उत्तर प्रदेश: समसामयिक घटनाएं एवं मुद्दे

उत्तर प्रदेश: समसामयिक घटनाएं एवं मुद्दे

उत्तर प्रदेश अब सिर्फ अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक विकास और नवाचार के एक नए सफरनामे के लिए भी जाना जा रहा है। देश की पहली एआई (AI) सिटी से लेकर बुंदेलखंड के पहले सोलर एक्सप्रेसवे तक, और महाकुंभ की आध्यात्मिक गूंज से लेकर जीआई टैग्स (GI Tags) के वैभवशाली शिखर तक-यूपी हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। इस विस्तृत लेख में हम आपको उत्तर प्रदेश की नवीनतम समसामयिक घटनाओं, यूपी-एससीआर (UP-SCR) के गठन, नए इंटरनेशनल स्टेडियमों के निर्माण और परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय मुद्दों की सटीक व संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे।

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'यूपी-एससीआर' का गठन

  • दिल्ली एनसीआर (दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में यूपी-एससीआर (UP-SCR-उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र) के गठन का निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने 19 जुलाई, 2024 को 'राज्य राजधानी क्षेत्र' (SCR) के गठन की अधिसूचना जारी की।
  • यूपी-एससीआर में 6 जिलों के क्षेत्र शामिल किये जाएंगे। यह जिले हैं- लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली तथा बाराबंकी।
  • राज्य राजधानी क्षेत्र और संबंधित विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा नए निर्धारित क्षेत्र के भीतर संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन हेतु राज्यपाल द्वारा 'उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण' (UP-SCRDA) की स्थापना को भी मंजूरी प्रदान की गयी है।
  • अधिसूचना के अनुसार यूपी एससीआर में 6 जिलों के 27,826 वर्ग किमी क्षेत्र को सम्मिलित किया जाएगा। इस निर्माण के लिए शासन द्वारा लखनऊ के 2528 वर्ग किमी, हरदोई के 5986 वर्ग किमी, सीतापुर के 5743 वर्ग किमी, उन्नाव के 4558 वर्ग किमी, रायबरेली के 4609 वर्ग किमी और बाराबंकी के 4402 वर्ग किमी क्षेत्र का अधिग्रहण किया जाएगा।
  • उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (UP-SCRDA) की अध्यक्षता मुख्यमंत्री द्वारा की जाएगी। प्रदेश के मुख्य सचिव इसके उपाध्यक्ष होंगे। अपर मुख्य सचिव आवास एवं शहरी नियोजन, लखनऊ और अयोध्या के मंडलायुक्त, सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारी, लखनऊ, उन्नाव-शुक्लागंज और रायबरेली विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष एवं अन्य अधिकारी इसके सदस्य होंगे।

यूपी का चौथा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम गोरखपुर में

  • उत्तर प्रदेश में राज्य के चौथे इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण गोरखपुर में किया जाएगा। नियोजन विभाग ने इस निर्माण की योजना तैयार की है।
  • गोरखपुर शहर के पास ताल नदौर में चिह्नित 50 एकड़ भूमि पर इस इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है।
  • उत्तर प्रदेश में वर्तमान में मात्र कानपुर और लखनऊ के स्टेडियमों में इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों का आयोजन होता है। वाराणसी में निर्माणाधीन इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम को पूर्ण करने हेतु तीव्र गति से कार्य चल रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर गोरखपुर इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण और विकास का कार्य आरंभ कर दिया गया है।
  • योजना के अनुसार गोरखपुर के ताल नदौर में 236.40 करोड़ व्यय कर 50 एकड़ भूमि पर आगामी 18 महीनों में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

कार्ययोजना

  • गोरखपुर में बनने वाले इस इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के मुख्य परिसर का निर्माण 45 एकड़ क्षेत्र में होगा, जबकि 5 एकड़ क्षेत्र में अन्य सुविधाओं का विकास होगा। यह स्टेडियम एयरपोर्ट से 23.6 किलोमीटर तथा गोरखपुर जंक्शन से 20.8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा।
  • गोरखपुर स्टेडियम में 7 मुख्य पिच और 4 प्रैक्टिस पिच होंगी। यह स्टेडियम 30 हजार दर्शकों की क्षमता से युक्त होगा।
  • यहां इंटरनेशनल क्रिकेटिंग इवेंट्स के साथ ही अन्य बड़े कार्यक्रमों के आयोजन भी किये जा सकेंगे।

तीसरा अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम निर्माणाधीन

  • यूपी का तीसरा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम वाराणसी में तैयार किया जा रहा है। इसका निर्माण कार्य पूर्ण होने के निकट है।
  • इस स्टेडियम का निर्माण शिव थीम पर किया जा रहा है। इसका आकार अर्ध चंद्राकार होगा, जिसमें लगी फ्लड लाइट्स त्रिशूल के आकार की होंगी। स्टेडियम भवन में बेलपत्र की डिजाइन होगी जिसमें डमरू का आकार दिखाई देगा। गंगा घाट की सीढ़ियों जैसी दर्शकदीर्घा होंगी।
  • स्टेडियम में सात पिच (प्रैक्टिस व मेन विकेट), लाउंज, कमेंट्री बॉक्स, प्रेस गैलरी सहित अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
  • यह देश का पहला स्टेडियम है, जिसका निर्माण बीसीसीआई करा रहा है।
  • वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण से पूर्वांचल के साथ ही बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के क्रिकेट खिलाड़ियों को प्रतिभा निखारने का अवसर प्राप्त होगा।
  • बीसीसीआई ₹330 करोड़ खर्च करके स्टेडियम का निर्माण करा रही है। इसमें 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी।

उत्तर प्रदेश वक्फ नियमावली-2025

  • वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 पर केन्द्र सरकार की स्वीकृति मिलने के पश्चात नए कानून के अनुसार उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने नयी 'उत्तर प्रदेश वक्फ नियमावली 2025' बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
  • इसके लिए प्रदेश में नवंबर 2024 में लागू वक्फ नियमावली 2024 में संशोधन किया जाएगा।
  • प्रदेश सरकार ने नवंबर 2024 में उत्तर प्रदेश वक्फ नियमावली-2024 लागू किया था, लेकिन अब उसमें नए कानून के तहत संशोधन करने की तैयारी है। ऐसा इसलिए, क्योंकि नए कानून में ऐसी कई व्यवस्थाएं की गई हैं, जो वक्फ नियमावली में शामिल नहीं हैं।
  • बीते वर्ष संशोधन में वक्फ बोर्ड को निर्धारित प्रारूप पर सरकार को रिपोर्ट भेजने सहित कई नई व्यवस्था दी गयी थी। अब नए कानून के प्रावधानों के अनुसार इस नियमावली में पुनः संशोधन किया जाएगा।
  • नए कानून के अनुसार वक्फ प्रबंधन के लिए प्रदेश की वक्फ संपत्तियों का पूरा डाटा नए सिरे से तैयार किया जाएगा। शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड के मौजूदा रिकार्ड का भी सत्यापन कराया जाएगा।
  • माना जा रहा है कि यूपी का अल्पसंख्यक कल्याण विभाग शीघ्र ही वक्फ से संबंधित नई नियमावली प्रस्तावित करेगा, जिस पर अंतिम मुहर सरकार लगाएगी।
  • प्रदेश में वक्फ संपत्तियों को लेकर काफी विवाद है। उच्चस्तरीय एक सरकारी रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन संपत्तियों को वक्फ के रूप में दर्ज कर लिया गया है उनमें से 57,792 संपत्तियां सरकारी हैं। शत्रु संपत्तियों और निजी भूमि को भी वक्फ के रूप में दर्ज कर लिया गया है।

