उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल | uttar pradesh ke paryatan sthal

उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल

गंगा-यमुना की अविरल धाराओं से लेकर अवध की नज़ाकत और ब्रज की रासलीला तक, उत्तर प्रदेश का हर कोना अपनी एक अलग गूंज सुनाता है। एक तरफ जहाँ ताजमहल का सफेद संगमरमर प्रेम की अमर दास्तान बयान करता है, वहीं काशी के घाटों पर जीवन और मोक्ष का असली सार समझ आता है। रामलला की पावन जन्मभूमि अयोध्या के नव्य-भव्य स्वरूप से लेकर भगवान बुद्ध की तपोस्थली सारनाथ और कुशीनगर तक, यह राज्य आध्यात्मिक शांति और वैभवशाली इतिहास का अनूठा संगम है।
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इस विस्तृत सफरनामे में हम आपको उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों, यूनेस्को विश्व धरोहरों और रोमांचक वन्यजीव अभ्यारण्यों की एक प्रामाणिक और यादगार यात्रा पर ले जाएंगे।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन परिपथ (Circuits)

रामायण सर्किट
बौद्ध सर्किट
जैन सर्किट
आध्यात्मिक सर्किट
हेरिटेज सर्किट

प्रमुख शहर एवं उनके आकर्षण

अयोध्या

  • राम जन्मभूमि (नव्य-भव्य राम मंदिर)
  • हनुमान गढ़ी, कनक भवन, देवकली मंदिर
  • राम की पैड़ी, गुप्तारघाट, नागेश्वरनाथ
  • गुलाबबाड़ी (शुजाउद्दौला का मकबरा)

आगरा

  • ताजमहल UNESCO (1983)
  • आगरा का किला UNESCO (1983)
  • फतेहपुर सीकरी UNESCO (1986)
  • सिकंदरा (अकबर का मकबरा), एत्मादुद्दौला

वाराणसी PRASAD

  • भव्य गंगा घाट (दशाश्वमेध, अस्सी, मणिकर्णिका)
  • काशी विश्वनाथ मंदिर, भारत माता मंदिर
  • सारनाथ (बौद्ध स्थल - धमेख व चौखंडी स्तूप)
  • रामनगर का किला, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय

मथुरा PRASAD

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि, द्वारिकाधीश मंदिर
  • बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर
  • वृंदावन, नंदगाँव, गोवर्धन, बरसाना (लट्ठमार होली)
  • कुसुम सरोवर, विश्राम घाट, केशी घाट

प्रयागराज

  • त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना, सरस्वती)
  • कुंभ मेला (प्रत्येक 12 वर्ष) अमूर्त धरोहर
  • इलाहाबाद का किला, अशोक स्तम्भ
  • आनंद भवन, भारद्वाज आश्रम, अक्षयवट

लखनऊ

  • बड़ा व छोटा इमामबाड़ा, रूमी दरवाजा
  • रेजीडेंसी, छतर मंजिल, मोती महल
  • 1857 मेमोरियल संग्रहालय, प्राणी उद्यान
  • डॉ. अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल

पर्यटन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश बेहद समृद्ध राज्य है। बुद्ध सर्किट का केन्द्र यहीं है। सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु तथा श्रावस्ती में प्रतिवर्ष लाखों देशी-विदेशी बौद्ध पर्यटक पहुंचते हैं। जैन पर्यटन स्थलों में भी उत्तर प्रदेश का अहम स्थान है। मथुरा, पावा (फाजिलनगर, कुशीनगर) तथा अयोध्या इसके महत्वपूर्ण केन्द्र हैं।
  • आगरा फतेहपुर सीकरी और लखनऊ में स्थित मुगल स्थापत्य को नजदीक से देखने-समझने के लिए पूरे वर्ष पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। दुनिया में शायद ही कोई व्यक्ति है जो ताजमहल से रूबरू न होना चाहता हो।
  • उत्तर प्रदेश में 'आध्यात्मिक पर्यटन' (Spiritual tourism) की अपार संभावनाएं हैं। रामायण सर्किट यहां बेहद प्रसिद्ध है। पुरूषोत्तम राम की जन्मस्थली 'अयोध्या' पर्यटन का बड़ा केन्द्र बनकर उभरा है। यहां विकास और अवसंरचना के काम तेजी से हो रहे हैं। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया आरम्भ होने के साथ ही इसका आकर्षण दुनिया भर में बढ़ गया है। श्रीराम ने अपने वनवास का सर्वाधिक समय चित्रकूट में व्यतीत किया। यहां पर्यटन सम्बन्धी सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है।
  • उत्तर प्रदेश में आध्यात्मिक पर्यटन के महत्व को प्रयागराज कुंभ से समझा जा सकता है। यहां बीते वर्ष कुंभ में 48 दिनों में 24 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। स्वच्छता और सुरक्षा में कुंभ ने मानक स्थापित किए, जिसे यूनेस्को समेत समूची दुनिया ने सराहा।
पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश शासन ने अनेक सर्किट (परिपथ) चिन्हित किए हैं। इनमें रामायण सर्किट, महाभारत सर्किट, बृज सर्किट, शक्तिपीठ सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट, जैन सर्किट, बौद्ध सर्किट आदि प्रमुख हैं।
राज्य में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य के अनेक स्थान मौजूद हैं। वन्य जीव आदि से जुड़े अनेक स्थल प्रदेश में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं।
'विविधतापूर्ण पर्यटन आकर्षण' से समृद्ध होने तथा पर्यटकों को उपलब्ध करायी जा रही सुविधाओं के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश देश-विदेश में महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

उत्तर प्रदेश में पर्यटन सर्किट

सर्किट क्षेत्र
रामायण सर्किट अयोध्या, चित्रकूट एवं श्रृंगवेरपुर
बुद्धिस्ट सर्किट कुशीनगर, कपिलवस्तु एवं श्रावस्ती
स्पिरिचुअल सर्किट-1 आहर, अलीगढ़, कासगंज, उन्नाव, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, मिर्जापुर, गोरखपुर, डुमरियागंज, बस्ती, बाराबंकी, आजमगढ़, कैराना, बागपत एवं शाहजहांपुर
स्पिरिचुअल सर्किट-2 बिजनौर, मेरठ, कानपुर, कानपुर देहात, बाँदा, गाजीपुर, सलेमपुर, घोसी, बलिया, अम्बेडकर नगर, अलीगढ़, फतेहपुर, देवरिया, महोबा, सोनभद्र, चन्दौली, मिश्रिख एवं भदोही
स्पिरिचुअल सर्किट-3 गोरखपुर, देवीपाटन, डुमरियागंज
स्पिरिचुअल सर्किट-4 जेवर-दादरी-सिकन्दराबाद-नोएडा-खुर्जा-बांदा
हेरिटेज सर्किट कालिंजर किला (बांदा), मगहर धाम (संत कबीर नगर), चौरीचौरा शहीद स्थल (गोरखपुर), महावर स्थल (घोसी) एवं शहीद स्मारक (मेरठ)

