उत्तर प्रदेश में नगरीकरण और उसकी समस्याएं

उत्तर प्रदेश में नगरीकरण और उसकी समस्याएं

उत्तर प्रदेश भारत का हृदय और सर्वाधिक आबादी वाला राज्य, जहां एक तरफ गगनचुम्बी इमारतों और मेट्रो रेल की रफ्तार है, तो दूसरी तरफ बढ़ती मलिन बस्तियों और प्रदूषण की घुटन। यह लेख महज़ आंकड़ों का पुलिंदा नहीं है, बल्कि यूपी के नगरीकरण की उस जमीनी हकीकत का सफरनामा है, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की औद्योगिक चकाचौंध और पूर्वी यूपी के धीमे विकास के बीच झूल रही है। इस विस्तृत लेख में आप जानेंगे कि कैसे लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद जैसे महानगरों का कायाकल्प हो रहा है, स्मार्ट सिटी मिशन व मेट्रो प्रोजेक्ट्स क्या बदलाव ला रहे हैं, और इस तेज शहरीकरण के कारण आवास, परिवहन, पलायन व प्रदूषण जैसी कौन सी विकराल चुनौतियां जन्म ले रही हैं।
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उत्तर प्रदेश में नगरीकरण: एक दृष्टि
आंकड़े (2011)
नगरीय जनसंख्या

राज्य में कुल 4.45 करोड़ लोग नगरों में निवास करते हैं, जो कुल जनसंख्या (19.96 करोड़) का मात्र 22.28% है।

राष्ट्रीय स्थिति
भारत में स्थान

कुल नगरीय जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा स्थान (महाराष्ट्र के बाद), लेकिन नगरीय प्रतिशत के मामले में 30वां स्थान

महानगर
प्रमुख बड़े नगर

10 लाख से अधिक नगरीय जनसंख्या वाले जिले: 12 | नगर निगम क्षेत्र वाले शहर: 7 (लखनऊ सबसे बड़ा)।

क्षेत्रीय असमानता (Regional Disparity)
पश्चिमी उत्तर प्रदेश (सर्वाधिक नगरीकृत)

यहां 32.45% जनसंख्या नगरों में निवास करती है। औद्योगिकीकरण के कारण रोजगार और उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध हैं।

पूर्वी उत्तर प्रदेश (न्यूनतम नगरीकृत)

यहां मात्र 13.40% जनसंख्या नगरों में है। धीमी आर्थिक गति और औद्योगिकीकरण के अभाव के कारण यहाँ से भारी मात्रा में पलायन होता है।

