजट : 50,550 करोड़ रुपये।
- निजी क्षेत्र के लिए इंसेंटिव- ₹22 करोड़ 91 लाख 59 हजार।
- स्टेट एलाइड एंड हेल्थ केयर काउंसिल के गठन हेतु आवंटन: ₹4 करोड़।
- बलरामपुर में नये मेडिकल कॉलेज हेतु ₹25 करोड़।
- बलिया में नया मेडिकल कॉलेज: ₹27 करोड़।
- एलोपैथी-₹12,817 करोड़ 83 लाख 12 हजार।
- परिवार कल्याण-₹16354 करोड़।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य-₹1458 करोड़ 62 लाख।
- विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षा बोर्ड का गठन-₹3 करोड़ 34 लाख।
- प्रदेश की सभी सीएचसी में ऑनलाइन स्वास्थ्य सुविधाएं आरंभ करना: ₹5 करोड़।
- सीएचसी पर एडवांस्ड पैथॉलाजी: ₹25 करोड़।
- टेलीमेडिसिन व टेली कंसल्टेशन: ₹5 करोड़।
- हेल्थ एटीएम कियोस्क मशीनों के लिए इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर: ₹25 करोड़।
- हेल्थ फेसिलिटी को पीपीपी मोड पर चलाने के लिए: ₹15 करोड़।
- आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा: ₹1920 करोड़।
- होम्योपैथी: ₹814 करोड़ 54 लाख।
मोबाइल मेडिकल यूनिट
'एक जनपद, एक मेडिकल कालेज'
- उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 तक मात्र 42 मेडिकल कॉलेज थे। इनमें सरकारी क्षेत्र के 17 और निजी क्षेत्र के 25 मेडिकल कालेज थे। नयी स्वास्थ्य नीति के क्रम में सरकार ने 'एक जनपद, एक मेडिकल कालेज' (वन डिस्ट्रिक, वन मेडिकल कॉलेज) कार्यक्रम आरंभ किया है। 'एक जनपद, एक मेडिकल कॉलेज' के अन्तर्गत राज्य सरकार पांच वर्षों के अंदर प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रही है। अब तक 50 जिलों में मेडिकल कॉलेज आरंभ किये जा चुके हैं, जबकि 16 जिलों में सार्वजनिक-निजी क्षेत्र भागीदारी (PPP) के तहत मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया चल रही है। इनमें छह जिलों में निजी क्षेत्र की संस्थाओं का चयन किया जा चुका है।
- वर्ष 2025-26 से प्रदेश के बुलंद शहर, बिजनौर, पीलीभीत, कुशीनगर, सुल्तानपुर, ललितपुर, कानपुर देहात, औरैया, चंदौली, गोंडा, सोनभद्र, लखीमपुर खीरी तथा कौशांबी में स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में कार्य आरंभ हो चुके हैं। पीपीपी मॉडल पर महराजगंज, शामली तथा संभल में भी मेडिकल कॉलेजों को आरंभ किया जा चुका है।
- प्रदेश के बागपत, हाथरस और कासगंज में मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया आरंभ की जा रही है।
- प्रदेश में दो एम्स, दो केंद्रीय चिकित्सा संस्थान तथा 33 निजी मेडिकल कॉलेज भी संचालित हो रहे हैं।
- राज्य के समस्त अस्पतालों एवं मेडिकल कालेजों को आक्सीजन उपलब्धता में आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। जनवरी, 2021 तक प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में लिक्विड मेडिकल आक्सीजन की क्षमता मात्र 241 किलोलीटर थी, जिसे 2024 में बढ़ाकर 1,444 किलोलीटर किया जा चुका है।
- प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में 20 किलोलीटर का आक्सीजन टैंक भर कर रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नीति, 2018
- उत्तर प्रदेश सरकार ने 22 जून, 2018 को राज्य की प्रथम स्वास्थ्य नीति जारी की। इस तरह उत्तर प्रदेश कर्नाटक के बाद देश दूसरा ऐसा राज्य बन गया, जिसके पास अपनी स्वास्थ्य नीति है।
- प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में स्वास्थ्य क्षेत्र पर होने वाला कुल व्यय वर्तमान में लगभग 1.4 प्रतिशत है, जबकि आवश्यकता इसके दोगुने से अधिक की है।
- उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नीति 2018 में स्वास्थ्य क्षेत्र पर होने वाले व्यय को 2.5 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- प्रदेश की नयी स्वास्थ्य नीति में गांवों से लगाय शहरों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को इस तरह विकसित करने की बात की गयी है कि चिकित्सा अथवा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु लोगों को महानगरों तक दौड़ न लगानी पड़े।