उत्तर प्रदेश में प्रमुख पर्यटन स्थल

जनपद का नाम महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल
1. मथुरा कृष्ण जन्मभूमि, द्वारिकाधीश मंदिर, विश्राम घाट, केशी घाट, बांके बिहारी मंदिर, गोविन्द देव मंदिर, मदन मोहन मंदिर, रंगनाथ जी मंदिर, इस्कॉन मंदिर, कुसुम सरोवर, मानसी गंगा, राधाकुण्ड संकेत, हरिदेव जी मंदिर, दानघाटी, ब्रह्माण्ड घाट, दाऊजी का मंदिर, प्रेम मंदिर।
2. आगरा ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, लाल किला, जोधाबाई का महल, सिकंदरा, जामा मस्जिद, एतमादुद्दौला का मकबरा, चीनी का रोजा, मेहताब बाग, दयाल बाग।
3. लखनऊ घंटाघर, छोटा इमामबाड़ा, जामा मस्जिद, बड़ा इमामबाड़ा, बनारसी बाग, मोती महल, रूमी दरवाजा, रेजीडेंसी संग्रहालय, कालका बिन्दादीन ड्योढ़ी, लाल बारादरी, बटलर पैलेस, लाल पुल, छतर मंजिल, अकबरी दरवाजा, शेर दरवाजा।
4. वाराणसी काशी विश्वनाथ मंदिर, भारत माता मंदिर, दूध का कर्ज मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, साक्षी गणेश मंदिर, काशी विशालाक्षी मंदिर, केदारेश्वर मंदिर, विष्णु, चरणपादुका, भैरव मंदिर, सीता मंदिर, मारकण्डेय महादेव मंदिर, विंध्याचल मंदिर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, भारत कला भवन वाराणसी, धूतपापेश्वर मंदिर।
5. प्रयागराज संगम, सुरावली घाट, अल्फ्रेड पार्क, (इलाहाबाद) इलाहाबाद का किला, कड़ा, अशोक स्तम्भ, स्वराज भवन, आनंद भवन, गढ़वा, हनुमान मंदिर, संग्रहालय।
6. जौनपुर अटाला मस्जिद, जामा मस्जिद, झंझरी मस्जिद, लाल दरवाजा मस्जिद।
7. गाज़ियाबाद गढ़मुक्तेश्वर महादेव का मंदिर, गंगा मंदिर, मीराबाई की रेती, ब्रज घाट, झारखण्डेश्वर महादेव, कल्याणेश्वर महादेव मंदिर।
8. चित्रकूट रामघाट, कामतानाथ, सती अनुसुइया, राम दरबार, तुलसी जी की जन्मभूमि, हनुमान धारा।
9. मेरठ पांडव का किला, शहीद स्मारक, राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय, शाहपीर मकबरा, सेन्ट जॉन चर्च, नंगली तीर्थ, सूरज कुंड, जामा मस्जिद, आबू मकबरा, विक्टोरिया पार्क, कालीपलटन मंदिर, पंजाब रेजिमेन्ट, गुरुद्वारा कम्पनी, कम्पनी बाग, माल रोड, शहीद स्मारक, माल रोड, बीस शिलालेख, जैन श्वेताम्बर मंदिर, हस्तिनापुर तीर्थ, रोमन कैथोलिक चर्च, द्रौपदी की रसोई, हस्तिनापुर अभयारण्य, सरधना, बेगम का महल।
10. सारनाथ सारनाथ संग्रहालय, अशोक स्तम्भ, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंध कुटी विहार, चौखंडी स्तूप, डीयर पार्क, धमेख स्तूप।
11. बहराइच चित्तूर झील, जंगलीनाथ मंदिर, सीता दोहरी झील, कैलाशपुरी बांध, कतरनिया घाट एवं अभयारण्य।
12. सीतापुर नैमिषारण्य, हरगांव, ललिता देवी मंदिर, बिसवां, बाड़ी।
13. गोण्डा जमदाग्निकुण्ड, दुखहरन नाथ मंदिर, पृथ्वीनाथ मंदिर।
14. हरदोई हरदोई पर्यटन, साण्डी पक्षी अभयारण्य, श्रवण देवी मंदिर, सर्वोदय आश्रम टडियावां, विक्टोरिया भवन, सकहा शंकर मंदिर, गांधी भवन, हत्याहरण तीर्थ, सुनासीरनाथ मल्लावां, मां कालिका देवी मंदिर, रायपुर कोथावां।
15. कौशांबी शीतला माता मंदिर
16. बुलन्दशहर बेलोन मंदिर, कर्णवास, अहर, सिंकदराबाद।
17. कानपुर राधाकृष्ण मंदिर, शासकीय संग्रहालय, फूलबाग।
18. अयोध्या गुलाबबाड़ी, कलकत्ता किला, गुप्तारघाट, (फैजाबाद) ऋषभदेव राजघाट उद्यान, अयोध्या, राममंदिर।
19. मिर्जापुर कंतित शरीफ दरगाह, विंध्याचल मंदिर, विंध्याचल काली मंदिर, अष्टभुजा त्रिकोण यात्रा, सीता कुंड, मोतिया तालाब, टांडा फाल, विंढमफाल, लोअर खजुरी डैम, निर्वाण स्तूप, परिनिर्वाण मंदिर।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल इस प्रकार हैं -

आगरा

आगरा में मुगल स्थापत्य के बेहतरीन नमूने मौजूद हैं। यहां देशी और विदेशी दोनों तरह के पर्यटकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय स्थल विद्यमान हैं। ताजमहल, लालकिला, फतेहपुर सीकरी, अकबर का मकबरा, एत्मादुद्दौला का मकबरा और दयालबाग आगरा के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। ताजमहल, लाल किला और फतेहपुर सीकरी यूनेस्को द्वारा चिन्हित विश्व धरोहर स्थल हैं। ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में से एक है। सफेद संगमरमर से बना यह मकबरा प्रेम की निशानी के रूप में विश्व भर में प्रसिद्ध है।
  • अकबर द्वारा निर्मित आगरा का किला ताजमहल के पास में स्थित है। इसके अंदर कई खूबसूरत इमारतें मौजूद हैं। मुसम्मन बुर्ज ऐसी ही एक इमारत है, जहां से शाहजहां कैद में रहते हुए अपने आखिरी दिनों में खिड़कियों से ताजमहल को निहारा करता था।
  • फतेहपुर सीकरी एक दुर्ग महल है जो आगरा से 40 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। इसके अंदर अनेक इमारतें अलग-अलग शैलियों में निर्मित की गयी हैं। बुलंद दरवाज़ा, जोधा महल, पंच महल और सलीम चिश्ती का मकबरा उनमें प्रमुख हैं।
सिकंदरा में बना हुआ अकबर का मकबरा एक पिरामिड के आकार की इमारत है। इसकी योजना अकबर ने बनाई थी और इसका निर्माण जहांगीर ने पूरा कराया। एत्मादुद्दौला का मकबरा सफेद संगमरमर से बनी पहली मुगल इमारत थी। इसका निर्माण नूरजहां ने कराया और इसमें पहली बार पित्रा-दूरा तकनीक का उपयोग हुआ है।

