उत्तर प्रदेश में शिक्षा
प्रदेश में वर्तमान शिक्षा व्यवस्था
सुधार के प्रयास
- बजट में बेसिक, माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा के विकास हेतु ₹2000 करोड़ के प्रावधान किए गए हैं। 22 नए प्राथमिक विद्यालयों के लिए ₹25 करोड़ की व्यवस्था की गयी है।
- बजट में पॉलिटेक्निक स्मार्ट क्लास रूम के लिए ₹10 करोड़ का प्रस्ताव किया गया है। बीते कुछ वर्षों से चल रहे इस तरह के प्रयासों के परिणाम सामने आने लगे हैं। साक्षरता की दर लगातार बढ़ रही है, जिससे निरक्षरों की संख्या तेजी से कम हुई है। वर्ष 2001 में प्रदेश में साक्षरता दर 56.27 प्रतिशत थी, जिसके कारण यहां निरक्षरों की संख्या 5.88 करोड़ थी। वर्ष 2011 में प्रदेश में साक्षरता दर 69.22 प्रतिशत होने के साथ ही निरक्षरों की संख्या घटकर 5.14 करोड़ रह गई।
उत्तर प्रदेश में साक्षरता |
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|---|---|---|
| विवरण | 2011 | 2001 |
| प्रदेश की साक्षरता | 67.68% | 56.27% |
| पुरुष साक्षरता | 77.28% | 68.82% |
| महिला साक्षरता | 57.18% | 42.22% |
| कुल साक्षर संख्या | 114,397,555 | 75,719,284 |
| पुरुष साक्षर संख्या | 68,234,964 | 48,901,413 |
| महिला साक्षर संख्या | 46,162,591 | 26,817,871 |
- केन्द्रीय सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट (2025) के अनुसार उत्तर प्रदेश की साक्षरता दर बढ़कर अब 72.6 प्रतिशत हो गयी है। शहरों में साक्षरता दर 80.85 प्रतिशत तथा ग्रामीण क्षेत्र में 70.45 प्रतिशत पर पहुंच गयी है।
शिक्षा निदेशालय का ऐतिहासिक कालक्रम
वर्ष 1972 तक
प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा का संचालन एक ही 'शिक्षा निदेशालय' के अंतर्गत।
वर्ष 1972 (विभाजन)
बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा निदेशक के पदों का सृजन कर तीन खण्डों में विभाजन।
वर्ष 1975
बेसिक और माध्यमिक शिक्षा का एकीकरण।
वर्ष 1985
बेसिक शिक्षा को गतिशील बनाने के लिए पृथक बेसिक शिक्षा निदेशालय की स्थापना।
डिजिटल नवाचार एवं महत्वपूर्ण ऐप्स
दीक्षा ऐप (DIKSHA)
कक्षा 1 से 8 तक के सभी विषयों के पाठ्यक्रम ऑनलाइन उपलब्ध। शिक्षा को तकनीकी रूप से सुलभ बनाने का प्रयास।
प्रेरणा ऐप
शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति (सेल्फी एवं जियो-लोकेशन के माध्यम से) दर्ज करने हेतु।
समर्थ ऐप
दिव्यांग एवं ड्रॉप-आउट बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने एवं सुविधाएँ उपलब्ध कराने का प्रयास।
संकल्प ऐप
समाज में बालिका शिक्षा को विस्तार देने एवं शिक्षा से भटकी बालिकाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल।
पहल कार्यक्रम
IIT कानपुर के सहयोग से ग्रामीण और शहरी शिक्षा के स्तर की खाई को कम करने हेतु निःशुल्क ऑनलाइन शिक्षा।
प्रमुख शैक्षिक योजनाएं व अभियान
ऑपरेशन कायाकल्प
सरकारी स्कूलों को 'स्मार्ट स्कूल' बनाना। 19 पैरामीटर्स के तहत फर्नीचर, शौचालय, पेयजल, डिजिटल क्लासरूम आदि का विकास।
पीएम श्री विद्यालय
यूपी के 928 विद्यालयों का प्रथम चरण में आधुनिकीकरण। स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी एवं अत्याधुनिक लैब की सुविधा।
कस्तूरबा गांधी विद्यालय
पिछड़े ब्लॉकों में कमजोर व वंचित वर्ग की बालिकाओं हेतु (कक्षा 6-8) निःशुल्क आवासीय शिक्षा। (कुल 746 विद्यालय)
मध्यान्ह भोजन (Mid-Day-Meal)
1995 से आरंभ। छात्रों का नामांकन बढ़ाने व पोषण हेतु विद्यालयों में पका-पकाया भोजन (2004 से लागू) उपलब्ध कराना।
उच्च शिक्षा का ढांचा: विश्वविद्यालय एवं संस्थान
| विश्वविद्यालय का प्रकार | कुल संख्या (लगभग) | महत्वपूर्ण तथ्य / संस्थान |
|---|---|---|
| केन्द्रीय विश्वविद्यालय | 06 | BHU, AMU, इलाहाबाद वि.वि., राजीव गांधी विमानन वि.वि. आदि। |
| राज्य विश्वविद्यालय | 43 | लखनऊ वि.वि., गोरखपुर वि.वि., चौधरी चरण सिंह वि.वि. आदि। |
| निजी विश्वविद्यालय | 48 | 28 नए विश्वविद्यालयों की स्थापना प्रस्तावित है। भूमि मानक में छूट (नगरीय: 20 एकड़, ग्रामीण: 50 एकड़)। |
| विशेषीकृत संस्थान | - | देश का प्रथम 'जल विश्वविद्यालय' हमीरपुर में प्रस्तावित। मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय मेरठ में। |
