उत्तर प्रदेश में शिक्षा | uttar pradesh mein shiksha

उत्तर प्रदेश में शिक्षा

उत्तर प्रदेश, जो कभी वैदिक ज्ञान और गुरुकुलों की पवित्र गूंज से परिपूर्ण था, आज आधुनिक शिक्षा के एक नए और परिवर्तनकारी सफरनामे से गुजर रहा है। यह लेख महज साक्षरता के आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि 'ऑपरेशन कायाकल्प' से संवरते परिषदीय विद्यालयों, 'पीएम श्री' स्कूलों की नींव और 'नॉलेज स्मार्ट सिटी' जैसे अत्याधुनिक कदमों के जरिए यूपी के बदलते शैक्षिक वैभव की पूरी कहानी है। अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो प्रदेश में प्राथमिक से लेकर उच्च और प्राविधिक शिक्षा तक की विकास यात्रा, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं को गहराई से समझने के लिए इस विस्तृत और प्रामाणिक लेख को जरूर पढ़ें।
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किसी क्षेत्र अथवा समाज में मानव विकास के लिए 'शिक्षा' और 'स्वास्थ्य' दो महत्वपूर्ण मानक समझे जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने भी अपने मानव विकास सूचकांक (HDI) के लिए इन्हें मुख्य मानक निर्धारित किया है।

प्रदेश में वर्तमान शिक्षा व्यवस्था

शिक्षा किसी भी क्षेत्र, समाज अथवा राज्य की रीढ़ होती है, जिस पर राष्ट्र का भविष्य टिका होता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद-45 में राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के अंतर्गत संविधान स्वीकृति के दस वर्षों के भीतर 6 से 14 वर्ष तक के समस्त बालक-बालिकाओं को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा देने की बात कही गयी है। बावजूद इसके, राष्ट्रीय स्तर पर साक्षरता दर में उत्तर प्रदेश की स्थिति आज भी निराशाजनक बनी हुई है। देश भर में अन्य प्रदेशों की तुलना में साक्षरता की दर के मामले में उत्तर प्रदेश 29वें पायदान पर है। देश में केरल जैसे राज्यों की साक्षरता दर जहां 93.91 प्रतिशत है, वहीं उत्तर प्रदेश की साक्षरता दर पूरे भारत की औसत साक्षरता दर 74.04 प्रतिशत से भी कम है।

उत्तर प्रदेश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की जानकारी हाल में जारी नीति आयोग के एक अध्ययन से भी प्राप्त होती है। सितम्बर, 2019 में नीति आयोग द्वारा जारी 'स्कूल शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक' में केरल राज्य ने जहां प्रथम स्थान प्राप्त किया, वहीं उत्तर प्रदेश सबसे निचले पायदान पर है। देश के बड़े राज्यों के सूचकांक में राजस्थान दूसरे और कर्नाटक तीसरे स्थान पर है। नीति आयोग ने यह सूचकांक वर्ष 2016-17 के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया है। इसमें छात्रों के सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए स्कूलों के प्रयासों का अध्ययन किया गया है।

सुधार के प्रयास

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 के बजट में प्रदेश सरकार ने कुल बजट धनराशि का 13 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया है, जिसकी कुल धनराशि 1,06,360 करोड़ रुपये से अधिक है।
  • बजट में बेसिक, माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा के विकास हेतु ₹2000 करोड़ के प्रावधान किए गए हैं। 22 नए प्राथमिक विद्यालयों के लिए ₹25 करोड़ की व्यवस्था की गयी है।
  • बजट में पॉलिटेक्निक स्मार्ट क्लास रूम के लिए ₹10 करोड़ का प्रस्ताव किया गया है। बीते कुछ वर्षों से चल रहे इस तरह के प्रयासों के परिणाम सामने आने लगे हैं। साक्षरता की दर लगातार बढ़ रही है, जिससे निरक्षरों की संख्या तेजी से कम हुई है। वर्ष 2001 में प्रदेश में साक्षरता दर 56.27 प्रतिशत थी, जिसके कारण यहां निरक्षरों की संख्या 5.88 करोड़ थी। वर्ष 2011 में प्रदेश में साक्षरता दर 69.22 प्रतिशत होने के साथ ही निरक्षरों की संख्या घटकर 5.14 करोड़ रह गई।

उत्तर प्रदेश में साक्षरता

विवरण 2011 2001
प्रदेश की साक्षरता 67.68% 56.27%
पुरुष साक्षरता 77.28% 68.82%
महिला साक्षरता 57.18% 42.22%
कुल साक्षर संख्या 114,397,555 75,719,284
पुरुष साक्षर संख्या 68,234,964 48,901,413
महिला साक्षर संख्या 46,162,591 26,817,871

  • केन्द्रीय सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट (2025) के अनुसार उत्तर प्रदेश की साक्षरता दर बढ़कर अब 72.6 प्रतिशत हो गयी है। शहरों में साक्षरता दर 80.85 प्रतिशत तथा ग्रामीण क्षेत्र में 70.45 प्रतिशत पर पहुंच गयी है।
प्रदेश में वर्ष 1972 तक प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च तथा प्रशिक्षण स्तर तक का शिक्षण प्रबंध 'शिक्षा निदेशालय' के अंतर्गत संचालित था। वर्ष 1972 में शिक्षा निदेशालय के विभाजन का निर्णय शासन द्वारा किया गया। इसके अंतर्गत शिक्षा निदेशक बेसिक, शिक्षा निदेशक माध्यमिक और उच्च शिक्षा निदेशक के पदों का सृजन कर इसे तीन खण्डों में विभाजित कर दिया गया। आगे चलकर वर्ष 1975 में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा का एकीकरण कर दिया गया। वर्ष 1985 में बेसिक शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं गतिशील बनाने के लिए पृथक रूप से बेसिक शिक्षा निदेशालय की स्थापना की गयी। प्राथमिक शिक्षा से संबंधित गैर-सरकारी निजी विद्यालयों को मान्यता एवं सामान्य नियंत्रण के कार्य के उद्देश्य से जुलाई, 1972 में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद का गठन किया गया। ऐसे विद्यालयों की देख-रेख के लिए मण्डल स्तर पर मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) तथा जनपद स्तर पर बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा विकास खण्ड स्तर पर खण्ड शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया।

शिक्षा निदेशालय का ऐतिहासिक कालक्रम

वर्ष 1972 तक

प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा का संचालन एक ही 'शिक्षा निदेशालय' के अंतर्गत।

वर्ष 1972 (विभाजन)

बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा निदेशक के पदों का सृजन कर तीन खण्डों में विभाजन।

वर्ष 1975

बेसिक और माध्यमिक शिक्षा का एकीकरण।

वर्ष 1985

बेसिक शिक्षा को गतिशील बनाने के लिए पृथक बेसिक शिक्षा निदेशालय की स्थापना।

डिजिटल नवाचार एवं महत्वपूर्ण ऐप्स

दीक्षा ऐप (DIKSHA)

कक्षा 1 से 8 तक के सभी विषयों के पाठ्यक्रम ऑनलाइन उपलब्ध। शिक्षा को तकनीकी रूप से सुलभ बनाने का प्रयास।

प्रेरणा ऐप

शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति (सेल्फी एवं जियो-लोकेशन के माध्यम से) दर्ज करने हेतु।

समर्थ ऐप

दिव्यांग एवं ड्रॉप-आउट बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने एवं सुविधाएँ उपलब्ध कराने का प्रयास।

संकल्प ऐप

समाज में बालिका शिक्षा को विस्तार देने एवं शिक्षा से भटकी बालिकाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल।

पहल कार्यक्रम

IIT कानपुर के सहयोग से ग्रामीण और शहरी शिक्षा के स्तर की खाई को कम करने हेतु निःशुल्क ऑनलाइन शिक्षा।

प्रमुख शैक्षिक योजनाएं व अभियान

बुनियादी ढांचा

ऑपरेशन कायाकल्प

सरकारी स्कूलों को 'स्मार्ट स्कूल' बनाना। 19 पैरामीटर्स के तहत फर्नीचर, शौचालय, पेयजल, डिजिटल क्लासरूम आदि का विकास।

आधुनिकीकरण

पीएम श्री विद्यालय

यूपी के 928 विद्यालयों का प्रथम चरण में आधुनिकीकरण। स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी एवं अत्याधुनिक लैब की सुविधा।

बालिका शिक्षा

कस्तूरबा गांधी विद्यालय

पिछड़े ब्लॉकों में कमजोर व वंचित वर्ग की बालिकाओं हेतु (कक्षा 6-8) निःशुल्क आवासीय शिक्षा। (कुल 746 विद्यालय)

पोषण व नामांकन

मध्यान्ह भोजन (Mid-Day-Meal)