लखनऊ

लखनऊ की इमारतें अवध के नवाबों के सौंदर्य प्रेम और विलासिता की साक्षी हैं। यहां बड़ा इमामबाड़ा, रूमी दरवाजा, आसिफी मस्जिद, दौलतखाना, बिबियापुर कोठी, रेजीडेन्सी और चौक बाजार कुछ ऐसी प्रसिद्ध इमारतें हैं, जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश के पर्यटक आते हैं। लखनऊ में गाज़ीउद्दीन हैदर द्वारा बनवायी गयी शाहनजफ, मोती महल, सआदत अली का मकबरा और खुर्शीदजादी भी मौजूद है। हुसैनाबाद की इमारतें जैसे छोटा इमामबाड़ा, बड़ी जामा मस्जिद और बारादरी भी अनेक पर्यटकों को आकर्षित करती है। नसीरूद्दीन हैदर द्वारा निर्मित छतर मंजिल लखनऊ के पर्यटन स्थलों में प्रमुख स्थान रखती है।
वर्ष 1857 के संघर्ष का एक प्रमुख केन्द्र होने के कारण लखनऊ में स्वतंत्रता संघर्ष की निशानियां चारों तरफ मौजूद हैं। 1857 मेमोरियल संग्रहालय, राज्य संग्रहालय, लोक कला संग्रहालय, प्राणी उद्यान और वनस्पति उद्यान यहां मौजूद हैं।
लखनऊ में अनेक नवीन आकर्षक स्थल हाल के वर्षों में जुड़े हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया पार्क, जनेश्वर मिश्रा पार्क, डॉ. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, डॉ. कांशीराम स्मारक स्थल और बौद्ध विहार शांतिवन इनमें प्रमुख हैं।

प्रयागराज

प्रयागराज (इलाहाबाद) एक प्राचीन नगर और भारत व उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। तीन पवित्र नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर स्थित होने के कारण इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
प्रयाग में प्रत्येक 12 वर्षों में कुंभ का आयोजन किया जाता है, जहां सबसे विशाल धार्मिक एकत्रीकरण होता है। इसी प्रकार प्रत्येक छः वर्षों पर यहां अर्द्ध कुंभ मेला आयोजित होता है। माघ मेला प्रत्येक वर्ष में आयोजित होता है। इस उत्सव की विशालता और प्राचीन सांस्कृतिक रीतियां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं। त्रिवेणी संगम, भारद्वाज आश्रम, नाग वासुकी मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, अलोपी देवी मंदिर, दुर्वासा आश्रम, ललिता देवी शक्तिपीठ, वेणीमाधव मंदिर, कृष्ण प्रणाली भजन मंदिर और कमौरी नाथ मंदिर प्रयागराज के प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल हैं। महाभारत से संबंधित लाक्षागृह भी यहां स्थित है।
प्रयागराज में ऐतिहासिक महत्व के अनेक स्थान हैं। अकबर ने 1583 में गंगा के किनारे किला बनवाया। किले के अंदर स्थापित अशोक स्तम्भ पर समुद्रगुप्त और जहांगीर के अभिलेख मौजूद हैं। सरस्वती कूप, पातालपुरी मंदिर और अक्षयवट दुर्ग के अंदर के अन्य आकर्षण हैं। एक मुगल शहजादे का मकबरा खुसरो बाग में मौजूद है। गढ़वा पुरातत्व के महत्व का स्थान है। आनंद भवन, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, चंद्रशेखर

उत्तर प्रदेश में यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल

उत्तर प्रदेश में यूनेस्को के कुल तीन विश्व धरोहर स्थल हैं, जो सूची में सम्मिलित होने के वर्ष के साथ इस प्रकार हैं-
  1. लाल किला, आगरा (1983)
  2. ताजमहल, आगरा (1983)
  3. फतेहपुर सीकरी (1986)
इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश के कुछ अन्य स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर की संभावित सूची के अंतर्गत विचाराधीन हैं।

ये स्थल हैं-
  1. सारनाथ के प्राचीन बौद्ध स्थल
  2. भारत में सिल्क रोड के स्थल (कुशीनगर के बौद्ध भग्नावशेष, श्रावस्ती, कौशाम्बी और अहिच्छत्र)
  3. साड़ी बुनने के प्रतिष्ठित स्थल (बनारस और मुबारकपुर)
  4. नमक सत्याग्रह के स्थान (चौरीचौरा और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय)
  5. उत्तरपथ/बादशाही सड़क/जीटी रोड के स्थल (बिजनौर, मेरठ, बरेली, लखनऊ, अयोध्या, सारनाथ, प्रयाग, लखीमपुर, कुशीनगर, श्रावस्ती आदि।)

यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची

उत्तर प्रदेश की निम्न सांस्कृतिक प्रथाएं सूची में सम्मिलित हैं -
  1. रामलीला (2008)
  2. कुंभ मेला (2017)
  3. योग (2016 में सम्मिलित)
  4. वैदिक मंत्रपाठ की प्रथा (2008 में सम्मिलित)

राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर की प्रारूप सूची

केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय ने राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर की सूची का एक प्रारूप तैयार किया है। इसके द्वारा भारतीय संस्कृति की विविधता को सांस्कृतिक धरोहर के आधार पर पहचान देने की कोशिश की गई है। उत्तर प्रदेश के निम्न सांस्कृतिक प्रथाओं को इस सूची में स्थान मिला है-
  1. नौटंकी
  2. चाहर बैत : मुस्लिम समुदाय द्वारा गायी जाने वाली कविता की प्रथा (चांदपुर, मलीहाबाद, अमरोहा)
  3. रामलीला
  4. कुंभ मेला
आजाद पार्क (अल्फ्रेड पार्क), मदन मोहन मालवीय पार्क, (मिंटो पार्क), उच्च न्यायालय भवन, स्वतंत्रता संघर्ष और अंग्रेज इतिहास के स्मारक हैं।
यहां नेहरू तारामण्डल भूगोलविज्ञान प्रेमियों को आकर्षित करता है। नया यमुना पुल प्रयागराज का सबसे बड़ा आकर्षण है।

वाराणसी

यह विश्व के प्राचीनतम और पवित्रतम् नगरों में से एक है। प्राचीन भारतीय संस्कृति का केंद्र होने के कारण अनेक विदेशी पर्यटक उस संस्कृति की झलक पाने के लिए बनारस भ्रमण करते हैं। भव्य गंगा घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर, सारनाथ, रामनगर का किला और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय बनारस के प्रमुख आकर्षण हैं। दुर्गा मंदिर, संकट मोचन, तुलसी मानस मंदिर, नवीन विश्वनाथ मंदिर आदि प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। दुर्गा कुंड, पुष्कर कुंड, पिशाचमोचन, कपिलधारा, लोलार्क, मानसरोवर और मंदाकिनी धार्मिक महत्व के सरोवर हैं। घाटों में अस्सी, दशाश्वमेध, मणिकर्णिका, हरिश्चन्द्र और अहिल्याबाई घाट पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध हैं।
 
