उत्तर प्रदेश में पर्यटन संबंधी मुद्दे एवं संभावनाएं
- भारतीय पर्यटक सांख्यिकी 2020 में उत्तर प्रदेश ने 23.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया है। तमिलनाडु (21.3 प्रतिशत) द्वितीय और तमिलनाडु (10.2 प्रतिशत) तृतीय स्थान पर है।
- विदेशी पर्यटकों की संख्या के आधार पर उत्तर प्रदेश का स्थान वर्ष 2020 में देश के प्रदेशों में तीसरा रहा।
- अनुमान के अनुसार 2019 में राज्य में लगभग 53 करोड़ देशी पर्यटक और 47 लाख विदेशी पर्यटक आये। इनमें से लगभग 24 करोड़ भारतीय और 10 लाख विदेशी पर्यटक कुंभ मेले में सम्मिलित हुए।
- उत्तर प्रदेश में पर्यटन के विकास की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को 'पर्यटन नीति, 2016' के माध्यम से उद्योग का दर्जा प्रदान किया गया है।
उत्तर प्रदेश: पर्यटन परिदृश्य एवं संभावनाएं
देशी पर्यटकों को आकर्षित करने में UP का भारत में प्रथम स्थान (2020 सांख्यिकी)।
वर्ष 2024 में सर्वाधिक पर्यटकों का आगमन। 2023 (48 करोड़) की तुलना में ~17 करोड़ की वृद्धि।
वर्ष 2024 में 16.44 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद आज भी 'आगरा' है।
प्रमुख पर्यटन नीतियां (Flowchart)
ग्रामीण 'विलेज स्टे' योजना, होटलों के लिए 40 करोड़ तक की सब्सिडी, साहसिक पर्यटन पर जोर।
1950 से पूर्व निर्मित ऐतिहासिक किलों, हवेलियों और महलों को 3 श्रेणियों में 'हेरिटेज होटल' में बदलना।
अधिकतम 6 कमरे/12 बेड। 7 दिन तक ठहरने की सुविधा। स्थानीय रोजगार व सस्ती आवास सुविधा।
पर्यटकों का आगमन: 2023 बनाम 2024 (तुलनात्मक तालिका)
| पर्यटन स्थल | 2023 में श्रद्धालु/पर्यटक | 2024 में श्रद्धालु/पर्यटक | विदेशी पर्यटक (2024) |
|---|---|---|---|
| अयोध्या | 5.75 करोड़ | 16.44 करोड़ | 26,048 |
| वाराणसी | 10.18 करोड़ | 11 करोड़ से अधिक | 3,09,932 |
| मथुरा | 7.79 करोड़ | 9 करोड़ से अधिक | 1,36,079 |
| प्रयागराज | 4.67 करोड़ | 5.12 करोड़ | - |
| आगरा | - | 1.77 करोड़ | 14.65 लाख (सर्वाधिक) |
हेरिटेज होटल्स की 3 श्रेणियां
- निर्माण काल: 1950 से पहले
- कमरों की संख्या: न्यूनतम 5 कमरे
- निर्माण काल: 1935 से पहले
- कमरों की संख्या: न्यूनतम 15 कमरे
- निर्माण काल: 1935 से पूर्व
- कमरों की संख्या: न्यूनतम 25 कमरे
महत्वपूर्ण कॉरिडोर एवं पर्यटन परियोजनाएं
बरेली के 7 प्राचीन शिव मंदिरों (अलखनाथ, मढ़ीनाथ, तपेश्वर नाथ आदि) को जोड़कर 6-लेन रोड और थीम आधारित सौंदर्यीकरण।
7 सीमावर्ती जिलों के 35 गांवों का चयन। प्रत्येक में 10 होमस्टे। थारू जनजाति हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजनों का प्रोत्साहन।
गंगा नदी से मंदिर तक 320 मीटर लंबा और 20 मीटर चौड़ा मार्ग। संग्रहालय, वैदिक-विज्ञानशाला और घाटों का भव्य विकास।
जापान के सहयोग से भावी बुद्ध 'मैत्रेय' की कांस्य प्रतिमा की स्थापना। कुशीनगर में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से पर्यटन को उड़ान।
उत्तर प्रदेश में पर्यटन के विविध रूप
| पर्यटन का प्रकार | संक्षिप्त विवरण एवं प्रमुख स्थल |
|---|---|
| चिकित्सा पर्यटन (Medical) | गोरखपुर में 'आयुष विश्वविद्यालय'। 50-बेड वाले एकीकृत आयुष चिकित्सालय (उन्नाव, हरदोई, मिर्जापुर)। |
| पर्यावरणीय (Eco-Tourism) | दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, चंबल सेंचुरी, सुरहाताल और नवाबगंज पक्षी विहार। |
| साहसिक व नाइट सफारी | मथुरा व विंध्याचल में हॉट एयर बैलून/पैराग्लाइडिंग। नोएडा में देश की इकलौती नाइट सफारी योजना। |
| माइस (MICE) पर्यटन | व्यापारिक बैठकों (Meetings, Incentives, Conventions, Exhibitions) हेतु विशेष सुविधाएं व समझौते। |
| कारावान (Caravan) | घर जैसी सुविधाओं वाली गाड़ी (RV)। बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में विशेष कारावान पार्क। |
प्रमुख पर्यटन परिपथ (Tourism Circuits)
पर्यटन प्रोत्साहन की अन्य योजनाएं
प्रवासी भारतीयों (मॉरीशस, फिजी आदि) को उनके पैतृक गांव और जड़ों से जोड़ने की योजना।
अयोध्या/मथुरा जैसे शहरों में 3-5 कमरे वालों को प्रतिदिन ₹1200-1500 आय का अवसर।
पर्यटन शोधार्थियों को 1 वर्ष के लिए ₹40,000 प्रतिमाह मानदेय।
राजमार्गों पर पर्यटन सुविधाएं विकसित करने पर पूंजीगत व्यय में 30% तक की भारी सब्सिडी।
पर्यटन संस्थान एवं प्रशासनिक व्यवस्था
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग
- केन्द्रीय योजना, राज्य योजना और जिला योजना के माध्यम से राज्य में पर्यटन की आधारभूत संरचना के विकास हेतु योजनाएं बनाना।
- पर्यटन सर्किटों/स्थलों की पहचान करना।
- जिला योजना के अंतर्गत ऐसे पर्यटन स्थलों का विकास जहां प्रतिवर्ष लगभग 50,000 पर्यटक आते हैं।
- मुख्य पर्यटन सर्किटों और पर्यटकों द्वारा वर्ष भर भ्रमण किये जाने वाले स्थलों का राज्य योजना के अंतर्गत विकास।
- उत्तर प्रदेश को एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देना।
- पर्यटकों के लिए आधारभूत संरचना का विकास।
- पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए मेलों, त्यौहारों और सेमिनारों का आयोजन करना।