1995 से आरंभ। छात्रों का नामांकन बढ़ाने व पोषण हेतु विद्यालयों में पका-पकाया भोजन (2004 से लागू) उपलब्ध कराना।

उच्च शिक्षा का ढांचा: विश्वविद्यालय एवं संस्थान

विश्वविद्यालय का प्रकार कुल संख्या (लगभग) महत्वपूर्ण तथ्य / संस्थान
केन्द्रीय विश्वविद्यालय 06 BHU, AMU, इलाहाबाद वि.वि., राजीव गांधी विमानन वि.वि. आदि।
राज्य विश्वविद्यालय 43 लखनऊ वि.वि., गोरखपुर वि.वि., चौधरी चरण सिंह वि.वि. आदि।
निजी विश्वविद्यालय 48 28 नए विश्वविद्यालयों की स्थापना प्रस्तावित है। भूमि मानक में छूट (नगरीय: 20 एकड़, ग्रामीण: 50 एकड़)।
विशेषीकृत संस्थान - देश का प्रथम 'जल विश्वविद्यालय' हमीरपुर में प्रस्तावित। मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय मेरठ में।

प्रदेश के विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में साक्षरता प्रतिशत

क्र. सं. आर्थिक क्षेत्र साक्षरता प्रतिशत वर्ष 2011
व्यक्ति पुरुष स्त्री
1. पूर्वी 67.4 78.1 56.2
2. पश्चिमी 67.5 76.5 57.2
3. केन्द्रीय 68.3 76.3 59.3
4. बुन्देलखण्ड 69.3 79.9 57.1
उत्तर प्रदेश 67.7 77.3 57.2
भारत 73.0 80.9 64.6

प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक शिक्षा

वर्ष 1986 में जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनी थी, तब से अब तक शिक्षा, विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। राज्य सरकार द्वारा 6 से 14 वर्ष की आयु तक के सभी बच्चों को कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु विभिन्न कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। निःशुल्क और बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009 के अंतर्गत राज्य सरकार की तरफ से प्रत्येक 300 आबादी और एक किमी. की दूरी पर प्राथमिक विद्यालय की सुविधा तथा तीन किमी. की दूरी और 800 आबादी पर एक उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थापना का मानक निर्धारित किया गया है और इस पर कार्य जारी है।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में प्रति लाख जनसंख्या पर विद्यालयों पर विद्यार्थियों की संख्या
क्र. सं. आर्थिक क्षेत्र जूनियर बेसिक सीनियर बेसिक हायर सेकेण्ड्री
1. पूर्वी 60 37 13
2. पश्चिमी 56 37 12
3. केन्द्रीय 59 32 11
4. बुन्देलखण्ड 71 48 10
उत्तर प्रदेश 59 37 12
स्रोत: उत्तर प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण-2022-23

उत्तर प्रदेश के विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में प्रति अध्यापक पर विद्यार्थियों की संख्या
क्र. सं. आर्थिक क्षेत्र जूनियर बेसिक सीनियर बेसिक हायर सेकेण्ड्री
1. पूर्वी 28 30 49
2. पश्चिमी 56 37 12
3. केन्द्रीय 59 32 11
4. बुन्देलखण्ड 25 26 51
उत्तर प्रदेश 59 37 12
स्रोत: उत्तर प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण-2022-23

कक्षा 1 से 8 तक के सभी वर्ग के विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकें एवं दो जोड़े स्कूल ड्रेस उपलब्ध कराने की घोषणा सरकार द्वारा की गयी है। प्रदेश में छात्र-छात्राओं को निःशुल्क स्कूल बैग उपलब्ध कराने की योजना वर्ष 2016-17 में आरम्भ की गयी। इसके अतिरिक्त वर्ष 2017-18 से कक्षा 1 से 8 तक अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को निःशुल्क एक जोड़ी, दो जोड़ी मोजा एवं एक स्वेटर उपलब्ध कराने की योजना शुरू की गयी है।

उच्च शिक्षा हेतु प्रदेश में महाविद्यालय
राजकीय महाविद्यालय 172
सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय 331
स्ववित्त पोषित महाविद्यालय 7372

उत्तर प्रदेश में 'शिक्षा का अधिकार'

बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम या 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' (RTE), जो भारत की संसद का एक अधिनियम है और जिसे देश में 4 अगस्त, 2009 को लागू किया गया था, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 27 जुलाई, 2011 को केन्द्रीय शिक्षा अधिकार नियम 2009 के प्रावधानों के अनुसार प्रदेश में लागू किया गया। यह अधिनियम निम्नलिखित प्रावधान करता है-
  1. आरटीई अधिनियम के अनुसार उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर उन छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाता है जो गरीब परिवार से सम्बन्ध रखते हैं। आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले छात्र-छात्राओं की पूरी फीस सरकार देती है।
  2. यह गरीब परिवार के बच्चों के लिए पड़ोस के किसी स्कूल में प्रारम्भिक शिक्षा पूरी करने तक निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के लिए बच्चों का अधिकार है।
  3. अनिवार्य शिक्षा से आशय 6 से 14 वर्ष तक की आयु के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क प्रारम्भिक शिक्षा प्रदान करने और अनिवार्य प्रवेश, उपस्थिति और प्रारम्भिक शिक्षा को पूरा करने को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की बाध्यता से है।
  4. यह अन्य के साथ-साथ छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR), भवन और अवसंरचना, स्कूल के कार्यदिवस, शिक्षक के कार्य के घण्टों से सम्बन्धित मानदंडों और मानकों को भी निर्धारित करता है।
  5. यह अध्यापकों की तैनाती में शहरी-ग्रामीण संतुलन को सुनिश्चित करता है।

समग्र शिक्षा

शिक्षा मंत्रालय (पुराना नाम 'मानव संसाधन विकास मंत्रालय') द्वारा वर्ष 2018-19 से समग्र शिक्षा लागू की गयी है। इसमें पूर्व से संचालित सर्व शिक्षा अभियान, माध्यमिक शिक्षा अभियान एवं शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Education) को सम्मिलित किया गया है। इसे उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में संचालित किया जा रहा है। योजना के वित्त पोषण में भारत सरकार का अंश 60 प्रतिशत जबकि उत्तर प्रदेश सरकार का 40 प्रतिशत है। वर्ष 2018-19 में सरकार द्वारा 22 प्राथमिक विद्यालयों का उच्चीकरण, सौ से अधिक नामांकन वाले विद्यालयों में 4,128 अतिरिक्त बालक-बालिका शौचालय, 667 विद्यालय भवनों के वृहद मरम्मत कार्य की स्वीकृति दी गयी है। विभिन्न विद्यालयों में इस तरह के कार्य जारी हैं।

उत्तर प्रदेश : शिक्षा में नवाचार

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा को तकनीकी रूप से सुलभ बनाने के उद्देश्य से 'दीक्षा ऐप' का प्रयोग आरम्भ किया गया है। इसके अतिरिक्त शिक्षकों की विद्यालयों में समय से और नियमित उपस्थिति हो सके इसके लिए 'प्रेरणा ऐप' से निगरानी की जा रही है। इसी प्रकार दिव्यांग बच्चों के लिए 'समर्थ ऐप' और छात्राओं में शिक्षा के प्रचार- प्रसार हेतु 'संकल्प ऐप' की शुरुआत की गई है।

पहल कार्यक्रम
  • उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से ऑनलाइन ग्रामीण शिक्षा कार्यक्रम 'पहल' की शुरूआत की है।
  • पहल कार्यक्रम माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा आईआईटी कानपुर के सहयोग से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के बीच शिक्षा स्तर की खाई को कम करना है।
  • कार्यक्रम का आरंभ 15 मई, 2023 को राजकीय यूपी सैनिक इंटर कॉलेज लखनऊ में किया गया।
  • कार्यक्रम के प्रथम चरण में प्रदेश के 10 सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में निःशुल्क ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम आरंभ किया जाएगा, जिसे शीघ्र ही 40 हजार विद्यालयों तक पहुंचाने की योजना है।
  • कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को गणित और विज्ञान से जुड़ी नवीनतम जानकारी उपलब्ध करायी जाएगी।

दीक्षा ऐप
प्रदेश के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इस ऐप के माध्यम से शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस ऐप पर कक्षा 1 से 8 तक के सभी विषयों के पाठ्यक्रम को समाहित किया गया है। ऐप को क्लिक करते ही पढ़ाई प्रारम्भ हो जाती है। किस कक्षा में किस पाठ को पढ़ाना है, इसकी भी जानकारी ऐप द्वारा प्राप्त होती है।