सारनाथ एक पवित्र बौद्ध स्थल है जो बड़ी संख्या में बौद्ध पर्यटकों को आकर्षित करता है। सारनाथ के डियर पार्क की पहचान बुद्ध के प्रथम उपदेश अर्थात् धर्मचक्रप्रवर्तन के स्थान के रूप में की गई है। धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप, अशोक निर्मित सिंहशीर्ष, थाई मंदिर और तिब्बती मंदिर सारनाथ के प्रमुख आकर्षण हैं। बुद्ध पूर्णिमा के समय सारनाथ में भव्य आयोजन किए जाते हैं।

चार जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थली होने के कारण वाराणसी को जैन तीर्थ भी कहा जाता है। जैन मत के अनुसार वाराणसी (काशी) सुपार्श्वनाथ, चंद्रप्रभु, श्रेयांशनाथ और पार्श्वनाथ, जो कि क्रमशः सातवें, आठवें, ग्यारहवें और तेइसवें तीर्थंकर, हैं, की जन्मस्थली है। सारनाथ को भगवान श्रेयांशनाथ की जन्मस्थली के रूप में पहचाना जाता है।

मथुरा

मथुरा भारत के पवित्र शहरों में से एक है। इसे पवित्र 'सप्तपुरियों' में से एक माना जाता है। यह श्रीकृष्ण का जन्मस्थान है। जन्माष्टमी के समय रासलीला और बरसाने की लट्ठमार होली का आयोजन देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक मथुरा पहुंचते हैं। वृंदावन, नंदगाँव, गोवर्धन, बरसाना और दाऊजी मथुरा के पवित्र तीर्थ स्थान हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि, केशवदेव मंदिर, दाऊजी मंदिर, प्रेम मंदिर, बांकेबिहारी मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, वृंदावन चन्द्रोदय मंदिर, इस्कॉन मंदिर, बिरला मंदिर, विश्राम घाट आदि मथुरा के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।
मथुरा को भारत सरकार की 'हृदय योजना' के अंतर्गत विरासत शहर के रूप में विकसित करने के लिए चयनित किया गया है।

अयोध्या

अयोध्या पुरूषोत्तम राम का जन्मस्थान है। राम की पैड़ी, नागेश्वरनाथ मंदिर, देवकली मंदिर, हनुमान गढ़ी, कनक भवन आदि अयोध्या के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। अयोध्या को पांच जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थली माना जाता है। अयोध्या में एक प्रसिद्ध जैन श्वेताम्बर मंदिर स्थित है।
अवध के नवाब शुजाउद्दौला का मकबरा गुलाब बाड़ी यहां स्थित है। यह देश का एकमात्र मकबरा है, जहां अशोक स्तम्भ लगाया गया है। यहां बहूबेगम मकबरा भी स्थित है, जिसका निर्माण नवाब शुजाउद्दौला ने अपनी स्वर्गीय बेगम की याद में कराया था।
  • अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि पर विगत 22 जनवरी, 2024 को राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गयी। यहां रामलला की 51 इंच ऊंची बालस्वरूप मूर्ति स्थापित की गयी है। मूर्ति का निर्माण श्याम शिला से हुआ है।
  • कमल दल पर खड़ी मूर्ति के हाथ में तीर और धनुष है। मूर्ति के ऊपर स्वास्तिक, ॐ, चक्र, गदा और सूर्य देव विराजमान हैं। मुख मण्डल के चारो तरफ आभा विद्यमान है।
  • राम मंदिर की स्थापना के साथ ही अयोध्या आने वाले पर्यटकों की संख्या में 20 गुणा से अधिक वृद्धि हुई है।

उत्तर प्रदेश में बौद्ध पर्यटन

चार सर्वाधिक प्रमुख बौद्ध स्थलों में से दो कुशीनगर एवं सारनाथ उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। इसके अतिरिक्त श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कौशाम्बी और संकिसा उत्तर प्रदेश में स्थित अन्य प्रमुख बौद्ध स्थल हैं। यह स्थान अपनी विरासत के लिए बौद्धों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। मुख्य भारतीय शहरों से यहां तक सरलता से पहुंचा जा सकता है।
बौद्ध पर्यटन का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि दुनिया में लगभग 450 मिलियन बौद्ध श्रद्धालु हैं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में बौद्ध इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग प्रतिवर्ष यहां पहुंचते हैं। कई बौद्ध देशों के समीप होना भी भारत के लिए एक लाभप्रद स्थिति है।
इसके बावजूद सीमित आधारभूत संरचना, गैर बौद्धों के बीच सीमित पहचान, सांस्कृतिक विरासत का नीरस व्याख्यान और अन्य पर्यटकीय गतिविधियों के अभाव जैसे कारणों से इन स्थानों की पर्यटन क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है।

सोनभद्र

सोनभद्र प्रकृति प्रेमियों के लिए एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। लखनिया दरी, कैमूर वन्यजीव अभयारण्य और साल्खन जीवाश्म उद्यान (Salkhan Fossil Park) सोनभद्र के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।
सोनभद्र के बड़ागांव नामक गांव में एक अन्य जीवाश्म उद्यान की खोज की गई है।
प्राचीन शैल चित्र, सोनभद्र के प्रमुख आकर्षण हैं। यह शैलचित्र मध्यपाषाण एवं ताम्रपाषाण युग के हैं। पंचमुखी शैलाश्रय कौवा खोह शैलाश्रय (चुर्क के समीप) लिखनिया शैलाश्रय और लखमा गुफाएं शैलचित्रों के प्रमुख स्थान हैं।
विजयगढ़ और नौगढ़ के ऐतिहासिक किले भी यहां स्थित हैं। ज्वालामुखी शक्तिपीठ, शिवद्वार मंदिर और रेणुकेश्वर मंदिर यहां के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं।

मिर्जापुर

मिर्जापुर, शक्ति साधना के लिए प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ है। यहां विंध्याचल स्थित विन्ध्यवासिनी देवी मंदिर परिसर को श्रद्धालुओं द्वारा अत्यंत पवित्र माना जाता है। अष्टभुजा देवी मंदिर, काली खोह मंदिर, सीताकुण्ड, लाल भैरव मंदिर, तारकेश्वर महादेव, महा त्रिकोण, गुरूद्वारा और रामेश्वर अन्य धार्मिक आकर्षण हैं।
मिर्जापुर प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। टांडा जलप्रपात, विडहम जलप्रपात और मोती तालाब यहां हैं।
प्राचीन चुनार का किला मिर्जापुर में प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है। गंगा से लगभग 85 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह किला स्थापत्य और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत मिश्रण है। यह दुर्ग मध्यकाल में अनेक युद्धों का साक्षी रहा है। सोनवा मंडप और भृतहरि मंदिर किले के भीतर स्थित हैं।