- राज्य की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं को संरक्षण और बढ़ावा देना।
- रोजगार निर्माण, गरीबी उन्मूलन, स्वच्छता मिशन और पूंजी निवेश जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर पर्यटन को एक उद्योग के रूप में स्थापित करना।
- पर्यटकों के लिए पर्यटन से सम्बन्धित पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराना।
पर्यटकों की प्रथम पसंद बना उत्तर प्रदेश
- उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय पर्यटकों का प्रथम आकर्षण का केन्द्र बन गया है। वर्ष 2024 में लगभग 64.90 करोड़ देशी विदेशी पर्यटक उत्तर प्रदेश आए। पर्यटकों में सर्वाधिक संख्या अयोध्या आने वालों की रही।
- वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश आने वाले पर्यटकों की संख्या 48 करोड़ थी। 2025 में आयोजित प्रयागराज महाकुंभ में 66 करोड़ 21 लाख से अधिक श्रद्धालु पर्यटक उत्तर प्रदेश पहुंचे।
- पर्यटन विभाग के अनुसार प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या 2023 की तुलना में 2024 में लगभग 17 करोड़ बढ़ी।
- विदेशी पर्यटकों में भी यूपी के प्रति आकर्षण बढ़ा है। एक वर्ष के भीतर उत्तर प्रदेश आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगभग 7 लाख की वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 में यहां 22,69,067 विदेशी पर्यटक आए, जबकि 2023 में 16,01,503 विदेशी पर्यटक यूपी आए थे।
- अयोध्या में वर्ष 2024 में 16.44 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 5.75 करोड़ थी। इस प्रकार एक वर्ष अयोध्या पहुंचने वाले में पर्यटको की संख्या 10.68 करोड़ बढ़ गयी।
- अयोध्या के बाद पर्यटकों की पसंद वाराणसी-मथुरा बनी हुई है। वाराणसी में वर्ष 2024 में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पर्यटक पहुंचे, जबकि 2023 में 10.18 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे। मथुरा में 2024 में 9 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जबकि 2023 में यह संख्या 7.79 करोड़ थी।
- प्रयागराज में वर्ष 2024 में 5.12 करोड़ पर्यटक आए, जबकि 2023 में 4.67 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे।
- विदेशी पर्यटकों की पसंद के मामले में आगरा आज भी प्रथम स्थान पर है। यहां 2024 में कुल 1.77 करोड़ पर्यटक आए जिनमें 14.65 लाख विदेशी पर्यटक थे।
- वाराणसी में कुल 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आए, जिनमें 3,09,932 पर्यटक विदेशी थे।
- कुशीनगर में कुल 22,42,913 पर्यटक आए, जिनमें 2,51,251 विदेशी पर्यटक थे।
- मथुरा में वर्ष 2024 में 9 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आए, जिनमें 1,36,079 विदेशी पर्यटक थे।
- अयोध्या में 16.44 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे, जिनमें 26,048 विदेशी पर्यटक थे।
उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विभाग
- प्रमुख पर्यटन स्थलों पर होटलों एवं अतिथि गृह का निर्माण।
- उत्तर प्रदेश टूअर्स का संचालन।
- अन्य राज्यों से व्यवसायिक समन्वय।
- विभिन्न कार्यक्रमों, उत्सवों और महोत्सवों के आयोजन में सहयोग।
- विभिन्न जिलों में गोवर्धन पूजा के दौरान मथुरा में हेलीकॉप्टर परिक्रमा के लिए हेलीपैड का विकास करना।
- साहसिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हॉट एयर बैलून और पैराग्लाइडिंग जैसी सुविधाओं का विकास करना।
- वन्य जीव अभयारण्यों और पक्षी विहारों में पर्यटन अधिसंरचना का विकास करना।
उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति, 2022
- पर्यटन स्थलों पर पुराने घरों को 'विलेज स्टे' योजना के तहत नया स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
- गांवों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन नीति में अनेक नई व्यवस्थाएं की गई हैं। गांव के इच्छुक लोग अपने मकानों को होटल, लॉज के रूप में विकसित कर सकेंगे।
- पर्यटन स्थलों पर स्टेडियम बनाने की मंजूरी प्रदान की गई है।
- नई पर्यटन नीति में होटल उद्योग को विस्तार देने हेतु निवेश आधारित सब्सिडी की व्यवस्था की गई है।
- इसके अंतर्गत ₹10 करोड़ तक के निवेश पर ₹2 करोड़ तथा ₹500 करोड़ से अधिक निवेश पर 40 करोड़ तक सब्सिडी देने का प्रावधान है।
- नई पर्यटन नीति में रामायण व महाभारत सर्किट के साथ ही साहसिक पर्यटन गतिविधियों पर जोर दिया गया है। रोजगार सृजन से संबंधित नई इकाइयों की स्थापना पर सब्सिडी का प्रावधान इस नीति में सम्मिलित है।
- नई नीति में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दिया गया है।
- आध्यात्मिक और वाइल्ड लाइफ के साथ ईको टूरिज्म सर्किट से आगरा को जोड़ा जाएगा।
- नई पर्यटन नीति में आध्यात्मिक सर्किट के अंतर्गत आगरा के बटेश्वर को सम्मिलित किया गया है। यमुना किनारे निर्मित शिव मंदिरों की श्रृंखला के साथ स्थानीय शौरीपुर स्थित जैन मंदिर को जोड़ा गया है।