प्रेरणा ऐप
प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 'प्रेरणा' मोबाइल ऐप बनाया है। इस ऐप के जरिए शिक्षकों को स्कूल पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना होता है। इंटरनेट के माध्यम से गूगल लोकेशन ट्रेस करके यह बताएगा कि ऐप से कहां सेल्फी लेकर उपस्थिति लगाई गई है। इससे शिक्षक स्कूल से बिना बताये गायब नहीं रह सकेंगे। इस ऐप से विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति और बच्चों की संख्या की सही जानकारी विभाग को मिलती रहती है। प्रत्येक ब्लाक के खण्ड शिक्षा अधिकारी और हर स्कूल के प्रधानाध्यापक को एक-एक टैब दिया जा रहा है, जिसके माध्यम से प्रतिदिन उपस्थिति लेकर ऐप पर अपलोड करना होगा।
प्रेरणा ऐप को लेकर विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के एक वर्ग ने गोपनीयता भंग होने का आरोप लगाते हुए इसका विरोध किया है।

समर्थ ऐप
उत्तर प्रदेश का शिक्षा विभाग 'समर्थ ऐप' के माध्यम से दिव्यांग बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। इसका उद्देश्य दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने के साथ दूसरे बच्चों में दिव्यांगों के लिए सम्मान का भाव पैदा करना है। शिक्षा विभाग प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले और ड्राप आउट दिव्यांग बच्चों को स्कूल में ऐसा वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है, जिससे उनकी स्कूलों में संख्या बढ़ सके। योजना में फिजियोथेरेपिस्ट और विशेषज्ञ शिक्षाविदों की मदद ली जा रही है।

संकल्प ऐप
संकल्प ऐप के माध्यम से प्रदेश में बालिका शिक्षा को विस्तार देने का प्रयास किया जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा परिषद से संचालित किए जा रहे संकल्प ऐप का उद्देश्य है बालिका शिक्षा का समाज में उत्तरोत्तर विकास और शिक्षा से भटकी हुई बालिकाओं को मुख्यधारा से जोड़ना।

स्वयं पोर्टल
यह अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा माइक्रोसाफ्ट की मदद से तैयार किया गया निःशुल्क ऑनलाइन पोर्टल है। इस पर 9वीं कक्षा से स्नातकोत्तर तक के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा कर प्रमाण-पत्र लेने पर विद्यार्थी को कुछ शुल्क जमा करना होता है।

स्वयं प्रभा
स्वयं प्रभा 32 डीटीएच चैनलों का एक ग्रुप है, जो कला, विज्ञान, वाणिज्य, सामाजिक विज्ञान, इंजीनियरिंग, सूचना तकनीकी, कानून, चिकित्सा, कृषि आदि विषयों के शिक्षकों को कवर करने वाले पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता है। यूपी बोर्ड द्वारा कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए यह सुविधा निःशुल्क उपलब्ध करायी जा रही है।

कल्प योजना

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को ई-कन्टेन्ट के माध्यम से विज्ञान एवं गणित जैसे विषयों को सरल ढंग से समझाने तथा कम्प्यूटर शिक्षा की प्रारम्भिक जानकारी देने के उद्देश्य से वर्ष 2004 में कल्प योजना (कम्प्यूटर एडेड लर्निंग प्रोग्राम) शुरू की गयी।
योजना के अन्तर्गत प्रत्येक विद्यालय में दो से तीन कम्प्यूटर उपलब्ध कराकर पांच वर्ष तक उनकी देखभाल एवं मरम्मत आदि की जिम्मेदारी विभिन्न सेवा प्रदाता एजेंसियों को दी गयी। इन कम्पनियों को कम्प्यूटर खराब होने पर उन्हें दुरुस्त करने, इंक तथा स्टेशनरी आदि मुहैया कराना था।
बावजूद इसके, आज सम्पूर्ण प्रदेश में कल्प योजना बुरे दौर से गुजर रही है। विद्यालयों के अधिकांश कम्प्यूटर खराब हो चुके हैं और उनका मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा है। अधिकतर विद्यालयों के कम्प्यूटर लैब पर कई वर्षों से ताले लटक रहे हैं।

बालिका शिक्षा

प्रदेश में बालिका शिक्षा की स्थिति सुधारने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें प्रमुख हैं-कस्तूरबा गांधी विद्यालय एवं मीना मंच।

कस्तूरबा गांधी विद्यालय
प्रदेश के पिछड़े विकास खण्डों में कमजोर व वंचित वर्ग की बालिकाओं के लिए कक्षा 6 से 8 तक की निःशुल्क आवासीय शिक्षा के उद्देश्य से वर्ष 2004 में यह योजना शुरू की गयी। प्रदेश में 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कार्यरत हैं, जिनमें 72,975 बालिकाएं आवासीय शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।

मीना मंच
किशोर-किशोरियों को अभिव्यक्ति के अवसर प्रदान करने एवं जीवन कौशल विकसित करने के उद्देश्य से 45,625 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मीना मंच गठित किए गए हैं। इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।

आरोहिणी पहल प्रशिक्षण कार्यक्रम

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में लड़कियों की सुरक्षा हेतु 'आरोहिणी पहल प्रशिक्षण कार्यक्रम' आरंभ किया है।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य वंचित वर्ग की लड़कियों को सक्षम और स्वावलंबी बनाना है।
  • यह अभियान लड़कियों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में सहायता करेगा।
  • आरोहिणी कार्यक्रम तीन चरणों में लागू होगा। प्रथम चरण में शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के पश्चात हर कस्तूरबा गांधी विद्यालय के दो शिक्षक छात्राओं को जागरूक करेंगे। तीसरे चरण में सामुदायिक स्तर पर अभियान चलाया जाएगा।

समेकित शिक्षा

प्रदेश के 67 जनपदों में गंभीर रूप से दृष्टि एवं श्रवण बाधित दिव्यांग बच्चों को आवासीय शिक्षा प्रदान करने हेतु 8 माह के 78 आवासीय 'एक्सीलेरेटेड लर्निंग कैम्पस' संचालित किये जा रहे हैं, जिनमें 4,501 दिव्यांग बच्चे अध्ययनरत हैं। इसके अतिरिक्त 73 जनपदों में विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के चिकित्सीय परीक्षण हेतु 437 मेडिकल 'एसेसेमेंट कैम्पस' का आयोजन किया गया, जिनमें 28,692 बच्चों का मेडिकल परीक्षण कर 15,087 बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराये गये।

शिक्षामित्र योजना

प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए शिक्षामित्र योजना जुलाई, 2001 में लागू की गयी। प्रत्येक परिषदीय प्राथमिक विद्यालय में न्यूनतम दो अध्यापकों की आवश्यकता को देखते हुए सुदूरवर्ती विद्यालयों में निर्धारित मानक के अनुसार छात्र-अध्यापक अनुपात को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह योजना संचालित की जा रही है। शिक्षामित्र की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इण्टरमीडिएट अथवा इसके समकक्ष होती है। इसके अतिरिक्त उसे ग्रामीण क्षेत्र का निवासी होना चाहिए और इसके अभाव में उसे सम्बन्धित न्याय पंचायत का निवासी होना चाहिए जहां पर प्राथमिक विद्यालय स्थित है। शासन द्वारा यह भी निर्धारित किया गया है कि कुल चयनित शिक्षामित्रों में 50 प्रतिशत अभ्यर्थी महिला होंगी।
शिक्षा मित्रों को पूर्ण शिक्षकों के समान वेतन नहीं दिया जाता है और इनकी नियुक्ति संविदा के आधार पर सत्रवार होती है। प्रदेश में पिछले 19 वर्षों से 1.50 लाख से अधिक शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक पद पर कार्य कर रहे हैं।

स्कूल चलो अभियान
6 से 14 वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्चों का विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन कराने के उद्देश्य से वर्ष 2001 में 'स्कूल चलो अभियान' कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का नामांकन बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय समुदाय को बच्चों को निरंतर विद्यालय भेजने हेतु प्रेरित एवं जागरूक किया जाता है।

मध्यान्ह भोजन योजना
छात्र-छात्राओं को विद्यालयों तक आकर्षित करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार के सहयोग से उत्तर प्रदेश में 15 अगस्त, 1995 को मध्यान्ह भोजन योजना (Mid-Day-Meal Scheme) आरम्भ की गयी। योजना के अन्तर्गत शुरू में बच्चों के अभिभावकों को अनाज उपलब्ध कराया जाता था, किन्तु सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद वर्ष 2004 से बच्चों को विद्यालय में पका-पकाया 'मध्यान्ह भोजन' उपलब्ध कराया जा रहा है। अक्टूबर, 2007 से इसे शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े ब्लाकों में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी लागू किया गया तथा 1 अप्रैल, 2008 से इसे समस्त क्षेत्र पंचायतों में विस्तारित कर दिया गया। इसके अतिरिक्त राजकीय/स्थानीय निकाय, सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 8 तक के छात्र-छात्राओं को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। मदरसों में भी इस योजना का संचालन हो रहा है। मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत भोजन बनाने का कार्य ग्राम पंचायतों, वार्ड समितियों एवं गैर सरकारी संस्थाओं की देख-रेख में किया जाता है।