- राज्य का स्वास्थ्य बजट बढ़ने से सर्वाधिक लाभ गरीबों और वंचितों को होगा। ब्लाक स्तर पर स्थापित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (PHC) एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (CHC) से लगाय जनपद स्तरीय जिला अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, आपरेशन थियेटर एवं जांच केन्द्रों की स्थापना से गरीबों एवं साधनहीन व्यक्तियों को स्थानीय स्तर पर निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होनी आरंभ हुई हैं, जिससे असमय होने वाली मृत्युओं में कमी आयी है।
- उत्तर प्रदेश के अनेक भाग, विशेषकर पूर्वांचल में, जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) तथा एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) से प्रतिवर्ष सैकड़ों बच्चों की मृत्यु हो जाती रही है। चिकित्सा के परिणामस्वरूप जो पीड़ित बच्चे इस बीमारी के पश्चात मृत्यु से बच जाते थे, वह प्राय: विकलांग हो जाते थे। पूर्वांचल के मेडिकल कॉलेज तथा जिला अस्पताल इंसेफेलाइटिस पीड़ित बच्चों से महीनों भरे रहते थे। राज्य की नयी स्वास्थ्य नीति के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश को इस समस्या से लगभग छुटकारा प्राप्त हो चुका है।
- नयी स्वास्थ्य नीति के अन्तर्गत प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर होने वाले व्यय में निरन्तर वृद्धि की जा रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने बजट 2024-25 में अपने कुल व्यय का 6.2 प्रतिशत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटित किया है, जो देश में राज्यों द्वारा स्वास्थ्य के लिए किये गये औसत आवंटन (6.2 प्रतिशत) के समकक्ष है।
जननी सुरक्षा योजना (JSY)
- उत्तर प्रदेश बजट 2023-24 के अनुसार, 'एक जनपद एक मेडिकल कॉलेज' योजना के अन्तर्गत प्रदेश के 45 जनपद मेडिकल कॉलेज से आच्छादित किये जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 14 जनपदों में मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं।
- असेवित 16 जनपदों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना पी.पी.पी. मॉडल पर की जा रही है।
- आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्तमान में कुल 65 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जिसमें 35 राज्य सरकार के हैं।
लखनऊ में नया चिकित्सा विश्वविद्यालय
गोरखपुर एवं रायबरेली में एम्स
- जौनपुर में राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना प्रक्रियाधीन है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में स्थापित 25 जिला चिकित्सालयों को उच्चीकृत करते हुए स्वायत्तशासी स्टेट मेडिकल कॉलेज बनाये जाने की योजना है। इसके प्रथम चरण में बस्ती, बहराइच, शाहजहांपुर, फैजाबाद एवं फिरोजाबाद में निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। यहां प्रत्येक कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटों का संचालन प्रस्तावित है।
- योजना के द्वितीय चरण में जनपद एटा, मिर्जापुर, गाजीपुर, सिद्धार्थनगर, हरदोई, प्रतापगढ़, फतेहपुर तथा देवरिया के स्वास्थ्य केन्द्रों को उच्चीकृत कर मेडिकल कॉलेज बनाये जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
- प्रदेश सरकार के अधीन संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ में स्थापित है, जहां गंभीर रोगियों को अति विशिष्ट चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। यहां स्नातकोत्तर एवं अतिविशिष्टता की डिग्री भी प्रदान की जाती है।
- हृदय एवं कैंसर रोग से पीड़ित गंभीर रोगियों के इलाज के लिए प्रदेश में हृदय रोग संस्थान कानपुर एवं जे.के. कैंसर संस्थान, कानपुर की स्थापना की गयी है। नर्सिंग का विशेष प्रशिक्षण देने हेतु कॉलेज ऑफ नर्सिंग कानपुर इसी विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
