अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा और मानव तस्करी की चुनौतियां (उत्तर प्रदेश)

अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा और मानव तस्करी की चुनौतियां

उत्तर प्रदेश और नेपाल के बीच की खुली सीमा महज दो देशों को बांटने वाली कोई लकीर नहीं, बल्कि 'रोटी-बेटी' के सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों का जीवंत प्रतीक है। लेकिन वक्त के बदलाव के साथ, शांति और मित्रता की इस खुली सीमा ने कई गंभीर और जटिल चुनौतियों को भी जन्म दिया है। आज यह क्षेत्र मानव तस्करी के बदलते स्वरूप, जाली नोटों की अवैध खेप, शातिर अपराधियों की शरणस्थली और आतंकवाद के वित्तपोषण जैसी राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों का एक संवेदनशील केंद्र बन चुका है। इस विस्तृत लेख में हम भारत-नेपाल सीमा प्रबंधन, मानव तस्करी के काले सच, दोनों देशों के बीच की प्रत्यर्पण संधि और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस दिशा में उठाए गए कड़े कदमों (जैसे- एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थानों की स्थापना) का गहराई से और प्रामाणिक विश्लेषण करेंगे।
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भारत-नेपाल सीमा: सुरक्षा एवं मानव तस्करी

भारत-नेपाल सीमा की रूपरेखा

  • कुल लम्बाई: 1751 किमी
  • सीमावर्ती राज्य: बिहार, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम।
  • सीमा स्वरूप: पूर्व में पहाड़ी, दक्षिण में मैदानी तथा पश्चिम में नदी (महाकाली) क्षेत्र।

1950 की शांति एवं मित्रता संधि

  • दोनों देशों के बीच खुली सीमा का प्रावधान।
  • नागरिकों को बिना वीजा/पासपोर्ट आवाजाही की छूट।
  • रोजगार, निवास, व्यापार और सम्पत्ति स्वामित्व में समान विशेषाधिकार।

खुली सीमा का प्रभाव एवं सुरक्षा चुनौतियाँ

1950 शांति एवं मित्रता संधि
(खुली सीमा)
बिना बाड़ की सीमा व
बेरोकटोक आवाजाही
सुरक्षा खतरे उत्पन्न
(तस्करी, जाली मुद्रा, ड्रग्स)

नेपाल सीमा से मानव तस्करी के मुख्य कारण

सामाजिक-आर्थिक कारण

  • नेपाल में भारी गरीबी एवं बेरोजगारी।
  • जनता में शिक्षा एवं जागरूकता की कमी।
  • गहरी सामाजिक-आर्थिक असमानता।
  • भारत में बेहतर रोजगार के अवसर।

प्रशासनिक व भौगोलिक कारण

  • उत्तर प्रदेश तथा नेपाल के मध्य खुली सीमा।
  • सरकारी नीतियों का खराब कार्यान्वयन।
  • सुरक्षा बलों एवं एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी।

अन्य प्रमुख कारण

  • नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता एवं आपसी संघर्ष।
  • अत्यधिक जनसंख्या तथा आंतरिक प्रवास।
  • तस्करों द्वारा आकर्षक नौकरी का झूठा लालच।

मानव तस्करी रोकने के लिये मौजूद कानूनी ढाँचा (भारत)

क्रम कानून / अधिनियम का नाम वर्ष
1 अनैतिक यातायात रोकथाम अधिनियम 1956
2 बाल विवाह पर रोक अधिनियम (PCMA) 2006
3 बंधुआ मजदूर व्यवस्था (उन्मूलन) अधिनियम 1976
4 मानव अंगों का प्रत्यारोपण अधिनियम 1994
5 किशोर न्याय (बच्चों की देख-भाल एवं सुरक्षा) अधिनियम 2015
6 व्यक्तियों की तस्करी (रोकथाम, संरक्षण एवं पुनर्वास) बिल 2018
7 भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धाराएँ 372, 373, 370 तथा 370A

नेपाल सीमा पर अन्य चुनौतियां एवं प्रमुख कदम

अन्य सीमावर्ती अपराध

  • जाली मुद्रा (FICN): अर्थव्यवस्था को नष्ट करने हेतु नेपाल के रास्ते नकली नोटों की तस्करी।
  • आतंकवाद वित्तपोषण: ISI और लश्कर-ए-तैयबा द्वारा नेपाल मार्ग से धन भेजना।
  • अपराधियों का ठिकाना: पुलिस से बचने के लिए भारतीय अपराधियों का नेपाल भागना।