साक्षर भारत कार्यक्रम

यह योजना 8 सितंबर, 2009 को 'अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस' के अवसर पर शुरू की गई, जिसे 1 अक्टूबर, 2009 से लागू कर दिया गया। योजना के अंतर्गत उन जनपदों का चयन किया जाता है, जहां महिला साक्षरता दर 50 प्रतिशत से कम है। उत्तर प्रदेश में इस आधार पर 70 जनपदों का चयन किया गया, जहां 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों को प्राथमिक साक्षरता प्रदान करने का लक्ष्य है। चालू वर्ष 2020-21 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस वर्ग के 182 लाख निरक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिनमें 26 लाख पुरुष और 156 लाख महिलाएं हैं।
साक्षर भारत कार्यक्रम का उद्देश्य सम्बन्धित जनपदों में 80 प्रतिशत साक्षरता दर प्राप्त करना, लैंगिक असमानता के वर्तमान अंतर को 10 प्रतिशत तक लाना और सामाजिक, क्षेत्रीय, लैंगिक भेद-भाव में कमी लाना है।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद

केन्द्र सरकार के शैक्षिक नीति के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 1981 में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की स्थापना लखनऊ में की गयी। परिषद की स्थापना का मूल उद्देश्य शैक्षिक शोध, सेवापूर्व एवं सेवारत प्रशिक्षण की व्यवस्था, प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक स्तर के पाठ्यक्रम एवं पाठ्य पुस्तकों का विकास तथा उनका संशोधन एवं पुनरीक्षण है। इसके अतिरिक्त नवीन शिक्षण विधियों तथा विशिष्ट कार्यक्रमों एवं उनके क्रियान्वयन से संबंधित योजना को विद्यालयों तथा शैक्षिक आयोजकों तक पहुंचाना इसका मुख्य लक्ष्य है।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की इकाइयां
  • इंस्टीट्यूट ऑफ एडवान्स स्टडी इन एजूकेशन
  • कॉलेज ऑफ टीचर एजूकेशन (सी.टी.ई.) वाराणसी, लखनऊ एवं प्रयागराज
  • राज्य शिक्षा संस्थान, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज
  • आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज
  • राज्य हिंदी संस्थान, उत्तर प्रदेश, वाराणसी
  • राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज
  • मनोविज्ञान प्रयोगशाला, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज
  • राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान, उत्तर प्रदेश, लखनऊ
  • जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट)
  • सेवा पूर्ण प्रशिक्षण
  • डी.एल.एड. (बी.टी.सी.) प्रशिक्षण
  • सी.टी. नर्सरी (प्रशिक्षण सर्टिफिकेट इन टीचिंग, नर्सरी)
  • नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग (एन.टी.टी.)
  • डिप्लोमा इन फिजिकल एजुकेशन (डी.पी.एड.)
  • डिप्लोमा इन गाइडेन्स एण्ड साइकोलॉजी (डी.जी.पी.)
  • डी.आई.ओ.एस. द्वारा संचालित डीएलएड प्रशिक्षण

माध्यमिक शिक्षा

माध्यमिक शिक्षा, बेसिक शिक्षा (आधार शिक्षा) एवं उच्च शिक्षा के बीच सेतु के रूप में कार्य करती है। यह सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था की एक मजबूत कड़ी है, जो देश के समृद्ध भविष्य का निर्माण करती है। यहां बालक-बालिकाओं को गुणात्मक शिक्षा प्रदान कर समाज के विभिन्न क्षेत्रों हेतु सुशिक्षित, चरित्रवान एवं सुयोग्य मानव के रूप में विकसित कर आगे बढ़ाने का कार्य किया जाता है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 2,152 राजकीय, 4,535 अशासकीय सहायता प्राप्त एवं 19,209 वित्तविहीन, कुल 25,896 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं।
उत्तर प्रदेश में शिक्षा निदेशालय, प्रयागराज में माध्यमिक शिक्षा से सम्बन्धित कार्य सम्पादित किए जाते हैं। शिक्षा में गुणात्मक सुधार तथा उन्नयन हेतु गोष्ठियों एवं आयोजनों से सम्बन्धित कार्य का संपादन किया जाता है। अशासकीय मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों से प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापकों तथा अध्यापकों की नियुक्ति/प्रोन्नतियों हेतु प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का गठन किया गया है। हाल में बोर्ड को विघटित कर क्षेत्रीय चयन बोर्डों की स्थापना प्रयागराज, वाराणासी तथा मेरठ में की गई। कुछ समय पश्चात इन तीनों क्षेत्रीय चयन बोर्डों को समाप्त करते हुए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का गठन किया गया, जो वर्तमान में प्रयागराज में स्थित है।

उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय

  • कुल विश्वविद्यालय 105
  • केन्द्रीय विश्वविद्यालय 06
  • राज्य विश्वविद्यालय 43
  • पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय 01
  • चिकित्सा विश्वविद्यालय 04
  • निजी विश्वविद्यालय 48
  • स्नातकोत्तर महाविद्यालय 42
  • स्नातक स्तरीय राजकीय महाविद्यालय 95
  • अशासकीय अनुदानित महाविद्यालय 331
  • डीम्ड पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय 01
  • डीम्ड कृषि विश्वविद्यालय 01
  • राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज 12
  • मेडिकल कॉलेज 28
  • औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान 305

कम भूमि क्षेत्र में हो सकेगी विश्वविद्यालय की स्थापना
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में निजी क्षेत्र के नये विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए न्यूनतम भूमि मानक में महत्वपूर्ण बदलाव किये गये हैं। प्रदेश में अब तक निजी क्षेत्र में विश्वविद्यालयों में भूमि का मानक नगरीय क्षेत्र में 40 एकड़ तथा ग्रामीण क्षेत्र हेतु 100 एकड़ निर्धारित किया गया था। प्रदेश सरकार ने इसमें महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए निजी क्षेत्र के विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु नगरी क्षेत्र में 20 एकड़ एवं ग्रामीण क्षेत्र के लिए 50 एकड़ भूमि का नया मानक निर्धारित किया है। इससे विश्वविद्यालय की स्थापना में तेजी आएगी तथा गुणवत्तापरक स्किल डेवलपमेंट युक्त शिक्षा का प्रसार होगा।

28 नए निजी विश्वविद्यालय खुलेंगे
प्रदेश में 'उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019' लागू किया गया है, जिससे नए विश्वविद्यालयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ है। सरकार द्वारा हाल में लिए गए निर्णय के अनुसार प्रदेश में 28 नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है। अभी प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या 29 है। नए विश्वविद्यालयों की स्थापना के पश्चात प्रदेश में इनकी संख्या 57 हो जाएगी।

पत्राचार शिक्षा संस्थान, उत्तर प्रदेश
शिक्षा का अवसर प्रत्येक व्यक्ति को उसकी सुविधा एवं आवश्यकता के अनुसार प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 1980-81 में पत्राचार शिक्षा संस्थान, उत्तर प्रदेश की स्थापना की गयी। वर्तमान में यह अपने प्रयागराज स्थित कार्यालय से संचालित हो रहा है।

पत्राचार शिक्षा सामान्य योजना
माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश, प्रयागराज द्वारा संचालित इण्टरमीडिएट परीक्षा में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के रूप में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों के शैक्षिक स्तर को उन्नत करने के उद्देश्य से वर्ष 1982-83 से यह योजना संचालित है। इण्टरमीडिएट व्यक्तिगत परीक्षा के लिए मानविकी, विज्ञान एवं वाणिज्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए संस्थान द्वारा 29 विषयों में दो वर्षीय पत्राचार शिक्षण की व्यवस्था की जाती रही है। वर्ष 2004 में खेल एवं शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य विषय घोषित किये जाने के बाद अब कुल 30 विषयों में पत्राचार शिक्षण की व्यवस्था की जा रही है।

राज्य विद्यालय क्रीड़ा संस्थान अयोध्या
प्रदेश स्तर पर चुने हुए प्रतिभावान छात्र/छात्रा खिलाड़ियों को नई तकनीक द्वारा खेलकूद का प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से अयोध्या में राज्य विद्यालय क्रीड़ा संस्थान की स्थापना की गई है। इसके अंतर्गत जनपद, मंडल, राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर की खेलकूद प्रतियोगिताओं का संचालन किया जाता है।

समग्र शिक्षा अभियान
इस योजना के अंतर्गत मुख्य रूप से माध्यमिक स्तर के छात्र-छात्राओं के लिए निर्धारित दूरी पर माध्यमिक स्तरीय शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना, माध्यमिक विद्यालयों का सुदृढ़ीकरण, गुणवत्ता-विकास तथा सेवारत शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्मिलित है। इसके अंतर्गत शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े विकास खंडों में माध्यमिक स्तर पर अध्ययनरत अपवंचित वर्ग की बालिकाओं के लिए 191 बालिका छात्रावासों के निर्माण की स्वीकृति प्रदेश सरकार द्वारा दी गयी है, जिनमें 80 छात्रावास तैयार किये जा चुके हैं।

