उत्तर प्रदेश में गैर-सरकारी संगठन - मुद्दे, योगदान एवं प्रभाव

उत्तर प्रदेश में गैर-सरकारी संगठन - मुद्दे, योगदान एवं प्रभाव

किसी भी सुदृढ़ समाज की नींव केवल सरकारी फाइलों और योजनाओं पर नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा भाव और जनभागीदारी पर टिकी होती है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और सघन आबादी वाले राज्य में, जहाँ प्रशासन के लिए पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना एक बड़ी चुनौती है, वहां गैर-सरकारी संगठन (NGOs) उम्मीद की एक मजबूत किरण बनकर उभरते हैं। इस महत्वपूर्ण लेख में हम यूपी में सक्रिय प्रमुख गैर-सरकारी संगठनों के प्रेरक सफरनामे, स्वास्थ्य, शिक्षा व महिला सशक्तिकरण में उनके अद्वितीय योगदान और एनजीओ सेक्टर से जुड़े अहम जमीनी मुद्दों व चुनौतियों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।
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गैर-सरकारी संगठन (NGO) : एक परिचय
गैर-सरकारी संगठन (NGO)
समाज सेवा से प्रेरित, स्थानीय लोगों की भागीदारी से संचालित संस्थाएं
उद्देश्य एवं भूमिका
महिला, बाल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सुशासन में सरकार के साझेदार
🏢 निजी क्षेत्र
अस्तित्व सरकार से अलग
⚖️ स्वशासी
सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं
🚫 गैर-लाभकारी
निदेशकों को लाभ का हिस्सा नहीं
📝 पंजीकृत / अनौपचारिक
परिभाषित लक्ष्यों के साथ स्थापित
उत्तर प्रदेश में सक्रिय प्रमुख गैर-सरकारी संगठन
अभिनव
📅 1993 📍 मुजफ्फरनगर

स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यरत। ग्रामीण विकास व कृषि प्रौद्योगिकी पर जोर।

🎯 10,000 गरीब परिवारों हेतु निःशुल्क शौचालय निर्माण
दृष्टि
📅 1995 📍 चित्रकूट

दृष्टिहीन बालिकाओं के उन्नयन, शिक्षा एवं स्वावलंबन हेतु समर्पित। दृष्टिहीन संगीत विद्यालय का संचालन।

🎯 दृष्टिहीन बालिकाओं का विवाह व वित्तीय सशक्तिकरण
एमपावरिंग माइंड
📅 2007 📍 गाजियाबाद

शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के क्षेत्र में कार्यरत अनुसंधान सोसाइटी।

🎯 'प्रोजेक्ट ट्रिया' : सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन स्थापना
गुड़िया
📅 1993 📍 वाराणसी

मानव तस्करी और बलात् श्रम जैसी बुराइयों के खिलाफ लड़ रही संस्था। पीड़ितों का पुनर्वास।

🎯 2022 में मानव तस्करी के आरोपियों को सजा दिलाई
हरितिका
📅 1994 📍 झांसी

प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, कृषि प्रबंधन और जल आपूर्ति। बुंदेलखंड को गरीबी व पर्यावरण क्षरण से मुक्ति दिलाना लक्ष्य।

🎯 500 ग्रामों को जल अभाव की समस्या से निजात
इंडियन ड्रीम फाउंडेशन
📅 2005 📍 आगरा

वंचित महिलाओं व बालिकाओं का सशक्तिकरण। "बदलाव, बालिकाओं के साथ शुरू होता है" मुख्य थीम।

🎯 'होनहार लड़की' व 'रेडी टू स्कूल' कार्यक्रम
किरण
📅 1990 📍 वाराणसी

दिव्यांग बालकों के सशक्तिकरण व सर्वांगीण विकास हेतु शिक्षा, व्यावसायिक कौशल और पुनर्वास।

🎯 सर्वश्रेष्ठ एनजीओ हेतु 'लोकमत' सम्मान से सम्मानित
अक्षय पात्र फाउंडेशन
📍 मुख्यालय: बेंगलुरु 📍 यूपी में सक्रिय