भारत-नेपाल प्रत्यर्पण संधि (1953)

  • अपराधियों को एक-दूसरे को सौंपने पर सहमति।
  • राष्ट्रीयता न होने पर आत्मसमर्पण के लिए बाध्यता नहीं।
  • मुकदमा चलने की स्थिति में समापन तक प्रत्यर्पण नहीं।
  • गिरफ्तारी/आत्मसमर्पण का खर्च सम्बन्धित सरकार वहन करेगी।

यूपी: मानव तस्करी-रोधी पुलिस स्टेशन

  • स्थापना आदेश: 20 अक्टूबर, 2020 (प्रत्येक जिले में)।
  • संख्या: 35 पुरानी इकाइयाँ + 40 नये पुलिस स्टेशन।
  • अधिकार: FIR दर्ज करने और कानूनी कार्यवाही करने की शक्ति।
  • बजट: नए थानों हेतु ₹15 लाख/थाना, पुरानों हेतु ₹12 लाख/थाना।
  • भारत नेपाल के साथ 1751 किमी लम्बी सीमा साझा करता है। भारत के राज्य बिहार, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम की सीमाएं नेपाल के साथ लगी हैं। नेपाल की सीमा का पहाड़ी हिस्सा पूर्व में सिक्किम एवं पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग), दक्षिण में गंगा का मैदान (उत्तर प्रदेश एवं बिहार) तथा पश्चिम में महाकाली नदी (उत्तराखण्ड) के साथ लगता है।
  • जुलाई, 1950 में हस्ताक्षरित शांति एवं मित्रता की भारत-नेपाल संधि दोनों देशों के बीच एक खुली सीमा प्रदान करती है। इस संधि के अंतर्गत पारस्परिक आधार पर एक देश दूसरे देश के नागरिकों को सम्पत्ति के स्वामित्व, व्यापार एवं वाणिज्य में भागीदारी एवं अन्य विशेष प्रकार के मामलों में समान विशेषाधिकार प्रदान करता है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा के प्रावधान का अर्थ है कि दोनो देशों के नागरिकों को एक दूसरे के क्षेत्र में आने जाने के लिये वीजा या पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं है। वे स्वतन्त्र रूप से देश भर में कहीं भी आ-जा सकते हैं, निवास कर सकते हैं तथा साथ ही काम भी कर सकते हैं।
  • भारत-नेपाल सीमा पर सभी स्थान पर विभाजक स्तम्भ मौजूद हैं, लेकिन इनमें से किसी भी सीमा पर बाड़ नहीं लगाई गई है। इससे सीमा पर दोनों तरफ से लोगों की बेरोकटोक आवाजाही बनी रहती है। यह खुली सीमा दोनों देशों के बीच सुरक्षा खतरों, मानव एवं हथियारों की तस्करी, नकली मुद्रा, ड्रग्स एवं उर्वरकों में तस्करी को बढ़ावा देती है।
  • मानव तस्करों द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण मार्गों में उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले की सोनौली सीमा, बिहार के बैरगनिया, रक्सौल एवं नरकटियागंज सीमा शामिल हैं।
  • प्रत्येक वर्ष हजारों नेपाली महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों को अवांछनीय ढंग से सेक्स व्यापार, जबरन मजदूरी और गृह कार्य के लिये भारत में तस्करी किया जाता है।
  • सीमा पार से तस्करी का तरीका अब बदल गया है। पहले तस्कर पीड़ितों का जबरन इस्तेमाल करके धोखा देते थे, किन्तु अब तस्कर सम्भावित पीड़ितों को आकर्षक नौकरी एवं आय का लालच देकर उन्हें सीमा पार करने को कहते हैं। वे सम्भावित पीड़ितों के मनोविज्ञान, मानसिकता एवं उनकी जरूरतों का अध्ययन करके उन्हें सीमा पार कराते हैं। इस प्रकार की तस्करी उत्तर प्रदेश के लिए नई चुनौती बन चुकी है, क्योंकि इसमें पीड़ित अपनी पहचान स्वयं छिपाता है।

नेपाल सीमा से मानव तस्करी के मुख्य कारण

  1. नेपाली लोगों में गरीबी एवं उनमें जागरूकता की कमी।
  2. नेपाल में अशिक्षा एवं बेरोजगारी।
  3. नेपाल में सामाजिक-आर्थिक असमानता।
  4. उत्तर प्रदेश तथा नेपाल के मध्य खुली सीमा।
  5. दोनों देशों में सरकारी नीतियों का खराब कार्यान्वयन।
  6. अत्यधिक जनसंख्या तथा गहन आंतरिक प्रवास।
  7. नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता एवं आपसी संघर्ष।
  8. उत्तर प्रदेश तथा भारत में बेहतर रोजगार के अवसर।