जीआई टैगिंग में उत्तर प्रदेश प्रथम

  • 11 अप्रैल, 2025 को वाराणसी के दो प्रसिद्ध उत्पाद शहनाई और तबला को जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) प्रदान किये जाने के साथ ही उत्तर प्रदेश सर्वाधिक 77 जीआई टैग प्राप्त करने वाला भारत का प्रथम राज्य बन गया है, जिसमें 32 जीआई वाराणसी से हैं। द्वितीय स्थान पर तमिलनाडु है, जिसके पास 69 जीआई टैग उत्पाद हैं।
  • जीआई टैग यह सुनिश्चित करने का प्रावधान है कि संबंधित लोकप्रिय उत्पाद के नाम का उपयोग करने का अधिकार मात्र चिह्नित/अधिकृत भौगोलिक क्षेत्र के निवासियों को है। इस प्रकार यह संबंधित उत्पाद के अनुकरण अथवा नकल को प्रतिबंधित करता है।
  • जीआई टैग उन उत्पादों को प्रदान किया जाता है, जिनका एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में उत्पत्ति होती है। इनमें किसी विशिष्ट स्थान से संबंधित विशेषताएं होती हैं।
  • जीआई टैग वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ‘उद्योग संवर्धन तथा आंतरिक व्यापार विभागों’ के ‘भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री’ कार्यालय (चेन्नई) द्वारा प्रदान किया जाता है।
  • जीआई टैग 10 वर्षों के लिए प्रदान किया जाता है। उसके बाद इनका नवीनीकरण कराना होता है।
  • वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश के 20 उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indications - GI) टैग प्रदान किया गया। प्रदेश के 55 उत्पादों को अब तक जीआई (GI) टैग प्राप्त हो चुका है।
  • जनवरी, 2024 में अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी के बेसन लड्डू को जीआई टैग प्रदान किया गया। इससे पूर्व अगस्त 2023 में आगरा के लेदर फुटवियर तथा जलेसर के मेटल क्रॉफ्ट (घुंघरू घंटी उद्योग) को जीआई टैग दिया गया था।
  • जून, 2023 में उत्तर प्रदेश के सात उत्पादों तथा अप्रैल 2023 में दस उत्पादों को जीआई टैग प्रदान किया गया।
वर्ष 2023-24 से 2024 -25 (जून, 2025) तक GI टैग प्राप्त करने वाले उत्तर प्रदेश के प्रमुख उत्पाद इस प्रकार हैं-

उत्पाद श्रेणी स्थान
तबला हस्तकला वाराणसी
भरवा मिर्च खाद्य सामग्री वाराणसी
शहनाई हस्तकला वाराणसी
फर्नीचर हस्तकला बरेली
तिरंगी बर्फी खाद्य सामग्री वाराणसी
मेटल कास्टिंग क्रॉफ्ट हस्तकला वाराणसी
हनुमान गढ़ी का खाद्य समाग्री अयोध्या बेसन लड्डू
लेदर फुटवियर हस्तकला आगरा
मेटल क्राफ्ट (घुंघरू घंटी) हस्तकला जलेसर
ढोलक हस्तकला अमरोहा
होम फर्निशिंग हस्तकला बागपत
हथकरघा उत्पादन हस्तकला बाराबंकी
हस्तनिर्मित कागज हस्तकला कालपी
गौरा पत्थर हस्तकला महोबा
तारकशी हस्तकला मैनपुरी
हार्न क्राफ्ट हस्तकला संभल
अलीगढ़ ताला हस्तकला अलीगढ़
नगीना काष्ठ शिल्प हस्तकला बिजनौर
बनारसी पान कृषि वाराणसी
बनारसी लंगड़ा आम कृषि वाराणसी
रामनगर भंटा कृषि वाराणसी
आदम चीनी चावल कृषि चंदौली
आंवला कृषि प्रतापगढ़
शजर स्टोन कला हस्तकला बांदा
हींग खाद्य समाग्री हाथरस
बखिरा पीतल बर्तन हस्तकला संतकबीर नगर

वाराणसी में डॉल्फिन सफारी

  • वाराणसी में शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर चौबेपुर के पास गंगा नदी में डॉल्फिन सफारी आरंभ की गयी है। जंगल सफारी की तर्ज पर यहां सैलानियों को घूमने और डॉल्फिंस देखने का आनंद प्राप्त होगा।
  • गंगा में तेजी से बढ़ रही डॉल्फिन को देखना टूरिस्ट्स के लिए नया अनुभव होगा।
  • वाराणसी वन विभाग ने डॉल्फिन के बीच घूमने और उन्हे नजदीक से देखने के लिए डॉल्फिन सफारी की पहल की है। विभाग अपनी नाव से लोगों को डॉल्फिन सफारी की सैर करा रहा है।
  • गंगा नदी के जल की गुणवत्ता में सुधार के बाद डॉल्फिन की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। डॉल्फिन दो-तीन मिनट में एक बार सांस लेने के लिए पानी से बाहर निकलती हैं, जिसे देखना आकर्षक होता है।
  • डॉल्फिन सफारी में एक बार में सात पर्यटक विशेष नौका से डॉल्फिन की अठखेलियों का लुत्फ उठा सकेंगे।
  • गंगा में शुरू हुई डॉल्फिन सफारी सभी के लिए निःशुल्क होगी। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
  • उत्तर प्रदेश में गाजीपुर के पटना और बलिया के माल्देपुर को भी डॉल्फिन सफारी के रूप में विकसित करने के लिए चिह्नित किया जा रहा है। गाजीपुर के पटना में तीन किमी क्षेत्र में 30 और बलिया के माल्देपुर क्षेत्र में चार किमी क्षेत्र में 25 डॉल्फिन विद्यमान हैं।

प्रदेश में 5 सीड पार्क को मंजूरी

  • बीजों के प्रसंस्करण में वृद्धि करने के लिए प्रदेश में पांच सीड पार्क स्थापित किए जाएंगे। प्रदेश कैबिनेट ने 15 मई, 2025 को सीड पार्क की स्थापना संबंधी प्रस्ताव पर स्वीकृति दे दी।
  • प्रदेश सरकार के इस निर्णय से रबी, खरीफ और जायद फसलों के बीज की उपलब्धता के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी।
  • प्रदेश में सीड पार्क पश्चिमी जोन, तराई जोन, मध्य जोन, बुंदेलखंड तथा पूर्वी जोन में स्थापित किए जाएंगे। सर्वप्रथम मध्य जोन स्थित लखनऊ के राजकीय कृषि प्रक्षेत्र अटारी में पार्क स्थापित किया जा रहा है।
  • प्रदेश का प्रथम सीड पार्क राज्य के मध्य जोन स्थित लखनऊ में स्थापित किया जा रहा है।

आवश्यकता एवं संभावना

  • उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष में 70 लाख कुंतल बीज की आवश्यकता होती है, किन्तु मात्र 40 लाख कुंतल बीज ही यहां उत्पादित होता है।
  • स्थानीय स्तर पर बीज की उपलब्धता बढ़ने से बीज के मूल्य में कमी आएगी। इसका लाभ किसानों को मिलेगा।
  • सीड पार्क में बीज व्यवसायियों को बीज प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, ताप नियंत्रण भंडारण, स्पीड ब्रीडिंग, हाइब्रिड लैब आदि की स्थापना हेतु छूट दी जाएगी।
  • सीड पार्क में बीज व्यवसायियों अथवा संस्थाओं को 30 वर्ष की लीज पर भूमि प्रदान की जाएगी, जो बीज उत्पादन संयंत्र, भंडारण सुविधाओं, प्रयोगशालाओं व अन्य सुविधाओं की स्थापना के लिए होगी।
  • एक सीड पार्क में स्थापित किए जाने वाले उद्योगों से लगभग 1200 लोगों को प्रत्यक्ष और 3000 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होने की संभावना है।

प्रदेश का प्रथम बायो-सीएनजी प्लांट प्रयागराज में

  • उत्तर प्रदेश का प्रथम बायो-सीएनजी प्लांट प्रयागराज के नैनी क्षेत्र में स्थापित किया गया है, जिसने 16 जुलाई, 2025 से काम करना आरंभ कर दिया। प्रयागराज शहर से निकलने वाले गीला कचरा का प्रयोग सीधे इस प्लांट में किया जा रहा है।
  • प्रयागराज के इस प्लांट की कुल क्षमता 343 टन प्रतिदिन (TPD) है। यह प्रतिदिन लगभग 21.5 टन गैस, 109 टन ठोस जैविक खाद और 100 टन तरल जैविक खाद का उत्पादन करेगा।
  • बायो-सीएनजी प्लांट के प्रथम चरण में 200 टन क्षमता के गीले कचरे से गैस बनाने का कार्य शुरू किया गया है, जबकि शेष 143 टन क्षमता धान के पुआल और गोबर से गैस उत्पादन से विकसित किया जा रहा है।
  • प्रदेश सरकार के अनुसार इस प्लांट से प्रतिवर्ष लगभग ₹53 लाख आय अर्जित होगी। यह कमाई उस कचरे से होगी जिसे पहले अनुपयोगी समझकर फेंक दिया जाता था। अब यही फल-सब्जी के छिलके, जूठन और फल-फूलों का कचरा प्रतिदिन 8900 किलो बायो-कोल और 109 टन खाद में बदले जाएंगे।
  • परियोजना का संचालन पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर आधारित है। प्लांट का संचालन 'एवर एनवायरो रिसोर्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा किया जा रहा है।
  • इस बायो-CNG प्लांट को दो चरणों में विकसित किया जाना है। पहले चरण में दो डाइजेस्टर लगाए गए हैं, जो 200 टन गीले कचरे से प्रतिदिन 8.9 टन गैस का उत्पादन करेंगे। दूसरे चरण में शेष 13.2 टन बायो-CNG का उत्पादन किया जाएगा।
  • इस प्लांट से लगभग 200 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। 40 लोग सीधे प्लांट में कार्यरत होंगे, जबकि 150 से अधिक लोग अप्रत्यक्ष रूप से इसमें शामिल होंगे।

