उत्तर प्रदेश की राजनैतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था
(कानून बनाना)
(कानून लागू करना)
(न्याय व्यवस्था)
| समिति / आयोग | गठन वर्ष | प्रमुख सिफारिशें (निष्कर्ष) |
|---|---|---|
| प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (मोरार जी देसाई) | 1966 | राज्यपाल पद पर अराजनैतिक व्यक्ति की नियुक्ति होनी चाहिए। |
| राजमन्नार समिति (तमिलनाडु सरकार) | 1970 | अनुच्छेद 356 व 357 का विलोपन हो। नियुक्ति में राज्यों को शामिल किया जाए और राज्यपाल एक ही बार पद धारण करे। |
| सरकारिया आयोग | 1980 (रिपोर्ट 1988) |
राज्यपाल की नियुक्ति मुख्यमंत्री के परामर्श से होनी चाहिए। |
| पुंछी आयोग (न्यायमूर्ति मदन मोहन पुंछी) | 2005 | अंतर्राज्यीय परिषद द्वारा तैयार सूची के आधार पर ही राज्यपाल की नियुक्ति की जाए। |
यह राज्य सरकार की वास्तविक कार्यकारिणी होती है। नीति निर्धारण में सर्वाधिक योगदान इन्हीं का होता है। ये विभिन्न समितियों के माध्यम से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं।
ये द्वितीय श्रेणी के मंत्री होते हैं। इन्हें कैबिनेट मंत्रियों के सहयोग के लिए नियुक्त किया जाता है या कुछ मामलों में स्वतंत्र प्रभार भी दिया जा सकता है।
ये तृतीय श्रेणी के मंत्री हैं, जो कैबिनेट एवं राज्यमंत्रियों को उनके प्रशासनिक और संसदीय कार्यों में सहायता प्रदान करते हैं।
नामकरण एवं राजधानी
शासन एवं प्रशासनिक व्यवस्था
- कार्यपालिका (Executive)
- विधायिका (Legislature)
- न्यायपालिका (Judiciary)
कार्यपालिका
- राज्यपाल
- मुख्यमंत्री
- मंत्रिपरिषद
- महाधिवक्ता
राज्यपाल
नियुक्ति एवं योग्यताएं
- राज्यपाल पद पर नियुक्ति के लिए आवश्यक है कि सम्बन्धित व्यक्ति भारत का नागरिक हो और उसकी आयु 35 वर्ष पूरी हो चुकी हो। (अनुच्छेद-157)
- राज्यपाल पद पर नियुक्ति के लिए आवश्यक है कि वह संसद अथवा राज्य की विधायिका के किसी सदन का सदस्य न हो। यदि ऐसे किसी व्यक्ति की नियुक्ति राज्यपाल के रूप में होती है तो उसे राज्यपाल के कार्यालय में पद संभालने की तिथि से अपनी उक्त सदस्यता को छोड़नी होगी। [अनुच्छेद-158 (1)]
- उसे किसी अन्य लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए। [(अनुच्छेद-158 (2)]
कार्यकाल
- मंडल (कमिश्नरी) - 18
- जिले - 75
- तहसील - 351
- शहर एवं कस्बे - 915
- विकास खण्ड - 826
- न्याय पंचायत -
- ग्राम पंचायत - 59,073
- आबादी वाले गांव - 97,814
- कुल गांव - 106,774
- नगर निगम - 17
- नगरपालिका परिषद - 200
- नगर पंचायत - 546
- संविधान में राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त को परिभाषित नहीं किया गया है। उच्चतम न्यायालय ने भी इसे 'न्यायप्रद' नहीं माना है।
- राष्ट्रपति द्वारा राज्यपाल को कभी-भी पदच्युत किया जा सकता है। राष्ट्रपति द्वारा उसका एक प्रांत से दूसरे प्रांत में स्थानांतरण भी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त राज्यपाल द्वारा स्वयं त्यागपत्र देकर भी पद को रिक्त किया जा सकता है।
- राज्य की विधायिका अथवा उच्च न्यायालय द्वारा राज्यपाल को नहीं हटाया जा सकता है।
शपथ
वेतन एवं भत्ते
कार्य एवं शक्तियां
- राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है। वह मुख्यमंत्री के परामर्श से मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों की नियुक्ति भी करता है।
- मंत्रिपरिषद राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त पद धारण करता है।
- राज्यपाल महाधिवक्ता, राज्य निर्वाचन आयुक्त, लोक सेवा आयोग के सदस्यों आदि की नियुक्ति करता है।
- राज्यपाल मंत्रियों के बीच कार्यों का विभाजन करता है। वह मुख्यमंत्री से प्रशासनिक मामलों एवं विधायी प्रस्तावों के सम्बन्ध में सूचना मांग सकता है।
- राज्यपाल राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति होता है। वह कुलपतियों की नियुक्ति भी करता है।
- वह राज्य के संवैधानिक आपातकाल के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश कर सकता है।
- विधानसभा का सदस्य न होते हुए भी राज्यपाल राज्य विधान मंडल का अंग होता है। वह राज्य विधान मंडल के सत्र को आहूत, स्थगित एवं राज्य विधानसभा को भंग कर सकता है। वह विधान मंडल की बैठक को आम चुनावों के पश्चात एवं प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र को सम्बोधित भी करता है।
- राज्य विधान मंडल द्वारा पारित कोई भी विधेयक राज्यपाल की स्वीकृति के पश्चात ही अधिनियम बनता है। वह विधान मंडल द्वारा पारित किसी भी विधेयक को अस्वीकृत कर सकता है। धन विधेयक के अलावा अन्य किसी भी विधेयक को पुनर्विचार हेतु विधान मंडल को वापस लौटा सकता है। वह किसी भी विधेयक को राष्ट्रपति के विचार हेतु सुरक्षित रख सकता है।
- राज्यपाल विधान परिषद के कुल सदस्यों के छठे भाग को नामित कर सकता है। वह विधान सभा में एक आंग्ल भारतीय सदस्य की नियुक्ति कर सकता है।
- राज्य विधान मण्डल के सत्र में न होने की स्थिति में राज्यपाल आवश्यकतानुसार किसी विषय पर अध्यादेश जारी कर सकता है। इस अध्यादेश की राज्य के विधानमण्डल से छ: सप्ताह के भीतर स्वीकृति आवश्यक होती है।
- राज्यपाल मात्र राज्यसूची एवं समवर्ती सूची पर अध्यादेश जारी कर सकता है। उसके द्वारा जारी अध्यादेश छ: माह तक प्रभावी रहता है।
- राज्यपाल राज्य से सम्बन्धित भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, राज्य वित्त आयोग एवं राज्य लोक सेवा आयोग की रिपोर्ट राज्य विधान सभा के सम्मुख प्रस्तुत करता है।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के सम्बन्ध में राष्ट्रपति द्वारा राज्यपाल से परामर्श कर निर्णय लिया जाता है।
- राज्यपाल राज्य के उच्च न्यायालय के साथ परामर्श कर जिला न्यायाधीशों एवं अन्य अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति, स्थानान्तरण एवं प्रोन्नति कर सकता है।
- राज्यपाल को किसी अपराध में दोष सिद्ध अपराधी के दण्ड को क्षमा करने, स्थगित करने तथा दूसरे दण्ड में परिवर्तित करने या पूर्णत: माफ करने का अधिकार है। राज्यपाल मृत्युदण्ड को माफ नहीं कर सकता।
- कोई धन विधेयक राज्यपाल की पूर्व अनुमति के बाद ही विधान सभा में प्रस्तुत किया जा सकता है। किसी अनुदान की मांग उसकी सहमति के बाद ही की जा सकती है।
- राज्यपाल यह सुनिश्चित करता है कि वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) को विधान मंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाये।