- नई नीति में चंबल सेन्चुरी और सूर सरोवर पक्षी विहार को ईको टूरिज्म का केन्द्र बनाने की बात कही गयी है। यहां सर्दियों में प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियां आती हैं। चंबल सेन्चुरी में मगरमच्छ, घड़ियाल, डॉल्फिन आदि पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनते हैं।
- क्रॉफ्ट सर्किट में आगरा का मार्बल, इनके कार्य तथा जरदोजी से संबंधित सजावट को सम्मिलित किया गया है। आगरा आने वाले पर्यटक मार्बल से बने ताजमहल के मॉडल तथा अन्य सामान पसंद करते हैं। आगरा से प्रतिवर्ष 1500 करोड़ का हैंडीक्राफ्ट निर्यात होता है।
- उत्तर प्रदेश में वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तथा अयोध्या के राम जन्मभूमि तीर्थ यात्रा की तर्ज पर बरेली में नाथ कॉरिडोर विकसित किया जायेगा।
- बरेली में भगवान शिव, अलखनाथ मंदिर, मढ़ीनाथ, तपेश्वर नाथ, धोपेश्वरनाथ, पशुपतिनाथ तथा बनखंडीनाथ के सात मंदिर हैं। इन्हें जोड़ते हुए नाथ कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है।
- बरेली विकास प्राधिकरण ने नाथ कॉरिडोर का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।
- नाथ कॉरिडोर में 6 लेन की रोड के साथ ही फुटपाथ का भी निर्माण कराया जायेगा। यहां इलेक्ट्रिक बस तथा ई-रिक्शा की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
- प्रस्ताव के अनुसार नाथ कॉरिडोर के अंतर्गत भगवान शिव के लिए बनाए गए मंदिरों को नये सिरे से तैयार किया जाएगा। यहां आवश्यक बुनियादी सुविधाएं बढ़ायी जा रही हैं।
- नाथ कॉरिडोर के अंतर्गत आने वाले सभी चौराहों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसके लिए भगवान शिव पर आधारित थीम तैयार की गयी है।
- कॉरिडोर में दुकानें, वेद-विज्ञानशाला, सामुदायिक भवन, सहायता केंद्र, नियंत्रण कक्ष, संग्रहालय, यज्ञशाला, मुमुक्षु भवन आदि को सम्मिलित किया गया है।
- मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार के दौरान लगभग 60 मंदिर और अनेक मूर्तियां प्राप्त हुयी हैं। इनमें से तीन मंदिरों का वर्णन स्कन्द पुराण के काशी खंड में प्राप्त होता है।
उत्तर प्रदेश में चिकित्सा पर्यटन
- प्राकृतिक चिकित्सा, योग, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी तथा एलोपैथी चिकित्सा विधि से उपचार कराने प्रतिवर्ष विभिन्न राज्यों तथा विदेशों तक से लोग बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश आते हैं।
- नेपाल एवं बिहार की सीमा पर स्थित गोरखपुर में प्रदेश के प्रथम 'आयुष विश्वविद्यालय' की स्थापना और इसकी ओपीडी आरंभ हो जाने से यहां अन्य राज्यों तथा कई देश के लोग चिकित्सीय लाभ के लिए पहुंचने लगे हैं।
- उत्तर प्रदेश में आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी नेचुरोपैथी आदि) विधि से इलाज की प्रक्रिया तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
- प्रदेश में चिकित्सा पर्यटन को प्रोत्साहित करने हेतु मुख्यमंत्री द्वारा 7 मार्च, 2024 को बस्ती, बलिया, जालौन और रायबरेली में 50 बिस्तरों वाले एकीकृत आयुष अस्पतालों, 226 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, प्रयागराज और झांसी में छात्राओं के लिए पांच ई-लाइब्रेरी, राज्यभर में विभिन्न 19 होम्योपैथिक और 14 आयुर्वेदिक विभागों में निर्माण परियोजनाओं सहित 271 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया, जिनका कुल बजट ₹238 करोड़ है।
- उत्तर प्रदेश में आयुर्वेद, होम्योपैथ, यूनानी एवं प्राकृतिक चिकित्सा के अलग-अलग अस्पताल एवं केन्द्र बनाए जा रहे हैं। एक ही कैंपस में तीन विभागों के अस्पताल बनाये जा रहे हैं।
- उन्नाव, श्रावस्ती, हरदोई, संभल, गोरखपुर तथा मीरजापुर में 50-50 बेड वाले एकीकृत आयुष चिकित्सालयों की स्थापना की जा रही है।
- गोरखपुर में 50 एकड़ में ₹300 करोड़ की लागत से आयुष विश्वविद्यालय तैयार हो चुका है। इसका शिलान्यास 28 अगस्त, 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा किया गया था।
- उत्तर प्रदेश में पीजीआई एवं राममनोहर लोहिया जैसे उच्च कोटि के चिकित्सा केंद्रों के अतिरिक्त 65 चिकित्सा महाविद्यालय हैं, जहां इलाज कराने देश-विदेश के विभिन्न भागों से लोग आते हैं।
- उत्तर प्रदेश में दो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)- गोरखपुर एवं रायबरेली में हैं, जहां बड़ी संख्या में लोगों को चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं।
उत्तर प्रदेश की हेरिटेज पर्यटन नीति
- हेरिटेज होटल: न्यूनतम 5 कमरों से युक्त व 1950 से पहले निर्मित।
- हेरिटेज क्लासिक: न्यूनतम 15 कमरों से युक्त व 1935 से पहले निर्मित।
- हेरिटेज ग्राण्ड: न्यूनतम 25 कमरों से युक्त व 1935 से पूर्व निर्मित।
- लग्जरी कर और मनोरंजन कर से नगरीय क्षेत्रों में 10 वर्ष और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 वर्ष के लिए छूट।
- पूंजी निवेश, ब्याज और गैर-परम्परागत ऊर्जा साधनों, जनरेटर और विशेष विद्युत आपूर्ति लाइन में निवेश पर सब्सिडी।
- स्टैम्प ड्यूटी, भू-उपयोग, परिवहन शुल्क, आबकारी लाइसेंस शुल्क और परिवहन शुल्क में छूट।