प्रदेश के विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में साक्षरता प्रतिशत |
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|---|---|---|---|---|
| क्र. सं. | आर्थिक क्षेत्र | साक्षरता प्रतिशत वर्ष 2011 | ||
| व्यक्ति | पुरुष | स्त्री | ||
| 1. | पूर्वी | 67.4 | 78.1 | 56.2 |
| 2. | पश्चिमी | 67.5 | 76.5 | 57.2 |
| 3. | केन्द्रीय | 68.3 | 76.3 | 59.3 |
| 4. | बुन्देलखण्ड | 69.3 | 79.9 | 57.1 |
| उत्तर प्रदेश | 67.7 | 77.3 | 57.2 | |
| भारत | 73.0 | 80.9 | 64.6 | |
प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक शिक्षा
| उत्तर प्रदेश के विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में प्रति लाख जनसंख्या पर विद्यालयों पर विद्यार्थियों की संख्या | ||||
|---|---|---|---|---|
| क्र. सं. | आर्थिक क्षेत्र | जूनियर बेसिक | सीनियर बेसिक | हायर सेकेण्ड्री |
| 1. | पूर्वी | 60 | 37 | 13 |
| 2. | पश्चिमी | 56 | 37 | 12 |
| 3. | केन्द्रीय | 59 | 32 | 11 |
| 4. | बुन्देलखण्ड | 71 | 48 | 10 |
| उत्तर प्रदेश | 59 | 37 | 12 | |
| उत्तर प्रदेश के विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में प्रति अध्यापक पर विद्यार्थियों की संख्या | ||||
|---|---|---|---|---|
| क्र. सं. | आर्थिक क्षेत्र | जूनियर बेसिक | सीनियर बेसिक | हायर सेकेण्ड्री |
| 1. | पूर्वी | 28 | 30 | 49 |
| 2. | पश्चिमी | 56 | 37 | 12 |
| 3. | केन्द्रीय | 59 | 32 | 11 |
| 4. | बुन्देलखण्ड | 25 | 26 | 51 |
| उत्तर प्रदेश | 59 | 37 | 12 | |
| उच्च शिक्षा हेतु प्रदेश में महाविद्यालय | |
|---|---|
| राजकीय महाविद्यालय | 172 |
| सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय | 331 |
| स्ववित्त पोषित महाविद्यालय | 7372 |
उत्तर प्रदेश में 'शिक्षा का अधिकार'
- आरटीई अधिनियम के अनुसार उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर उन छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाता है जो गरीब परिवार से सम्बन्ध रखते हैं। आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले छात्र-छात्राओं की पूरी फीस सरकार देती है।
- यह गरीब परिवार के बच्चों के लिए पड़ोस के किसी स्कूल में प्रारम्भिक शिक्षा पूरी करने तक निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के लिए बच्चों का अधिकार है।
- अनिवार्य शिक्षा से आशय 6 से 14 वर्ष तक की आयु के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क प्रारम्भिक शिक्षा प्रदान करने और अनिवार्य प्रवेश, उपस्थिति और प्रारम्भिक शिक्षा को पूरा करने को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की बाध्यता से है।
- यह अन्य के साथ-साथ छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR), भवन और अवसंरचना, स्कूल के कार्यदिवस, शिक्षक के कार्य के घण्टों से सम्बन्धित मानदंडों और मानकों को भी निर्धारित करता है।
- यह अध्यापकों की तैनाती में शहरी-ग्रामीण संतुलन को सुनिश्चित करता है।
समग्र शिक्षा
उत्तर प्रदेश : शिक्षा में नवाचार
- उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से ऑनलाइन ग्रामीण शिक्षा कार्यक्रम 'पहल' की शुरूआत की है।
- पहल कार्यक्रम माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा आईआईटी कानपुर के सहयोग से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के बीच शिक्षा स्तर की खाई को कम करना है।
- कार्यक्रम का आरंभ 15 मई, 2023 को राजकीय यूपी सैनिक इंटर कॉलेज लखनऊ में किया गया।
- कार्यक्रम के प्रथम चरण में प्रदेश के 10 सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में निःशुल्क ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम आरंभ किया जाएगा, जिसे शीघ्र ही 40 हजार विद्यालयों तक पहुंचाने की योजना है।
- कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को गणित और विज्ञान से जुड़ी नवीनतम जानकारी उपलब्ध करायी जाएगी।
कल्प योजना
बालिका शिक्षा
आरोहिणी पहल प्रशिक्षण कार्यक्रम
- उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में लड़कियों की सुरक्षा हेतु 'आरोहिणी पहल प्रशिक्षण कार्यक्रम' आरंभ किया है।
- इस कार्यक्रम का उद्देश्य वंचित वर्ग की लड़कियों को सक्षम और स्वावलंबी बनाना है।