पुलिस भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य पुलिस में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया है। यह क्षैतिज आरक्षण पुलिस कांस्टेबल, प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी), घुड़सवार कांस्टेबल और फायरमैन के पदों पर होने वाली सीधी भर्ती में लागू होगा।
  • उत्तर प्रदेश सरकार ने यह घोषणा 3 जून, 2025 को की। इसके अनुसार अग्निपथ योजना के तहत चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले अग्निवीरों को पुलिस भर्ती आरक्षण के माध्यम से रोजगार के अवसर सुनिश्चित किये जाएंगे। यह आरक्षण सभी श्रेणियों –सामान्य, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए उनसे संबंधित समूहों में लागू होगा।
  • प्रदेश सरकार के निर्णय के अनुसार पुलिस भर्ती में आवेदन करने वाले पूर्व अग्निवीरों को आयु सीमा में भी 3 वर्ष की छूट प्रदान की जाएगी।
  • उत्तर प्रदेश सरकार की इस नीति के तहत भर्तियों का पहला बैच वर्ष 2026 में शुरू होने की संभावना है

लखनऊ में बनेगा प्रथम स्पेस एस्ट्रोनॉमी पार्क

  • प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राज्य का प्रथम 'स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी पार्क' बनेगा। पार्क के लिए शहर अन्तर्गत चक गजरिया सिटी में 10 एकड़ भूमि आवंटित करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गयी है।
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा एलडीए के सहयोग से बनाया जा रहा यह पार्क न सिर्फ लखनऊ, बल्कि संपूर्ण उत्तर भारत का ऐसा प्रथम विशिष्ट केन्द्र होगा, जो अंतरिक्ष, खगोल विज्ञान की रोचक जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने का कार्य करेगा।
  • पार्क को विकसित करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की होगी। एलडीए इसके लिए 10 एकड़ भूमि उपलब्ध कराएगा।

प्रमुख तथ्य
  • डिजिटल प्लैनेटेरियम में 360 डिग्री डोम थिएटर बनेगा, जहां से आकाशगंगा, तारों की गति, चंद्र-सूर्यग्रहण जैसी घटनाएं 3 डी में देखी जा सकेंगी।
  • रात को यहां बड़े टेलीस्कोप से चंद्रमा, बृहस्पति, शनि जैसे ग्रहों और तारों को देखा जा सकेगा।
  • पार्क में ग्रहों के मॉडल लगाये जाएंगे।

यूपी में ट्रांसजेंडर को राशन कार्ड समेत विशेष सुविधाएं

  • उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में ट्रांसजेंडर समुदाय को विशेष राशन कार्ड समेत अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। सरकार के इस निर्णय से अब ट्रांसजेंडर समुदाय को भी सस्ते दर पर राशन मिल सकेगा।
  • प्रदेश सरकार इस फैसले के तहत एक विशेष अभियान आरंभ करेगी, जिसके माध्यम से उन ट्रांसजेंडर की पहचान की जाएगी, जिन्हें अभी तक राशन कार्ड नहीं मिला है।
  • खाद्य और रसद विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ट्रांसजेंडर समुदाय के पात्र व्यक्तियों की पहचान करें और उन्हें गृहस्थी श्रेणी में शामिल कर राशन कार्ड जारी करें।
  • सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अभियान तेज और पारदर्शी तरीके से चलाया जाए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना से वंचित न रह जाए।
  • उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में ट्रांसजेंडर नागरिक आज भी रोजगार, शिक्षा और सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं। कई के पास राशन कार्ड नहीं है, जिससे वे सस्ते दर पर राशन जैसी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते।
  • राशन कार्ड मिलने से ट्रांसजेंडर नागरिकों को न केवल भोजन मिलेगा, बल्कि वे सम्मान के साथ समाज में शामिल हो सकेंगे।
  • उत्तर प्रदेश में 1,067 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को पहचान पत्र मिल चुका है और 248 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति भी मिली है, जिससे वे अपनी पढ़ाई जारी रख पा रहे हैं और आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
  • राज्य सरकार ने 60 साल से ऊपर के ट्रांसजेंडर नागरिकों के लिए वृद्धाश्रम शुरू किया है, जहां उन्हें रहने, भोजन, पेंशन, स्वास्थ्य सेवाएं और मानसिक परामर्श जैसी सुविधाएं मिल रही हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 में ट्रांसजेंडर समुदाय को थर्ड जेंडर की मान्यता दी थी और सरकारों को निर्देश दिया था कि वे इस समुदाय को समान अधिकार और योजनाओं का लाभ दें। इसी दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह योजनाएं आरंभ की है।

यूपी का सलखन जीवाश्म पार्क यूनेस्को की धरोहर सूची में
  • उत्तर प्रदेश के सलखन जीवाश्म पार्क (सोनभद्र जीवाश्म पार्क) को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में शामिल किया गया है।
  • उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के सलखन गाँव में स्थित यह पार्क कैमूर वन्यजीव अभयारण्य से लगे सुंदर कैमूर रेंज में अवस्थित है।
  • सलखन जीवाश्म पार्क में स्ट्रोमैटोलाइट्स को संरक्षित किया गया है। यह देश के प्राचीन साइनोबैक्टीरिया (नीली-हरित शैवाल) द्वारा निर्मित दुर्लभ अवसादी संरचनाओं में शामिल है।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 3.5 अरब वर्ष पूर्व उत्पन्न साइनोबैक्टीरिया संभवतः ऑक्सीजनिक प्रकाश संश्लेषण करने वाले प्रथम जीव थे, जिनके कारण ऑक्सीकरण घटना (लगभग 2.4 अरब वर्ष पूर्व) घटित हुई, जिसने पृथ्वी के वायुमंडल को ऑक्सीजन से समृद्ध किया। माना जाता है कि इसके परिणामस्वरूप ही पृथ्वी पर जटिल जीवन संभव हो सका।
  • यह प्रकाश संश्लेषण करने वाले सूक्ष्मजीव मेसोप्रोटेरोजोइक युग (1.6-1.0 बिलियन वर्ष पूर्व) के हैं, जिससे इनके जीवाश्म 1.4 बिलियन वर्ष पुराने माने जाते हैं।
  • इस प्रकार की संरचनाएँ विश्व स्तर पर अत्यंत दुर्लभ मानी जाती हैं, जो सलखन को दुनिया के सबसे प्राचीन जीवाश्म स्थलों में से एक बनाती हैं।

स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश के पांच शहरों को पुरस्कार

  • राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में उत्तर प्रदेश के पांच शहरों-लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर, आगरा और गौतमबुद्ध नगर को स्थान मिला है। लखनऊ ने श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 44वें स्थान से तीसरे स्थान पर जगह बनाई है।
  • लखनऊ ने स्वच्छ शहरों में ऊंची छलांग लगाते हुए देश के सर्वश्रेष्ठ तीन शहरों में स्थान बनाया है।
  • प्रयागराज को स्वच्छ सर्वेक्षण में विशेष श्रेणी का पुरस्कार दिया गया है, जबकि गोरखपुर को स्वच्छ शहरों की श्रेणी के मिनिस्टीरियल अवार्ड से सम्मानित किया गया। आगरा को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • गौतमबुद्ध नगर को तीन से 10 लाख की आबादी की श्रेणी में सबसे साफ सुथरे शहर के रूप में स्थान देते हुए सम्मानित किया गया है।
  • इंदौर ने इतिहास रचते हुए लगातार आठवीं बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीता है।
  • फाइव स्टार की रैंकिंग में आगरा, गोरखपुर, कानपुर, गाजियाबाद, प्रयागराज और नोएडा को पुरस्कृत किया गया है।
  • थ्री स्टार वाले शहरों में अयोध्या, फिरोजाबाद, झांसी, मथुरा, मुरादाबाद और वाराणसी को सम्मानित किया गया है। कूड़ा मुक्त शहरों में यूपी के 83 शहरों को स्थान मिला है।
  • गोरखपुर ने दोहरी सफलता प्राप्त की है। शहर ने सफाईमित्र सुरक्षित शहर श्रेणी में तीसरा स्थान और 3-10 लाख आबादी वर्ग में चौथा स्थान प्राप्त किया है। गोरखपुर ने 5-स्टार जीएफसी रेटिंग भी हासिल की है।
  • आगरा को राज्य का उभरता स्वच्छ शहर घोषित किया गया है। इसे राष्ट्रीय स्तर पर 10वां स्थान मिला है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर गाजियाबाद 11वें, प्रयागराज 12वें, कानपुर 13वें और वाराणसी 17वें स्थान पर रहा है।

शहरों में कम भूमि पर अधिक निर्माण की अनुमति

  • प्रदेश सरकार ने आम आदमी को राहत देते हुए शहरों में कम भूमि पर अधिक निर्माण की अनुमति दे दी है।
  • विकास प्राधिकरणों द्वारा नये प्रावधान को लागू करते हुए अपने यहां इसके आधार पर नक्शा पास किया जाएगा। इसमें शमन कंपाउंडिंग उपविधि, आर्थिक दृष्टि से दुर्बल एवं अल्प आय वर्ग के लिए भवनों को बनाने की व्यवस्था को भी बेहतर बनाया गया है। ग्रीन बिल्डिंग को प्रोत्साहित करने के लिए पांच प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर देने, अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने की व्यवस्था की गई है।
  • होटलों के निर्माण और पेट्रोल पंप खोलने में आने वाली बाधाओं को दूर कर दिया गया है। स्कूल, कॉलेज खोलने के साथ ही नर्सिंगहोम और निजी अस्पताल बनाने के लिए मानक सरल बनाये गये हैं।
  • आवासीय और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा हेतु विशेष प्रावधान किये गये हैं। पार्किंग की व्यवस्था में भी बदलाव कर दिया गया है।

प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में बनेंगे पंचायत उत्सव भवन

  • उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय के अनुसार राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पड़ने वाले प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में विवाह, मुंडन तथा अन्य मांगलिक कार्यों के आयोजन हेतु पंचायत उत्सव भवनों का निर्माण कराया जाएगा। पहले चरण में ग्रामीण क्षेत्र के 71 विधानसभा क्षेत्र में इनका निर्माण होगा।
  • प्रत्येक पंचायत उत्सव भवन के निर्माण पर ₹1.41 करोड़ खर्च किए जाएंगे। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल ₹100 करोड़ का बजट इसके लिए आवंटित किया गया है। आगे चरणबद्ध ढंग से अन्य ग्रामीण इलाकों की विधानसभा क्षेत्रों में भी इनका निर्माण कराया जाएगा।
  • उत्तर प्रदेश में 70 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। प्रदेश के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह, मुंडन व अन्य मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन हेतु कोई स्थल न होने के कारण ग्रामीण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उत्सव भवन (विवाह घर) के निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही थी।
  • नई योजना ग्राम पंचायतों के माध्यम से क्रियान्वित एवं संचालित की जाएगी।

प्रदेश के प्रत्येक जिले में बनेंगे 'मॉडल सोलर गांव'

  • उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में 'मॉडल सोलर गांव' विकसित किये जाएंगे।
  • मॉडल सोलर गांव के हर घर पर रूफटॉप सोलर पैनल के साथ कृषि यंत्रों को ऊर्जीकृत किया जाएगा। फरवरी, 2026 तक राज्य के सभी जनपदों में इस कार्य को पूर्ण कर लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • प्रदेश सरकार यह कार्यक्रम पीएम सूर्य घर बिजली योजना के तहत संचालित कर रही है।
  • योजना के अन्तर्गत सौर ऊर्जा क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले गांवों का चयन किया जाएगा। चयनित गांव का एक करोड़ रुपये व्यय कर पूर्ण विकास किया जाएगा।

लखीमपुर खीरी में बायोप्लास्टिक का बड़ा प्लांट

  • उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य में निवेश से संबंधित बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। सरकार ने बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड के साथ लखीमपुर खीरी की कुंभी चीनी मिल में एक बड़ा बायोप्लास्टिक प्लांट लगाने के समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं।
  • इस बायोप्लास्टिक प्लांट को स्थापित करने में लगभग ₹2850 करोड़ का निवेश होगा, जिससे 225 से अधिक व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा।
  • माना जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के हरित विकास (पर्यावरण के अनुकूल) को गति देगा।

बीएचयू में पंचांग तैयार करने का अत्याधुनिक साफ्टवेयर

  • काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पंचांग बनाने के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर का प्रयोग आरंभ किया गया है। इसके माध्यम से हर तरह के पंचांग अब कुछ मिनट में ही तैयार किये जा सकेंगे। इससे शोधार्थियों को सुविधा होगी।
  • ज्योतिष विभाग में गणित के 'मान' की तीव्र गणना के लिए इस सॉफ्टवेयर का निर्माण किया गया है। महीनों में बनने वाला पंचांग अब इसकी सहायता से मात्र पांच मिनट में बन कर तैयार हो जाएगा। शास्त्री और आचार्य से लेकर पीएचडी करने वाले शोधार्थियों तक को इससे सहायता मिलेगी।
  • पंचाग के इस नये साफ्टवेयर से बीएचयू में ज्योतिष के सूर्य सिद्धांत की पढ़ाई अब आसान होगी।
  • इस सॉफ्टवेयर पर ऑनलाइन कहीं से भी काम किया जा सकता है।
  • बीएचयू में बीते तीन वर्षों से यह सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा था। डॉ. सुभाष पांडेय के निर्देशन में डॉ. अमित कुमार मिश्र और डॉ. गौरव मिश्र ने इसे तैयार किया है।

प्रदेश में चार नये साइंस पार्क और दो तारामंडल की घोषणा

  • नवाचार और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तर प्रदेश में चार नए साइंस पार्क और दो नये तारामंडल स्थापित करने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। इस योजना पर कार्य आरंभ करने हेतु प्रदेश के बजट 2025-26 में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
  • आगरा में ₹25 करोड़ की लागत से साइंस सिटी तथा वाराणसी में ₹ 5 करोड़ की लागत से साइंस सिटी के साथ-साथ तारामंडल का निर्माण करने की योजना तैयार हुई है। शेष ₹ 20 करोड़ मशीनरी, फिटिंग तथा उपकरणों पर व्यय किए जाएंगे।
  • आगरा में साइंस सिटी का निर्माण कार्य शुरू होने वाला है। यहां पंचकुइयां के पास करीब दो एकड़ भूमि इस परियोजना के लिए ली जा चुकी है।
  • गोरखपुर में तारामंडल के पास साइंस पार्क का निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है।
  • वाराणसी, बरेली और बांदा में भी साइंस पार्क हेतु जमीन की पहचान कर ली गयी है।
  • वाराणसी में तारामंडल के निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गयी है। काम का प्रारंभिक चरण 2026 तक पूरा होने की संभावना है।
  • गोरखपुर में 'महंत अवैद्यनाथ ज्ञान विज्ञान पार्क' नाम से साइंस पार्क स्थापित किया जा रहा है। गोरखपुर में तारामंडल पहले से है, जिसके जीर्णोद्धार का काम चल रहा है।
  • साइंस पार्कों में गुरुत्वाकर्षण बल, न्यूटन के गति के नियम, बल और ध्वनि जैसे विभिन्न विज्ञान-आधारित सिद्धांतों से संबंधित मॉडल रखे जाएंगे। यह पार्क विज्ञान, गणित और खगोल विज्ञान के विद्वानों एवं विद्यार्थियों को नवाचार के अवसर उपलब्ध कराएंगे।

अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केन्द्र का दक्षिण एशिया केन्द्र आगरा में