कुपोषण मुक्ति व शिक्षा का अधिकार समर्थन। मिड-डे-मील (पीएम पोषण) योजना में सरकार की भागीदार।

🎯 यूपी में 6 किचन, 3,543 विद्यालयों के 2.59 लाख बच्चों को लाभ
साई कृपा
📅 1989 📍 नोएडा

अंजना राजगोपाल द्वारा स्थापित। परित्यक्त व अनाथ बच्चों के सर्वांगीण विकास, शिक्षा और स्नेह के लिए समर्पित।

🎯 'बाल कुटीर' घर व 'साई शिक्षण संस्थान' का संचालन
श्रमिक भारती
📅 1986 📍 कानपुर

ग्रामीण व शहरी वंचित समुदायों में गरीबी उन्मूलन, महिला व बाल विकास हेतु सतत प्रयास।

🎯 सामुदायिक रेडियो स्टेशन 'वक्त की आवाज' का संचालन
विद्या एंड चाइल्ड
📅 1998 👤 सुप्रिया अखौरी

2 बच्चों के साथ शुरू हुई यह संस्था वंचित बच्चों के लिए सीखने का माहौल व शिक्षा सुलभ कराती है।

🎯 मान्यता प्राप्त स्कूल द्वारा 1500+ वंचित बच्चों को शिक्षा
हमसफर & वात्सल्य
📍 लखनऊ (दोनों संस्थाएं)

हमसफर: हिंसा पीड़ित महिलाओं हेतु कानूनी/सामाजिक सहायता।
वात्सल्य: झुग्गी झोपड़ी व ग्रामीण बच्चों हेतु स्वास्थ्य सेवाएं।

🎯 ई-रिक्शा प्रशिक्षण (हमसफर) व बाल लैंगिक समानता (वात्सल्य)
एनजीओ: प्रभाव एवं चुनौतियाँ
✅ सकारात्मक पक्ष / योगदान ⚠️ आलोचनाएँ / चुनौतियाँ
  • कमजोर एवं वंचित वर्गों का सशक्तिकरण कर उन्हें बेहतर भविष्य देना।
  • सरकारी पहुँच से दूर क्षेत्रों (घरेलू हिंसा, पर्यावरण, पशु क्रूरता) में जरूरतमंदों की सहायता।
  • सरकार और निजी क्षेत्र के मध्य एक मजबूत 'सेतु' (Bridge) के रूप में कार्य करना।
  • औपचारिकताओं (Red Tapism) की कमी के कारण त्वरित एवं बृहद स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन।
  • फंड एवं संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता का अभाव एवं राजनीतिज्ञों का नियंत्रण।
  • अधिकारियों/विभागों को अनुचित लाभ देने से कार्य की लागत बढ़ना और लाभार्थियों को कम लाभ मिलना।
  • विदेशी/बाहरी फंडिंग पर निर्भरता के कारण स्वायत्तता और निष्पक्षता का प्रभावित होना।
  • समाज सेवा के नाम पर व्यक्तिगत स्वार्थसिद्धि तथा मूल लक्ष्य/उद्देश्य से भटक जाना।
  • एक ही क्षेत्र में कई संस्थाओं के कार्य करने से धन का व्यय और अनावश्यक कार्यों का दोहराव।

गैर-सरकारी संगठन

  • गैर सरकारी संगठन (NGO) समाज सेवा की भावना से प्रेरित सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों द्वारा संचालित संस्थाएं होती हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं, बच्चों, वंचितों, दिव्यांगों तथा समाज के पिछड़े वर्गों के कल्याण तथा विकास हेतु स्थानीय लोगों की भागीदारी के साथ विभिन्न कार्यक्रम संचालित करना होता है।
  • गैर सरकारी संगठनों (NGOs) को प्रायः सरकार द्वारा अनुदान प्रदान किया जाता है, जिससे वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हुए सरकार के कार्यक्रमों में सहायता प्रदान कर सकें।
  • वैश्विक स्तर पर मान्यता है कि गैर सरकारी संगठन किसी भी लोकतांत्रिक समाज को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
  • गैर सरकारी संगठन सरकार द्वारा नियंत्रित न हो कर अपने कार्यों एवं निर्णयों में आत्मनिर्भर होते हैं।
  • गैर सरकारी संगठन के कार्यों में आर्थिक विकास के साथ सामाजिक मोर्चे पर विकास, जीवन की गुणवत्ता, महिला सशक्तिकरण और बालविकास, शिक्षा तथा नागरिकों के प्रति जागरूकता शामिल है।

