उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार एवं इसका प्रभाव
अवध लगान अधिनियम: काश्तकारों को बेदखली से बचाने और लगान वृद्धि की सीमा निर्धारण हेतु प्रथम प्रयास।
यूपी जमींदारी उन्मूलन अधिनियम: 1949 में पं. गोविंद बल्लभ पंत द्वारा प्रस्तुत। 24 जनवरी 1951 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर, 1 जुलाई 1952 से लागू।
चकबंदी की शुरुआत: मुजफ्फरनगर (कैराना) एवं सुल्तानपुर (मुसाफिर खाना) से चकबंदी कार्यक्रम का आरंभ।
संपूर्ण प्रदेश में चकबंदी: सफल परीक्षण के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में चकबंदी लागू।
पूर्ण उन्मूलन: भारत में जमींदारी प्रथा का पूर्णरूपेण उन्मूलन कर दिया गया।
| सुधार का प्रकार | मुख्य प्रावधान | प्रभाव / उद्देश्य |
|---|---|---|
| बिचौलियों का अंत (Zamindari Abolition) | राज्य और वास्तविक किसान के बीच बिचौलियों (जमींदारों) को हटाना। | कृषकों को सीधे भूमि का स्वामित्व मिला। ग्राम स्वायत्त शासन का विकास। |
| हदबंदी (Ceiling) | एक परिवार के लिए भूमि सीमा (40 से 80 एकड़) का निर्धारण। | अधिशेष भूमि लेकर भूमिहीनों और निर्धनों में बांटी गई (सामाजिक न्याय)। |
| चकबंदी (Consolidation) | किसानों के छोटे व बिखरे हुए जोतों (खेतों) को एक बड़े चक में बदलना। | कृषि भूमि का कुशलतम उपयोग और उत्पादन में भारी वृद्धि। |
| काश्तकारी सुधार (Tenancy Reforms) | लगान का 50% से नियमन कर 20-25% पर लाना। 12 वर्ष से जोतने वाले को मालिकाना हक़। | किसानों का शोषण रुका, उन्हें भूमि पर कानूनी संरक्षण मिला। |
| लीजिंग (Leasing) | अनुबंध के तहत निश्चित समय व शर्तों पर कृषि कार्य हेतु भूमि देना। | कृषि निवेश और सहकारिता को बढ़ावा। शिकमी (अवैध) उठान पर रोक। |
डिजिटलीकरण एवं रिकॉर्ड
पारदर्शिता लाने के लिए सभी भू-अभिलेखों (Land Records) का 100% डिजिटलीकरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
संस्थागत विकास
भूमि प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए 'लैण्ड बैंक' और 'लैण्ड राइट्स आयोग' (Land Rights Commission) की स्थापना आवश्यक है।
महिला अधिकार
भूमि पर महिलाओं के मालिकाना अधिकारों को सुनिश्चित करने हेतु विशेष भूमि कानूनों का निर्माण व क्रियान्वयन हो।
राजनीतिक व न्यायिक इच्छाशक्ति
सुधारों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और न्यायपालिका का सक्रिय हस्तक्षेप अनिवार्य है।
- सीमांत एवं लघु कृषकों तथा भूमिहीनों को भूमि उपलब्ध कराकर सामाजिक न्याय को प्रोत्साहित करना।
- कृषि उत्पादन में वृद्धि।
- भारत मे भूमि सुधार संबंधी कानून बनाना राज्यों की जिम्मेदारी है।
- उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है। यहां 65 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आश्रित है। प्रदेश के आर्थिक विकास में कृषि क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। अतः कृषि क्षेत्र को लाभदायक बनाने हेतु भूमि सुधार आवश्यक हो जाता है।
- स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात संविधान के नीति निदेशक तत्व (DPSP) में वर्णित सामाजिक और आर्थिक न्याय को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भूमि सुधार की आवश्यकता महसूस की गई।
- भारत सरकार ने 1951 में प्रथम संविधान संशोधन द्वारा नवीं अनुसूची को जोड़कर भूमि सुधार संबंधी प्रावधान लागू किया।
- स्वतंत्र भारत में भूमि सुधार हेतु जे.सी. कुमारप्पन समिति का गठन किया गया।
भूमि सुधार हेतु कुमारप्पन समिति के सुझाव
- राज्य व खेतों के वास्तविक जोतदार के बीच सभी बिचौलियों का उन्मूलन, भूमि को बटाई पर देने पर कानूनी रोक लगे। विधवा, बच्चे व विकलांग व्यक्ति इस प्रावधान के अपवाद रहेंगे।
- एक खेत में निरंतर 6 वर्ष तक कृषि करने वालों को भूस्वामित्व के पूरे अधिकार प्रदान किए जाएं।
- भू-स्वामी द्वारा स्वयं कृषि करने के नाम पर काश्तकार से भूमि वापस लिये जाने पर रोक लगे।
- भू-स्वामियों द्वारा काश्तकारों से भूमि वापस लिये जाने की स्थिति में काश्तकारों के हितों की सुरक्षा की जाए।
- उपर्युक्त उपायों को वास्तविक व्यवहार में लाने के लिए काश्तकारों की आर्थिक सहायता की जानी चाहिए।
- करों का उचित निर्धारण किया जाए।