- सड़क सम्पर्क मार्ग: राज्य सरकार हेरिटेज होटलों के लिए बेहतर और कब्जा युक्त लिंक रोड की व्यवस्था को प्राथमिकता देगी।
- राज्य सरकार इन हेरिटेज स्थलों का पर्यटन साहित्य और वेबसाइट द्वारा प्रचार करेगी।
पर्यावरणीय पर्यटन नीति
- मौजूदा कानूनों के अनुरूप: सभी पर्यावरणीय पर्यटन गतिविधियां केन्द्र व राज्य सरकार के कानूनों, सुझावों और गाइडलाइन के अनुरूप होनी चाहिए।
- संरक्षण केंद्रित: जंगल क्षेत्रों और निकटवर्ती पर्यटन स्थलों के लिए पर्यावरणीय पर्यटन योजनाओं के संरक्षण पर जोर।
- समुदाय आधारित: स्थानीय समुदायों की सहभागिता और उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने पर जोर दिया जाएगा। पर्यावरणीय पर्यटन का प्रकार और तरीका स्थानीय समुदाय के पर्यावरण और सामाजिक सांस्कृतिक लक्षणों के अनुरूप होगा।
- जागरूकता: सभी वर्गों और उम्र के लोगों के बीच पर्यावरणीय जागरूकता पैदा करना।
- अवसंरचना विकास: पर्यटक स्थलों में पहले से मौजूद अवसंरचना को प्राथमिकता। इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि कोई भी नई अवसंरचना स्थानीय संस्कृति पर कम-से-कम प्रभाव डाले।
- प्रचार-प्रसार की नीति: सर्वे और विश्लेषण के आधार पर प्रचार-प्रसार नीति तैयार की जाएगी। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग करते हुए उत्तर प्रदेश को एक बहुमुखी पर्यावरणीय पर्यटन स्थल के रूप में प्रचारित किया जाएगा।
- क्षमता विकास: आतिथ्य प्रचार, सांस्कृतिक विरासत और उसके व्याख्यान के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान कर स्थानीय समुदाय की क्षमता के विकास पर बल दिया जायेगा।
पर्यावरणीय पर्यटन
हेरिटेज पर्यटन
सांस्कृतिक पर्यटन
शिल्प, हथकरघा और वस्त्र पर्यटन
बौद्ध पर्यटन के विकास को समर्पित योजनाएं
- मैत्रेय प्रोजेक्ट: बौद्ध धर्म में बुद्ध के छह: आध्यात्मिक स्वरूपों की परिकल्पना की गयी है, जिन्हें 'बोधिसत्व' कहा गया। कुल छह: बोधिसत्वों में अंतिम नाम है- 'मैत्रेय' जिन्हें भावी बुद्ध के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसी नाम पर बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में जापान के सहयोग से 'मैत्रेय' (भावी बुद्ध) की एक कांसे की प्रतिमा लगाने की महत्वाकांक्षी परियोजना है। परियोजना स्थल महापरिनिर्वाण मंदिर और रामभर स्तूप के बगल में स्थित है। कुशीनगर इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बुद्ध के महापरिनिर्वाण और महायान बौद्ध मान्यताओं के अनुरूप भविष्य में आने वाले बुद्ध के जन्म का स्थान है।
- परियोजना के अंतर्गत एक शिक्षण संस्थान, चिकित्सालय, ध्यान मंडप, उद्यान, तालाब, बुद्ध विहार और कुछ अन्य सुविधाएं तैयार की जाएंगी।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने 2003 में 'मैत्रेय परियोजना ट्रस्ट' (एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन) के साथ परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, किन्तु परियोजना को लेकर स्थानीय किसानों द्वारा 'भूमि बचाओ संघर्ष समिति' के अंतर्गत लगातार विरोध किया जाता रहा। राज्य सरकार ने 2019 में ज्ञापन समझौते को स्थगित कर दिया और अब राज्य का पर्यटन विभाग परियोजना का क्रियान्वयन करेगा।
- कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: केन्द्रीय कैबिनेट द्वारा 2020 में कुशीनगर को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा प्रदान कर दिया गया है।
- इससे राज्य में बौद्ध सर्किट के अंतर्गत पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। बौद्ध धर्म के चार सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में से एक कुशीनगर बौद्ध परिपथ को अन्य स्थलों से जोड़ता है। नेपाल में लुम्बिनी, सिद्धार्थनगर में पिपरहवा, श्रावस्ती और सारनाथ, कुशीनगर के समीप स्थित है।
- इन परियोजनाओं में बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की संभावना निहित है। कुशीनगर में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की मौजूदगी, विशेष रूप से पास के एशियाई देशों यथा म्यांमार, श्रीलंका, वियतनाम आदि, पर्यटकों को आकर्षित करेगी। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से प्रदेश एवं देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी तथा स्थानीय जनता के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
साहसिक पर्यटन
- पैराग्लाइडिंग, जिप लाइनिंग जैसे साहसिक स्पोर्ट्स का विकास करना।
- साहसिक खेलकूदों के लिए प्रशिक्षण संस्थान और अकादमी के निर्माण में सहयोग।
- साहसिक खेलकूदों और संबंधित गतिविधियों के संचालन व प्रशासन में सहयोग।
कारावान पर्यटन
- कारावान-घर जैसी सुविधाओं से युक्त एक गाड़ी होती है, जहां पर्यटक पूरे टूर के दौरान रह सकते हैं।
- बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में कारावान पार्कों की पहचान।
- व्यवसायियों के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बैठक कर समझौते करना।
वेलनेस पर्यटन
- आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथिक) के विशेष केंद्रों की पहचान।
- अंतर्राष्ट्रीय योग कान्क्लेव का आयोजन।