नगरीकरण से उत्पन्न प्रमुख समस्याएं (चेन रिएक्शन)
ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन
बढ़ती स्लम (मलिन) आबादी
आवास व अवसंरचना की कमी
प्रदूषण व परिवहन संकट
सामाजिक विचलन व अपराध
महत्वपूर्ण जनगणना आंकड़े (2011)
सर्वाधिक नगरीय जनसंख्या (Top 5)
  • 1गाजियाबाद
    31.62 लाख
  • 2लखनऊ
    30.38 लाख
  • 3कानपुर नगर
    30.24 लाख
  • 4आगरा
    20.24 लाख
  • 5मेरठ
    17.59 लाख
न्यूनतम नगरीय जनसंख्या (Bottom 5)
  • 1श्रावस्ती
    38 हजार
  • 2चित्रकूट
    96 हजार
  • 3कौशाम्बी
    1.24 लाख
  • 4संत कबीर नगर
    1.28 लाख
  • 5महराजगंज
    1.34 लाख
सर्वाधिक नगरीय प्रतिशत (%)
  • 1गाजियाबाद
    67.6%
  • 2लखनऊ
    66.2%
  • 3कानपुर
    65.8%
  • 4गौतमबुद्ध नगर
    59.1%
  • 5मेरठ
    51.1%
न्यूनतम नगरीय प्रतिशत (%)
  • 1श्रावस्ती
    3.5%
  • 2कुशीनगर
    4.7%
  • 3महराजगंज
    5.0%
  • 4सुल्तानपुर
    5.3%
  • 5प्रतापगढ़
    5.5%
शहरीकरण की चुनौतियों हेतु सरकारी पहल
आवास योजना
मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना
  • आगामी एक वर्ष में 4 लाख भवनों के निर्माण का लक्ष्य।
  • दिव्यांगजनों के लिए आवास आवंटन आरक्षण 3% से बढ़ाकर 5% किया गया।
इंफ्रास्ट्रक्चर
स्मार्ट सिटी एवं स्वच्छ भारत
  • राज्य के 75 जिले ODF (खुले में शौच मुक्त) घोषित।
  • केंद्र द्वारा 10 तथा राज्य सरकार द्वारा 7 (अयोध्या, गोरखपुर आदि) शहरों का स्मार्ट सिटी के रूप में विकास।
परिवहन
मेट्रो एवं इलेक्ट्रिक बसें
  • लखनऊ और गाजियाबाद में मेट्रो संचालित।
  • कानपुर (₹11,076 करोड़) व आगरा (₹8,379 करोड़) मेट्रो कार्य प्रगति पर।
  • 9 प्रमुख शहरों में 700+ इलेक्ट्रिक बसों का संचालन।
प्रदूषण नियंत्रण
हॉट-स्पॉट मॉनिटरिंग
  • भारत के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में यूपी के 6 शहर शामिल।
  • 16 शहरों को खतरनाक श्रेणी में रखकर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग कमेटी का गठन। निर्माण स्थलों पर PTZ कैमरे अनिवार्य।
  • जनगणना 2011 के अनुसार भारत का सर्वाधिक जनसंख्या (19.96 करोड़) वाला राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश देश के सबसे कम नगरीकृत राज्यों में से एक है। यहां नगरीय जनसंख्या मात्र 4.45 करोड़ है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 22.28 प्रतिशत है। दूसरी तरफ जनगणना 2011 के अनुसार देश में नगरीय जनसंख्या का राष्ट्रीय अंश 31.14 प्रतिशत है, जो उत्तर प्रदेश से काफी अधिक है।
  • राज्य की कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या के प्रतिशत की दृष्टि से देश के राज्यों में उत्तर प्रदेश का स्थान 30वां है। राज्य में 15.51 करोड़ जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र में रहती है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 77.72 प्रतिशत है।
  • भारत के नगरों में निवास करने वाली कुल जनसंख्या का 11.80 प्रतिशत जनसंख्या उत्तर प्रदेश के नगरों में निवास करती है। कुल नगरीय जनसंख्या की दृष्टि से भारत में उत्तर प्रदेश का स्थान महाराष्ट्र के बाद दूसरा है। ऐसा अनुमान व्यक्त किया जा रहा है कि वर्ष 2021 तक प्रदेश में नगरीकृत जनसंख्या 5.83 करोड़ हो जाएगी।