उपयोगिता एवं योगदान

  • सुशासन की अवधारणा में सरकार से यह अपेक्षा की जाती है, कि वह शासन संबंधी निर्णयों तथा उनके कार्यान्वयन के लिए बहु-हितधारक दृष्टिकोण अपनाते हुए सभी के हित में कार्य करे।
  • वर्तमान युग में सरकार, लोक-कल्याण एवं विकासात्मक कार्यक्रमों तथा विनियमन आदि जैसी अनेक गतिविधियों में शामिल है।
  • प्रायः यह देखा जाता है कि सरकार पर जिम्मेदारियों एवं विभिन्न दायित्वों का बोझ होता है, जिनकी पूर्ति के दौरान सरकार तकनीकी, वित्तीय तथा मानव संसाधनों की कमी के कारणवश गंभीर संकटों का सामना करती है।
  • संसाधनों की कमी एवं सुशासन की अवधारणा सरकारों को नेट वर्किंग दृष्टिकोण अपनाने की तरफ प्रेरित करती है, जहां सरकार निजी संस्थाओं तथा गैर सरकारी संगठनों (NGO) एवं अन्य हित धारकों के साथ एक साझेदार के रूप में कार्य करती है। सरकार योजनाओं के कार्यान्वयन, निगरानी आदि कार्यों में इन संस्थाओं को भागीदार बनाती है।

गैर सरकारी संगठन (NGO) की सामान्यतः निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं -
  • यह परिभाषित लक्ष्यों और उद्देश्यों के साथ पंजीकृत संगठन या अनौपचारिक समूह होते हैं।
  • यह निजी क्षेत्र से आते हैं, अर्थात् इनका अस्तित्व सरकार से अलग होता है।
  • इन्हें अपने स्वामी या निदेशकों को लाभ का हिस्सा देना नहीं होता है।
  • यह स्वशासी हैं, अर्थात सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं होते।
उत्तर प्रदेश सरकार अपने विभिन्न कार्यक्रमों में सुशासन दृष्टिकोण अपनाते हुए गैर सरकारी संगठनों (NGOs) को बढ़ावा दे रही है।

उत्तर प्रदेश में सक्रिय प्रमुख 'गैर-सरकारी संगठन'

'अभिनव'

  • इस एनजीओ का गठन मुजफ्फरनगर जिले में वर्ष 1993 में किया गया।
  • यह संस्था मुख्यतः स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के क्षेत्र में कार्यरत है। सुरक्षित पेय जल और स्वच्छता पर इसका विशेष ध्यान है।
  • यह संस्था ग्रामीण विकास के कार्यों, जैसे- कृषि प्रौद्योगिकी, वरिष्ठ नागरिकों की सहायता तथा कौशल विकास आदि, माध्यमों से महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य कर रही है।
  • इस संस्था ने मुजफ्फरनगर जिले में दस हजार गरीब परिवारों के लिए निःशुल्क शौचालयों के निर्माण का बीड़ा उठाया है।

'दृष्टि'

  • इस एनजीओ की स्थापना वर्ष 1995 में चित्रकूट जनपद में की गई।
  • यह संस्था मुख्यतः दृष्टिहीन बालिकाओं के उन्नयन हेतु कार्य करती है, उन्हें जीवन के सभी क्षेत्रों में सशक्त एवं स्वावलंबी बनाने का प्रयास करती है, जिससे यह बालिकाएं समाज में सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें।
  • संस्था के मुख्य कार्यों में सम्मिलित है- दृष्टिहीन बालिकाओं के लिए विद्यालय की स्थापना, दृष्टिहीन संगीत विद्यालय, दृष्टिहीन बालिकाओं का विवाह,समारोह तथा उनके लिए वित्तीय सशक्तिकरण संबंधी कार्यक्रम।