- राज्यपाल की अनुमति के बिना राज्य की आकस्मिक निधि (Contingency Fund) से कोई व्यय नहीं किया जा सकता है। राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund) राज्यपाल के अधिकार में रहती है।
राज्यपाल पर विभिन्न समितियों की सिफारिशें
- प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग ( 1966 )- मोरार जी देसाई की अध्यक्षता में बने प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) ने राज्यपाल पद पर अराजनैतिक व्यक्ति की नियुक्ति का सुझाव दिया था।
- राजमन्नार समिति ( 1970 ) - तत्कालीन तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित इस कमेटी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 एवं 357 के विलोपन (Deletion) की सिफारिश करते हुए सुझाव दिया कि राज्यपाल की नियुक्ति की प्रक्रिया में राज्यों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
- पुंछी आयोग - वर्ष 2005 में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन मोहन पुंछी की अध्यक्षता में केन्द्र-राज्य संबंधों पर गठित इस आयोग ने सिफारिश की कि अंतर्राज्यीय परिषद द्वारा एक सूची तैयार कर राज्यपाल की नियुक्ति उसी सूची के आधार पर की जानी चाहिए।
- सरकारिया आयोग - 1980 में गठित इस आयोग ने 1988 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए सिफारिश की कि राज्यपाल की नियुक्ति मुख्यमंत्री के परामर्श से होनी चाहिए।
| राज्यपाल एवं राष्ट्रपति के पद की तुलनात्मक स्थिति | |
|---|---|
| राज्यपाल | राष्ट्रपति |
| राज्यपाल राज्य कार्यपालिका का प्रमुख एवं राज्य का प्रथम व्यक्ति होता है। | राष्ट्रपति भारत गणराज्य का प्रमुख एवं राष्ट्र का प्रथम नागरिक होता है। |
| राज्यपाल को राज्य विधि के तहत किसी अपराध में दोषी पाये गये व्यक्ति को क्षमादान, दण्ड कम करने, स्थगित करने अथवा दूसरे दण्ड में बदलने का अधिकार है। वह मृत्युदंड के संबंध में क्षमादान नहीं दे सकता। | राष्ट्रपति केन्द्रीय विधि के तहत किसी अपराध में दोषी पाये गये व्यक्ति को क्षमा दान दे सकता है। इसके अतिरिक्त वह मृत्युदण्ड की सजा को भी माफ कर सकता है। |
| राज्य विधान मंडल के सत्र में न होने की स्थिति में राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है। ( अनुच्छेद 213 ) | राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के सत्र में न होने की स्थिति में अध्यादेश जारी कर सकता है। ( अनुच्छेद 123 ) |
| राज्यपाल की नियुक्ति अथवा मनोनयन होता है। इस पद के लिए निर्वाचन नहीं होता। | राष्ट्रपति का निर्वाचन होता है। यह निर्वाचन संसद एवं राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा होता है। |
| राज्यपाल अपने पद पर राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त बना रहता है। | राष्ट्रपति को महाभियोग की प्रक्रिया द्वारा हटाया जा सकता है। |
राज्यपाल का पद एवं इससे जुड़े विवाद
- राज्य विधान मंडल द्वारा पारित किसी विधेयक को राष्ट्रपति की संस्तुति हेतु सुरक्षित करना।
- राज्य में राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा करना।