  • उत्तर प्रदेश में देश की सबसे बड़ी नगर प्रणाली है। इसमें 630 नगरपालिकाएँ हैं। बावजूद इसके प्रदेश में नगरीकरण के स्तर में काफी अनियमितताएं हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश में जहाँ एक ओर पश्चिमी क्षेत्रों में 32.45 प्रतिशत नगरीय जनसंख्या (सबसे अधिक) निवास करती है, वहीं पूर्वी क्षेत्र में मात्र 13.40 प्रतिशत जनसंख्या (सबसे कम) नगरों में रह रही है। प्रदेश के केन्द्रीय और बुंदेलखण्ड क्षेत्र में नगरीय जनसंख्या क्रमशः 20.06 प्रतिशत और 22.74 प्रतिशत निवास करती है, जो पूर्वी क्षेत्र से काफी अधिक है। स्पष्ट है कि प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में स्थित अनेक नगरों-जौनपुर, सुल्तानपुर, देवरिया, सुल्तानपुर, कुशीनगर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, मऊ, बलिया, सोनभद्र, संत कबीर नगर, बहराइच, बस्ती, कौशाम्बी, चंदौली आदि में आर्थिक विकास की गति बेहद धीमी होने से यहां औद्योगिकीकरण नहीं हो पा रहा है, जिससे रोजगार और उच्च शिक्षा की तलाश में यहां से लोगों का बड़ी संख्या में अन्य नगरों में पलायन हो रहा है।
  • दूसरी तरफ नगरीय आबादी में निरन्तर हो रही बढ़ोत्तरी यह बताती है कि प्रदेश में आगरा, मुरादाबाद, मेरठ, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद, नोएडा, वाराणसी, गोरखपुर जैसे बड़े नगर काफी तेजी से विकास कर रहे हैं। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि वर्ष 1951 में जिन शहरों की नगरीकृत जनसंख्या प्रदेश में मात्र 33.71 प्रतिशत थी, वह 2011 में बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई है। इसके अतिरिक्त प्रथम श्रेणी के नगर 1991 में 14 थे जो बढ़कर 2001 में 54 तथा 2011 में 64 हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त मेट्रोपॉलिटन सिटी की संख्या प्रदेश में 06 (2001 में) से बढ़कर 07 (2011 में) हो गई है।
  • जनगणना 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश में 10 लाख से अधिक नगरीय जनसंख्या वाले जिलों की संख्या 12 है।
इसके अतिरिक्त प्रदेश में नगर निगम क्षेत्र के आधार पर 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों की संख्या 7 है-
  • लखनऊ (2.82 मिलियन)
  • कानपुर नगर (2.77 मिलियन)
  • गाजियाबाद (1.64 मिलियन)
  • आगरा (1.58 मिलियन)
  • मेरठ (1.31 मिलियन)
  • वाराणसी (1.20 मिलियन)
  • प्रयागराज (1.12 मिलियन)
जनगणना के आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रदेश का नगरीकरण काफी तेजी से हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश के गांवों एवं छोटे नगरों से लोग रोजगार एवं अच्छी शिक्षा की तलाश में बड़े शहरों की तरफ तेजी से पलायन कर रहे हैं। हालांकि इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि प्रदेश के अंदर क्षेत्रीय असमानता व्यापक रूप से विद्यमान है। प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में शहरीकरण तथा पूर्वी क्षेत्र में शहरीकरण की दर में लगभग 20 प्रतिशत का वृहद अंतर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में नगरीकरण से संबंधित अनेक समस्यायें मौजूद हैं।
कुछ महत्वपूर्ण समस्याएं इस प्रकार हैं-