- यह अभियान लड़कियों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में सहायता करेगा।
- आरोहिणी कार्यक्रम तीन चरणों में लागू होगा। प्रथम चरण में शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के पश्चात हर कस्तूरबा गांधी विद्यालय के दो शिक्षक छात्राओं को जागरूक करेंगे। तीसरे चरण में सामुदायिक स्तर पर अभियान चलाया जाएगा।
समेकित शिक्षा
शिक्षामित्र योजना
साक्षर भारत कार्यक्रम
राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद
- इंस्टीट्यूट ऑफ एडवान्स स्टडी इन एजूकेशन
- कॉलेज ऑफ टीचर एजूकेशन (सी.टी.ई.) वाराणसी, लखनऊ एवं प्रयागराज
- राज्य शिक्षा संस्थान, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज
- आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज
- राज्य हिंदी संस्थान, उत्तर प्रदेश, वाराणसी
- राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज
- मनोविज्ञान प्रयोगशाला, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज
- राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान, उत्तर प्रदेश, लखनऊ
- जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट)
- सेवा पूर्ण प्रशिक्षण
- डी.एल.एड. (बी.टी.सी.) प्रशिक्षण
- सी.टी. नर्सरी (प्रशिक्षण सर्टिफिकेट इन टीचिंग, नर्सरी)
- नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग (एन.टी.टी.)
- डिप्लोमा इन फिजिकल एजुकेशन (डी.पी.एड.)
- डिप्लोमा इन गाइडेन्स एण्ड साइकोलॉजी (डी.जी.पी.)
- डी.आई.ओ.एस. द्वारा संचालित डीएलएड प्रशिक्षण
माध्यमिक शिक्षा
उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय
- कुल विश्वविद्यालय 105
- केन्द्रीय विश्वविद्यालय 06
- राज्य विश्वविद्यालय 43
- पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय 01
- चिकित्सा विश्वविद्यालय 04
- निजी विश्वविद्यालय 48
- स्नातकोत्तर महाविद्यालय 42
- स्नातक स्तरीय राजकीय महाविद्यालय 95
- अशासकीय अनुदानित महाविद्यालय 331
- डीम्ड पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय 01
- डीम्ड कृषि विश्वविद्यालय 01
- राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज 12
- मेडिकल कॉलेज 28
- औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान 305
उच्च शिक्षा
समस्या एवं समाधान
- वैदिक संस्कृति (1500-600 ई. पू.) के प्रवर्तक आर्य थे। माना जाता है, कि आर्य लेखन कला से अनभिज्ञ थे। बावजूद इसके, उन्होंने ऋग्वेद समेत अनेक ग्रंथों की रचना की। स्पष्ट है कि उनकी शिक्षा व्यवस्था उच्च कोटि की थी, जिसके चलते मौखिक रूप से ज्ञान अर्जित कर उन्होंने वैदिक ग्रंथों की रचना की। यही कारण है कि वेद को 'श्रुति' कहते हैं।
- वैदिक समाज में ज्ञान और नैतिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता था। शिक्षा का प्रबन्ध राज्य द्वारा नहीं किया जाता था। विद्वान ब्राह्मण अपने घर अथवा आश्रम पर ही उच्च तीन वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा वैश्य) के विद्यार्थियों को शिक्षा देते थे। वैदिक काल (1500-1000 ई.पू.) तक शिक्षा व्यवस्था बालक और बालिकाओं के लिए समान थी।
- बच्चों के लिए शिक्षा की औपचारिक शुरुआत उपनयन संस्कार के पश्चात होती थी। उपनयन संस्कार शूद्रों के अतिरिक्त तीन वर्णों के लिए अनिवार्य था। ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ण के लिए उपनयन की आयु क्रमशः 8, 11 एवं 12 वर्ष निर्धारित थी। उपनयन बालिकाओं का भी होता था, लेकिन उन्हें भिक्षाटन आदि से छूट प्राप्त थी।
- गुरूकुल अथवा आश्रम में प्रत्येक गुरू के पास 15 से 25 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करते थे। वरिष्ठ छात्र अपने कनिष्ठ छात्रों को पढ़ाते थे। वेद के किसी एक अंग अथवा वेदांग की शिक्षा देने वाले शिक्षक को 'उपाध्याय', साहित्य की शिक्षा देने वाले को 'प्रवक्ता' कंठस्थ कराकर शिक्षा देने वाले को 'श्रोत्रिय', गृहस्थ शिक्षक को 'गुरू' तथा घूम-घूम कर शिक्षा देने वाले को 'चरक' कहा जाता था।
- गुरूकुल में शिष्य सामान्यतः बारह वर्ष, किन्तु विशेष परिस्थितियों में 24 वर्ष तक अथवा आजीवन रह सकता था। अध्ययन की समाप्ति पर 'समावर्तन' नामक संस्कार में गुरू शिष्य को अंतिम महत्वपूर्ण उपदेश देते थे।
- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में डीएवी कालेज, कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जा रही है।
- सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर को अंतर्राष्ट्रीय बुद्धिस्ट सेंटर एवं सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन हिंदुइज्म, बुद्धिज्म एण्ड जैनिज्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध केन्द्र में प्राच्य भाषा एवं विदेशी भाषा केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इस कार्य के लिए 21 शैक्षिक एवं 24 शिक्षणेत्तर पदों का सृजन किया गया है।
- दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर में 'महायोगी गुरू श्री गोरक्षनाथ शोध पीठ' की स्थापना की जा रही है।
- प्रदेश के 15 राज्य विश्वविद्यालयों में पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की स्थापना की गई है।
- शोध कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लखनऊ विश्वविद्यालय में 'भाउराव देवरस शोध पीठ' तथा 'अभिनव गुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ शैव फिलॉसफी एण्ड एस्थेटिक्स' की स्थापना की गई है।
- लखनऊ विश्वविद्यालय में 'महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय रोजगार अध्ययनपीठ' एवं 'अटल सुशासन पीठ' की स्थापना की जा रही है।
- वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में 'प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल साइंस ऑफ स्टडी एण्ड रिसर्च' तथा 'रिसर्च सेंटर फॉर रिन्यूएबल एनर्जी एण्ड नैनो साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी' की स्थापना की गयी है।
- राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के अंतर्गत 26 मॉडल राजकीय महाविद्यालय एवं राज्य सेक्टर के अंतर्गत 30 राजकीय महाविद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के अंतर्गत 84 राजकीय महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर कक्षाओं/संकाय हेतु अतिरिक्त शिक्षण कक्ष निर्माणाधीन हैं।
प्राविधिक शिक्षा
प्राविधिक विश्वविद्यालय
- उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्कूली शिक्षा की विफलता और इसके भविष्य का आकलन सरकार के इस निर्णय से किया जा सकता है कि जून, 2025 में राज्य के हजारों विद्यालयों को बच्चों की संख्या के आधार पर निकटवर्ती उच्च प्राथमिक अथवा कंपोजिट स्कूलों में मर्ज (विलय) करने का निर्णय लिया गया।
- वर्ष 2017-18 में राज्य में बेसिक शिक्षा परिषद के 1.58 लाख से अधिक विद्यालय थे, जिनमें प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 1 लाख 13 हजार 289 थी। बीते दिनों कम छात्र संख्या वाले लगभग 28 हजार विद्यालयों को पड़ोस के स्कूलों में मर्ज कर दिया गया। अब नये स्तर पर 5000 विद्यालयों के मर्जर का निर्णय लिया गया है। इस मर्जर से हजारों बच्चों के विद्यालय छूट गये।
- सरकारी आकड़ों के अनुसार राज्य के बेसिक शिक्षा परिषद विद्यालयों में 2021-22 में विद्यार्थियों की संख्या 1.91 करोड़ थी, जो 2025 में घट कर 1.49 करोड़ रह गयी है। इसका नकारात्मक प्रभाव अध्यापकों की संख्या पर भी पड़ा है।
- इस संबंध में सरकार का तर्क यह है कि मर्जर (विलय) अथवा कंपोजिट स्कूलों की स्थापना से विद्यार्थियों को उच्च बुनियादी संरचना एवं सुविधाओं से युक्त विद्यालय उपलब्ध कराये जा रहे हैं।
- छात्रों का नामांकन व प्रतिधारण का गिरता स्तर
- खराब शिक्षक-छात्र अनुपात (36:1)
- गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का अभाव
- सामाजिक दृष्टि से अभिभावकों की उदासीनता, लैंगिक भेदभाव
- आर्थिक लाभ हेतु अभिभावकों द्वारा बच्चों को घरेलू व व्यावसायिक कार्यों में लगाना।
- विद्यालयों में बुनियादी ढाँचे का अभाव, उदाहरण: पेयजल सुविधा एवं छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय का अभाव।
- अति महत्वाकांक्षी पाठ्यक्रम (एनसीईआरटी के अनुरूप नहीं)
- राजनीतिक-हस्तक्षेप, उदाहरण-मर्जर, ट्रांसफर-पोस्टिंग आदि।
- भ्रष्टाचार, आवंटित धन का इष्टतम उपयोग नहीं।
- अपर्याप्त स्टाफ व उत्तरदायित्व की कमी।
- उत्तर प्रदेश में 70 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ग्रामीण पृष्ठ पर आधारित है, जिनकी प्रति व्यक्ति आय कम है। ऐसे लोग पैसे के अभाव में अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेज पाते।