एमपावरिंग माइंड विकास और अनुसंधान सोसाइटी

  • यह संस्था वर्ष 2007 में गाजियाबाद जिले में स्थापित की गयी। यह शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, अनुसंधान तथा प्रशिक्षण आदि क्षेत्र में कार्यरत है।
  • संस्था द्वारा संचालित 'प्रोजेक्ट ट्रिया', बालिकाओं तथा महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार, मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने हेतु कार्य करती है।
  • इस 'प्रोजेक्ट ट्रिया' के अंतर्गत सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन स्थापित करना शामिल है।

'गुड़िया'

  • 'गुड़िया' एनजीओ की स्थापना वर्ष 1993 में वाराणसी जनपद में की गई। यह मुख्यतः मानव तस्करी विरोधी संस्था है, जो समाज में व्याप्त बलात् श्रम तथा मानव तस्करी आदि जैसी बुराइयों से लड़ रही है।
  • यह पीड़ित व्यक्तियों के पुनर्वास तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास करती है।
  • यह संस्था वेश्यावृत्ति तथा मानव तस्करी रोकने हेतु देश में एक मजबूत कानून बनाने की मांग कर रही है।
  • संस्था के प्रयास से वर्ष 2022 में मानव तस्करी में संलग्न आरोपियों के दोष सिद्ध हुए तथा उन्हें सजा दिलायी जा सकी।

हरितिका

  • यह संस्था वर्ष 1994 में झांसी जनपद में स्थापित हुई।
  • यह संस्था प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, कृषि तथा फसल प्रबंधन और एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में कार्य करती है।
  • संस्था का विजन बुंदेलखण्ड क्षेत्र को गरीबी, भूख तथा पर्यावरण क्षरण की समस्या से मुक्ति दिलाना है।
  • संस्था के प्रयास से 500 ग्रामों में जल के अभाव संबंधित समस्या से निजात पाया जा सका है।

इंडियन ड्रीम फाउंडेशन

  • इस संस्था की स्थापना वर्ष 2005 में आगरा जिले में की गयी। 'बदलाव, बालिकाओं के साथ शुरू होता है' इस संस्था का ध्येय वाक्य (थीम) है।
  • यह संस्था वंचित तथा पिछड़े वर्ग से संबंधित महिलाओं तथा बालिकाओं के सशक्तिकरण हेतु कार्य करती है, जिससे एक समावेशी तथा संधारणीय समाज की स्थापना की जा सके।
  • संस्था द्वारा संचालित 'होनहार लड़की' तथा 'रेडी टू स्कूल' जैसे कार्यक्रमों से बालिकाओं के स्कूल ड्रापआउट में उल्लेखनीय कमी आयी है।

किरण

  • किरण नामक संस्था की स्थापना वर्ष 1990 में वाराणसी जिले में हुई। इस नाम से आगरा समेत कई अन्य क्षेत्रों में अलग-अलग संस्थाएं सक्रिय हैं।
  • यह सोसाइटी दिव्यांग बालकों के सशक्तिकरण हेतु कार्य करती है।
  • यह संस्था दिव्यांग बालकों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से उन्हें शिक्षा, व्यावसायिक कौशल, पारिवारिक सहयोग, पुनर्वास तथा अन्य सहयोग प्रदान करने का प्रयास करती है।
  • किरण सोसाइटी को अपने उत्कृष्ट कार्य हेतु सर्वश्रेष्ठ एनजीओ के लिए 'लोकमत' सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

अक्षय पात्र फाउंडेशन

  • 'अक्षय पात्र' भारत का एक प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठन है, जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। यह उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में सक्रिय है।
  • यह एनजीओ सरकार द्वारा संचालित मिड-डे-मील (प्रधानमंत्री पोषण) योजना के कार्यान्वयन में भागीदारी करती है।
  • अक्षय पात्र का लक्ष्य भूख तथा कुपोषण का सामना कर रहे सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े विद्यार्थियों के 'शिक्षा का अधिकार' का समर्थन करना है।
  • अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा उत्तर प्रदेश में 6 किचन का संचालन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से यह 3,543 विद्यालयों के 2,59,938 बच्चों को लाभान्वित कर रहा है।
  • फाउंडेशन के किचन वृंदावन, लखनऊ, गोरखपुर, मांट, वाराणसी तथा बरसाना में स्थित हैं।
  • अक्षय पात्र के 62 वें किचन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई, 2022 में वाराणसी में किया।
  • अप्रैल, 2023 में इसके बरसाना (मथुरा) किचन की शुरुआत हुई।