- केन्द्रीय भूमि आयोग के साथ अलग से एक स्वतंत्र इकाई की स्थापना की जानी चाहिए, जिसके पास भूमि सुधार की गति तीव्र करने की शक्तियाँ हों।
- भूमि सुधार के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम 1950 लागू किया गया।
भूमि सुधार के उद्देश्य
- बढ़ती जनसंख्या के लिये खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना।
- जमींदारी व्यवस्था के उन्मूलन द्वारा छोटे किसानों को शोषण से मुक्त करा कर सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना।
उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार के विभिन्न चरण
- लगान में वृद्धि की सीमा निर्धारण।
- काश्तकारों का कानूनी अधिकार रेखांकित करना।
- काश्तकारों को सुधार संबंधी अधिकार प्रदान करना।
- बेदखली पर निर्बन्धन।
हदबंदी
- काश्तकारों को शोषण से मुक्ति दिलाना
- गरीबी उन्मूलन
- कृषि उत्पादन में वृद्धि
- निर्धनों एवं भूमिहीनों में भूमि वितरण
- कृषि भूमि का कुशलतम उपयोग
- शिकमी पर भूमि उठाने पर रोक
- ग्राम स्वायत्त शासन का विकास
- समावेशी भूमि प्रबंधन
- सहकारिता को बढ़ावा
- जमींदारी प्रथा का उन्मूलन
- प्राकृतिक संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण
उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम 1950
- जुलाई 1949 में जमींदारी उन्मूलन तथा भूमि सुधार विधेयक पं. गोविंद बल्लभ पंत द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य काश्तकारों के अधिकारों की रक्षा करना था।
- उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 पर राष्ट्रपति द्वारा 24 जनवरी, 1951 को हस्ताक्षर किया गया, जिसके पश्चात 1 जुलाई 1952 को इसमें निहित आदेश जारी कर दिये गये।
बिचौलियों का उन्मूलन
- सरकार द्वारा जमींदारी व्यवस्था के उन्मूलन पर बल दिया गया, जिससे बिचौलियों को समाप्त कर कृषि योग्य भूमि पर कृषकों को स्वामित्व प्रदान करने में सफलता प्राप्त हुई।
- भारत में बिचौलियों के अन्त की शुरूआत वर्ष 1948 में मद्रास राज्य द्वारा की गई। आगे चलकर अन्य राज्यों ने इस संबंध में कानून बनाए।
- वर्ष 1972 में भारत में जमींदारी प्रथा का पूर्णरूपेण उन्मूलन कर दिया गया।
काश्तकारी सुधार
- विशेषज्ञों के अनुसार कृषि भूमि पर लगान का स्तर कुल कृषि उत्पादन का 20 से 25 प्रतिशत तक होना चाहिए, लेकिन ऐसा देखा गया कि भू-स्वामी 50 प्रतिशत तक लगान की वसूली करते थे।
- इस स्थिति में सुधार हेतु उत्तर प्रदेश में लगान का उचित नियमन आरंभ किया गया।
स्वामित्व संबंधी अधिकार
- स्वामित्व संबंधी अधिकार में यह निर्णय लिया गया कि लम्बे समय (12 वर्ष) से एक ही भूमि को जोतने वाले काश्तकारों को संबंधित भूमि का स्वामी बना दिया जायेगा।
- इस संबंध में अलग-अलग राज्यों ने अपना-अलग कानून बनाया, लेकिन विशेष सफलता केरल, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक को मिली।
कृषि भूमि का पुनर्संगठन
चकबन्दी
- चकबंदी के अन्तर्गत लोगों के भू-स्वामित्व में बदलाव कर छोटे खेतों (छोटे भू-चक) को बड़े खेतों में बदला जाता है।
- उत्तर प्रदेश में चकबंदी की शुरूआत वर्ष 1954 में मुजफ्फरनगर जिले की कैराना तहसील एवं सुल्तानपुर जनपद की मुसाफिर खाना तहसील से हुई। यहां सफलता के पश्चात चकबंदी कार्यक्रम 1958 में सम्पूर्ण प्रदेश में लागू कर दिया गया।
- भारत में चकबन्दी कुछ राज्यों में ही सफल हो पाई है, जैसे पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा आदि।
लीजिंग
- लीजिंग के अन्तर्गत एक व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को अपनी भूमि अनुबंध के तहत कृषि कार्य हेतु निश्चित समय के लिये निर्धारित शर्तों पर उपलब्ध कराता है।
निर्धन लोगों को कृषि भूमि वितरण (हदबंदी)
उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार के लिए क्या किया जाना चाहिए?
- सभी भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण होना चाहिए।
- लैण्ड बैंक की स्थापना पर ध्यान देना चाहिए।
- लैण्ड राइट्स आयोग की स्थापना की जानी चाहिए।
- भूमि सुधार को लागू करने के लिये राजनीतिक इच्छाशक्ति प्रदर्शित की जानी चाहिए।
- भूमि पर महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने हेतु विशेष भूमि कानून की व्यवस्था होनी चाहिए।
- न्यायपालिका का हस्तक्षेप भूमि सुधार में शामिल होना चाहिए।
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