- मंत्रिपरिषद के किसी प्रशासनिक निर्णय एवं विधायी प्रस्ताव के विषय में सूचना मांगने की शक्ति।
मुख्यमंत्री
- उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधान परिषद के सदस्य हैं।
- मुख्यमंत्री को राज्यपाल पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाता है। वह विधानसभा में बहुमत रहने तक राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त अपने पद पर रहता है। इसका यह अर्थ नहीं है कि राज्यपाल किसी भी समय मुख्यमंत्री को उसके पद से हटा सकता है। राज्यपाल मुख्यमंत्री को पद से तब तक बर्खास्त नहीं कर सकता है, जब तक कि उसे विधानसभा में बहुमत प्राप्त है। इसके अतिरिक्त राज्य में संवैधानिक व्यवस्था के छिन्न-भिन्न हो जाने पर अनुच्छेद 356 के तहत राज्यपाल की सिफारिश पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर मुख्यमंत्री को पद से हटाया जा सकता है।
- मुख्यमंत्री के वेतन एवं भत्तों का निर्धारण राज्य विधान मंडल द्वारा किया जाता है।
| नाम | कार्यकाल |
|---|---|
| श्रीमती सरोजिनी नायडू | 15 अगस्त, 1947 से 02 मार्च, 1949 |
| श्री बी. बी. मलिक | 03 मार्च, 1949 से 01 मई, 1949 |
| श्री एच.पी. मोदी | 02 मई, 1949 से 01 जून, 1952 |
| डॉ. के.एल. मुंशी | 02 जून, 1952 से 09 जून, 1957 |
| श्री. वी.वी. वेंकटगिरि | 10 जून, 1957 से 30 जून, 1960 |
| डॉ. बी. रामाकृष्णा राव | 01 जुलाई, 1960 से 15 अप्रैल, 1962 |
| श्री विश्वनाथ दास | 16 अप्रैल, 1962 से 30 अप्रैल, 1967 |
| डॉ. बी. गोपाला रेड्डी | 01 मई, 1967 से 30 जून, 1972 |
| श्री शशीकांत वर्मा | 01 जुलाई, 1972 से 13 नवम्बर, 1972 |
| श्री अकबर अली खान | 14 नवम्बर, 1972 से 24 अक्टूबर, 1974 |
| डॉ. मारी चेन्ना रेड्डी | 25 अक्टूबर, 1974 से 01 अक्टूबर, 1977 |
| श्री जी.आर.डी. तपासे | 02 अक्टूबर, 1977 से 27 फरवरी, 1980 |
| श्री सी.पी.एन. सिंह | 28 फरवरी, 1980 से 31 मार्च, 1985 |
| श्री मो. उस्मान आरिफ | 31 मार्च, 1985 से 11 फरवरी, 1990 |
| श्री बी. एस. एन. रेड्डी | 12 फरवरी, 1990 से 25 मई, 1993 |
| श्री मोती लाल वोरा | 25 मई, 1993 से 03 मई, 1996 |
| श्री मो. शफी कुरैशी | 03 मई, 1996 से 19 जुलाई, 1996 |
| श्री रोमेश भंडारी | 19 जुलाई, 1996 से 17 मार्च, 1998 |
| श्री मो. शफी कुरैशी | 17 मार्च, 1998 से 19 अप्रैल, 1998 |
| श्री सूरजभान | 20 अप्रैल, 1998 से 23 नवम्बर, 2000 |
| श्री विष्णुकांत शास्त्री | 24 नवम्बर, 2000 से 02 जुलाई, 2004 |
| श्री सुदर्शन अग्रवाल | 03 जुलाई, 2004 से 07 जुलाई, 2004 |
| श्री टी.वी. राजेश्वर | 08 जुलाई, 2004 से 27 जुलाई, 2009 |
| श्री बी.एल. जोशी | 28 जुलाई, 2009 से 23 जून, 2014 |
| डॉ. अज़ीज़ कुरैशी | 23 जून, 2014 से 22 जुलाई, 2014 |
| श्री राम नाईक | 22 जुलाई, 2014 से 28 जुलाई, 2019 |
| श्रीमती आनंदी बेन पटेल | 29 जुलाई, 2019 से आज तक |
| नाम | कार्यकाल |
|---|---|
| पं. गोविन्द वल्लभ पंत | 01 अप्रैल, 1946 से 27 दिसंबर, 1954 |
| डॉ. सम्पूर्णानन्द | 28 दिसंबर, 1954 से 06 दिसंबर, 1960 |
| श्री चन्द्रभानु गुप्त | 07 दिसंबर, 1960 से 01 अक्टूबर, 1963 |
| श्रीमती एस. कृपलानी | 02 अक्टूबर, 1963 से 13 मार्च, 1967 |