- निजी स्कूलों द्वारा गरीब बच्चों एवं अभिभावकों का शोषण सर्वविदित है, ऐसे में सार्वजनिक शिक्षा को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
- शिक्षकों को शिक्षण के अतिरिक्त अन्य कार्यों से मुक्त किया जाना चाहिए।
- स्वयं सहायता समूह की सहायता लेनी होगी। इस क्षेत्र में प्रेरणा एवं प्रथम जैसे कई संगठन अच्छा कार्य कर रहे हैं।
- कर्नाटक की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना होनी चाहिए।
- शिक्षकों को प्रशिक्षण एवं अद्यतन तकनीकी ज्ञान देना होगा।
- अभिभावक जागरूकता हेतु सामुदायिक अभियान संचालित करना होगा।
- कुपोषण, स्टंटिंग, वेस्टिंग जैसी समस्याओं के निदान हेतु स्वास्थ्य देखभाल करना होगा।
- नई शिक्षा नीति 2022 व 'निपुण भारत मिशन' को एक जन आंदोलन का स्वरूप देकर सार्वजनिक शिक्षा को उच्चता के शिखर पर ले जाया जा सकता हैं, जो सतत् विकास लक्ष्य-4 की पूर्ति हेतु आवश्यक है
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा)
प्राविधिक शिक्षा निदेशालय
प्राविधिक शिक्षा परिषद
इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर हैण्डीकैप्ड
कम्युनिटी डेवलेपमेंट थ्रू पॉलीटेक्निक स्कीम (CDTP)
कम्युनिटी कॉलेज
- उत्तर प्रदेश के बुंदेलखण्ड क्षेत्र स्थित हमीरपुर में देश और दुनिया के प्रथम 'जल विश्वविद्यालय' की स्थापना की जा रही है।
- हमीरपुर जिले के 25 एकड़ क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय निर्मित होगा, जिसमें शीघ्र ही देश-दुनिया के लोग जल संरक्षण का पाठ पढ़ने आएंगे।
- यह अपनी तरह का प्रथम विश्वविद्यालय होगा, जहां छात्र और शोधार्थी जल की कमी से उत्पन्न समस्याओं के लिए, पुरातन और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से सामाधान तलाशेंगे।
- यहां यूजीसी पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिसमें जल संरक्षण की विद्या को कोर्स के रूप मे जोड़ा जाएगा।
- इस प्रथम जल विश्वविद्यालय की पहल पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. रविकांत पाठक के अतिरिक्त पद्मश्री से सम्मानित जल योद्धा उमाशंकर पांडेय ने की है। इनके प्रस्ताव को उच्च शिक्षा विभाग को भेज दिया गया है।
- जल विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए प्रो. पाठक ने अपनी 25 एकड़ जमीन दान की है।
उत्तर प्रदेश में स्थित प्रमुख शिक्षण संस्थान
- इलाहाबाद वि.वि., प्रयागराज - 1887
- काशी हिंदू वि.वि., वाराणसी - 1916
- अलीगढ़ मुस्लिम वि. वि., अलीगढ़ - 1920
- डॉ. भीमराव अम्बेडकर वि. वि., लखनऊ - 1989
- रानी लक्ष्मीबाई कृषि वि.वि., झांसी - 2014
- राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन वि.वि., अमेठी - 2017
- इंडियन वेटेरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बरेली - 1983
- केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ - 1967
- राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, प्रयागराज - 2000
- मोतीलाल नेहरू रा. प्रौ. संस्थान, प्रयागराज - 2002
- राजर्षि पुरुषोत्तम टंडन मुक्त वि.वि., प्रयागराज - 1998
- लखनऊ, विश्वविद्यालय - 1921
- डॉ. भीमराव अम्बेडकर वि.वि., आगरा - 1927
- पं. दीनदयाल उपाध्याय वि.वि., गोरखपुर 1957
- सम्पूर्णानंद संस्कृत वि.वि., वाराणसी 1958
- छत्रपति शाहूजी महाराज, वि.वि., कानपुर 1965
- चौधरी चरण सिंह वि.वि., मेरठ 1965
- महात्मा गांधी, काशी विद्यापीठ, वाराणसी 1975
- मैथिलीशरण गुप्त बुंदेलखण्ड वि.वि., झांसी 1975
- राम मनोहर लोहिया अवध वि.वि., अयोध्या 1975
- महात्मा ज्योतिबा फूले रूहेलखंड वि.वि. बरेली 1975
- वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल वि.वि., जौनपुर 1987
- गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, गौतमबुद्ध नगर 2002
- डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि वि.वि., लखनऊ 2005
- डॉ. शकुन्तला मिश्रा रा. पुनर्वास वि.वि. लखनऊ 2009
- ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा वि.वि., लखनऊ 2010
- सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, सिद्धार्थनगर 2015
- प्रो. राजेन्द्र सिंह वि.वि., प्रयागराज 2016
- जननायक चन्द्रशेखर वि.वि., बलिया 2016
- दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, आगरा 1981
- संजय गांधी पी.जी. आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ 1983
- भातखण्डे म्यूजिक इन्टीट्यूट, लखनऊ 2001
- चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौ. वि.वि., कानपुर 1975
- आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौ. वि.वि., फैजाबाद 1976
- सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि वि.वि. मेरठ 2000
- बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी वि.वि. बांदा 2010
- महात्मा बुद्ध कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुशीनगर
- विकसित देशों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में देश की प्रथम एजुकेशन टाउनशिप की स्थापना का निर्णय लिया गया है, जहां सभी प्रकार की शिक्षा, संबंधित पाठ्यक्रम, शिक्षा प्रणाली, शिक्षा केन्द्रों की जानकारी एवं कौशल प्रशिक्षण आदि एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगे। प्रदेश में ऐसी 5 टाउनशिप विकसित किया जाने की योजना है।
- यह टाउनशिप योजना 'सिंगल एंट्री-मल्टीपल एग्जिट' मोड में कार्य करेगी। इस योजना में सरकारी तथा निजी क्षेत्र, दोनों भाग ले सकेगें। यहां विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खोलने की सुविधा भी होगी।
- यहां प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों से लेकर स्नातक, परास्नातक, शोध हेतु विश्वविद्यालय व महाविद्यालय एक नियत भौगोलिक क्षेत्र में उपलब्ध होंगे। साथ ही कौशल विकास केंद्र एवं कोचिंग संस्थानों की भी स्थापना की जा सकेगी।
- सैम हिगिनवाटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एण्ड साइंस वि.वि. नैनी, प्रयागराज 2000
- किंग जार्ज मेडिकल वि.वि., लखनऊ 2002
- किंग जॉर्ज दन्त वि.वि., लखनऊ 2004
- उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान वि.वि., सैफई, इटावा 2016
- अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा वि.वि., लखनऊ (निर्माणाधीन)
- महायोगी गुरू गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय गोरखपुर
- नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, मेरठ
- पं. दीनदयाल उपाध्याय पशु. चिकित्सा विज्ञान वि.वि. एव गौ अनुसंधान संस्थान, मथुरा 2001
- डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक वि.वि., लखनऊ 2000
- एम.एम.एम. प्राविधिक वि.वि., गोरखपुर 2013
- हरकोर्ट बटलर प्राविधिक वि.वि., कानपुर 2016
- महर्षि सूचना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, लखनऊ 2001
- जगदगुरू रामभद्राचार्य विकलांग वि.वि. चित्रकूट 2001
- इंटेग्रल विश्वविद्यालय, लखनऊ 2004
- एम.ए.टी. विश्वविद्यालय, नोएडा, गौतमबुद्ध नगर 2005
- मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर 2006
- मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़ 2006
- स्वामी विवेकानन्द सुभारती वि.वि., मेरठ 2008
- तीर्थकर महावीर वि.वि., मुरादाबाद 2008
- शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा 2009
- श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय, गजरौला, अमरोहा 2010
- बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, लखनऊ 2010
- नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा 2010
- मोनाड विश्वविद्यालय, हापुड़ 2010
- आई.एफ.टी.एम. विश्वविद्यालय, मुरादाबाद 2010
- जी.एल.ए. विश्वविद्यालय, मथुरा 2010
- इन्वर्टिस विश्वविद्यालय, बरेली 2010
- रामा विश्वविद्यालय, रूमाक्षेत्र, कानपुर 2011
- गलगोतियाज विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा 2011
- शिवनादर विश्वविद्यालय, दादरी, गौतमबुद्ध नगर 2011
- रामस्वरूप मेमोरियल, विश्वविद्यालय, बाराबंकी 2012
- ग्लोकल यूनिवर्सिटी, सहारनपुर 2012
- शोभित विश्वविद्यालय, सहारनपुर 2012
- जे.पी. विश्वविद्यालय, अनूपशहर, बुलंदशहर 2014
- जे.एस. विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद 2015
- यूनाइटेड विश्वविद्यालय, प्रयागराज 2015
- बेनेट विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा 2016
- आई.आई.एम.टी. विश्वविद्यालय, मेरठ 2016
- एस. विश्वविद्यालय, लखनऊ 2016