प्रसाद योजना

प्रसाद अर्थात् 'तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्धन मुहिम' (Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual Augmentation Drive - PRASAD) योजना की शुरुआत वर्ष 2014-15 में की गयी थी। इसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन अनुभव को समृद्ध करते हुए तीर्थस्थलों की पहचान और विकास को प्रोत्साहित करना है। इसके अतिरिक्त स्थानीय कला-संस्कृति, हस्तकला तथा व्यंजन आदि को बढ़ावा देकर पर्यटकों को आकर्षित करना इस योजना का भाग है। तीर्थ स्थलों के विकास के लिए समुदाय पर आधारित विकास (Community Based Development) और प्रो-पुअर (Pro-Poor) पर्यटन की संकल्पना को आगे बढ़ाना योजना का उद्देश्य है। योजना के अंतर्गत देश के पांच पर्यटक स्थलों का चयन किया गया है, जिनमें दो उत्तर प्रदेश में हैं-
  1. वाराणसी
  2. मथुरा

चुनार की मिट्टी से बनी वस्तुओं की पर्यटकों के बीच बेहद मांग रहती है।

जौनपुर

जौनपुर में शर्की स्थापत्य की कई खूबसूरत इमारतें हैं। यहां स्थित अटाला, झंझीरी, लाल दरवाजा और जामा मस्जिद अपने अनुपम स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध हैं। फिरोजशाह द्वारा निर्मित शाही किला और अकबर निर्मित शाही पुल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। शीतला माता चौकिया नामक प्राचीन मंदिर भी यहां स्थित है।

झांसी

झांसी एक ऐतिहासिक नगर है। यह ओरछा के राजा वीर सिंह देव द्वारा निर्मित झांसी के किले के लिए प्रसिद्ध है। कलाकृतियों से सुसज्जित रानी लक्ष्मीबाई का महल यहां स्थित है। बेतवा नदी पर बना पारीछा बांध अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यह वाटर स्पोर्ट्स के लिए एक उपयुक्त स्थान है।

चित्रकूट

चित्रकूट अपने हिन्दू तीर्थ स्थलों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। पुरूषोत्तम श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान चित्रकूट में सर्वाधिक समय निवास किया था। यह मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित है। गुप्त गोदावरी, कामदगिरी पर्वत, भरतकूप, गणेशबाग, सती अनुसुइया आश्रम, राजापुर, धारकुंडी, जानकी कुंड, रामघाट, भरत मिलाप मंदिर, चित्रकूट जलप्रपात, हनुमान धारा, स्फटिक शिला आदि चित्रकूट के प्रमुख आकर्षण हैं। यहां स्थित राजापुर गोस्वामी तुलसीदास का जन्म स्थान है।

बांदा

बांदा, बुंदेलखण्ड स्थित एक प्राचीन नगर है। यह अपने प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक स्थानों के लिए जाना जाता है। अजेय कालिंजर का किला बांदा के इतिहास का साक्षी है। इसे चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित करवाया गया था। भूरागढ़ का किला, बामदेव मंदिर, नवाब टैंक और महेश्वरी देवी मंदिर बांदा के अन्य प्रसिद्ध आकर्षण हैं। भूरागढ़ किला 1857 के विद्रोह का एक प्रमुख स्थल रहा है। अली बहादुर द्वितीय के नेतृत्व में लगभग 3000 विद्रोहियों ने यहां अपने प्राणों का बलिदान दिया था।

भव्य अयोध्या, दिव्य अयोध्या

धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में अयोध्या धाम को वैश्विक पटल पर स्थापित करने का उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किया जा रहा है, जिसमें अच्छी सफलता भी प्राप्त हुई है।
अयोध्या के नव्य-भव्य स्वरूप को मूर्त रूप देने के लिए ₹4,115.56 करोड़ की लागत से 50 मेगा प्रोजेक्ट्स को पूर्ण कर लिया गया है, जिससे अयोध्या अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन एवं धार्मिक स्थल के रूप में दिखने लगी है। प्रधानमंत्री द्वारा 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या के मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा किये जाने के पश्चात् यहां प्रतिदिन पहुँचने वाले पर्यटकों की संख्या लाख से ऊपर पहुँच गयी है।
अयोध्या में ₹1,462.97 करोड़ की लागत से बने महर्षि वाल्मीकी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा एवं ₹241 करोड़ से निर्मित अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का लोकार्पण पीएम मोदी द्वारा 30 दिसम्बर, 2023 को किया गया।
सआदतगंज से नयाघाट तक स्पाइन रोड का ₹844.93 करोड़ की लागत से 'राम पथ' के रूप में विकास किया गया है।
राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के निर्माण कार्य को ₹245.64 करोड़, पोल लाइनों को भूमिगत किये जाने हेतु ₹167 करोड़, नया घाट पर लता मंगेशकर चौक के विकास के लिए ₹75.26 करोड़, पंचकोसी परिक्रमा मार्ग स्थित बड़ी बुआ रेलवे क्रॉसिंग पर रेल ओवर ब्रिज के निर्माण को ₹74.24 करोड़ तथा भक्ति पथ के निर्माण को ₹68.04 करोड़ की लागत से पूर्ण किया जा चुका है।
अयोध्या में एनएच-27 बाईपास महोबरा बाजार होते हुए टेढ़ी बाजार राम जन्म भूमि तक ₹44.98 करोड़ की लागत से फोरलेन मार्ग का निर्माण पूरा कर लिया गया है।
₹14.87 करोड़ की लागत से सूर्य कुंड में जन सुविधाओं का विकास कर अयोध्या में पर्यटन सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए तमाम सुविधाओं का प्रसार किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के बजट 2024-25 में अयोध्या के सर्वांगीण विकास हेतु ₹100 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