| श्री चन्द्रभानु गुप्त | 14 मार्च, 1967 से 02 अप्रैल, 1967 |
| चौधरी चरण सिंह | 03 अप्रैल, 1967 से 25 फरवरी, 1968 |
| राष्ट्रपति शासन | 25 फरवरी, 1968 से 25 फरवरी, 1969 |
| श्री चन्द्रभानु गुप्त | 26 फरवरी, 1969 से 17 फरवरी, 1970 |
| चौधरी चरण सिंह | 17 फरवरी, 1970 से 01 अक्टूबर, 1970 |
| राष्ट्रपति शासन | 02 अक्टूबर, 1970 से 18 अक्टूबर, 1970 |
| श्री त्रिभुवन एन. सिंह | 18 अक्टूबर, 1970 से 04 अप्रैल, 1971 |
| श्री कमलापति त्रिपाठी | 04 अप्रैल, 1971 से 12 जून, 1973 |
| राष्ट्रपति शासन | 13 जून, 1973 से 08 नवम्बर, 1973 |
| श्री एच.एन. बहुगुणा | 08 नवम्बर, 1973 से 30 नवम्बर, 1975 |
| राष्ट्रपति शासन | 30 नवम्बर, 1975 से 21 जनवरी, 1976 |
| श्री एन.डी. तिवारी | 21 जनवरी, 1976 से 30 अप्रैल, 1977 |
| राष्ट्रपति शासन | 30 अप्रैल, 1977 से 22 जून, 1977 |
| श्री रामनरेश यादव | 23 जून, 1977 से 28 फरवरी, 1979 |
| श्री बनारसी दास | 28 फरवरी, 1979 से 17 फरवरी, 1980 |
| राष्ट्रपति शासन | 17 फरवरी, 1980 से 09 जून, 1980 |
| वी.पी. सिंह | 09 जून, 1980 से 19 जुलाई, 1982 |
| श्री श्रीपति मिश्र | 19 जुलाई, 1982 से 03 अगस्त, 1984 |
| श्री एन.डी. तिवारी | 03 अगस्त, 1984 से 10 मार्च, 1985 |
| श्री एन.डी. तिवारी | 11 मार्च, 1985 से 23 सितंबर, 1985 |
| श्री वीर बहादुर सिंह | 24 सितंबर, 1985 से 24 जून, 1988 |
| श्री एन.डी. तिवारी | 25 जून, 1988 से 05 दिसंबर, 1989 |
| श्री मुलायम सिंह यादव | 05 दिसंबर, 1989 से 24 जून, 1991 |
| श्री कल्याण सिंह | 24 जून, 1991 से 06 दिसंबर, 1992 |
| राष्ट्रपति शासन | 06 दिसंबर, 1992 से 04 दिसंबर, 1993 |
| मुलायम सिंह यादव | 04 दिसंबर, 1993 से 03 जून, 1995 |
| सुश्री मायावती | 03 जून, 1995 से 17 अक्टूबर, 1995 |
| राष्ट्रपति शासन | 18 अक्टूबर, 1995 से 17 अक्टूबर, 1996 |
| राष्ट्रपति शासन | 17 अक्टूबर, 1996 से 21 मार्च, 1997 |
| सुश्री मायावती | 21 मार्च, 1997 से 21 सितंबर, 1997 |
| श्री कल्याण सिंह | 21 सितंबर, 1997 से 12 नवंबर, 1999 |
| श्री रामप्रकाश गुप्त | 12 नवंबर, 1999 से 28 अक्टूबर, 2000 |
| श्री राजनाथ सिंह | 28 अक्टूबर, 2000 08 मार्च, 2002 |
| राष्ट्रपति शासन | 08 मार्च, 2002 से 03 मई, 2002 |
| सुश्री मायावती | 03 मई, 2002 से 29 अगस्त, 2003 |
| श्री मुलायम सिंह यादव | 29 अगस्त, 2003 से 13 मई 2007 |
| सुश्री मायावती | 13 मई, 2007 से 14 मार्च, 2012 |
| श्री अखिलेश यादव | 15 मार्च, 2012 से 19 मार्च, 2017 |
| योगी आदित्यनाथ | 19 मार्च, 2017 से 25 मार्च, 2022 |
| योगी आदित्यनाथ* | 25 मार्च, 2022 से वर्तमान |
मुख्यमंत्री के कार्य एवं शक्तियां
- मुख्यमंत्री किसी मंत्री को पद से बर्खास्त करने की सिफारिश राज्यपाल से कर सकता है।
- यदि मुख्यमंत्री की मृत्यु हो जाए या वह अपने पद से त्यागपत्र दे दे तो मंत्रिपरिषद विघटित हो जाती है। विघटन की यह स्थिति मंत्रिपरिषद के किसी अन्य सदस्य की आकस्मिक मृत्यु या त्यागपत्र से नहीं होती है।
- मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं मंत्रिपरिषद के बीच संवाद की कड़ी है।
राज्य मंत्रिपरिषद