- संस्कृत विश्वविद्यालय, मथुरा 2016
- बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी 2016
- नेहरू ग्राम भारतीय विश्वविद्यालय, प्रयागराज 2008
- शोभित इंस्टीट्यूट इंजीनियरिंग एवं तकनीकी, मेरठ 2006
- संतोष विश्वविद्यालय, गाजियाबाद 2007
- जे.पी. इंस्टीट्यूट ऑफ सूचना प्रौद्योगिकी, नोएडा 2001
- अत्याधुनिक तकनीक एवं सुविधाओं से सुसज्जित विद्यालय परिसर में बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में 'पीएम श्री' विद्यालयों की शुरूआत की गयी है। इनका शुभारम्भ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केन्द्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 4 जनवरी, 2024 को किया।
- योजना के प्रथम चरण में राज्य के 928 विद्यालयों को अपग्रेड कर 'पीएम श्री' स्कूल का स्तर प्रदान किया जा रहा है।
- उत्तर प्रदेश के कुल 1,753 विद्यालयों को 'पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया' (SHRI) योजना के लिए चुना गया है।
- उत्तर प्रदेश में 'पीएम श्री' योजना से पांच करोड़ बच्चों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है।
- 'पीएम श्री' विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजीटल लाइब्रेरी, विज्ञान प्रयोगशाला, कम्प्यूटर लैब, बाल वाटिका, सुविधाजनक फर्नीचर एवं अनेक अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 सितंबर 2022 को शिक्षक दिवस के अवसर पर 'पीएम श्री' योजना की घोषणा की थी।
- योजना के माध्यम से प्रदेश में आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्कूलों का निर्माण किया जाएगा। यह स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन का माध्यम बनेंगे।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने 'पीएम श्री' योजना के अन्तर्गत 928 स्कूलों के आधुनिकरण हेतु ₹404 करोड़ जारी किये हैं।
| प्रदेश में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान | |
|---|---|
| राजकीय ITI | 305 |
| निजी ITI | 2963 से अधिक |
| प्रदेश में प्राविधिक शिक्षा हेतु संस्थान | |
|---|---|
| डिप्लोमा/पॉलीटेक्निक हेतु राजकीय संस्थान | 201 |
| डिप्लोमा/पॉलीटेक्निक हेतु राजकीय संस्थान | 1372 |
| डिप्लोमा/पॉलीटेक्निक हेतु राजकीय संस्थान | 19 |
प्रदेश में शिक्षण सुविधाएं
- प्रदेश में वर्ष 2020-21 में जूनियर बेसिक विद्यालयों की संख्या 1,38,145 थी जो वर्ष 2021-22 में 1,38,078 हो गयी। इसी प्रकार सीनियर बेसिक विद्यालयों की संख्या वर्ष 2020-21 में 85,570 थी, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 86,430 हो गयी। वर्ष 2020-21 में हॉयर सेकेण्ड्री विद्यालयों की संख्या 27,892 थी, जो वर्ष 2021-22 में 27,806 हो गयी।
- प्रदेश में वर्ष 2020-21 में जूनियर बेसिक विद्यालयों की संख्या 586 हजार थी, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 589 हजार हो गयी। इसी प्रकार वर्ष 2020-21 में सीनियर बेसिक विद्यालयों में अध्यापकों की संख्या 502 हजार थी, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 508 हजार हो गयी।
उत्तर प्रदेश में नॉलेज स्मार्ट सिटी
- उत्तर प्रदेश सरकार ने सैन फ्रैंसिसको की आस्टिन यूनिवर्सिटी के साथ राज्य में नॉलेज स्मार्ट सिटी बनाने का समझौता किया है।
- इसमें विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थान और विश्वविद्यालय एक ही स्थान पर स्थापित किए जाएंगे।
- भारत में पहली बार इस तरह का कोई प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसमें बड़ी संख्या में छात्रों को न सिर्फ स्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, बल्कि उच्च शिक्षा की पूरी तस्वीर बदल जाएगी, ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है।
- नॉलेज सिटी की स्थापना 5 हजार एकड़ में की जाएगी। इसकी लागत लगभग ₹25 हजार करोड़ होगी।
- नॉलेज स्मार्ट सिटी का समझौता प्रदेश में उच्च शिक्षा के विकास हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस नॉलेज स्मार्ट सिटी में दुनिया भर के सबसे अच्छे उच्च शिक्षा और तकनीकी संस्थानों को शामिल किया जाएगा।
'ऑपरेशन कायाकल्प' से बदल रही प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था