- प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बलरामपुर चिकित्सालय कार्यरत है। यहां 10 शैय्या युक्त सुपर स्पेशालिटी विंग की स्थापना की गयी है।
- डॉ. राममनोहर लोहिया चिकित्सालय लखनऊ तथा यू.एच.एम. चिकित्सालय कानपुर नगर में एम.आर.आई. मशीन लगाई गयी है। इसके अतिरिक्त डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय लखनऊ में कैथ लैब स्थापित है, जहां हृदय रोगियों का उपचार किया जाता है।
- प्रदेश के वाराणसी और बरेली में राजकीय मानसिक चिकित्सालय कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त आगरा मानसिक चिकित्सालय स्वायत्त पोषित संस्थान के रूप में कार्य कर रहा है।
उत्तर प्रदेश में बाल मृत्यु दर चिंताजनक स्थिति में
- तमाम सुधारों और दावों के बावजूद उत्तर प्रदेश में बाल मृत्यु दर की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बाल मृत्यु दर के मामले में उत्तर प्रदेश देश के राज्यों में द्वितीय स्थान पर है।
- केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी वार्षिक स्वास्थ्य रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार उत्तर प्रदेश में जन्म लेने वाले प्रत्येक 1,000 बच्चों में से 43 बच्चे पाँच वर्ष की आयु तक पहुँचने से पहले ही मर जाते हैं।
- राज्य में शिशु मृत्यु दर (IMR) 1,000 जीवित जन्मों में 38 है, जबकि नवजात मृत्यु दर (NMR), अर्थात जीवन के पहले 28 दिनों के भीतर मृत्यु 1,000 में 28 है। यह आँकड़े राष्ट्रीय औसत शिशु मृत्यु दर (IMR) 28 और नवजात मृत्यु दर (NMR) 20 से काफी अधिक हैं।
- उत्तर प्रदेश बाल मृत्यु दर में देश के एकमात्र राज्य मध्य प्रदेश से पीछे है, जहां शिशु मृत्यु दर 43 और नवजात मृत्यु दर 31 है।
- बाल मृत्युदर : 1000 में 43 बच्चे जन्म से पांच दिनों के भीतर मर जाते हैं।
- शिशु मृत्यु (IMR) 1000 जीवित बच्चों पर 38
- नवजात मृत्यु दर (NMR) 1000 जीवित जन्मों पर 28
- मातृ मृत्यु दर (MMR) 1 लाख जीवित जन्मों पर 167
- उत्तर प्रदेश में 35 प्रतिशत बच्चे समय से पूर्व पैदा होते हैं, जो उनके अस्वस्थ होने का कारण बनता है।
- प्रदेश में 33 प्रतिशत नवजात में संक्रमण पाया गया, जो असावधानी का परिणाम होता है।
- 20 प्रतिशत नवजात में सांस न ले पाने की समस्या पायी गयी है।
ब्लड बैंक
आयुष
- चिकित्सीय क्रियाकलाप
- औषधि निर्माण एवं गुणवत्ता नियंत्रण
- शिक्षा एवं प्रशिक्षण
- 12 जनवरी, 2023 को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 'ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22' रिपोर्ट जारी की गयी।
- रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में कुल 20,778 स्वास्थ्य उपकेन्द्र, 3,516 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (PHC), 765 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (CHC) तथा 168 जिला अस्पताल हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में उपकेन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या में कुल आवश्यकता से क्रमशः 41 प्रतिशत, 50 प्रतिशत तथा 49 प्रतिशत की कमी है।
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य केन्द्रों की वर्तमान स्थिति
| उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य केन्द्रों की वर्तमान स्थिति | ||
|---|---|---|
| केन्द्र | ग्रामीण | शहरी |
| उपकेन्द्र | 20,778 | 0 |
| सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र | 753 | 12 |
| प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र | 2,923 | 593 |
- उत्तर प्रदेश के ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर सर्जन डॉक्टर के पदों में 571 रिक्तियां हैं। प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए कुल 753 सर्जन डॉक्टरों की आवश्यकता है, जबकि मात्र 182 डॉक्टर कार्यरत हैं। वहीं बाल रोग विशेषज्ञ तथा प्रसूति विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में भी कुल 565 डॉक्टरों के संदर्भ में 421 डॉक्टरों की कमी है।