  • आगरा-दिल्ली हाईवे स्थित गांव सींगना में अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र की दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केन्द्र खोलने की अनुमति प्राप्त हुई है।
  • इस अनुसंधान केंद्र के खुलने से उत्तर प्रदेश के किसानों को लाभ मिलेगा। किसानों को आलू की खेती की तकनीकी ज्ञान के साथ उच्च गुणवत्ता युक्त बीज भी प्राप्त हो सकेंगे। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और फसल की क्षति कम होगी।
  • उद्यान विभाग का 'राजकीय आलू संस्थान' सींगना स्थित 138.5 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। यहां वर्तमान समय में 25 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू बीज का उत्पादन होता है, जबकि, आगरा में किसान प्रतिवर्ष 78 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू उत्पादन करते हैं।
  • उत्तर प्रदेश का 27 प्रतिशत आलू आगरा में ही पैदा होता है। आगरा की जलवायु एवं मिट्टी आलू उत्पादन के लिए सर्वथा उपयुक्त पायी गयी है।
  • आलू उत्पादन में उत्तर प्रदेश का स्थान भारत के राज्यों में प्रथम है। यहां देश के कुल उत्पादन का लगभग 30 प्रतिशत आलू पैदा होता है, द्वितीय स्थान पर पं. बंगाल है।
  • आलू अनुसंधान केन्द्र खुलने से आगरा क्षेत्र में नई प्रसंस्करण योग्य प्रजातियों का विकास होगा। इससे वृहद एवं लघु स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना होगी।
  • अभी तक अंतरराष्ट्रीय आलू केन्द्र की दक्षिण एशिया में कोई अनुसंधान शाखा नहीं हैं। इसका एक केन्द्र चीन में है। चीन विश्व का सबसे बड़ा आलू उत्पादक और निर्यातक देश है।
  • अंतरराष्ट्रीय आलू केन्द्र (IPC) का मुख्यालय लीमा, पेरु में स्थित है।

प्रथम हॉकी म्यूजियम झांसी में

  • सुप्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचन्द की कर्मभूमि रही झांसी में डिजिटल खेल म्यूजियम जनता के लिए तैयार हो गया है।
  • हॉकी को समर्पित यह प्रथम डिजिटल म्यूजियम झांसी स्थित रानी लक्ष्मी बाई पार्क में स्थित है।
  • आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से युक्त इस म्यूजियम में पर्यटकों को मेजर ध्यानचंद के जीवन से जुड़ी तमाम जानकारियां प्राप्त हो सकेंगी।
  • म्यूजियम में एक विशालकाय हॉकी और बॉल बनाया गया है, जो उसी हॉकी और बॉल की तरह है, जिससे मेजर ध्यानचंद खेला करते थे। यहां डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से देश के मशहूर हॉकी खिलाड़ियो के संबंध में भी जानकारी दी जाएगी।
  • यहां एक वर्चुअल हॉकी फील्ड बनायी गयी है। इस वर्चुअल फील्ड में आगन्तुक हॉकी खेल सकते हैं।
  • यहां युवा खिलाड़ियों को यह जानकारी भी दी जाएगी कि स्पोर्ट्स में अपना कैरियर कैसे बनाया जा सकता हैं।
  • म्यूजियम के बाहर मेजर ध्यानचंद की मूर्ति लगायी गयी है, जो दिल्ली के राष्ट्रीय स्टेडियम के बाहर लगी मूर्ति के समान है।
  • कुल 19 करोड़ की लागत से तैयार इस म्यूजियम को 20 से अधिक जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन अपने आप में अलग और अद्भुत है।

बुंदेलखण्ड में देश का प्रथम सोलर एक्सप्रेसवे

  • देश का प्रथम सोलर एक्सप्रेसवे उत्तर-प्रदेश में तैयार हो रहा है। इसका नाम है 'बुंदेलखण्ड एक्सप्रेसवे'।
  • बुंदेलखण्ड एक्सप्रेसवे में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) के तहत सोलर प्लांट्स लगेंगे, जिससे 550 मेगावाट सोलर पावर जनरेट की जाएगी।
  • यह परियोजना लगभग एक लाख घरों को प्रतिदिन बिजली प्रदान करेगी। इसके लिए एक्सप्रेसवे पर 1700 हेक्टेयर भूमि चिन्हित कर ली गयी है।
  • परियोजना की आयु 25 वर्ष होगी।
  • एक्सप्रेसवे पर मुख्य मार्ग और सर्विस लेन के मध्य 15 से 20 मीटर चौड़ी पट्टी वाला क्षेत्र पूरे एक्सप्रेस-वे में खाली है, इसी पर सोलर पैनल लगाने की तैयारी की जा रही है।
  • बुंदेलखण्ड एक्सप्रेसवे को सोलर एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित करने का कार्य 'उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण' (UPEIDA) द्वारा किया जा रहा है।
  • कई बड़ी कंपनियां इस परियोजना में सहयोग कर रही हैं, जिनमें टास्को, टोरेंट पॉवर लि., सोमाया सोलर सॉल्यूशन, 3 आर मैनेजमेंट, एरिशाई मोबिलिटी, एरिया वृंदावन पॉवर और अवाडा एनर्जी लि. आदि शामिल हैं।
  • उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) द्वारा 296 किमी लंबे फोर-लेन 'बुंदेलखण्ड एक्सप्रेसवे' का निर्माण लगभग ₹14,850 करोड़ की लागत से किया गया है। एक्सप्रेसवे बुंदेलखण्ड क्षेत्र को इटावा के पास आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ता है।
  • बुंदेलखण्ड एक्सप्रेसवे सात जिलों से होकर गुजरता है, जिनमें चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा शामिल हैं।
  • बुंदेलखण्ड क्षेत्र में सोलर एक्सप्रेसवे बनाने के पीछे मुख्य कारण यह है कि यहां भूमि आसानी से उपलब्ध है। बुंदेलखण्ड क्षेत्र में मौसम साफ रहता है। यह एक शुष्क क्षेत्र है।

'गंगा डॉल्फिन' यूपी का 'राज्य जलीय जीव' घोषित

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने गंगा डॉल्फिन को 'राज्य का जलीय जीव' घोषित किया है।
  • गंगा डॉल्फिन को राज्य का जलीय जीव घोषित करने का उद्देश्य 'मेरी गंगा, मेरी डॉल्फिन 2023' अभियान के अन्तर्गत वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण के साथ नदियों और तालाबों की शुद्धता बनाए रखने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
  • प्रदेश सरकार की यह घोषणा भारत की समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिक विरासत की रक्षा के व्यापक लक्ष्य में योगदान करती हैं।
  • गांगेय डॉल्फिन गंगा, यमुना, चंबल, घाघरा, राप्ती और गेरुआ जैसी नदियों में पाई जाने वाली एक अनूठी और लुप्तप्राय प्रजाति है। यह पानी की गुणवत्ता के प्रति संवेदनशीलता के कारण नदी के स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में काम करती है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में सहायता प्राप्त होती है।
  • उत्तर प्रदेश में गांगेय डॉल्फिन की अनुमानित संख्या वर्तमान में लगभग 2000 है। इनके संरक्षण मूल्य को पहचानते हुए राज्य सरकार इस प्रजाति की रक्षा के लिए सक्रिय उपाय कर रही है।
  • उत्तर प्रदेश में गंगा डॉल्फिन को 'राज्य जलीय जीव' के रूप में पदनाम दिए जाने से इसे अतिरिक्त सुरक्षा और मान्यता प्राप्त होगी। यह कदम नदी के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय कल्याण के महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में इन प्राणियों के महत्व को रेखांकित करता है।

ललितपुर, पीलीभीत एवं जेवर में 'फार्मा सिटी'