उत्तर प्रदेश में पुरातात्विक महत्व के स्थान

स्थान विवरण
अतरंजीखेड़ा (एटा) यहां से गैरिक मृदभांड संस्कृति से लेकर गुप्तकाल तक की वस्तुएं अलग-अलग स्थलों से प्राप्त हुई हैं। लौह उपयोग, चावल के उत्पादन और वैदिक काल से संबद्ध पशु हड्डियों के साक्ष्य यहां से प्राप्त हुए हैं। ह्वेनसांग ने अतरंजीखेड़ा को 'पिलोशन' कहा है। यह एक बौद्ध तीर्थ है।
अहिच्छत्र (बरेली) मृदभांड संस्कृति से लेकर गुप्त काल तक के साक्ष्य यहां प्राप्त हुए हैं। यह पांचाल महाजनपद की राजधानी थी। इसका विवरण महाभारत में भी प्राप्त होता है। अशोक ने यहां एक स्तूप का निर्माण कराया था। यहां कुषाणों के सिक्के प्राप्त हुए हैं। जैन ग्रंथों के अनुसार यह तीर्थंकर पार्श्वनाथ के कैवल्य प्राप्त करने का स्थान है।
आलमगीरपुर (मेरठ) यह हड़प्पा सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल है। यहां से कपास उत्पादन के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। मिट्टी के बर्तन, पकी मिट्टी से बनी वस्तुएं, कीमती पत्थरों, तांबे और कांसे और हड्डियों के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। एक टेराकोटा निर्मित कूबड़युक्त बैल की मूर्ति यहां प्राप्त हुई हैं।
हस्तिनापुर (मेरठ) हस्तिनापुर को महाभारत में कुरू की राजधानी के रूप में वर्णित किया गया है। तीर, भालों के शीर्ष, कुल्हाड़ी, चाकू समेत 135 लौह निर्मित वस्तुएं प्राप्त हुई हैं।
गढ़वा (प्रयागराज) कुमारगुप्त के दो शिलालेख और स्कन्दगुप्त का एक अभिलेख यहां प्राप्त हुआ है। अभिलेखों में राजाओं द्वारा किये गये दस कार्यों का वर्णन है।
बांसखेड़ा
(शाहजहांपुर)
सम्राट हर्ष का 628 ईसवी का ताम्रपत्र अभिलेख यहां प्राप्त हुआ है। इससे हर्ष के वंश, प्रशासन, कर-व्यवस्था और दानकार्यों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्राप्त होती है।
राजघाट (वाराणसी) यहां उत्तरी काले मृदभांड संस्कृति के भग्नावशेष प्राप्त हुए हैं। यह काशी महाजनपद की राजधानी थी। यह नगर अपने विशिष्ट शिल्प और समृद्ध व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। पतंजलि, ह्वेनसांग और अलबरूनी ने अपनी पुस्तकों में इसका उल्लेख किया है।
सोहगौरा (गोरखपुर) यहां चन्द्रगुप्त मौर्य का अभिलेख प्राप्त हुआ है, जिसे भारत का प्राचीनतम अभिलेख माना जाता है।
हुलास (सहारनपुर) उत्तरी काले ओपदार मृदभांड संस्कृति, शुंग काल और कुषाण काल के साक्ष्य यहां से प्राप्त हुए हैं। यह स्थान हड़प्पा सभ्यता से भी संबद्ध है।
हुलास खेरा (लखनऊ) यहां कुषाण काल से गुप्त काल तक के साक्ष्य मिले हैं। कुषाण सिक्के, कार्तिकेय की स्वर्ण मूर्ति और नगरीय सभ्यता के साक्ष्य मौजूद हैं। गुप्त काल के एक दुर्ग के भग्नावशेष भी प्राप्त हुए हैं।
देवगढ़ (ललितपुर) देवगढ़ से गुप्त स्थापत्य और मूर्तिकला के साक्ष्य मिले हैं। भारत का प्रथम शिखरयुक्त मंदिर यहां विद्यमान है। दशावतार नामक इस मंदिर में विष्णु को शेषशय्या पर लेटा दिखाया गया है।
भीतरगांव (कानपुर) यहां गुप्त शासनकालीन ईंटों से बने एक मंदिर के अवशेष प्राप्त हुए हैं। मंदिर की छत पिरामिड के आकार की है। बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं की मूर्तियों को उकेरा गया है।
सरायनाहर राय
(प्रतापगढ़)
यहां 8000 ई. पूर्व की मानव बस्ती के साक्ष्य मिले हैं।
सालागढ़, कपिलवस्तु
(सिद्धार्थनगर)
पिपरहवा स्तूप के पास कुषाण कालीन विहार के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। विहार के भीतर एक छोटे स्तूप के अवशेष मिले हैं।
गनवरिया, कपिलवस्तु
(सिद्धार्थनगर)
पिपरहवा स्तूप के पास भव्य द्वार से युक्त दो विशाल पकी ईंटों से निर्मित भवन प्राप्त हुए हैं। बड़े भवन में 25 और छोटे भवन में 20 कमरे हैं। इन भवनों को कपिलवस्तु के राजाओं अर्थात् शाक्य शासक शुद्धोदन और उनके पूर्ववर्ती राजाओं का निवास स्थान माना गया है।
सनौली (बागपत) यहां से भूमिगत कमरे और सुसज्जित पांव युक्त ताबूतों की प्राप्ति हुई है। चावल और उड़द दाल के बर्तन, मवेशियों की हड्डियां, जंगली शूकर और नेवले को मृत शरीर के साथ दफनाया गया है।

उत्तर प्रदेश के प्राचीन तीर्थ और धार्मिक स्थान

धार्मिक/तीर्थ क्षेत्र विवरण
सोरों (एटा) यह प्राचीन तीर्थ क्षेत्र है, जिसे शूकर क्षेत्र नाम से भी जाना जाता है। यहां भगवान विष्णु के तीसरे अवतार 'वाराह' का एक मंदिर है। यहां प्रतिवर्ष भगवान वाराह के सम्मान में मार्गशीर्ष मेला आयोजित किया जाता है।
गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़) यह गंगा के किनारे एक प्राचीन तीर्थ स्थान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां शिव के गणों को मुक्ति मिली थी। यहां पर मुक्तेश्वर मंदिर नामक एक प्राचीन शिव मंदिर स्थित है। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर यहां मेला लगता है।
श्रीरामपुर (फर्रुखाबाद) यहां शृंगी ऋषि को समर्पित मंदिर स्थित है। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा और दशहरा पर यहां मेला लगता है।
शृंगीवेरपुर (प्रयागराज) ऐसा माना जाता है कि श्रीराम ने वन जाते समय यहीं से गंगा को पार किया था। रामायण के अनुसार श्रीराम ने वन जाते समय यहां पर एक रात्रि विश्राम किया था।
नैमिषारण्य (सीतापुर) यह प्राचीन तीर्थ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान महर्षि दधीचि से संबंधित है। इसे 88,000 ऋषियों की तपोभूमि माना गया है। नैमिषारण्य में 30,000 तीर्थ स्थान हैं। चक्रतीर्थ, व्यास गद्दी, सुत गद्दी, ललिता देवी मंदिर, श्री हनुमान गढ़ी और मिश्रिख उनमें से महत्वपूर्ण हैं। नैमिषारण्य मंदिर के विषय में माना जाता है कि यहां भगवान विष्णु खुद प्रकट हुए थे, अर्थात् स्वयंव्यक्त। इसे 108 पवित्र वैष्णव पूजास्थलों में एक माने जाने के कारण 'दिव्यदेशम्' भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में मात्र चार दिव्यदेशम् पूजा स्थल हैं। अन्य तीन के नाम हैं- राम जन्म भूमि, कृष्ण जन्म भूमि और गोकुल।
बिठूर (कानपुर) इसे ब्रह्मावर्त तीर्थ कहते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसे महर्षि वाल्मीकि के आश्रम और लवकुश के जन्म स्थान के रूप में जाना जाता है। बिठूर 1857 संघर्ष के दौरान सर्वाधिक ज्वलंत स्थानों में से एक था।
गोला, गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी) इसे छोटी काशी भी कहते हैं। यहां पर एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है, जहां शिवलिंग को रावण द्वारा भूलवश स्थापित किया हुआ माना जाता है। यहां पर शिवलिंग गाय के कान के आकार का है।
शुक्रताल (मुजफ्फरनगर) पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान महर्षि शुकदेव और राजा परीक्षित से संबंधित है। यहां प्रत्येक महीने भागवत कथा का आयोजन किया जाता है। कार्तिक माह की पूर्णमासी और एकादशी को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
बटेश्वर (आगरा) बटेश्वर आगरा से 70 किमी. दूर स्थित एक प्राचीन मंदिरों का नगर है। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में बटेश्वर का वर्णन है। अनेक प्राचीन मंदिरों में से 41 अभी भी यहां मौजूद हैं। कई मंदिरों की दीवारें अभी भी प्राकृतिक वनस्पति रंगों से चित्रित भित्तिचित्रों से युक्त हैं। बटेश्वर को 22वें जैन तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी की जन्म स्थली माना जाता है। यहां बटेश्वर पशु मेला पिछले 400 वर्षों से लग रहा है।
काम्पिल्य (फर्रुखाबाद) काम्पिल्य जैन तीर्थंकर विमलनाथ, द्रौपदी और द्रोणाचार्य से संबंधित है। मुगलघाट, कपिल मुनि आश्रम, रामेश्वर धाम मंदिर, जैन श्वेताम्बर मंदिर और भेदकुण्ड काम्पिल्य के प्रमुख आकर्षण हैं।
संकिसा (फर्रुखाबाद) संकिसा एक बौद्ध स्थल है, जहां एक टीले के ऊपर बौद्ध अवशेष पाये गये थे। गजशीर्ष युक्त स्तम्भ और अशोक स्तूप प्रमुख हैं। ऐसा माना जाता है कि बुद्ध स्वयं यहां पर स्वर्ग से अवतरित हुए थे। यहां पर बिसारी देवी मंदिर स्थित है।
बांगरमऊ (उन्नाव) यह राजेश्वरी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जहां देवी जगदम्बा की एक अष्टधातु निर्मित मूर्ति है।
भृगु मंदिर (बलिया) यह महर्षि दरदर की तपोभूमि पर स्थित है, जो उनके गुरु महर्षि भृगु को समर्पित है। यहां पर कार्तिक पूर्णिमा पर प्रसिद्ध दादरी पशु मेला लगता है।
मगहर
(संतकबीर नगर)
संत कबीर ने मगहर में ही अपना शरीर त्याग किया था। यह कबीर पंथियों के लिए तीर्थ क्षेत्र है।