मानव तस्करी

संयुक्त राष्ट्र मानव तस्करी को श्रम या यौन शोषण सहित अनुचित उद्देश्य के लिये अनुचित साधनों (जैसे- बलपूर्वक अपहरण, धोखाधड़ी या जबरदस्ती) द्वारा व्यक्तियों की भर्ती, परिवहन, स्थानांतरण, दोहन या प्राप्ति के रूप में परिभाषित करता है। यह अपराध मानवाधिकारों का उल्लंघन है तथा समय के साथ व्यापार का सबसे उच्च लाभ एवं कम जोखिम वाला रूप लेता जा रहा है। इसकी मांग निरन्तर बढ़ रही है।

मानव तस्करी रोकने के लिये मौजूद कानूनी ढाँचा
मानव तस्करी जैसे अपराध का मुकाबला करने के लिये भारत में निम्नलिखित कानून मौजूद हैं -
  • अनैतिक यातायात रोकथाम अधिनियम, 1956
  • बाल विवाह पर रोक अधिनियम (पीसीएमए), 2006
  • बंधुआ मजदूर व्यवस्था (उन्मूलन) अधिनियम, 1976
  • मानव अंगों का प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994
  • किशोर न्याय (बच्चों की देख-भाल एवं सुरक्षा) अधिनियम, 2015
  • भारतीय दण्ड संहिता की धारा 372,373,370 तथा 370A (आईपीसी)
  • व्यक्तियों की तस्करी (रोकथाम, संरक्षण एवं पुनर्वास) बिल, 2018

इंडो-नेपाल सीमा प्रबंधन

उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र नेपाल की सीमा से अपराधियों के प्रवेश एवं मानव तस्करी करने के लिये सबसे मजबूत क्षेत्र है। भारत सरकार ने नेपाल के साथ खुली सीमा की रक्षा के लिये सशस्त्र सीमा बल (SSB) को तैनात किया है। नेपाल सरकार की तरफ से भी अपनी सीमा पर निगरानी के लिये सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती की गई है। हालाँकि सीमा पर मानव तस्करी के पीड़ितों या संदिग्ध तस्करों के अवरोधन से सम्बंधित प्रक्रियायें संस्थागत नहीं हैं। यह तस्करी का खेल सीमाओं के दोनों ओर से तस्करों द्वारा संयोजित किया जाता है।

नेपाल सीमा पर तस्करी रोकने के उपाय

  • सीमा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये सरकार के पास वृहद विकल्प हैं। इसमें सीमा सुरक्षा बलों की तैनाती, सीमा पर बाड़ निर्माण, सीमा सड़कें, फ्लड लाइट्स की स्थापना, सीमा चौकियों का निर्माण और उन्नत हथियार के साथ सुरक्षा बलों को विशेष वाहन उपलब्ध कराना आदि शामिल हैं।
  • कई वर्षों के प्रयास के बाद भी भारत तथा नेपाल के बीच अपराध एवं मानव तस्करी का जारी रहना दोनों देशों के प्रवर्तन एजेंसियों के लिये एक बड़ी चुनौती बन चुका है। सुरक्षा बल अकेले इन समस्याओं से नहीं निपट सकते हैं। प्रवासी एवं तस्करी के शिकार लोगों के बीच पहचान का अंतर करना सुरक्षा एजेंसियों के लिये बेहद मुश्किल है। यह उन बड़ी संख्या में काम करने वाले आयु वर्ग के संभावित पीड़ितों, जो कि अवैध रूप से एवं असुरक्षित मार्गों द्वारा विदेशों में रोजगार की तलाश करते हैं, के कारण उनकी पहचान करना और भी कठिन बना गया है।
  • नेपाल सीमा पर मानव तस्करी की चुनौती से निपटने के लिये सरकारों, गैर सरकारी संगठनों, नागरिक समाजों, सीमा सुरक्षा बलों एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग की आवश्यकता है।