- उत्तर प्रदेश के जिला अस्पतालों में 4,497 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 3,261 डॉक्टर कार्य कर रहे हैं।
- प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 839 स्वास्थ्य कर्मियों (ANM) की कमी है।
- रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 140 चिकित्सकों की कमी है, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कुल 2 विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है।
- उत्तर प्रदेश में औसत रूप से 60,413 व्यक्तियों पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (PHC) तथा औसतन 2,34,513 व्यक्तियों पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (CHC) है, जबकि औसतन 8,499 व्यक्तियों पर एक उप-केन्द्र है।
- उत्तर प्रदेश में औसतन 5 ग्रामों पर एक उप-केन्द्र, 37 ग्राम पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 145 ग्राम पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र है।
होम्योपैथिक चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संबंधी प्रमुख योजनाएं
आयुष्मान भारत
मुख्यमंत्री जन-आरोग्य योजना
राष्ट्रीय अन्धता नियन्त्रण कार्यक्रम
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम
- उत्तर प्रदेश के प्रथम आयुष विश्वविद्यालय का लोकार्पण 2 जुलाई, 2025 को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने किया। गोरखपुर जनपद अंतर्गत भटहट के पिपरी में उत्तर प्रदेश के प्रथम आयुष विश्वविद्यालय ने कार्य आरंभ कर दिया है। लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में ₹300 करोड़ की लागत से निर्मित इस विश्वविद्यालय का नाम 'महायोगी गुरू गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय' है। माना जा रहा है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से उत्तर प्रदेश संपूर्ण देश में नये मेडिकल हब तथा चिकित्सा पर्यटन केन्द्र के रूप में स्थापित होगा।
- आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास 28 अगस्त, 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था।
- विश्वविद्यालय का उद्देश्य आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथ, नेचुरोपैथी आदि) को प्रोत्साहित कर इसका लाभ प्रदेश वासियों एवं अन्य लोगों तक पहुंचाना है। इसका लाभ उत्तर प्रदेश से बाहर नेपाल एवं बिहार तक के निवासियों को प्राप्त होगा।
- महायोगी गुरू गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय ने प्रदेश के 19 आयुष महाविद्यालयों को संबद्धता प्रदान कर दी है। इसमें आयुर्वेद के आठ, होम्योपैथ के नौ तथा यूनानी के दो महाविद्यालय शामिल हैं। अभी तक यह महाविद्यालय अन्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध थे। प्रदेश के अन्य 88 महाविद्यालयों को आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध करने की प्रक्रिया जारी है।
- यहां आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, नर्सिंग, फार्मेसी, सिद्ध आदि सभी विधाओं का अध्ययन एवं शोध किया जाएगा।
- विश्वविद्यालय का मुख्य कार्य संबद्ध कॉलेजों का नियंत्रण, पर्यवेक्षण और विनियमित करने के साथ-साथ त्वरित एवं कुशल परीक्षाएं आयोजित करने और एआईएमएमस, मदन मोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) और बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के साथ पूर्ण डिजटलीकरण और सहयोग करके पारंपरिक तथा गतिशील क्षेत्रों में अनुसंधान की सुविधा प्रदान करना है।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी)
राष्ट्रीय तम्बाकू नियन्त्रण कार्यक्रम
बधिरता बचाव एवं रोकथाम कार्यक्रम
टीकाकरण कार्यक्रम
राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन
जननी सुरक्षा योजना
जननी शिशु सुरक्षा
प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना
दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

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