व्यावसायिक शिक्षा योजना
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में केन्द्र पुरोनिधानित व्यावसायिक शिक्षा योजना इंटरमीडिएट स्तर पर संचालित की जा रही है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 892 माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। चयनित विद्यालयों में माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज द्वारा 35 ट्रेड में से प्रत्येक विद्यालय में दो से तीन ट्रेड की स्वीकृति प्रदान की गई है।

उर्दू निदेशालय
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2007 में निदेशक उर्दू एवं प्राच्य भाषाएं उत्तर प्रदेश, लखनऊ के पद को समाप्त कर निदेशक, साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषाएं उत्तर प्रदेश, लखनऊ के नाम से 'उर्दू निदेशालय' का संचालन किया जा रहा है।

उच्च शिक्षा

किसी देश, प्रदेश अथवा क्षेत्र में विशेषज्ञता के प्रसार एवं शोध कार्यों के लिए उच्च शिक्षा की आवश्यकता होती है। उत्तर प्रदेश में स्वतंत्रता से पूर्व मात्र 5 विश्वविद्यालय कार्य कर रहे थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 75 हो चुकी है।
उत्तर प्रदेश में 6 केन्द्रीय विश्वविद्यालय हैं, जिनमें एक कृषि एवं एक विमानन विश्वविद्यालय सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त 4 चिकित्सा विश्वविद्यालय, 3 प्राविधिक विश्वविद्यालय तथा 1 पशुचिकित्सा विश्वविद्यालय मौजूद हैं। प्रदेश में चार केन्द्रीय और तीन राज्य डीम्ड विश्वविद्यालय भी स्थित हैं। डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा उच्च शिक्षा से सम्बद्ध उन इंस्टीट्यूट एवं विश्वविद्यालयों के अतिरिक्त किसी विशेष शिक्षण क्षेत्र में काम कर रहे उन संस्थानों को दिया जाता है जो बहुत ऊंचे मानदंड पर कार्य करते हैं। केन्द्रीय अथवा राज्य विश्वविद्यालयों के विपरीत यह डीम्ड विश्वविद्यालय अपने पाठ्यक्रम और शिक्षण शुल्क आदि निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।

समस्या एवं समाधान

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा की स्थिति तमाम प्रयासों और घोषणाओं के बावजूद तुलनात्मक रूप से खराब है। यद्यपि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन तमाम ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों में बेहतर उच्च शिक्षा की सुलभता आज भी निराशाजनक बनी हुई है। जिन क्षेत्रों में उच्च शिक्षा संस्थानों की सुलभता है, वहां भी इसकी गुणवत्ता इस स्तर तक चिंतनीय है कि पीएचडी एवं नेट/जेआरएफ क्वालिफाइड लोग प्राथमिक विद्यालयों अथवा मानक से बेहद कम मानदेय पर निजी विद्यालयों में शिक्षा देने को विवश हैं। बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा की डिग्रियां लेकर रोजगार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त प्रदेश के हजारों युवा अन्य प्रदेशों में पलायन कर रहे हैं।

मेरठ में प्रथम खेल विश्वविद्यालय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 जनवरी, 2022 को मेरठ के सलावा क्षेत्र में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया। यह उत्तर प्रदेश का प्रथम खेल विश्वविद्यालय है।
विश्वस्तरीय अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त यह खेल विश्वविद्यालय 91.38 एकड़ क्षेत्र में निर्मित होगा। इसके निर्माण पर ₹700 करोड़ की लागत अनुमानित है। इसमें 1080 खिलाड़ियों को एक साथ प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।

वैदिक शिक्षा व्यवस्था
  • वैदिक संस्कृति (1500-600 ई. पू.) के प्रवर्तक आर्य थे। माना जाता है, कि आर्य लेखन कला से अनभिज्ञ थे। बावजूद इसके, उन्होंने ऋग्वेद समेत अनेक ग्रंथों की रचना की। स्पष्ट है कि उनकी शिक्षा व्यवस्था उच्च कोटि की थी, जिसके चलते मौखिक रूप से ज्ञान अर्जित कर उन्होंने वैदिक ग्रंथों की रचना की। यही कारण है कि वेद को 'श्रुति' कहते हैं।
  • वैदिक समाज में ज्ञान और नैतिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता था। शिक्षा का प्रबन्ध राज्य द्वारा नहीं किया जाता था। विद्वान ब्राह्मण अपने घर अथवा आश्रम पर ही उच्च तीन वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा वैश्य) के विद्यार्थियों को शिक्षा देते थे। वैदिक काल (1500-1000 ई.पू.) तक शिक्षा व्यवस्था बालक और बालिकाओं के लिए समान थी।
  • बच्चों के लिए शिक्षा की औपचारिक शुरुआत उपनयन संस्कार के पश्चात होती थी। उपनयन संस्कार शूद्रों के अतिरिक्त तीन वर्णों के लिए अनिवार्य था। ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ण के लिए उपनयन की आयु क्रमशः 8, 11 एवं 12 वर्ष निर्धारित थी। उपनयन बालिकाओं का भी होता था, लेकिन उन्हें भिक्षाटन आदि से छूट प्राप्त थी।
  • गुरूकुल अथवा आश्रम में प्रत्येक गुरू के पास 15 से 25 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करते थे। वरिष्ठ छात्र अपने कनिष्ठ छात्रों को पढ़ाते थे। वेद के किसी एक अंग अथवा वेदांग की शिक्षा देने वाले शिक्षक को 'उपाध्याय', साहित्य की शिक्षा देने वाले को 'प्रवक्ता' कंठस्थ कराकर शिक्षा देने वाले को 'श्रोत्रिय', गृहस्थ शिक्षक को 'गुरू' तथा घूम-घूम कर शिक्षा देने वाले को 'चरक' कहा जाता था।
  • गुरूकुल में शिष्य सामान्यतः बारह वर्ष, किन्तु विशेष परिस्थितियों में 24 वर्ष तक अथवा आजीवन रह सकता था। अध्ययन की समाप्ति पर 'समावर्तन' नामक संस्कार में गुरू शिष्य को अंतिम महत्वपूर्ण उपदेश देते थे।

प्रदेश सरकार द्वारा हाल में उच्च शिक्षा प्राप्त बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के अनेक प्रयास किए गए हैं। इस संबंध में नियमित रूप से आयोजित करायी जा रही प्रतियोगी परीक्षाओं एवं बड़ी संख्या में की गई शिक्षकों की भर्ती से समस्या में कुछ कमी आई है, किंतु समाधान की राह अभी लम्बी दिखाई दे रही है।
प्रदेश में उच्च शिक्षा को विस्तार देने हेतु हाल के दिनों में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनमें उल्लेखनीय हैं-
  • पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में डीएवी कालेज, कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जा रही है।
  • सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर को अंतर्राष्ट्रीय बुद्धिस्ट सेंटर एवं सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन हिंदुइज्म, बुद्धिज्म एण्ड जैनिज्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध केन्द्र में प्राच्य भाषा एवं विदेशी भाषा केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इस कार्य के लिए 21 शैक्षिक एवं 24 शिक्षणेत्तर पदों का सृजन किया गया है।
  • दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर में 'महायोगी गुरू श्री गोरक्षनाथ शोध पीठ' की स्थापना की जा रही है।
  • प्रदेश के 15 राज्य विश्वविद्यालयों में पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की स्थापना की गई है।
  • शोध कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लखनऊ विश्वविद्यालय में 'भाउराव देवरस शोध पीठ' तथा 'अभिनव गुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ शैव फिलॉसफी एण्ड एस्थेटिक्स' की स्थापना की गई है।
  • लखनऊ विश्वविद्यालय में 'महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय रोजगार अध्ययनपीठ' एवं 'अटल सुशासन पीठ' की स्थापना की जा रही है।
  • वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में 'प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल साइंस ऑफ स्टडी एण्ड रिसर्च' तथा 'रिसर्च सेंटर फॉर रिन्यूएबल एनर्जी एण्ड नैनो साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी' की स्थापना की गयी है।
  • राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के अंतर्गत 26 मॉडल राजकीय महाविद्यालय एवं राज्य सेक्टर के अंतर्गत 30 राजकीय महाविद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के अंतर्गत 84 राजकीय महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर कक्षाओं/संकाय हेतु अतिरिक्त शिक्षण कक्ष निर्माणाधीन हैं।