साई कृपा

  • यह एनजीओ वर्ष 1989 में उत्तर प्रदेश के नोएडा जिले में स्थापित किया गया।
  • अंजना राजगोपाल साई कृपा एनजीओ की संस्थापक हैं।
  • साई एनजीओ परित्यक्त बच्चों एवं अनाथों के लिए काम करता है।
  • यह बच्चों के सर्वांगीण विकास का प्रयास करता है। उन्हें घर, शिक्षा, प्यार और स्नेह प्रदान करता है।
  • यह ऐसे परित्यक्त बच्चों के लिए 'बाल कुटीर' घर और 'साई शिक्षण संस्थान' नाम से विद्यालय संचालित कर रहे हैं।

'श्रमिक भारती'

  • श्रमिक भारती नामक संस्था वर्ष 1986 में कानपुर जिले में स्थापित की गयी। गणेश पाण्डे तथा कुछ अन्य लोगों ने मिलकर इस एनजीओ को स्थापित किया।
  • यह एनजीओ वंचित ग्रामीण और शहरी समुदायों में कार्य करती है। इसका लक्ष्य महिलाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ गरीबी उन्मूलन है। यह सभी के लिए अवसरों के साथ सतत विकास पर कार्य कर रहा है।
  • यह संस्था विभिन्न स्थानीय सामुदायिक मुद्दों पर चर्चा के लिए सामुदायिक रेडियो स्टेशन 'वक्त की आवाज' संचालित करती है।

'विद्या एंड चाइल्ड'

  • यह एनजीओ वर्ष 1998 में स्थापित की गयी।
  • सुप्रिया अखौरी ने इस एनजीओ को वर्ष 1992 में मात्र 2 बच्चों के साथ आरंभ किया था। संस्था का मिशन ऐसे बच्चों को शिक्षित करना है, जिनकी शिक्षा तक बहुत कम या कोई पहुंच नहीं है।
  • यह संस्था वंचित बच्चों के लिए सीखने का माहौल बनाने पर कार्य कर रही है।
  • यह संस्था अपने मान्यता प्राप्त स्कूल के साथ यह संस्था 1500 से अधिक वंचित बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रही है, जिनकी पहुंच शिक्षा तक बहुत कम थी। यह संस्था वंचित बच्चों के जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन करने में सक्षम हुई है।

हमसफर

  • हिंसा की शिकार एवं अपनों द्वारा पराया कर दी गयी महिलाओं की सहायता करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य 'हमसफर' नामक संस्था कर रही है।
  • हमसफर की स्थापना नवंबर, 2003 में लखनऊ में की गयी। वर्ष 2008 में यह एक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत हुआ और ट्रस्टियों के एक समूह एवं प्रशिक्षित स्वयंसेवकों द्वारा संचालित किया जा रहा है।
  • यह संस्था महिला (लड़की/महिला/क्वियर/ट्रांसजेंडर आदि) मानवाधिकारों की सुरक्षा हेतु हिंसा से पीड़ित संघर्षशील महिलाओं की सहायता करती है। उन्हें परामर्श, सामाजिक मध्यस्थता, कानूनी परामर्श, कानूनी सहायता व अल्पकालीन आवास आदि सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
  • 'हमसफर' द्वारा वर्तमान में हिंसा पीड़ित महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान कर उसे चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

वात्सल्य

  • यह संस्था बच्चों के स्वास्थ्य क्षेत्र, विशेष रूप से ग्रामीण एवं झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीब एवं वंचित वर्ग, के बच्चों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का कार्य करती है।
  • 'वात्सल्य' बाल जीवन यापन के अधिकारों एवं लैंगिक समानता के क्षेत्र में भी कार्य करती है।
  • इसकी स्थापना 1995 में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कुछ पेशेवरों (Professional) द्वारा की गयी। इसका मुख्यालय इंदिरानगर, लखनऊ में है।