ग्रामीण पर्यटन
- विशेष प्रकार के हस्तशिल्प, संगीत, नृत्य और कला से संबंधित ग्रामों की पहचान व उनकी अवसंरचना का विकास।
- विशिष्ट गांवों का शहरी एवं विदेशी पर्यटकों के बीच प्रचार।
खेलकूद पर्यटन
- प्रमुख खेलकूद सुविधाओं, यथा-बुद्ध अंतर्राष्ट्रीय सर्किट (ग्रेटर नोएडा), गोल्फ कोर्स (नोएडा व लखनऊ) बैडमिंटन अकादमी (लखनऊ), अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम (लखनऊ और कानपुर) को प्रोत्साहन।
- रेवाइन मोटर स्पोर्ट्स की शुरुआत।
- कुश्ती, कबड्डी आदि पारंपरिक खेलकूदों को बढ़ावा।
- खेलकूद पर्यटन के विकास के लिए बुंदेलखंड और विंध्य संभावित स्थल हैं।
होमस्टे नीति, 2025
- उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 3 जून, 2025 को होमस्टे नीति 2025 को स्वीकृति प्रदान कर दी। इसके अंतर्गत पर्यटकों को धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर सस्ते आवास की सुविधाएं मिलेंगी।
- योजना के तहत होमस्टे में छह कमरे और 12 बेड तक की अनुमति होगी।
- इस नीति से पर्यटकों को सुविधा और स्थानीय लोगों को रोजगार प्राप्त होंगे।
- योजना के तहत प्रदेश के 229 स्थलों को चिह्नित किया गया है। इस नीति के अंतर्गत होम स्टे संचालकों को नीति के दायरे में पर्यटकों को होम स्टे की सुविधा उपलब्ध करानी होगी, जिससे उनकी आय बढ़ेगी।
- होम स्टे नीति के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति अपने घरों में एक से 6 कमरों तक की इकाई को होमस्टे के रूप में पंजीकृत करा सकता है। इसके तहत, अधिकतम 12 बेड की अनुमति होगी। कोई भी पर्यटक लगातार सात दिन तक इस सुविधा का लाभ ले सकता है।
- अनुमति की प्रक्रिया जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की अगुवाई वाली समिति के माध्यम से पूरी की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में होम स्टे इकाइयों के लिए ₹500 से 750 तक का पंजीकरण शुल्क लिया जाएगा।
- राज्य में अभी तक ऐसी कोई नीति न होने के कारण होम स्टे संचालकों को केंद्र सरकार के निधि प्लस पोर्टल पर पंजीकरण कराना पड़ता था।
- अयोध्या मंडल में 19, सुल्तानपुर, बाराबंकी व अमेठी में 12, वाराणसी, गाजीपुर व चंदौली में 10, लखनऊ मंडल में 23, देवीपाटन में 17, चित्रकूट में 24, रायबरेली, लखीमपुर खीरी, हरदोई में 17 होम स्टे को पर्यटन विभाग की तरफ से मंजूरी दी जा चुकी है।
हेरिटेज आर्क
उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'हेरिटेज आर्क यात्रा' की शुरुआत की है। इसका मूल उद्देश्य है- 'यात्रा का हर पल आनन्द उठाना'। हेरिटेज आर्क के अंतर्गत सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक हेरिटेज को महत्व दिया जाता है। इसके अंतर्गत वाराणसी, लखनऊ और आगरा क्षेत्रों और इसके चारों ओर स्थित मनोरम स्थलों की यात्रा करायी जाती है। हेरिटेज आर्क के तीन प्रमुख केन्द्रों और उनसे जुड़े दर्शनीय स्थलों के नाम इस प्रकार हैं:
| केन्द्र का नाम | जुड़े दर्शनीय स्थल |
|---|---|
| आगरा | आगरा, फतेहपुर सीकरी, बरसाना, बटेश्वर, चम्बल अभयारण्य, इटावा लॉयन सफारी, गोकुल, नंदगांव, मथुरा, वृंदावन |
| लखनऊ | लखनऊ, अयोध्या, बिठूर, देवा शरीफ, दुधवा, कतरनिया घाट वन्य जीव अभयारण्य, नैमिषारण्य, नवाबगंज पक्षी विहार |
| वाराणसी | वाराणसी, सारनाथ, विंध्याचल, सोनभद्र, चुनार, कुशीनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती |
सीमावर्ती गांवों में बनेंगे 'टूरिस्ट विलेज'
- उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सीमावर्ती सात जिलों के गांवों को पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर लाने की महत्वपूर्ण योजना तैयार की है।
- योजना के अन्तर्गत संबंधित सीमावर्ती जिलों के 35 गांवों को 'टूरिस्ट विलेज' के रूप में विकसित किया जाएगा।
- योजना से न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होंगे, बल्कि पर्यटकों को उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं, खान-पान और जैव विविधता का आनंद लेने का अवसर भी मिलेगा।
- राज्य महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जैसे सीमावर्ती गांवों को इस योजना के तहत विकसित किया जाएगा।
| क्र. सं. | संस्था | स्थापना वर्ष |
|---|---|---|
| 1. | राज्य पर्यटन निदेशालय | 1972 |
| 2. | उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम | 1974 |
| 3. | मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान, चिनहट, लखनऊ | 1991 |
| 4. | ब्रज तीर्थ विकास परिषद | 2015 |
- सिद्धार्थनगर: दुल्हासुमाली, बजहा, खुनुवां, कोटिया, घरुआर।
- बलरामपुर: इमलिया कोडर, चंदनपुर, नरिहवा, पहाड़ापुर, बेलभरिया।
- लखीमपुर खीरी: बनकटी, छिदिया, पूरब मजरा, हिम्मतनगर, पिपरौला, पुरैना, सिगंहिया।
- बहराइच: बद्रिया, आम्बा, कारीकोट, फकीरपुरी, विशुनापुर।
- श्रावस्ती: लालपुर, कुसमहवां, मोतीपुर कला, कटकुईयां, मेढकिया, बेलहरी।
- पीलीभीत: नौजल्हा, नकटहा, गभिया, सहराई, ढकिया, महाराजपुर, मटैंइया, लालपुर।
- महराजगंज: भेड़िहारी, इटहिया, गिरहिया, तरैनी, चण्डीथान.
- इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक चयनित गांव में 10-10 होम स्टे यूनिट स्थापित किया जाएगा, जहां पर्यटक ग्रामीण परिवेश में रहकर स्थानीय संस्कृति, जीवनशैली और परंपराओं का अनुभव कर सकेंगे।
- स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को पारंपरिक व्यंजन बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे पर्यटक स्थानीय स्वाद का आनंद ले सकेंगे। इससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
- योजना के तहत थारू जनजाति के सुंदर हस्तशिल्प उत्पादों को स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से प्रचारित किया जाएगा, जिससे कारीगरों की आय बढ़ेगी।
- गांवों की परंपराएं, परिधान और जैव विविधता को संरक्षित कर पर्यटकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
| योजना/कार्यक्रम | विवरण |
|---|---|
| कानपुर और लखनऊ में तितली पार्क | प्राणी उद्यानों में तितली पार्क स्थापित करने से जैव संरक्षण के प्रयासों के साथ-साथ पर्यावरणीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। |
| ताजगंज परियोजना | इसे 2014 में शुरू किया गया। इसके अंतर्गत ताजमहल के चारों ओर के क्षेत्र तथा ताजमहल को जाने वाले मार्गों के विकास और सौन्दर्यीकरण की योजना है। |
| गोल्ड ट्रिपल्स कार्ड | सरकारी स्वामित्व वाले होटलों में विशेष छूट प्रदान कर पर्यटन को बढ़ावा देना। |
| हेरिटेज वॉक | इसके द्वारा क्षेत्र के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की एक अनुभवी गाइड के साथ यात्रा कर स्थानीय संस्कृति और हेरिटेज को महसूस कराने का प्रयास किया जाता है। योजना प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी में सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है। |
| हॉस्पिटैलिटी एंड फेमिलियराइजेशन विजिट | इसके द्वारा पर्यटन स्थलों को यात्रा वृत्तांत लेखकों, ट्रैवल एजेंटों तथा पर्यटन से जुड़े अन्य लोगों के बीच बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है। |
| उत्तर प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय पक्षी महोत्सव | यह राज्य में पर्यावरणीय पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु आयोजित किया जाता है। 2018 में दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में पक्षी महोत्सव का आयोजन किया गया था। इससे पहले पक्षी महोत्सव चंबल अभयारण्य में आयोजित हुए थे। |
पर्यटन क्षेत्र में होटलों, ढाबा को सब्सिडी देगी सरकार
- उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा और पर्यटकों को बेहतर सुविधा देने पर्यटन मार्ग पर के उद्देश्य से विद्यमान होटलों और ढाबा संचालकों को अनुदान देने का निर्णय लिया है।
- योजना के तहत राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले रास्तों पर ढाबा, मोटल, फूड प्लाजा, एसी शौचालय व कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाओं के विकास के लिए 30 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। इससे न सिर्फ पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
- योजना के तहत निजी जमीन, मैरिज लॉन, पेट्रोल-डीजल पंप परिसर या अन्य उपयोगी परिसरों में ढाबा और अन्य पर्यटन सुविधाएं स्थापित करने पर सरकार अनुदान देगी। इन सुविधाओं के निर्माण के लिए जमीन खरीदने पर रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी में पूरी छूट दी जाएगी। निर्माण लागत (पूंजीगत व्यय) पर भी 30 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी।
पर्यटन पर शोध के लिए 40 हजार प्रतिमाह मिलेंगे
- पर्यटन में रूचि रखने वाले शोधार्थियों (रिसर्चस) को उत्तर प्रदेश सरकार ₹40 हजार प्रतिमाह मानदेय प्रदान करेगी। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए मान्यता प्राप्त संस्थानों अथवा विश्वविद्यालय से कम से कम 60 प्रतिशत अंक के साथ ग्रेजुएशन और उच्च शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए।
- योजना के अन्तर्गत 40 वर्ष की आयु तक के लोग लाभ ले सकते हैं। इस योजना में पर्यटन, संस्कृति, इतिहास जैसे विषयों में काम करने वाले रिसर्चर्स चयन किया जाएगा। रिसर्चर्स को डीएम, डिविजनल कमिश्नर और टूरिज्म डिपार्टमेंट के अधिकारियों की निगरानी में काम करना होगा।
- मुख्यमंत्री टूरिज्म फेलोशिप कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश सरकार द्वारा पारिश्रमिक व क्षेत्र भ्रमण के लिए मानदेय ₹40000 दिए जाएंगे।
- चयनित शोधार्थियों को एक वर्ष तक योजना का लाभ मिलेगा।
- उत्तर प्रदेश सरकार टूरिज्म के इस फेलोशिप का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों के माध्यम से पर्यटन विभाग द्वारा योजनाओं का पर्यवेक्षण, अनुसरण व परिस्थितियों से जुड़े हुए स्थलों का विकास करना है।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में अयोध्या, वाराणसी, मथुरा-वृंदावन जैसे धार्मिक नगरी तथा अन्य प्रमुख पर्यटक स्थलों पर 'पेइंग-गेस्ट योजना' आरंभ किया है।
- योजना का उद्देश्य पर्यटकों को स्थानीय स्तर पर घर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही क्षेत्रीय निवासियों के लिए रोजगार एवं अवसर का अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध कराना है। फिलहाल इसके अन्तर्गत अयोध्या में आने वाले पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है।
- अयोध्या जैसी धार्मिक नगरी अथवा अन्य पर्यटक शहरों में यदि किसी के पास 3 से 5 कमरे का मकान है तो वह इस योजना के तहत प्रतिदिन ₹1200 से 1500 तक की आय अर्जित कर सकते हैं।