शहरी आवास की कमी

‘आवास’ प्रत्येक व्यक्ति के लिए मूलभूत आवश्यकता है। नगर में निवास करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिये एक आवास की व्यवस्था करना राज्य का सामाजिक दायित्व है। उत्तर प्रदेश में यह दायित्व सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। नगरीय क्षेत्रों में आवास की कमी एक गंभीर समस्या है, जो न सिर्फ उत्तर प्रदेश जैसे राज्य, बल्कि सम्पूर्ण देश में विद्यमान है। हालांकि प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना एवं इसके ही तर्ज पर प्रदेश में आरम्भ की गयी मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना के माध्यम से प्रत्येक परिवार को आवास उपलब्ध कराने के वृहद प्रयास जारी हैं।
इसके अतिरिक्त दिव्यांगजन हेतु भवनों के आवंटन में 3 प्रतिशत के आरक्षण को बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे अपना आवास प्राप्त करने का उन्हें नया अवसर प्राप्त होगा। प्रदेश सरकार ने दुर्बल आय वर्ग के लिए आगामी एक वर्ष में 4 लाख भवनों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है।

भौतिक अवसंरचना पर दबाव

नगरीय क्षेत्रों में बढ़ती जनसंख्या के कारण शहर के भौतिक अवसंरचना प्रणाली पर अधिक भार पड़ रहा है। नगरों में ड्रेनेज, सीवरेज सॉलिड वेस्ट प्रबंधन और जलापूर्ति को नियमित रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। नगर निगमों में जल आपूर्ति कनेक्शन मात्र 50 प्रतिशत घरों तक उपलब्ध है। शेष घर स्वच्छ पेय जल से वंचित है। मात्र 20 प्रतिशत नगरीय क्षेत्रों में सीवरेज प्रणाली के तहत सर्विस प्रदान की जा रही है। ऐसे में सरकार के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती शहरी नागरिकों को मूलभूत सेवाएँ उचित लागत पर प्रदान करना है, जिसके लिए शासन-प्रशासन निरन्तर प्रयासरत है।
  • प्रदेश के नगरों को स्वच्छ रखने तथा वहां रहने वाले व्यक्तियों को स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध कराने की दृष्टि से प्रदेश सरकार द्वारा अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जिलों को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्ति) घोषित किया जा चुका है।
  • स्मार्ट सिटी मिशन के तहत प्रदेश के बारह शहरों लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, गाजियाबाद, रामपुर, सहारनपुर, बरेली, झांसी, मुरादाबाद तथा अलीगढ़ में ₹ 20 हजार करोड़ की परियोजनाओं को स्वीकृत किया गया है।
  • प्रदेश सरकार ने केन्द्र द्वारा स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित 10 नगर निगमों के अतिरिक्त 7 अन्य नगर निगमों अयोध्या, गोरखपुर, मेरठ, गाजियाबाद, फिरोजाबाद, मथुरा-वृंदावन तथा शाहजहांपुर को राज्य स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित कर इनके विकास की योजनाएं आरम्भ की हैं।

शहरी परिवहन

उत्तर प्रदेश के ज्यादातर शहरों में शहरी परिवहन की समस्या देखने को मिलती है। इस समस्या से लोगों के आवागमन और शहरी क्षेत्रों के विकास पर काफी प्रभाव पड़ा है। प्रदेश सरकार सभी बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को सुदृढ़ करने में प्रयासरत है। इस संबंध में बहुत-सी पहलें शुरू की जा चुकी हैं। प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और मेरठ जैसे शहरों में व्यापक गतिशील योजनाओं जैसे- इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया गया है। इसके अतिरिक्त लखनऊ तथा गाजियाबाद में प्रथम चरण में मेट्रो रेल सेवा को स्थापित किया गया है। कानपुर नगर एवं आगरा में मेट्रो सेवा शुरू करने के लिए निर्माण कार्य जारी हैं। वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, झांसी और गोरखपुर में मेट्रो रेल सेवा शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।

सर्वाधिक नगरीय जनसंख्या वाले पांच जिले

जिले जनसंख्या
गाजियाबाद 31,62,547
लखनऊ 30,38,996
कानपुर नगर 30,24,195
आगरा 20,24,195
मेरठ 17,59,182

न्यूनतम नगरीय जनसंख्या वाले पांच जिले

जिले जनसंख्या
श्रावस्ती 38,649
चित्रकूट 96,332
कौशाम्बी 1,24,456
संत कबीर नगर 1,28,531
महराजगंज 1,34,730

सर्वाधिक नगरीय जनसंख्या प्रतिशत वाले पांच जिले

जिले प्रतिशतता
गाजियाबाद 67.6
लखनऊ 66.2
कानपुर 65.8
गौतमबुद्ध नगर 59.1
मेरठ 51.1

न्यूनतम नगरीय जनसंख्या प्रतिशत वाले पांच जिले

जिले प्रतिशतता
श्रावस्ती 3.5
कुशीनगर 4.7
महराजगंज 5.0
सुल्तानपुर 5.3
प्रतापगढ़ 5.5

नगरीकरण के चलते प्रदेश में होने वाली समस्याओं में बढ़ती स्लम आबादी, पर्यावरणीय समस्या जैसे-जल एवं ध्वनि प्रदूषण, भूमि पर बढ़ता दबाव, अतिक्रमण, औद्योगिक कचरे का निस्तारण, बेहतर सड़कें आदि विद्यमान हैं। यद्यपि शहरी स्थानीय निकाय अपने कार्यों के निर्वहन हेतु प्रयासरत हैं किंतु इन समस्त समस्याओं के निवारण हेतु क्षमतावर्धन करना एवं आधुनिक तकनीक को सुदृढ़ बनाना आवश्यक है, जिससे शहरों की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
कानपुर मेट्रो रेल परियोजना- भारत सरकार द्वारा अनुमोदित करते हुए इसकी लागत ₹ 11,076 करोड़ स्वीकृत की गयी है। परियोजना की कुल लम्बाई 32 किमी है।
कानपुर मेट्रो पर कार्य आरम्भ हो चुका है। प्रदेश सरकार द्वारा परियोजना के लिए ₹ 358 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित है।
आगरा मेट्रो रेल परियोजना- भारत सरकार द्वारा ₹ 8379 करोड़ की लागत से अनुमोदित की गयी है। इसकी कुल लम्बाई 29 किमी है। प्रदेश सरकार द्वारा परियोजना हेतु ₹ 286 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित है।
प्रदेश सरकार के बजट 2020-21 के अनुसार लखनऊ, प्रयागराज, आगरा, गाजियाबाद, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, मथुरा एवं शाहजहांपुर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का निर्णय लिया गया है। इसके लिए 700 से अधिक बसों की व्यवस्था की जा रही है।