  • उत्तर प्रदेश को देश में फार्मा एवं बायो टेक्नोलॉजी क्षेत्र का सबसे बड़ा हब बनाने की योजना साकार होती दिखायी दे रही है। प्रदेश सरकार पीलीभीत, ललितपुर और जेवर में देश के सबसे बड़े फार्मा पार्क को विकसित कर रही है।
  • देश-विदेश के अनेक उद्यमियों एवं निवेशकों ने उत्तर प्रदेश के इस फार्मा पार्क में निवेश की इच्छा जाहिर की है। यह जानकारी हाल ही में लखनऊ के बायोटेक पार्क में एडवाइजरी कम मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक के बाद प्रदेश सरकार द्वारा साझा की गयी। बैठक में देश भर के बायोटेक और फार्मा क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए।
  • उत्तर प्रदेश भारत सरकार की महत्वाकांक्षी 'नई फार्मा पालिसी-23' के तहत बायो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का गंभीरता से प्रयास कर रहा है।
  • राज्य सरकार जेवर एयरपोर्ट के पास 350 एकड़ क्षेत्र में चिकित्सा उपकरण निर्माण क्षेत्र में अत्याधुनिक मेडिटेक पार्क विकसित कर रही है, जहां 100 से अधिक उद्योग स्थापित होंगे। इसी तरह बल्क ड्रग्स स्टार्टिंग मैटेरियल और एक्टिव फार्मास्युटिकल के निर्माण हेतु ललितपुर में दो हजार एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक 'फार्मा पार्क' को विकसित किया जा रहा है।
  • 'मेडिटेक' एवं 'फार्मा पार्क' के निर्माण से भारत एक तरफ जहां अन्य देशों से आयात होने वाले उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा, वहीं उपकरण और दवाओं का निर्यात भी कर सकेगा। भारत को विश्व में दवाओं की कम लागत निर्माण और उच्च गुणवत्ता युक्त फार्मेसी के लिए जाना जाता है। यहां से करीब दो सौ देशों को दवा की आपूर्ति की जाती है।

नोएडा में अन्तरराष्ट्रीय फिल्म सिटी

  • उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना 'नोएडा इंटरनेशनल फिल्म सिटी' संबंधी परिकल्पना साकार होती नजर आ रही है। मार्च, 2024 तक की सूचना के अनुसार फिल्म सिटी के निर्माण हेतु ग्लोबल टेंडर जारी किये गये थे, जिसमें देश-विदेश की अनेक कंपनियों ने आवेदन किये।
  • नोएडा इंटरनेशनल फिल्म सिटी के लिए सर्वाधिक बड़ी बोली फिल्म निर्माता बोनी कपूर और रियल एस्टेट डेवलपर भूटानी समूह समर्थित बेव्यू प्रोजेक्ट्स ने लगाया है। माना जा रहा है कि परियोजना के प्रथम चरण पर कार्य शीघ्र आरम्भ हो जाएगा।
  • फिल्म सिटी का निर्माण ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे 1000 एकड़ से अधिक भूमि पर किया जा रहा है। यह कार्य दो चरणों में पूरा किया जाना है। प्रथम चरण के अन्तर्गत 230 एकड़ क्षेत्र में फिल्म सिटी के निर्माण हेतु कार्य शुरू किया जा रहा है।
  • फिल्म सिटी का निर्माण कार्य सार्वजनिक - निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) के अन्तर्गत किया जाना है। योजना के अनुसार संबंधित कंपनी को सरकार द्वारा निःशुल्क भूमि उपलब्ध करायी जाएगी, जिसपर कंपनी को अपना पैसा लगाकर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है।
  • उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी के निर्माण को लेकर राज्य सरकार कितना गंभीर है, इसे इसी बात से समझा जा सकता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निवेशकों और बालीवुड कलाकारों से परामर्श करने कई बार मुम्बई जा चुके हैं।

देश की प्रथम AI सिटी लखनऊ में

  • उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में देश की प्रथम एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-AI) सिटी विकसित करने की कार्य योजना तैयार की गई है, जिसे क्रियान्वित करते हुए यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPLc) ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
  • लखनऊ को एआई सिटी बनाने के क्रम में यूपीएलसी द्वारा 'यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति' (यूपीईएमपी) के अंतर्गत दिग्गज रियल स्टेट डेवलपर कंपनियों व एजेंसियों से डिजाइन, विकास व संचालन के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट के जरिए आवेदन मांगा गया है।
  • माना जा रहा है कि लखनऊ में एआई सिटी बनने से यहां आईटी कंपनियों के लिए ग्रेड-ए सर्टिफाइड कमर्शियल स्पेस, स्टेट ऑफ द आर्ट डाटा सेंटर, ग्रेड-ए फ्लेक्सिबल वर्क प्लेस एवं टेक लैब्स के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।
  • इसमें प्रदेश में कमर्शियल स्पेसेस के साथ लग्जरी व अफोर्डेबल हाउसिंग रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स, रीक्रिएशन एरिया, हरित क्षेत्र समेत कई वर्ल्ड क्लास एमिनिटीज के निर्माण का रास्ता भी साफ होगा।
  • लखनऊ में एआई सिटी बनाने के क्रम में आईटी व इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग ने शहर के प्रमुख स्थानों पर संभावित लैंड पार्सल की पहचान की है। इस क्रम में आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के स्वामित्व वाले 40 एकड़ भूमि पार्सल को एआई सिटी के लिए संभावित विकास स्थल के रूप में चिन्हित किया गया है।
  • लखनऊ एआई सिटी की भूमि नादरगंज औद्योगिक क्षेत्र के प्रमुख स्थान पर स्थित और लखनऊ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 3 किलोमीटर दूरी पर है। भूमि क्षेत्र तक दो-लेन की सड़क के माध्यम से पहुंचा जा सकता है।

उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा

वर्ष 2025 तक 250 बिलियन अमेरिकी डालर से अधिक की आवश्यकताओं के साथ भारत वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख एयरोस्पेस और रक्षा बाजार के रूप में तेजी से उभर रहा है। यह रक्षा आवश्यकताएं सैन्य विमानों, पनडुब्बियों, हेलीकॉप्टरों, भूमि प्रणालियों से लेकर हथियारों और सेंसर तक फैली हैं।
इस वर्तमान आर्थिक अवसर का लाभ उठाने के उद्देश्य एवं एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ भारत सरकार ने देश में दो रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित करने की घोषणा की है, जिसमें से एक उत्तर प्रदेश में है।

उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर
  • उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर (यूपी डीआईसी) एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जो भारतीय एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता को कम करने का उद्देश्य रखती है।
  • बीते वर्ष अलीगढ़ में आयोजित मीट में रक्षा उत्पादन में ₹3700 करोड़
  • से अधिक के निवेश की घोषणा के साथ यूपी रक्षा कॉरिडोर की उत्साहजनक शुरुआत हुई। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) को विभिन्न अन्य राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर इस परियोजना को पूर्ण करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।
  • उत्तर प्रदेश में रक्षा औद्योगिक गलियारा की स्थापना से न केवल विनिर्माण केंद्रों की स्थापना का लक्ष्य पूरा होगा, बल्कि देश में सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य में रोजगार के नये अवसर भी सृजित होंगे।
  • उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा (यूपीडीआईसी) की योजना 6 क्षेत्र (नोड्स)-लखनऊ, कानपुर, झाँसी, आगरा, अलीगढ़, चित्रकूट में विस्तृत होगी। यह उत्तर प्रदेश के मध्य, पूर्व, पश्चिम क्षेत्र में फैली होगी और दिल्ली को जोड़ने वाले स्वर्णिम चतुर्भुज के साथ-कोलकाता एक्सप्रेसवे के नेटवर्क द्वारा समर्थित है।
इससे जुड़े एक्सप्रेसवे हैं -
  • यमुना एक्सप्रेसवे
  • आगरा - लखनऊ एक्सप्रेसवे
  • पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
  • बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
  • गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे
  • गंगा एक्सप्रेसवे
आई.आई.टी. कानपुर और आई.आई.टी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से संबंधित उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना हेतु अधिकृत किया गया है।
यूपीडीआईसी के लिए नोड्स पर विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने हेतु यूपीडा और विभिन्न कंपनियों के बीच 32 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। रक्षा औद्योगिक गलियारा अलीगढ़ और कानपुर नोड्स के लिए भूमि आवंटन शुरू किया जा चुका है।
यूपीडा और भारतीय नौसेना के मध्य संबंधित क्षेत्रों को चिन्हित करने में सुविधा प्रदान करने तथा भारतीय उद्योगों के माध्यम से विनिर्माण कार्य आरंभ करने हेतु एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये गये हैं।
उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा हेतु अब तक ₹24,510.60 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इससे करीब 41,667 लोगों को रोजगार प्राप्त होंगे। स रक्षा मंत्रालय और निजी उद्योगों के साथ साझेदारी में
अत्याधुनिक परीक्षण सुविधाओं की स्थापना के लिए ₹117.06 करोड़ अनुदान सहायता प्रदान करने की मंजूरी दी गई है।