- योजना का बड़ा लाभ यह है कि अयोध्या अथवा अन्य धार्मिक नगरी में आने वाले पर्यटकों को इसके माध्यम से घर जैसी सुविधाएं प्राप्त होंगी। पर्यटक अयोध्या की संस्कृति और सभ्यता से सन्निकट परिचित हो सकेंगे।
- योजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं को ठहरने के साथ-साथ भोजन आदि की भी व्यवस्था घर एवं स्थानीय परंपरा के अनुरूप प्राप्त होगी।
- अयोध्या में 50 भवन स्वामियों को इस योजना के अंतर्गत विकास प्राधिकरण द्वारा स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री पर्यटक विकास सहभागिता योजना
- उत्तर प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पर्यटन की दृष्टि से एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थल का चयन कर उसे उच्च स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना प्रदेश सरकार ने तैयार की है।
- कार्यक्रम में 50-50 प्रतिशत सहभागिता के आधार पर मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना के अंतर्गत पर्यटन स्थलों को विकसित किया जायेगा।
- योजना के तहत एक क्षेत्र में एक से अधिक पर्यटन स्थलों के विकास के लिए प्रस्ताव भेजा जा सकता है।
- इस योजना के परिणामस्वरूप स्थानीय एवं घरेलू पर्यटकों के आवागमन में लगातार वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
- उत्तर प्रदेश के लगभग प्रत्येक जनपद में महत्वपूर्ण धार्मिक, आध्यात्मिक, पौराणिक, प्राचीन सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं। इन विविध आकर्षणों को विश्व के नक्शे पर स्थापित करने एवं अधिक-से-अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यह नयी योजना प्रदेश सरकार द्वारा लाई गई है।
- चयनित पर्यटक स्थलों पर सैलानियों एवं श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं सृजित की जायेंगी। इसके माध्यम से पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों को आकर्षित करने के प्रयास किए जाएंगे।
- मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना के अंतर्गत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सांसद (लोक सभा एवं राज्य सभा), विधायक (विधानसभा/विधानपरिषद), नगर निकायों के अध्यक्ष तथा निजी क्षेत्र के सीएसआर, निजी व्यक्ति/प्रवासी भारतीय, एनजीओ एवं ट्रस्ट द्वारा पर्यटन विकास एवं निर्माण की जो परियोजनाएं राज्य सरकार/पर्यटन विभाग के समक्ष प्रस्तुत की जायेंगी, उन परियोजनाओं के डीपीआर में उल्लिखित लागत न्यूनतम ₹25 लाख तथा अधिकतम ₹5 करोड़ होगी, में 50 प्रतिशत धनराशि की व्यवस्था पर्यटन विभाग द्वारा की जायेगी। शेष 50 प्रतिशत धनराशि सांसद द्वारा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, विधायक द्वारा अपनी विधायक निधि, नगर निकायों, ग्राम पंचायतों द्वारा अपनी निधियों के अंतर्गत तथा पौराणिक व धार्मिक स्थलों की प्रबंध समिति/ट्रस्ट, ख्याति प्राप्त एनजीओ, कॉरपोरेट फर्म, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अथवा निजी क्षेत्र के सीएसआर के अंतर्गत कन्वर्जेंस प्रस्ताव दिए जा सकेंगे।
- प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पर्यटन स्थल के विकास से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
राज्य में पर्यटन की योजनाएं
- पर्यटक पुलिस: यात्रियों की सुरक्षा के लिए राज्य में 'पर्यटक पुलिस' स्थापित की गई है। इनको प्रयाग, वाराणसी, मथुरा और अयोध्या समेत लगभग सभी प्रमुख पर्यटक स्थलों पर तैनात किया जाएगा। आगरा की भांति वाराणसी, अयोध्या, मथुरा और प्रयाग में विशेष पर्यटन पुलिस चौकियां स्थापित की जायेंगी। पर्यटक पुलिस बल में महिलाओं की संख्या बढ़ाकर महिला पर्यटकों की सुरक्षा निश्चित की जाएगी।
- वन स्टॉप ट्रैवल सोल्यूशन: इस माध्यम से एक पोर्टल के अंदर ही होटल, हवाई यात्रा, रेलयात्रा, टैक्सी, बस आदि बुक कराने की सुविधा होगी। यह जर्मन, फ्रेंच, जापानी, कोरियन, मराठी, हिन्दी और अंग्रेजी समेत कुल 8 भाषाओं में उपलब्ध होगी।
उत्तर प्रदेश प्रो-पुअर पर्यटन विकास परियोजना
- पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में कई पर्यटन केंद्रों पर पर्यटकों को रोप-वे कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान की जाएगी। पर्यटन विभाग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी है।
- रोप-वे परियोजना के तहत पहले चरण में चित्रकूट स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम और महोबा के गोरख गिरी पर्वत पर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर के लिए यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। दोनों परियोजनाओं के लिए क्रमश: 8,920 वर्ग मीटर तथा 9,750 वर्ग मीटर भूमि चिह्नित करने का काम पूरा कर लिया गया है।
- उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 'वन ट्रिलियन डॉलर' की बनाने के लिए सरकार पर्यटन को प्रोत्साहन दे रही है। सरकार के लिए यह आय का बड़ा स्रोत है। बड़ी मात्रा में इससे विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। यही कारण है कि प्रदेश सरकार राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए रोप-वे कनेक्टिविटी से लेकर हवाई कनेक्टिविटी तक की योजनाओं पर सरकार कार्य कर रही है।
नए हवाई अड्डों का विकास
डिस्कवर योर रूट्स
रामायण, महाभारत और बौद्ध सर्किट से आकर्षित किया जाएगा पर्यटकों को
सात जिलों को जोड़कर बनेगा नया धार्मिक सर्किट
- सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में एक नए धार्मिक सर्किट की घोषणा की है। इस नये सर्किट में सात प्रमुख जिले शामिल होंगे, जिनके नाम है- प्रयागराज, काशी (वाराणसी), चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर और भदोही।
- आध्यात्मिक सर्किट निर्माण का उद्देश्य संबंधित क्षेत्र की विशिष्ट आध्यात्मिक पहचान को सुरक्षित करना है। इस निर्माण से मंदिरों, रीति-रिवाजों और परंपराओं के संरक्षण में सहायता मिलेगी।
- धार्मिक सर्किट के विकास को पूरा करने के लिए क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। गंगा एक्सप्रेस-वे का विस्तार प्रयागराज से मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, चंदौली और गाजीपुर तक किया जाएगा। इसी प्रकार, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की कनेक्टिविटी वाराणसी और चंदौली से सोनभद्र तक किया जाएगा। इसके साथ ही गंगा नदी पर छह लेन का पुल, प्रयागराज को झांसी से जोड़ने वाला चार लेन का पुल और यमुना नदी पर सिग्नेचर ब्रिज का निर्माण कराया जाएगा।
बौद्ध सर्किट
इको-टूरिज्म
शक्तिपीठ सर्किट
आध्यात्मिक पर्यटन
सूफी सर्किट
जैन सर्किट
शिल्प सर्किट
स्वतंत्रता संग्राम सर्किट
बुंदेलखंड सर्किट
उत्तर प्रदेश में पर्यटन की संभावनाएं
- ऐतिहासिक धरोहर स्थल: उत्तर प्रदेश में एक तरफ जहां ताजमहल (आगरा), लालकिला (आगरा) तथा फतेहपुर सिकरी जैसे यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल हैं, वहीं धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की एक लंबी श्रृंखला भी विद्यमान है। यहां देश-विदेश से प्रतिवर्ष करोड़ों व्यक्ति शांति एवं अध्यात्म की तलाश में पहुंचते हैं।
- धार्मिक पर्यटन: बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन ने तीव्र गति पकड़ा है। अयोध्या, वाराणसी (काशी), प्रयागराज, विंध्याचल, चित्रकूट, नैमिषारण्य, मथुरा-वृंदावन, गोरखपुर, बटेश्वर धाम, गढ़मुक्तेश्वर, शुक्रतीर्थ धाम, लखनऊ तथा मां शाकुंभरी देवी कुछ ऐसे प्रमुख स्थल हैं, जहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक अपने आराध्य का दर्शन-पूजन करने पहुंचते हैं।
- बौद्ध स्थल: हिन्दू धार्मिक स्थलों के साथ-साथ बौद्ध स्थलों के संबंध में भी उत्तर प्रदेश काफी समृद्ध है। बुद्ध के जीवन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण स्थल यहां विद्यमान हैं। इसमें प्रमुख हैं- बुद्ध का गृह क्षेत्र 'कपिलवस्तु' (बुद्ध ने अपने आरंभिक जीवन के 29 वर्ष यहां बिताये), ननिहाल 'देवदह' (वर्तमान महाराजगंज जनपद अन्तर्गत निचलौल क्षेत्र), ससुराल 'रामग्राम', (रामग्राम कोलीय गणराज्य की राजधानी थी, जिसकी पहचान वर्तमान गोरखपुर क्षेत्र के रूप में की जाती है), धर्मचक्र प्रवर्तन स्थल 'सारनाथ', (जहां बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया), श्रावस्ती (जहां बुद्ध ने सर्वाधिक उपदेश दिये/सर्वाधिक वर्षाकाल बिताया), महापरिनिर्वाण स्थली (कुशीनगर), संकिसा (पालि ग्रंथों के अनुसार बुद्ध यहीं स्वर्ग से उतरे थे) आदि।
- जैन धर्म स्थल: उत्तर प्रदेश में जैन धर्म तथा इसके तीर्थंकरों से जुड़े अनेक पवित्र स्थल विद्यमान हैं, जहां जैन अनुयायी बड़ी संख्या में श्रद्धा के साथ पर्यटन करने पहुंचते हैं। उत्तर प्रदेश के प्रमुख जैन धर्म स्थल हैं- काशी (तेइसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ की जन्म स्थली), अयोध्या (प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का जन्म स्थान), मथुरा (द्वितीय शताब्दी ई.पू. में जैन धर्म का प्रभावी क्षेत्र रहा), पावा (कुशीनगर जनपद) तथा सारनाथ आदि।
- पारिस्थितिकी पर्यटन स्थल: उत्तर प्रदेश में अच्छे ईको-टूरिज्म स्थल हैं। लखीमपुर खीरी क्षेत्र अन्तर्गत दुधवा राष्ट्रीय उद्यान से लगाई कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य तक के घने जंगलों में प्रकृति के अद्भुत नजारे देखने को मिलते हैं, जिसका आनंद लेने बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। यहां बाघों, हाथियों और गैंडा को खुले में घूमते देखना चमत्कृत करने वाला होता है।
- पीलीभीत टाइगर रिजर्व में रॉयल बंगाल टाइगर्स एवं कतरनियाघाट में मायावी गंगा डॉल्फिन की उपस्थिति पर्यटकों को आकर्षित करती है।
उत्तर प्रदेश में पर्यटन परिपथ
- रामायण परिपथ: अयोध्या, नंदीग्राम, चित्रकूट, श्रृंगेशवपुर
- बौद्ध परिपथ: कपिलवस्तु, कुशीनगर, संकिसा, सारनाथ, श्रावस्ती।
- बुंदेलखंड परिपथ: बिठूर, चित्रकूट, झांसी, कलिंजर, महोबा।
- ब्रज परिपथ: आगरा, मथुरा, वृंदावन।
- अवध परिपथ: लखनऊ, देवा शरीफ, नैमिषारण्य, अयोध्या।
- विंध्य: वाराणसी परिपथ - वाराणसी, चुनार, विंध्याचल।
- पर्यावरणीय पर्यटन परिपथ: दुधवा, पीलीभीत, कतरनिया घाट।
- महाभारत परिपथ: हस्तिनापुर, काम्पिल्य, मथुरा, अहिच्छत्र।
- कृष्ण परिपथ: मथुरा, वृंदावन, गोकुल, बरसाना और नंदगांव।
- जैन परिपथ: मेरठ, आगरा, कौशाम्बी, वाराणसी, देवरिया, अयोध्या, श्रावस्ती और फर्रुखाबाद।
- सूफी परिपथ: फतेहपुर सीकरी, रामपुर, बदायूँ, बरेली, लखनऊ, काकोरी, देवा शरीफ, बहराइच, इलाहाबाद, किछौछा शरीफ, सैय्यद कड़कशाह दरगाह और कान्तित शरीफ दरगाह।
- कांवड़ परिपथ: बागपत, गाजियाबाद, गोंडा, लखीमपुर खीरी, कलिंजर और अयोध्या।
- शक्तिपीठ परिपथ: विंध्याचल, देवीपाटन, नैमिषारण्य, बलरामपुर, वाराणसी, प्रयागराज, सोनभद्र और सहारनपुर।
- स्वतंत्रता संग्राम परिपथ: बिठूर, काकोरी, मेरठ व अन्य छावनियां।

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