उत्तर प्रदेश में एनजीओ संबंधी मुद्दे एवं प्रभाव

उत्तर प्रदेश समेत देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों में गैर सरकारी संगठनों की उपस्थिति एवं उनकी कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की जाती है।
समाज का एक बड़ा वर्ग एनजीओ के पक्ष में सकारात्मक विचार रखते हुए इसे समाज के लिए आवश्यक एवं उपयोगी मानता है, जबकि कुछ अन्य लोग इसे अनावश्यक बताते हैं।

सकारात्मक पक्ष/प्रभाव

  • एनजीओ समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को सशक्त बनाते हुए उन्हें एक बेहतर भविष्य की ओर ले जाने का कार्य करते हैं।
  • यह कमजोर वर्ग के पक्ष में खड़ा हो कर समाज में बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • सामाजिक कार्यों और विकास के क्षेत्र में जहां सरकारी पहुँच कम होती है (उदाहरण- बाल एवं महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू हिंसा, पशुओं के विरुद्ध क्रूरता, पर्यावरण आदि) वहां पहुंच कर एनजीओ जरूरतमंदों की सहायता करते हैं।
  • यह सरकार और निजी क्षेत्र के मध्य महत्वपूर्ण सेतु का काम करते हैं।
  • सरकारी क्षेत्र की भांति औपचारिकताओं की बाध्यता न होने के कारण यह अपेक्षाकृत त्वरित एवं बृहद स्तर पर कार्य करते हैं।

आलोचनाएँ

  • अनेक एनजीओ अपने फंड एवं संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता नहीं रखते। इनके संचालक प्रायः प्रभावशाली व्यक्ति अथवा राजनीतिज्ञ होते हैं, अतः इनके द्वारा जवाबदेही को नजरअंदाज किया जाता है।
  • एनजीओं को काम पाने के लिए कई बार राजनेताओं एवं अधिकारियों/विभागों पर अतिरिक्त धनराशि व्यय करनी होती है। इस स्थिति में कार्य की लागत बढ़ जाती है और लाभार्थियों को कम लाभ प्राप्त हो पाता है।
  • अधिकांश एनजीओं अपनी फंडिंग के लिए बाहरी संस्थाओं अथवा व्यक्तियों पर निर्भर होते हैं। यह बाहरी संस्थाएं फण्ड देने के बदले कई बार ऐसी शर्ते अथवा प्रस्ताव रखती हैं जिससे एनजीओ की स्वायत्तता एवं निष्पक्षता प्रभावित होती है।
  • अनेक एनजीओ समाजसेवा के नाम पर अपने व्यक्तिगत स्वार्थसिद्धि अथवा लाभ के लिए कार्य करती हैं, जिससे आम जनता में सभी एनजीओ के प्रति गलत धारणा बनती है।
  • एनजीओ समय के साथ अपने कार्य में विस्तार एवं विविधता लाती हैं, जिसमें कई बार वह अपने मूल उद्देश्य एवं लक्ष्य से भटक जाती हैं। यह स्थिति संस्था के पतन का कारण बनती है।
  • प्रायः एक ही क्षेत्र में कई एनजीओ एक साथ कार्य करते हैं, जिससे कार्यों का अनावश्यक दोहराव एवं व्यय वृद्धि होती है। इससे आम जनता में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है।

निष्कर्ष

  • तमाम कमियों एवं आलोचनाओं के बावजूद आज के समाज में गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) आवश्यक आवश्यकता बन चुके हैं। यह समाज के असंख्य व्यक्तियों एवं समुदायों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
  • उत्तर प्रदेश जैसी बड़ी जनसंख्या वाले राज्य में एनजीओ की उपस्थिति इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण एवं मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं, जिन पर सरकार द्वारा कम काम किया जाता है।

दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UPPSC, UPSSSC, UP Police, UP Lekhpal, RO/ARO और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।