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे औद्योगिक गलियारा

  • उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना 'पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे औद्योगिक गलियारा' अपने अंतिम स्वरूप में लगभग तैयार है। इस योजना के अन्तर्गत पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर 341 किमी दूरी में लखनऊ से गाजीपुर के बीच छह औद्योगिक गलियारा विकसित करने की प्रक्रिया आरंभ की जा चुकी है। इसके लिए स्थान चिन्हित कर लिए गए हैं। संबंधित जिले के राजस्व अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी गई है।
  • अयोध्या-प्रयागराज हाईवे और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे क्रासिंग पर 410 हेक्टेयर भूमि में औद्योगिक गलियारा विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की ओर से भूमि चिन्हित की गई है।
  • पूर्वांचल एक्सप्रेसवे औद्योगिक गलियारा (पूर्वांचल एक्सप्रेसवे इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर) की स्थापना से एक तरफ जहां औद्योगिक विकास के साथ आर्थिक रूप से पिछड़े पूर्वांचल क्षेत्र में विनिर्माण इकाइयां स्थापित होंगी, वहीं इससे स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

वाराणसी में 'काशी तमिल संगमम'

  • देश के अनूठे सांस्कृतिक सम्मेलन 'काशी तमिल संगमम' के तीसरे संस्करण का आयोजन 15 से 24 फरवरी, 2025 तक वाराणसी में हुआ।
  • यह सांस्कृतिक संगम देश के दो सबसे प्राचीन और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों - काशी और तमिलनाडु को एक मंच पर साथ आने का अवसर प्रदान करता है।
  • इस वर्ष आयोजित काशी तमिल संगमम का विशेष महत्व रहा, क्योंकि इसे महाकुंभ के साथ मेल खाते स्वरूप में तैयार किया गया था।
  • काशी तमिल संगमम में इस वर्ष तमिलनाडु के लगभग 1,000 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों के 200 से अधिक तमिल मूल के छात्र इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर काशी और तमिलनाडु दोनों के नृत्य प्रदर्शन, संगीत और उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन किया जिसका प्रभाव आज भी यहां देख-महसूस किया जा सकता है।

इतिहास
तमिल ऋषि, मुनि और विद्वान सदियों से काशी की यात्रा करते रहे हैं, जिससे काशी का आध्यात्मिक और शैक्षणिक संपदा समृद्ध हुई है। आदि शंकराचार्य से लगाय महाकवि सुब्रमण्यम भरतियार तक ने काशी में तमिल सांस्कृतिक विकास के लिए कार्य किया है।

पुरस्कार एवं सम्मान

यूपी के 10 व्यक्ति पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित

  • पद्म पुरस्कार 2025 में उत्तर प्रदेश के 10 व्यक्तियों के नाम शामिल हैं।
  • पद्मभूषण सम्मान- रामबहादुर राय (साहित्य, शिक्षा एवं पत्रकारिता) और साध्वी ऋतम्भरा (समाजसेवा)।
  • पद्मश्री सम्मान- प्रो. आशुतोष शर्मा (विज्ञान एवं इंजीनियरिंग), डा. सोनिया नित्यानंद (चिकित्सा), सैयद ऐनुल हसन (शिक्षा एवं साहित्य), हृदय नारायण दीक्षित (साहित्य एवं शिक्षा), गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ (साहित्य एवं शिक्षा), सत्यपाल सिंह (खेल), श्याम बिहारी अग्रवाल (कला), श्री नारायण उर्फ भुलई भाई (लोक कार्य)।

गणतंत्र दिवस परेड में उत्तर प्रदेश की झांकी को प्रथम स्थान

  • गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2025) के अवसर पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर उत्तर प्रदेश की ओर से निकाली गई झांकी 'महाकुंभ, 2025 : स्वर्णिम भारत : विरासत और विकास'। को 'पीपुल्स च्वाइस अवार्ड' श्रेणी में प्रथम स्थान मिला।
  • इस श्रेणी में 40 प्रतिशत मतों के साथ उत्तर प्रदेश ने प्रथम स्थान जबकि 35 प्रतिशत मतों के साथ गुजरात ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
  • उत्तर प्रदेश की झांकी 'महाकुम्भ' की थीम पर आधारित थी। यह झांकी प्रयागराज में पवित्र गंगा, अविरल यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर आयोजित महाकुम्भ के दिव्य स्वरूप को प्रदर्शित कर रही थी।

गणतंत्र दिवस पर निकाली गयी झांकियों को राज्यवार इस प्रकार अंक/मत प्राप्त हुए-

प्रदेश प्रतिशत मत प्राप्त कुल मत
उत्तर प्रदेश 40% 25007
गुजरात 35% 21714
हरियाणा 5% 2975
बिहार 3% 1969
आंध्र प्रदेश 2% 1467
  • उत्तर प्रदेश की झांकी में ट्रैक्टर के आगे 'अमृत कलश' को आगे झुकी अवस्था में दर्शाया गया था, जिससे अमृतधारा प्रवाहित हो रही थी। पीछे शंखनाद, आचमन और साधना करते साधु-संत और संगम में डुबकी लगाते श्रद्धालुओं को दिखाया गया था।
  • ट्रेलर के प्लेटफार्म पर समुद्र मंथन की पौराणिक कथा को प्रदर्शित किया गया था, जिसने महाकुंभ के महत्व और इसकी ऐतिहासिकता को रेखांकित किया। पिछले हिस्से में समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों को दर्शाया गया था।

उत्तर प्रदेश टाउनशिप पालिसी-2023

  • उत्तर प्रदेश में नगरीकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार 'उत्तर प्रदेश टाउनशिप पॉलिसी-2023' लेकर आयी है। यह नीति जहां राज्य के छोटे शहरों का कायाकल्प करने वाली बतायी जा रही है, वहीं गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए इसे काफी लाभप्रद भी माना जा रहा है।
  • उत्तर प्रदेश टाउनशिप पॉलिसी-2023 राज्य की पूर्ववर्ती सरकार द्वारा प्रस्तुत 'इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी-2014' का स्थान लेगी।
  • नई टाउनशिप नीति का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि 2 लाख से कम जनसंख्या वाले शहरों में यह योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा देती है।
  • नई पॉलिसी के अन्तर्गत अब न्यूनतम 12.5 एकड़ भूमि पर भी टाउनशिप प्लान किया जा सकेगा। इससे पहले इसके लिए न्यूनतम 25 एकड़ भूमि चाहिए था।
  • नई पॉलिसी से छोटे शहरों में नियोजित कॉलोनियां बनाने में सहायता मिलेगी। कम जनसंख्या वाले शहरों में 'ग्रुप हाउसिंग सोसायटी' जैसी योजनाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • नई पॉलिसियों के अनुसार बड़े शहरों में टाउनशिप बनाने के लिए न्यूनतम भूमि 25 एकड़ ही चाहिए होगी।
  • प्रदेश सरकार की इस पॉलिसी में स्पष्ट किया गया है कि टाउनशिप तक पहुंच के लिए न्यूनतम 25 मीटर चौड़ी सड़क देना अनिवार्य होगा, जबकि कॉलोनी के अंदर कम से कम 12 मीटर चौड़ी सड़क होनी चाहिए। इससे आवागमन सुविधाजनक होगा और लोगों को मोहल्ले के अंदर खुली और चौड़ी सड़कें उपलब्ध होंगी। संकरी गलियों की समस्या दूर होगी।
  • प्रदेश की नई टाउनशिप पॉलिसी में घर और दफ्तर को एक दूसरे के निकट रखने पर जोर दिया गया है। इसका यह उद्देश्य यह है कि ऐसी कॉलोनियां या टाउनशिप विकसित की जाए जहां लोगों के लिए घर से दफ्तर की दूरी कम हो। इससे 'पीक ऑवर्स' में सड़कों पर लंबे जाम से छुटकारा मिलेगा।
  • नई पॉलिसी में सरकार की मंशा चंडीगढ़ जैसी टाउनशिप प्लानिंग को बढ़ावा देना है। इसमें पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त फुटपाथ और खराब जगह को ग्रीन बेल्ट में बदलने का प्रावधान शामिल है।
  • नई पॉलिसी के अनुसार टाउनशिप योजनाओं में 20 प्रतिशत आवास आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और लोअर इनकम ग्रुप (एलआईजी) के लिए आरक्षित रखे जाएंगे। इसके अतिरिक्त क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों से निपटने के लिए वेटलैंड, वाटर बॉडीज और बाढ़ क्षेत्र को टाउनशिप के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा।
  • शहरों में पार्क, स्पोर्ट कॉम्प्लेक्स, पार्किंग, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, पुलिस स्टेशन, जीरो वेस्ट फैसिलिटी, बागवानी जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
  • शहर की बड़ी इमारतों की डिजाइन में स्थानीय इतिहास, सांस्कृतिक पहचान और हेरिटेज को ध्यान में रखते हुए उसे बढ़ावा दिया जाएगा।
  • नई टाउनशिप पॉलिसी में 'विलेज सोसायटी' के विकास का भी ध्यान रखा गया है। 50 एकड़ कृषि भूमि पर कॉलोनियां बनाने के लिए लाइसेंस दिए जाएंगे। ऐसे प्रोजेक्ट्स ही शहरों के मास्टर प्लान में शामिल होंगे।
  • 'विलेज सोसायटी' और अन्य सरकारी भूमि का कन्वर्जन किया जाना अब सरल होगा। इन्हें बदलने का काम 60 दिन के अंदर पूर्ण करने का निर्देश है।
  • नई पॉलिसी में औद्योगिक और इंटरनल ट्रेड को बढ़ावा देने के लिए 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गयी है।