प्राविधिक शिक्षा

उत्तर प्रदेश में प्राविधिक शिक्षा विभाग के अधीन 16 स्नातक/ स्नातकोत्तर स्तरीय संस्थाएं कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त 57 डिप्लोमा स्तरीय राजकीय संस्थाओं में निर्माण कार्य चल रहा है। प्राविधिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार एवं तीव्र विकास के लिए शोध विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान, डिप्लोमा स्तरीय पाठ्यक्रमों की परीक्षा सम्पन्न कराने के उद्देश्य से 'प्राविधिक शिक्षा परिषद' तथा छात्रों के प्रवेश हेतु 'संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद' का गठन किया गया है।

प्राविधिक विश्वविद्यालय

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में डॉ. एपीजे अब्दुल कलॉम प्राविधिक विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश की स्थापना की गयी है। यह एशिया का सबसे बड़ा प्राविधिक विश्वविद्यालय (Technical University) है। इसका पूर्ववर्ती नाम उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ था, जिसकी स्थापना महामाया प्राविधिक विश्वविद्यालय, गौतमबुद्ध नगर तथा गौतमबुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ के आपसी विलयसे की गयी थी।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलॉम प्राविधिक विश्वविद्यालय का मुख्य कार्य प्रदेश में स्थापित ऐसे निजी एवं सरकारी संस्थान, जो बी.टेक, बी.फार्मा., बी.आर्क., एम.बी.ए. एम.सी.ए., होटल मैनेजमेंट, एम.फार्मा. एवं एम.टेक. पाठ्यक्रम संचालित करते हैं, को सम्बद्धता प्रदान करना, उनके लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करना तथा परीक्षा के पश्चात अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान करना है। वर्तमान में इस विश्वविद्यालय से 592 प्राविधिक/मैनेजमेंट कॉलेज एवं संस्थाएं सम्बद्ध हैं।
मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज, गोरखपुर को विस्तार देकर रूड़की विश्वविद्यालय की तरह मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Madan Mohan Malaviya University of Technology) का स्वरूप दिया गया है।
हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (एच.बी.टी.आई.) कानपुर को हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय, कानपुर के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक शिक्षा की विफलता : भविष्य एवं सुझाव
  • उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्कूली शिक्षा की विफलता और इसके भविष्य का आकलन सरकार के इस निर्णय से किया जा सकता है कि जून, 2025 में राज्य के हजारों विद्यालयों को बच्चों की संख्या के आधार पर निकटवर्ती उच्च प्राथमिक अथवा कंपोजिट स्कूलों में मर्ज (विलय) करने का निर्णय लिया गया।
  • वर्ष 2017-18 में राज्य में बेसिक शिक्षा परिषद के 1.58 लाख से अधिक विद्यालय थे, जिनमें प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 1 लाख 13 हजार 289 थी। बीते दिनों कम छात्र संख्या वाले लगभग 28 हजार विद्यालयों को पड़ोस के स्कूलों में मर्ज कर दिया गया। अब नये स्तर पर 5000 विद्यालयों के मर्जर का निर्णय लिया गया है। इस मर्जर से हजारों बच्चों के विद्यालय छूट गये।
  • सरकारी आकड़ों के अनुसार राज्य के बेसिक शिक्षा परिषद विद्यालयों में 2021-22 में विद्यार्थियों की संख्या 1.91 करोड़ थी, जो 2025 में घट कर 1.49 करोड़ रह गयी है। इसका नकारात्मक प्रभाव अध्यापकों की संख्या पर भी पड़ा है।
  • इस संबंध में सरकार का तर्क यह है कि मर्जर (विलय) अथवा कंपोजिट स्कूलों की स्थापना से विद्यार्थियों को उच्च बुनियादी संरचना एवं सुविधाओं से युक्त विद्यालय उपलब्ध कराये जा रहे हैं।

सार्वजनिक शिक्षा की विफलता के कारण
  • छात्रों का नामांकन व प्रतिधारण का गिरता स्तर
  • खराब शिक्षक-छात्र अनुपात (36:1)
  • गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का अभाव
  • सामाजिक दृष्टि से अभिभावकों की उदासीनता, लैंगिक भेदभाव
  • आर्थिक लाभ हेतु अभिभावकों द्वारा बच्चों को घरेलू व व्यावसायिक कार्यों में लगाना।
  • विद्यालयों में बुनियादी ढाँचे का अभाव, उदाहरण: पेयजल सुविधा एवं छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय का अभाव।
  • अति महत्वाकांक्षी पाठ्यक्रम (एनसीईआरटी के अनुरूप नहीं)
  • राजनीतिक-हस्तक्षेप, उदाहरण-मर्जर, ट्रांसफर-पोस्टिंग आदि।
  • भ्रष्टाचार, आवंटित धन का इष्टतम उपयोग नहीं।
  • अपर्याप्त स्टाफ व उत्तरदायित्व की कमी।
  • उत्तर प्रदेश में 70 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ग्रामीण पृष्ठ पर आधारित है, जिनकी प्रति व्यक्ति आय कम है। ऐसे लोग पैसे के अभाव में अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेज पाते।
  • निजी स्कूलों द्वारा गरीब बच्चों एवं अभिभावकों का शोषण सर्वविदित है, ऐसे में सार्वजनिक शिक्षा को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।

भविष्य की संभावनाएं एवं सुझाव
  • शिक्षकों को शिक्षण के अतिरिक्त अन्य कार्यों से मुक्त किया जाना चाहिए।
  • स्वयं सहायता समूह की सहायता लेनी होगी। इस क्षेत्र में प्रेरणा एवं प्रथम जैसे कई संगठन अच्छा कार्य कर रहे हैं।
  • कर्नाटक की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना होनी चाहिए।
  • शिक्षकों को प्रशिक्षण एवं अद्यतन तकनीकी ज्ञान देना होगा।
  • अभिभावक जागरूकता हेतु सामुदायिक अभियान संचालित करना होगा।
  • कुपोषण, स्टंटिंग, वेस्टिंग जैसी समस्याओं के निदान हेतु स्वास्थ्य देखभाल करना होगा।
  • नई शिक्षा नीति 2022 व 'निपुण भारत मिशन' को एक जन आंदोलन का स्वरूप देकर सार्वजनिक शिक्षा को उच्चता के शिखर पर ले जाया जा सकता हैं, जो सतत् विकास लक्ष्य-4 की पूर्ति हेतु आवश्यक है

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा)

इस योजना का उद्देश्य महाविद्यालयों/तकनीकी संस्थानों में शिक्षा के स्तर एवं गुणवत्ता में वृद्धि कर पर्याप्त मात्रा में तकनीकी शैक्षिक संस्थाओं की स्थापना करना है, जिससे युवाओं को गुणवत्तापरक तकनीकी शिक्षा उपलब्ध करायी जा सके। योजना में अभी तक भारत सरकार एवं राज्य सरकार का वित्त पोषण क्रमशः 65:35 प्रतिशत था, जो अब 60:40 हो गया है।

प्राविधिक शिक्षा निदेशालय

प्रदेश में संचालित डिप्लोमा स्तरीय संस्थाओं के प्रशासन तथा संचालन का दायित्व प्राविधिक शिक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश, कानपुर का है, जिसके प्रमुख निदेशक प्राविधिक शिक्षा हैं। इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी, लखनऊ, दौराला (मेरठ) तथा झांसी में हैं।

प्राविधिक शिक्षा परिषद

इसका कार्य प्रदेश के पॉलीटेक्निक संस्थानों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की परीक्षा आयोजित कराना तथा निजी क्षेत्र की पॉलीटेक्निक संस्थानों को सम्बद्धता प्रदान करना है। इसका प्रमुख परिषद का सचिव होता है तथा इसके अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष शासन द्वारा नामित किये जाते हैं।

इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर हैण्डीकैप्ड

कानपुर स्थित डॉ. अम्बेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर हैण्डीकैप्ड की स्थापना 1997 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विकलांगों के लिए प्राविधिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए की गयी।

कम्युनिटी डेवलेपमेंट थ्रू पॉलीटेक्निक स्कीम (CDTP)

भारत सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वित्त पोषित इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अंचल के निवासियों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने, उनके सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए रोजगारपरक तकनीकी/व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संचालित करना है। वर्तमान में प्रदेश की कुल 59 संस्थाओं में सीटीडीपी योजना संचालित है।

कम्युनिटी कॉलेज

यह नेशनल वोकेशनल एजुकेशन क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (NVEQF) योजनान्तर्गत समाज के कमजोर वर्ग के व्यक्तियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने का कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य माड्यूलर कोर्स की सहायता से छात्र-छात्राओं में गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान कर स्किल गैप को दूर किया जाना है। इस योजना के अंतर्गत स्कूल, कॉलेज, पॉलीटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज तथा कौशल ज्ञान प्रदान करने वाले उद्योग, सर्विस सेक्टर्स आदि का चयन किया जाता है।