- राज्य मंत्रिपरिषद के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री के परामर्श पर की जाती है।
- संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करेगा और मुख्यमंत्री की सलाह से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करेगा।
- मंत्रिपरिषद में सामान्यतः राज्य विधानसभा अथवा विधान परिषद के सदस्य होते हैं, किंतु विशेष परिस्थितियों में मंत्रिपरिषद में ऐसे व्यक्तियों को शामिल किया जा सकता है जो राज्य विधानसभा अथवा विधान परिषद के सदस्य न हों।
- मंत्रिपरिषद के ऐसे सदस्य को छः माह के भीतर दोनों सदनों में से किसी एक की सदस्यता लेनी होगी, अन्यथा उसे मंत्रिपरिषद की सदस्यता का त्याग करना होगा।
सदस्य संख्या एवं स्वरूप
- यदि राज्य विधान मंडल के किसी सदस्य की सदस्यता दल-बदल कानून के आधार पर रद्द होती है तो ऐसा व्यक्ति मंत्री पद से भी अयोग्य हो जायेगा।
- राज्यपाल मंत्रिपरिषद को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाता है।
- मंत्रिपरिषद का कार्यकाल राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त होता है।
मंत्रिपरिषद की श्रेणियां
- कैबिनेट मंत्री
- राज्यमंत्री
- उपमंत्री
मंत्रिपरिषद का उत्तरदायित्व
मंत्रिपरिषद की कार्य प्रणाली
- राज्य की शासन प्रणाली में मंत्रिपरिषद का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
- मंत्रिमण्डल की बैठक सामान्यतः सप्ताह में एक बार होती है, यद्यपि मुख्यमंत्री को यह अधिकार है कि वह आवश्यकता अथवा अपनी इच्छानुसार इसकी बैठक कभी भी बुला सकता है।
- मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करते हैं। मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में बैठक की अध्यक्षता मंत्रिपरिषद के वरिष्ठ मंत्री द्वारा किया जाएगा।
- मंत्रिपरिषद की बैठक में गणपूर्ति (Quorum) की अनिवार्यता नहीं होती।
- बैठक में लिया गया निर्णय सामूहिक और सभी सदस्यों/मंत्रियों के लिए अनिवार्य रूप से स्वीकार्य होता है। यदि कोई मंत्री सामूहिक निर्णय को स्वीकार करने में असमर्थता व्यक्त करता है, तो उसे मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र देना होगा।
मंत्रिपरिषद के कार्य एवं शक्तियां
- राज्य के शासन संचालन हेतु नीतियों का निर्माण मंत्रिपरिषद करती है।
- शासन की कार्यपालिका को व्यवस्थापिका से जोड़ने का कार्य मंत्रिपरिषद करती है।
- कार्यपालिक की वास्तविक शक्तियां मंत्रिपरिषद में निहित होती हैं। मंत्रिमण्डल को कई विभागों में विभक्त किया जाता है। प्रत्येक विभाग, जिसे मंत्रालय कहते हैं, का मुखिया एक मंत्री होता है।
- यह निर्णय मंत्रिपरिषद द्वारा लिया जाता है कि किसी विधेयक को विधानसभा के किस अधिवेशन में प्रस्तुत करना है।
- महाधिवक्ता, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालयों के कुलपति जैसे बड़े पदों पर नियुक्ति का निर्णय मंत्रिपरिषद द्वारा लिया जाता है। मंत्रिपरिषद की सलाह पर इन पदों पर नियुक्तियों की घोषणा राज्यपाल द्वारा की जाती है।
- मंत्रिपरिषद की स्वीकृति पर विधान सभा में बजट प्रस्तुत किया जाता है।
दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

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