प्राइवेट प्लेयर्स को लाभ
  • नई टाउनशिप पॉलिसी 2023 में निवेश करने वाले प्राइवेट डेवलपर्स को अनेक रियायतें देने की घोषणा की गयी है। ऐसे डेवलपर्स को सबसे बड़ी राहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में मिलेगी। 5 लाख से अधिक और 10 लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों में टाउनशिप बनाने पर भू- उपयोग परिवर्तन शुल्क में 25 प्रतिशत, जबकि 5 लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों में 50 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी।
  • नई पॉलिसी के अनुसार टाउनशिप का क्षेत्रफल 50 एकड़ से कम होने पर मात्र आवासीय उपयोग में ही अनुमति प्रदान की जाएगी। दूसरी तरफ टाउनशिप का क्षेत्रफल 50 एकड़ या इससे अधिक होने पर कृषि उपयोग की भी अनुमति प्रदान की जाएगी।
  • लाइसेंस क्षेत्र के अंतर्गत नयी कॉलोनी के विकास एवं निर्माण संबंधी पूर्ण अधिकार मात्र डेवलपर्स, कंसोर्टियम के पास होंगे।

अज्ञेय स्मृति सम्मान, 2025
7 मार्च, 2025 को कथाकार एवं कवि उदय प्रकाश को अज्ञेय स्मृति सम्मान-2025' से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान विख्यात हिन्दी साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' की 114वीं जयंती पर कलावती देवी स्मृति न्यास, कुशीनगर द्वारा प्रदान किया गया।

प्रदेश की छह विभूतियों को ‘उत्तर प्रदेश गौरव’ सम्मान

उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस पर 24 जनवरी, 2025 को प्रदेश की छह विभूतियों को 'उत्तर प्रदेश गौरव' सम्मान प्रदान किया गया। सभी को पुरस्कार स्वरूप ₹11-11 लाख की धनराशि और प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुए।
उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान प्राप्त करने वाले नाम हैं-

डॉ. कृष्णकांत शुक्ला

पर्यावरणविद, भौतिक विज्ञानी और साहित्यकार/ कवि डॉ. कृष्णकांत शुक्ला वाराणसी के मूल निवासी हैं। इन्होंने लंबे समय तक अमेरिका में काम किया और वहीं रह कर सूर, तुलसी, मीरा, कबीर, गोरखनाथ और तुकाराम आदि की रचनाओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया।

कृष्णा यादव

  • कृष्णा यादव को यह सम्मान स्वरोजगार तथा 'आत्म निर्भर भारत' के क्षेत्र में नया आयाम स्थापित करने हेतु प्रदान किया गया।
  • बुलंदशहर की उद्यमी कृष्णा यादव ने वर्ष 1995 में एक छोटे कमरे से अचार का व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने सब्जियां उगाई और अचार-मुरब्बा बनाकर बेचना आरंभ किया। आज उनका व्यवसाय सात करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है।

कर्नल सुभाष देशवाल

  • सेना से अवकाश लेने के बाद कर्नल सुभाष देशवाल ने कृषि क्षेत्र अन्तर्गत नवाचार के क्षेत्र में कदम बढ़ाया, जो आज सफलता का पर्याय बन चुका है।
  • बुलंदशहर के सिकंदराबाद निवासी कर्नल सुभाष देशवाल ने रिटायरमेंट के बाद वर्ष 2000 में ढाई एकड़ जमीन किराए पर लेकर गाजर उगाना शुरू किया। आज वह 1200 एकड़ जमीन पर गाजर उगा रहे हैं और देश के सबसे बड़े गाजर उत्पादक बन चुके हैं। कृषि से आज उनका करोड़ों का टर्नओवर है। फूड प्रोसेसिंग में उनकी कंपनी आज देश की सबसे प्रतिष्ठित कंपनियों में से एक मानी जाती है।

मनीष वर्मा

  • लखनऊ निवासी मनीष वर्मा मूल रूप से वेयर हाउसिंग, फूड प्रोसेसिंग, कृषि, मत्स्य पालन समेत कई उद्यमों से जुड़े हैं। वर्ष 2008 में उन्होंने कानपुर रोड पर 'ड्रीम वर्ल्ड रिसॉर्ट' की शुरूआत की। इस क्षेत्र में उनका नया अनुभव कामयाब हुआ और अब वह बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
  • पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में मनीष वर्मा अच्छा काम कर रहे हैं।

जनजाति सांस्कृतिक समागम-2025
  • जनजाति सांस्कृतिक समागम-2025 का आयोजन फरवरी, 2025 में प्रयागराज महाकुंभ में किया गया, जिसमें देश भर से 15 हजार से अधिक आदिवासियों ने भाग लिया।
  • जनजाति सांस्कृतिक समागम में सभी प्रतिभागियों ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संकल्प लिया।
  • बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में वर्ष 2025 को 'जनजातीय गौरव वर्ष घोषित' किया गया है।

विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित 50 शहरों में 9 उत्तर प्रदेश में
  • विश्व के सबसे प्रदूषित 50 शहरों में से 42 भारत में हैं, जिनमें से 9 उत्तर प्रदेश में हैं। नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, मुजफ्फरनगर, आगरा, इटावा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, मेरठ आदि शहर इस सूची में शामिल हैं।
  • जून, 2025 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) की छठी वर्षगांठ पर जारी रेस्पायर लिविंग साइंसेज की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच भारत के शहरों में पीएम 2.5 के स्तर में औसतन 27 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

जय सिंह

  • बहराइच निवासी जय सिंह आज देश के सबसे बड़े केला उत्पादक माने जाते हैं। जब उन्होंने बहराइच में केला की खेती का निर्णय लिया तो इनके समक्ष सबसे बड़ी चुनौती थी कि यूपी के गर्म मौसम में केले की खेती को कैसे सफल बनाया जाए?
  • 1972 में लखनऊ विश्वविद्यालय से बायो केमिस्ट्री से एमएससी करने वाले जय सिंह ने 1983 में बेहतर भविष्य के लिए पुश्तैनी जमीन पर केले की खेती शुरू की, जिसमें कुछ समय के भीतर ही उन्हें अभूत पूर्ण सफलता मिली।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से जय सिंह को 'सर्वश्रेष्ठ केला किसान' का सम्मान मिल चुका है। चौधरी चरण सिंह पुरस्कार से भी वह सम्मानित हो चुके हैं।

हिमांशु गुप्ता

  • वृंदावन के मूल निवासी हिमांशु गुप्ता ने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक किया और आगे की पढ़ाई अमेरिका स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पूरी की।
  • हिमांशु आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस (AI) के माध्यम से किसानों को फसल से संबंधित पूर्वानुमान की जानकारी देते हैं। इसके लिए उन्होंने एक एप बनाया है। यह एप बताता है कि फसल के लिए आगे मौसम कैसा रहेगा, कब बीज डालें और कब फसलों को काटना सही होगा।
  • आज 60 देशों में आईटीसी के सहयोग से लगभग ढाई करोड़ लोग हिमांशु के एप से जुड़कर इसका लाभ ले रहे हैं। उनके शोध को टाइम मैगजीन ने 'सर्वश्रेष्ठ शोध' के रूप में प्रकाशित किया है।

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UPPSC, UPSSSC, UP Police, UP Lekhpal, RO/ARO और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।