प्रदेश में पर्यावरणीय पर्यटन

सर्किट सम्मिलित वन्यजीव/प्राकृतिक स्थल विवरण
वेस्टर्न वाइल्डलाइफ सर्किट 1. अमनगढ़ टाइगर रिजर्व (बिजनौर)
2. शिवालिक (सहारनपुर)
3. हस्तिनापुर वन्य जीव अभयारण्य (मुजफ्फरनगर, बिजनौर)
4. एलीफेंट रिजर्व विहार (बिजनौर, सहारनपुर)
इस सर्किट के द्वारा शानदार बाघों, हाथियों, तेंदुओं, बारहसिंगा और लगभग 300 पक्षियों की प्रजातियों को देखने का अवसर प्राप्त होता है। गंगा के ऊपरी हिस्से में मगरमच्छ, कछुए और गंगा डॉल्फिन देखे जा सकते हैं।
तराई टाइगर सर्किट 1. दुधवा नेशनल पार्क (लखीमपुर खीरी)
2. पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीलीभीत)
3. कतरनियाघाट वन्य जीव अभयारण्य (बहराइच)
4. किशनपुर वन्य जीव अभयारण्य (लखीमपुर खीरी)
तराई टाइगर सर्किट के अंतर्गत बाघ, गैंडे, हाथी, स्वैम्प हिरण और हार्नबिल, बंगाल फ्लोरिकन, रेड जंगल फाउल आदि 450 से अधिक पक्षियों के आवास स्थित हैं। यहां का परिदृश्य दलदलों, घास के मैदान और घने जंगलों से भरा हुआ है।
लायन सफारी एण्ड चंबल सर्किट 1. ताज नेचर वॉक (आगरा)
2. बीयर रेस्क्यू सेन्टर (आगरा)
3. राष्ट्रीय चम्बल वन्य जीव अभयारण्य (इटावा)
4. लॉयन सफारी पार्क/बब्बर शेर प्रजनन केन्द्र सफारी
चंबल सेंचुरी घड़ियाल, मगर, कछुए, ऊदबिलाव, मीठे पानी की डॉल्फिन और विविध प्रकार के जलीय और स्थलीय पक्षियों जैसे फ्लेमिंगों, रूडी शेल्डक, और इंडियन स्किमर का घर है। आगरा में दुनिया का सबसे बड़ा बीयर रेस्क्यू सेंटर है।
बुंदेलखण्ड एडवेंचर सर्किट 1. देवगढ़ (ललितपुर)
2. कालिंजर (बांदा)
3. रानीपुर वन्यजीव अभयारण्य (चित्रकूट)
4. महावीर स्वामी वन्य जीव अभयारण्य (ललितपुर)
5. विजय सागर पक्षी विहार (महोबा)
बुंदेलखण्ड सर्किट हाउस द्वारा बुंदेलखण्ड की प्राकृतिक सुंदरता और इसके प्रकृति मनोहर दुर्गों को देखने का अवसर प्राप्त होता है। यहां के वन्य जीवों में तेंदुए, जंगली कुत्ते, जंगली बिल्ली, ब्लेक-नेक्ड क्रेन आदि सम्मिलित हैं।
गंगा बेसिन सर्किट 1. नरोरा (बुलंदशहर)     2. कन्नौज     3. बिठूर (कानपुर) यह सर्किट शांत गंगा घाट, बांधों और बैराजों के रमणीय दृश्यों को देखने के उद्देश्य से बनाया गया है।
विंध्य माउंटेन सर्किट 1. कैमूर वन्यजीव अभयारण्य (मिर्जापुर और सोनभद्र)
2. चंद्रप्रभा वन्यजीव विहार (चंदौली)
3. हाथीनाला बायो डाइवर्सिटी पार्क, (रेनूकूट)
4. विजयगढ़ (सोनभद्र)
5. चुनार, विडंम (मिर्जापुर)
6. बेंतीताल पक्षी विहार, प्रतापगढ़
इस सर्किट द्वारा अनेक नदी धाराओं और जलप्रपातों से युक्त विंध्य पर्वत क्षेत्र के मनोरम परिदृश्य के दर्शन का अवसर प्राप्त होता है। राजदरी, देवदरी, करकट, विंध्य और तलहर प्रसिद्ध जल प्रपात हैं। जीवाश्म उद्यान और गुफा चित्र इस सर्किट की विशेषता है। हाथीनाला जंगल एक प्रस्तावित जैव विविधता हॉटस्पॉट है, जहां केवल स्थानीय तौर पर उपलब्ध वृक्ष की प्रजातियां पायी जाती हैं।
वेस्टर्न बर्ड वेटलैण्ड सर्किट 1. ओखला पक्षी विहार (गौतम बुद्ध नगर)
2. सूरजापुर वेटलैण्ड (गौतमबुद्ध नगर)
3. पटना वन्यजीव अभयारण्य (एटा)
4. सरसई पक्षी विहार (इटावा)
5. समान वन्य जीव अभयारण्य (मैनपुरी)
6. सूर सरोवर पक्षी विहार (आगरा)
यह सर्किट 300 से अधिक पक्षियों को देखने का अवसर देता है। यहां एक बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। सरसई नवर वेटलैण्ड में सारस क्रेन की संकटग्रस्त प्रजाति बड़ी संख्या में मौजूद हैं। यहां पर सारस क्रेन के 10 जोड़े नियमित रूप से प्रजनन करते हैं जो कि राजस्थान के भरतपुर के पक्षी विहार से दो गुना से भी अधिक हैं。
• पटना पक्षी विहार उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा पक्षी विहार है।
सेन्ट्रल बर्ड/वेटलैण्ड सर्किट 1. शहीद चन्द्रशेखर आजाद पक्षी विहार (नवाबगंज पक्षी विहार), उन्नाव
2. सांडी पक्षी विहार (हरदोई)
3. समसपुर पक्षी विहार (रायबरेली)
4. लाख बहाशी पक्षी विहार (कन्नौज)
यह सर्किट पक्षी प्रेमियों को आकर्षक अवसर प्रदान करता है। वेटलैण्ड्स और स्थानीय व प्रवासी पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियां यहां मुख्य आकर्षण हैं।
• नवाबगंज उत्तर प्रदेश का पहला पक्षी विहार है। अब इसका नाम बदल दिया गया है।
• कन्नौज का 'लाख बहोशी' उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा पक्षी विहार है।