दुनिया का प्रथम 'जल विश्वविद्यालय' हमीरपुर में
  • उत्तर प्रदेश के बुंदेलखण्ड क्षेत्र स्थित हमीरपुर में देश और दुनिया के प्रथम 'जल विश्वविद्यालय' की स्थापना की जा रही है।
  • हमीरपुर जिले के 25 एकड़ क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय निर्मित होगा, जिसमें शीघ्र ही देश-दुनिया के लोग जल संरक्षण का पाठ पढ़ने आएंगे।
  • यह अपनी तरह का प्रथम विश्वविद्यालय होगा, जहां छात्र और शोधार्थी जल की कमी से उत्पन्न समस्याओं के लिए, पुरातन और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से सामाधान तलाशेंगे।
  • यहां यूजीसी पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिसमें जल संरक्षण की विद्या को कोर्स के रूप मे जोड़ा जाएगा।
  • इस प्रथम जल विश्वविद्यालय की पहल पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. रविकांत पाठक के अतिरिक्त पद्मश्री से सम्मानित जल योद्धा उमाशंकर पांडेय ने की है। इनके प्रस्ताव को उच्च शिक्षा विभाग को भेज दिया गया है।
  • जल विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए प्रो. पाठक ने अपनी 25 एकड़ जमीन दान की है।

उत्तर प्रदेश में स्थित प्रमुख शिक्षण संस्थान

केन्द्रीय विश्वविद्यालय
  • इलाहाबाद वि.वि., प्रयागराज - 1887
  • काशी हिंदू वि.वि., वाराणसी - 1916
  • अलीगढ़ मुस्लिम वि. वि., अलीगढ़ - 1920
  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर वि. वि., लखनऊ - 1989
  • रानी लक्ष्मीबाई कृषि वि.वि., झांसी - 2014
  • राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन वि.वि., अमेठी - 2017

केन्द्रीय डीम्ड विश्वविद्यालय
  • इंडियन वेटेरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बरेली - 1983
  • केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ - 1967
  • राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, प्रयागराज -  2000
  • मोतीलाल नेहरू रा. प्रौ. संस्थान, प्रयागराज - 2002

मुक्त विश्वविद्यालय
  • राजर्षि पुरुषोत्तम टंडन मुक्त वि.वि., प्रयागराज - 1998

राजकीय विश्वविद्यालय
  • लखनऊ, विश्वविद्यालय - 1921
  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर वि.वि., आगरा - 1927
  • पं. दीनदयाल उपाध्याय वि.वि., गोरखपुर 1957
  • सम्पूर्णानंद संस्कृत वि.वि., वाराणसी 1958
  • छत्रपति शाहूजी महाराज, वि.वि., कानपुर 1965
  • चौधरी चरण सिंह वि.वि., मेरठ 1965
  • महात्मा गांधी, काशी विद्यापीठ, वाराणसी 1975
  • मैथिलीशरण गुप्त बुंदेलखण्ड वि.वि., झांसी 1975
  • राम मनोहर लोहिया अवध वि.वि., अयोध्या 1975
  • महात्मा ज्योतिबा फूले रूहेलखंड वि.वि. बरेली 1975
  • वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल वि.वि., जौनपुर 1987
  • गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, गौतमबुद्ध नगर 2002
  • डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि वि.वि., लखनऊ 2005
  • डॉ. शकुन्तला मिश्रा रा. पुनर्वास वि.वि. लखनऊ 2009
  • ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा वि.वि., लखनऊ 2010
  • सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, सिद्धार्थनगर 2015
  • प्रो. राजेन्द्र सिंह वि.वि., प्रयागराज 2016
  • जननायक चन्द्रशेखर वि.वि., बलिया 2016

राजकीय डीम्ड विश्वविद्यालय
  • दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, आगरा 1981
  • संजय गांधी पी.जी. आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ 1983
  • भातखण्डे म्यूजिक इन्टीट्यूट, लखनऊ 2001

कृषि विश्वविद्यालय
  • चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौ. वि.वि., कानपुर 1975
  • आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौ. वि.वि., फैजाबाद 1976
  • सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि वि.वि. मेरठ 2000
  • बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी वि.वि. बांदा 2010
  • महात्मा बुद्ध कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुशीनगर

प्रदेश में देश की प्रथम एजुकेशन टाउनशिप
  • विकसित देशों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में देश की प्रथम एजुकेशन टाउनशिप की स्थापना का निर्णय लिया गया है, जहां सभी प्रकार की शिक्षा, संबंधित पाठ्यक्रम, शिक्षा प्रणाली, शिक्षा केन्द्रों की जानकारी एवं कौशल प्रशिक्षण आदि एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगे। प्रदेश में ऐसी 5 टाउनशिप विकसित किया जाने की योजना है।
  • यह टाउनशिप योजना 'सिंगल एंट्री-मल्टीपल एग्जिट' मोड में कार्य करेगी। इस योजना में सरकारी तथा निजी क्षेत्र, दोनों भाग ले सकेगें। यहां विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खोलने की सुविधा भी होगी।
  • यहां प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों से लेकर स्नातक, परास्नातक, शोध हेतु विश्वविद्यालय व महाविद्यालय एक नियत भौगोलिक क्षेत्र में उपलब्ध होंगे। साथ ही कौशल विकास केंद्र एवं कोचिंग संस्थानों की भी स्थापना की जा सकेगी।

डीम्ड कृषि विश्वविद्यालय
  • सैम हिगिनवाटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एण्ड साइंस वि.वि. नैनी, प्रयागराज 2000

चिकित्सा विश्वविद्यालय
  • किंग जार्ज मेडिकल वि.वि., लखनऊ 2002
  • किंग जॉर्ज दन्त वि.वि., लखनऊ 2004
  • उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान वि.वि., सैफई, इटावा 2016
  • अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा वि.वि., लखनऊ (निर्माणाधीन)
  • महायोगी गुरू गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय गोरखपुर

खेल विश्वविद्यालय
  • नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, मेरठ

पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय
  • पं. दीनदयाल उपाध्याय पशु. चिकित्सा विज्ञान वि.वि. एव गौ अनुसंधान संस्थान, मथुरा 2001

प्राविधिक विश्वविद्यालय
  • डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक वि.वि., लखनऊ 2000
  • एम.एम.एम. प्राविधिक वि.वि., गोरखपुर 2013
  • हरकोर्ट बटलर प्राविधिक वि.वि., कानपुर 2016

निजी विश्वविद्यालय
  • महर्षि सूचना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, लखनऊ 2001
  • जगदगुरू रामभद्राचार्य विकलांग वि.वि. चित्रकूट 2001
  • इंटेग्रल विश्वविद्यालय, लखनऊ 2004
  • एम.ए.टी. विश्वविद्यालय, नोएडा, गौतमबुद्ध नगर 2005
  • मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर 2006
  • मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़ 2006
  • स्वामी विवेकानन्द सुभारती वि.वि., मेरठ 2008
  • तीर्थकर महावीर वि.वि., मुरादाबाद 2008
  • शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा 2009
  • श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय, गजरौला, अमरोहा 2010
  • बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, लखनऊ 2010
  • नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा 2010
  • मोनाड विश्वविद्यालय, हापुड़ 2010
  • आई.एफ.टी.एम. विश्वविद्यालय, मुरादाबाद 2010
  • जी.एल.ए. विश्वविद्यालय, मथुरा 2010
  • इन्वर्टिस विश्वविद्यालय, बरेली 2010
  • रामा विश्वविद्यालय, रूमाक्षेत्र, कानपुर 2011
  • गलगोतियाज विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा 2011
  • शिवनादर विश्वविद्यालय, दादरी, गौतमबुद्ध नगर 2011
  • रामस्वरूप मेमोरियल, विश्वविद्यालय, बाराबंकी 2012
  • ग्लोकल यूनिवर्सिटी, सहारनपुर 2012
  • शोभित विश्वविद्यालय, सहारनपुर 2012
  • जे.पी. विश्वविद्यालय, अनूपशहर, बुलंदशहर 2014
  • जे.एस. विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद 2015
  • यूनाइटेड विश्वविद्यालय, प्रयागराज 2015
  • बेनेट विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा 2016
  • आई.आई.एम.टी. विश्वविद्यालय, मेरठ 2016
  • एस. विश्वविद्यालय, लखनऊ 2016
  • संस्कृत विश्वविद्यालय, मथुरा 2016
  • बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी 2016

निजी डीम्ड विश्वविद्यालय
  • नेहरू ग्राम भारतीय विश्वविद्यालय, प्रयागराज 2008
  • शोभित इंस्टीट्यूट इंजीनियरिंग एवं तकनीकी, मेरठ 2006
  • संतोष विश्वविद्यालय, गाजियाबाद 2007
  • जे.पी. इंस्टीट्यूट ऑफ सूचना प्रौद्योगिकी, नोएडा 2001