भारत-नेपाल प्रत्यर्पण संधि

भारत नेपाल ने 2 नवम्बर, 1953 को एक प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए। इस संधि के अंतर्गत निम्नलिखित प्रावधान हैं-
  • दोनों देशों की सरकार एक-दूसरे के अपराधियों, जो दूसरे देश के क्षेत्र में पाया जायेगा, को समर्पित करने के लिये सख्त पारस्परिकता के आधार पर काम करेंगे।
  • कुछ निर्दिष्ट मामलों को छोड़कर, किसी भी ऐसे व्यक्ति को जिनके पास उस देश की राष्ट्रीयता नहीं है, आत्मसमर्पण करने के लिये सरकार बाध्य नहीं करेंगी।
  • यदि किसी एक सरकार द्वारा ऐसे व्यक्ति के प्रत्यर्पण का दावा किया जाता है, जिसके ऊपर दूसरे क्षेत्र में किसी भी अपराध के लिये मुकदमा चल रहा है, तो मुक़दमे के समापन तक तक उसका प्रत्यर्पण नहीं हो सकता।
  • इस संधि के अनुसरण में किसी भी गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण के सम्बन्ध में होने वाले खर्च को सम्बन्धित सरकार द्वारा वहन किया जायेगा।

नेपाल सीमा पर अन्य अपराध एवं चुनौतियां

जाली मुद्रा

नेपाल सीमा से प्रत्येक वर्ष भारत में नकली भारतीय मुद्रा नोटों (Fake Indian Currency Note - FICN) की बड़ी राशि लायी जाती है। इन नकली मुद्राओं को मुख्य रूप से पाकिस्तान द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था को नष्ट करने के लिये भेजा जाता है। विमुद्रीकरण के बाद भारी संख्या में जाली मुद्रा का भारत में नेपाल के रास्ते भेजे जाने का मामला सामने आया था।

आतंकवाद के लिये वित्तपोषण

नेपाल में अनौपचारिक व्यापारियों द्वारा उच्च पकड़ वाले नेटवर्क का उपयोग करके कानूनी नियमों में सेंध लगायी जाती है। इस तरह के कार्य मुख्यतः पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा जैसे उग्रवादी संगठनों द्वारा पैसा प्राप्त करने एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर चोट करने के उद्देश्य से किये जाते हैं। नेपाल में बुनियादी ढाँचे की कमी, कानूनी खामियों और व्यापक भ्रष्टाचार के कारण यह आतंकवादी समूह नेपाल की भूमि का भारत विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त आतंकवादी गतिविधियों एवं भारत विरोधी क्रियाकलापों के लिए नेपाल मार्ग से भारत में बड़ी संख्या में धनराशि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा भेजी जाती है।

नेपाल : अपराधियों का सुरक्षित ठिकाना

नेपाल उत्तर प्रदेश के अपराधियों के लिये एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है। प्रायः देखा जाता है कि कोई अपराधी अपराध करने के बाद कानूनी एजेंसियों एवं पुलिस से बचने के लिए सीमा पार नेपाल चला जाता है। अपराधी, पुलिस, राजनेता और भ्रष्ट अधिकारियों की साठ-गाँठ से प्रायः अपराधियों को ऐसा करने में मदद मिलती है।
यद्यपि भारत-नेपाल ने अपराधियों के आदान-प्रदान के लिये प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किये हैं, लेकिन अपराधियों के भारत से नेपाल भागने की संख्या को कम करने में यह कानूनी एजेंसियों की बहुत मदद नहीं कर पा रहा है।

उत्तर प्रदेश में मानव तस्करी-रोधी पुलिस स्टेशन

  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 20 अक्टूबर, 2020 को महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी की जाँच करने के लिये प्रत्येक जिले में मानव तस्करी रोधी पुलिस स्टेशन स्थापित करने का आदेश जारी किया गया।
  • राज्य में 2011 से 2016 के बीच 35 मानव तस्कर-रोधी इकाईयां स्थापित की गई थीं। सरकार ने शेष जिलों में 40 नये मानव तस्कर रोधी पुलिस स्टेशन स्थापित करने का आदेश दिया है।
  • इन पुलिस स्टेशनों के पास एफआईआर दर्ज करने, जाँच जारी रखने एवं आवश्यक कानूनी कार्यवाही करने की शक्ति होगी।
  • केन्द्र ने 40 नये पुलिस थानों के लिये ₹15 लाख प्रति थाना की दर से धनराशि आवंटित किया है, जो कुल ₹6 करोड़ होगी। पहले से मौजूद 35 मानव तस्करी रोधी पुलिस स्टेशनों के लिये ₹12 लाख प्रति थाना की दर से धनराशि आवंटित की गयी है।

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UPPSC, UPSSSC, UP Police, UP Lekhpal, RO/ARO और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।