महोबा

महोबा प्राकृतिक सौंदर्य से सम्पन्न ऐतिहासिक शहर है। मदनसागर झील, कीर्तिसागर झील, विजयसागर झील, रोहिल्ला सूर्य मंदिर, मकरबाई मंदिर और खखरा मठ लगभग 1000 वर्ष पुराने चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित स्थल हैं। इनके अतिरिक्त चरखारी पैलेस, शिव तांडव, छोटी चंडिका मंदिर, बड़ी चंडिका मंदिर, रामकुंड, गोखार पहाड़ महोबा के प्रमुख आकर्षण हैं।

गोरखपुर

गोरखपुर में स्थित गोरखनाथ मंदिर, नाथ संप्रदाय के सर्वाधिक पवित्र स्थलों में से एक है। यह मंदिर 11वीं शताब्दी के गुरू गोरखनाथ को समर्पित है, जिन्हें नाथ संप्रदाय का प्रतिपादक माना जाता है। वह मत्स्येन्द्रनाथ के शिष्य थे।
गोरखपुर का टेराकोटा का काम विश्व प्रसिद्ध है। यहां के 'कारीगर गांव' का पर्यटकों द्वारा भ्रमण किया जाता है।
रामगढ़ ताल वॉटर स्पोर्ट्स की संभावनाओं से संपन्न है। यहां वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामंडल) स्थित है। गोरखपुर को गीताप्रेस, चौरीचौरा शहीद स्थल और विश्व के सबसे लम्बे रेलवे प्लेटफॉर्म के लिए भी जाना जाता है।

श्रावस्ती

श्रावस्ती अपनी बौद्ध विरासत के लिए प्रसिद्ध है। बुद्ध ने अपने जीवन का काफी समय श्रावस्ती में व्यतीत किया था। माहेट में कच्ची कुटी और पक्की कुटी मुख्य आकर्षण हैं। ऐसा माना जाता है कि कच्ची कुटी और पक्की कुटी क्रमशः सुदत्त स्तूप (अनाथपिंडक) और अंगुलिमाल स्तूप से संबंधित हैं।
सुहेलदेव वन्यजीव अभयारण्य श्रावस्ती में स्थित है। अभयारण्य के अंदर थारू जनजाति की मौजूदगी इसकी विशेषता है।
जैन तीर्थंकर संभवनाथ चंद्रप्रभु और आजीवक सम्प्रदाय के संस्थापक मक्खलि गोसाल श्रावस्ती से संबंधित थे।

कपिलवस्तु

कपिलवस्तु बुद्ध के पिता शुद्धोदन के शाक्य गणराज्य की राजधानी थी। महाभिनिष्क्रमण (गृहत्याग) से पूर्व का बुद्ध का जीवन कपिलवस्तु में ही व्यतीत हुआ। सिद्धार्थनगर जिला स्थित पिपरहवा की कपिलवस्तु के रूप में पहचान की गयी है।
पिपरहवा स्तूप व कुछ अन्य बौद्ध स्थल यहां स्थित हैं। यहां उत्तरी काले पालिशयुक्त ओपदार मृदभांड (NBPW) संस्कृति की वस्तुएं और कुषाण काल के सिक्के मिले हैं।

कुशीनगर

कुशीनगर बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली है। महापरिनिर्वाण स्तूप, मठ कुंवर, श्रीलंका बौद्ध मंदिर और चीनी बुद्ध मंदिर कुशीनगर के प्रमुख आकर्षण हैं।
बुद्ध के महापरिनिर्वाण के समय (483 ई.पू.) कुशीनगर (कुशनारा) मल्ल गणराज्य की राजधानी थी। बुद्ध ने 80 वर्ष की आयु में यहीं हिरण्यवती नदी तट पर शरीर का त्याग किया था।
यहां बुद्ध की 6.1 मीटर की लेटी हुई प्रतिमा महापरिनिर्वाण स्तूप से प्राप्त हुई है। महापरिनिर्वाण स्तूप के समीप ही रामभर स्तूप है, जहां पर बुद्ध का अंतिम संस्कार किया गया था। यहां से मौर्य, कुषाण और गुप्तकाल के पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
कुशीनगर में जापान सरकार के सहयोग से 'मैत्रेय परियोजना' (Project Maitreya) आरंभ की गयी है, किन्तु वर्षों बीत जाने के बाद भी परियोजना को गति नहीं मिल सकी है।
'मैत्रेय' बोधिसत्व का एक रूप है, जिसे 'भावी बुद्ध' माना जाता है।
'मैत्रेय परियोजना' बुद्ध की सबसे विशाल मूर्ति स्थापित करने का कार्यक्रम है।

कौशाम्बी

कौशाम्बी प्रयाग के समीप स्थित एक प्राचीन शहर है। कड़ा पभासगिरी, घोषिताराम बौद्धमठ और वत्सराज उदयन का महल कौशाम्बी के प्रमुख आकर्षण हैं।
कड़ा मां शीतला शक्तिपीठ के लिए प्रसिद्ध है। नवरात्रि के दौरान माँ शीतला मंदिर पर मेले का आयोजन किया जाता है।
यह संत मलूकदास की जन्मस्थली है। यह छठे जैन तीर्थंकर पद्मप्रभु से भी संबंधित है।
घोषिताराम विहार के स्थान पर एक अशोक स्तम्भ के भग्नावशेष पाये गये हैं। एक अन्य अशोक स्तम्भ जो अब प्रयाग में स्थित है, कौशाम्बी से ले जाया गया है।

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UPPSC, UPSSSC, UP Police, UP Lekhpal, RO/ARO और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।