प्रदूषण की समस्या

उत्तर प्रदेश के नगरों में प्रदूषण की समस्या बेहद गंभीर है। वाहनों की बढ़ती संख्या, वायु, ध्वनि आदि ने प्रदूषण का स्तर बढ़ा दिया है। गैर-सरकारी संगठन ग्रीन पीस इण्डिया की ताजा रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद, बरेली, प्रयागराज, मुरादाबाद और फिरोजाबाद की हवा बेहद खराब बताई गयी है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के यह 6 नगर भारत के सर्वाधिक प्रदूषित 10 नगरों में शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त प्रदेश के 16 नगरों को वायु प्रदूषण की दृष्टि से बेहद खतरनाक स्थिति में माना गया है। ये नगर हैं - लखनऊ, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद, नोएडा, खुर्जा (बुलंदशहर), फिरोजाबाद, अनपरा (सोनभद्र), गजरौला (बिजनौर), झांसी, मुरादाबाद, रायबरेली, बरेली तथा मेरठ। प्रदेश सरकार द्वारा इन 16 नगरों में हॉट स्पॉट अर्थात् सर्वाधिक प्रदूषण वाले क्षेत्र चिन्हित किये जा रहे हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में गठित एयर क्वालिटी मानीटरिंग कमेटी इन नगरों पर निगरानी रख रही है। यहां बड़ी निर्माण परियोजनाओं में पीटीजेड (पैन टिल्ट जूम) कैमरे लगाकर उसका ओपन ऐक्सेस प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं।

ग्रामीण क्षेत्र से पलायन के कारण

ग्रामीण समस्याओं का एक बड़ा कारण है ग्रामीण लोगों का संकेन्द्रित समूहों में न रहना। इस कारण वहां चिकित्सा, बाजार, बैंकिंग, शिक्षा, मनोरंजन आदि आधारभूत सुविधाएं कम उपलब्ध हो पाती हैं। आधारभूत संरचना एवं रोजगार के अवसरों के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अनेक गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उनके सामने कई सामाजिक समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के निवासी बड़ी संख्या में शहर की तरफ पलायन कर रहे हैं।

नगरों की सामाजिक समस्याएं

नगरीय समस्याएँ जनसंख्या के अत्यधिक केन्द्रीयकरण के कारण उत्पन्न होती हैं। शहरों में गन्दी बस्तियाँ, बेरोजगारी, अपराध, भिक्षावृत्ति, मादक द्रव्यों का सेवन, वायु प्रदूषण आदि समस्याएं घनी आबादी और अतिव्यस्त जीवन सम्बन्धी परिस्थितियों के परिणाम हैं। शहरों में अत्यधिक भीड़ रहने के कारण किसी को पता नहीं चलता कि पड़ोस का दूसरा व्यक्ति क्या कर रहा है। शहरी व्यक्तियों पर कोई सामाजिक दबाव न होने से विचलन की दर बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त नगरीय जीवन में आत्मनिर्भरता इतनी अधिक है कि एक भाग में पैदा हुई गड़बड़ी दूसरे भाग को निष्क्रिय बना देती है। सफाई मजदूरों, यातायात कर्मचारियों या दुकानदारों द्वारा की जाने वाली हड़तालें इसका उदाहरण हैं। इन सभी क्रियाओं के कारण शहरों में सामाजिक समस्याएँ जन्म लेती हैं और सम्पूर्ण समाज को प्रभावित करती हैं।

दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UPPSC, UPSSSC, UP Police, UP Lekhpal, RO/ARO और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।