प्रदेश में 928 'पीएम श्री' विद्यालय आरंभ
  • अत्याधुनिक तकनीक एवं सुविधाओं से सुसज्जित विद्यालय परिसर में बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में 'पीएम श्री' विद्यालयों की शुरूआत की गयी है। इनका शुभारम्भ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केन्द्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 4 जनवरी, 2024 को किया।
  • योजना के प्रथम चरण में राज्य के 928 विद्यालयों को अपग्रेड कर 'पीएम श्री' स्कूल का स्तर प्रदान किया जा रहा है।
  • उत्तर प्रदेश के कुल 1,753 विद्यालयों को 'पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया' (SHRI) योजना के लिए चुना गया है।
  • उत्तर प्रदेश में 'पीएम श्री' योजना से पांच करोड़ बच्चों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है।
  • 'पीएम श्री' विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजीटल लाइब्रेरी, विज्ञान प्रयोगशाला, कम्प्यूटर लैब, बाल वाटिका, सुविधाजनक फर्नीचर एवं अनेक अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 सितंबर 2022 को शिक्षक दिवस के अवसर पर 'पीएम श्री' योजना की घोषणा की थी।
  • योजना के माध्यम से प्रदेश में आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्कूलों का निर्माण किया जाएगा। यह स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन का माध्यम बनेंगे।
  • उत्तर प्रदेश सरकार ने 'पीएम श्री' योजना के अन्तर्गत 928 स्कूलों के आधुनिकरण हेतु ₹404 करोड़ जारी किये हैं।

प्रदेश में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान
राजकीय ITI 305
निजी ITI 2963 से अधिक
स्रोत- उत्तर प्रदेश बजट 2023-24

प्रदेश में प्राविधिक शिक्षा हेतु संस्थान
डिप्लोमा/पॉलीटेक्निक हेतु राजकीय संस्थान 201
डिप्लोमा/पॉलीटेक्निक हेतु राजकीय संस्थान 1372
डिप्लोमा/पॉलीटेक्निक हेतु राजकीय संस्थान 19
स्रोत- उत्तर प्रदेश बजट 2023-24

प्रदेश में शिक्षण सुविधाएं

  • प्रदेश में वर्ष 2020-21 में जूनियर बेसिक विद्यालयों की संख्या 1,38,145 थी जो वर्ष 2021-22 में 1,38,078 हो गयी। इसी प्रकार सीनियर बेसिक विद्यालयों की संख्या वर्ष 2020-21 में 85,570 थी, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 86,430 हो गयी। वर्ष 2020-21 में हॉयर सेकेण्ड्री विद्यालयों की संख्या 27,892 थी, जो वर्ष 2021-22 में 27,806 हो गयी।
  • प्रदेश में वर्ष 2020-21 में जूनियर बेसिक विद्यालयों की संख्या 586 हजार थी, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 589 हजार हो गयी। इसी प्रकार वर्ष 2020-21 में सीनियर बेसिक विद्यालयों में अध्यापकों की संख्या 502 हजार थी, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 508 हजार हो गयी।

उत्तर प्रदेश में नॉलेज स्मार्ट सिटी

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने सैन फ्रैंसिसको की आस्टिन यूनिवर्सिटी के साथ राज्य में नॉलेज स्मार्ट सिटी बनाने का समझौता किया है।
  • इसमें विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थान और विश्वविद्यालय एक ही स्थान पर स्थापित किए जाएंगे।
  • भारत में पहली बार इस तरह का कोई प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसमें बड़ी संख्या में छात्रों को न सिर्फ स्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, बल्कि उच्च शिक्षा की पूरी तस्वीर बदल जाएगी, ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है।
  • नॉलेज सिटी की स्थापना 5 हजार एकड़ में की जाएगी। इसकी लागत लगभग ₹25 हजार करोड़ होगी।
  • नॉलेज स्मार्ट सिटी का समझौता प्रदेश में उच्च शिक्षा के विकास हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस नॉलेज स्मार्ट सिटी में दुनिया भर के सबसे अच्छे उच्च शिक्षा और तकनीकी संस्थानों को शामिल किया जाएगा।

'ऑपरेशन कायाकल्प' से बदल रही प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था

  • प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक (माध्यमिक) विद्यालयों में अवसंरचनात्मक (इंफ्रास्ट्रक्चर) तथा अन्य सुविधाओं का विकास कर उन्हें निजी क्षेत्र में संचालित कान्वेंट स्कूलों की भांति आकर्षक तथा अधिक उपयोगी बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में 'ऑपरेशन कायाकल्प' आरंभ किया गया है।
  • जून, 2018 में आरंभ इस योजना के अंतर्गत राज्य के प्राथमिक एवं माध्यमिक (उच्च प्राथमिक) विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूलों' में परिवर्तित किया जा रहा है। राज्य के लगभग 30 हजार माध्यमिक विद्यालय स्मार्ट कक्षाओं, खेल के मैदान, सुविधाजनक शौचालय, पुस्तकालयों, कम्प्यूटर प्रयोगशालाओं, कला कक्षों तथा अन्य सुविधाओं से सुसज्जित किये जा रहे हैं।
  • 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत राज्य के सभी प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के लिए अनुकूल फर्नीचर, जैसे टेबल-बेंच आदि, की व्यवस्था की जा रही है। निजी स्कूलों की भांति सरकारी विद्यालयों में ऑडियो-वीडियो प्रोजेक्टर के साथ स्मार्ट क्लासरूम तैयार किये जा रहे हैं।
  • प्रदेश के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब, साइंस लैब, आर्ट रूम आदि बनाने के साथ-साथ वाई-फाई की व्यवस्था की जा रही है। निजी स्कूलों की तरह सरकारी विद्यालयों में भी बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। कई विद्यालयों में बच्चों के लिए खेलने के मैदान तैयार किये गये हैं।
  • आपरेशन कायाकल्प के तहत सरकारी विद्यालयों के आधुनिकीकरण की दिशा में बढ़ते कदमों का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय कान्वेंट स्कूलों की प्रतिस्पर्धा में आ चुके हैं। जिन सरकारी विद्यालयों में अभिभावक अपने बच्चों को भेजना नहीं पसंद करते थे, उनमें छात्रों की संख्या तीव्र गति से बढ़ रही है।
  • आपरेशन कायाकल्प के तहत राज्य के 1.33 लाख परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 1.64 लाख बच्चों को आधुनिक परिवेश के साथ स्वच्छ और सुरक्षित माहौल देने का प्रयास किया जा रहा है।
  • कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयों का सौन्दर्यीकरण, शुद्ध पेयजल, शौचालय, फर्नीचर आदि की व्यवस्था भी की जा रही है।
  • 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत प्रदेश के प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में 19 पैरामीटर पर कार्य किये जा रहे हैं। योजना की सफलता के लिए इन 19 पैरामीटर का पूर्ण होना आवश्यक है।

आपरेशन कायाकल्प के 19 पैरामीटर
  • शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल, बालक-बालिकाओं के लिए सुविधाजनक शौचालय, नल-जल आपूर्ति, मूत्रालय का टाइलीकरण, दिव्यांग सुलभ शौचालय, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, रसोई घर, कक्ष के फर्श का टायलीकरण, श्याम पट्ट, विद्यालयों का समुचित रंग पुताई, विद्यालय परिसर में दिव्यांग-सुलभ रैम्प, कक्ष में उपयुक्त वायरिंग एवं विद्युत उपकरण, विद्यालयों का विद्युत संयोजन, पाइप वॉटर सप्लाई, फर्नीचर डेस्क आदि।

कार्य और परिणाम
  • 'ऑपरेशन कायाकल्प' के कार्यों की प्रमाणिकता एवं पारदर्शिता के लिए प्रत्येक विद्यालय की फोटो प्रोटोकॉल के तहत जीओ टैगिंग कराई जा रही है। 'प्रेरणा' पोर्टल के माध्यम से निरंतर इन कार्यों के सन्तृप्तिकरण का रियल टाइम अनुश्रवण भी किया जा रहा है।
  • प्रदेश के सैकड़ों विद्यालयों में जबरदस्त परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इन विद्यालयों में गेट, चहारदीवारी, फर्श पर टाइल्स, खेलने के लिए पार्क और लाइब्रेरी के साथ डिजिटल क्लास रूम्स, बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, पीने के स्वच्छ पानी और हाथ धोने के लिए हैण्डवॉश सिस्टम, क्लास रूम में बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर आदि की सुविधाएं उपलब्ध करायी जा चुकी हैं।
  • 19 आधारभूत सुविधाओं का विकास कर बड़े पैमाने पर प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों को 5 स्टार श्रेणी युक्त बनाकर उन्हें आदर्श विद्यालय एवं ग्राम सभा के सबसे आदर्श भवन के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। इस क्रम में दिव्यांग सुलभता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UPPSC, UPSSSC, UP Police, UP Lekhpal, RO/ARO और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।