- प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक (माध्यमिक) विद्यालयों में अवसंरचनात्मक (इंफ्रास्ट्रक्चर) तथा अन्य सुविधाओं का विकास कर उन्हें निजी क्षेत्र में संचालित कान्वेंट स्कूलों की भांति आकर्षक तथा अधिक उपयोगी बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में 'ऑपरेशन कायाकल्प' आरंभ किया गया है।
- जून, 2018 में आरंभ इस योजना के अंतर्गत राज्य के प्राथमिक एवं माध्यमिक (उच्च प्राथमिक) विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूलों' में परिवर्तित किया जा रहा है। राज्य के लगभग 30 हजार माध्यमिक विद्यालय स्मार्ट कक्षाओं, खेल के मैदान, सुविधाजनक शौचालय, पुस्तकालयों, कम्प्यूटर प्रयोगशालाओं, कला कक्षों तथा अन्य सुविधाओं से सुसज्जित किये जा रहे हैं।
- 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत राज्य के सभी प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के लिए अनुकूल फर्नीचर, जैसे टेबल-बेंच आदि, की व्यवस्था की जा रही है। निजी स्कूलों की भांति सरकारी विद्यालयों में ऑडियो-वीडियो प्रोजेक्टर के साथ स्मार्ट क्लासरूम तैयार किये जा रहे हैं।
- प्रदेश के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब, साइंस लैब, आर्ट रूम आदि बनाने के साथ-साथ वाई-फाई की व्यवस्था की जा रही है। निजी स्कूलों की तरह सरकारी विद्यालयों में भी बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। कई विद्यालयों में बच्चों के लिए खेलने के मैदान तैयार किये गये हैं।
- आपरेशन कायाकल्प के तहत सरकारी विद्यालयों के आधुनिकीकरण की दिशा में बढ़ते कदमों का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय कान्वेंट स्कूलों की प्रतिस्पर्धा में आ चुके हैं। जिन सरकारी विद्यालयों में अभिभावक अपने बच्चों को भेजना नहीं पसंद करते थे, उनमें छात्रों की संख्या तीव्र गति से बढ़ रही है।
- आपरेशन कायाकल्प के तहत राज्य के 1.33 लाख परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 1.64 लाख बच्चों को आधुनिक परिवेश के साथ स्वच्छ और सुरक्षित माहौल देने का प्रयास किया जा रहा है।
- कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयों का सौन्दर्यीकरण, शुद्ध पेयजल, शौचालय, फर्नीचर आदि की व्यवस्था भी की जा रही है।
- 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत प्रदेश के प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में 19 पैरामीटर पर कार्य किये जा रहे हैं। योजना की सफलता के लिए इन 19 पैरामीटर का पूर्ण होना आवश्यक है।
- शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल, बालक-बालिकाओं के लिए सुविधाजनक शौचालय, नल-जल आपूर्ति, मूत्रालय का टाइलीकरण, दिव्यांग सुलभ शौचालय, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, रसोई घर, कक्ष के फर्श का टायलीकरण, श्याम पट्ट, विद्यालयों का समुचित रंग पुताई, विद्यालय परिसर में दिव्यांग-सुलभ रैम्प, कक्ष में उपयुक्त वायरिंग एवं विद्युत उपकरण, विद्यालयों का विद्युत संयोजन, पाइप वॉटर सप्लाई, फर्नीचर डेस्क आदि।
- 'ऑपरेशन कायाकल्प' के कार्यों की प्रमाणिकता एवं पारदर्शिता के लिए प्रत्येक विद्यालय की फोटो प्रोटोकॉल के तहत जीओ टैगिंग कराई जा रही है। 'प्रेरणा' पोर्टल के माध्यम से निरंतर इन कार्यों के सन्तृप्तिकरण का रियल टाइम अनुश्रवण भी किया जा रहा है।
- प्रदेश के सैकड़ों विद्यालयों में जबरदस्त परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इन विद्यालयों में गेट, चहारदीवारी, फर्श पर टाइल्स, खेलने के लिए पार्क और लाइब्रेरी के साथ डिजिटल क्लास रूम्स, बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, पीने के स्वच्छ पानी और हाथ धोने के लिए हैण्डवॉश सिस्टम, क्लास रूम में बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर आदि की सुविधाएं उपलब्ध करायी जा चुकी हैं।
- 19 आधारभूत सुविधाओं का विकास कर बड़े पैमाने पर प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों को 5 स्टार श्रेणी युक्त बनाकर उन्हें आदर्श विद्यालय एवं ग्राम सभा के सबसे आदर्श भवन के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। इस क्रम में दिव्यांग सुलभता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
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