उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार, मुद्दे एवं प्रभाव
उत्तर प्रदेश की माटी अब केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वैभव की गवाह नहीं रही, बल्कि यह तकनीकी क्रांति और नवाचार (Innovation) के एक नए स्वर्णिम युग की पटकथा भी लिख रही है। स्टार्टअप्स की बढ़ती गूंज, विश्वस्तरीय इन्क्यूबेशन सेंटर्स और नवाबों के शहर लखनऊ में आकार लेती देश की पहली 'एआई सिटी' (AI City) इस बदलाव के सबसे बड़े प्रमाण हैं। इस विस्तृत लेख में आपको उत्तर प्रदेश के उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम, नवाचार के विभिन्न क्षेत्रों, नई एमएसएमई नीति 2022 (MSME Policy) और राज्य के आर्थिक विकास में इन क्रांतिकारी कदमों की पूरी और प्रामाणिक जानकारी मिलेगी।
उत्तर प्रदेश : नवाचार, मुद्दे एवं प्रभाव
नवाचार का प्रभाव चक्र
नवीनता/नवाचार
नई विधि का प्रयोग
नई विधि का प्रयोग
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स्वस्थ प्रतिस्पर्धा
संसाधनों का बेहतर उपयोग
संसाधनों का बेहतर उपयोग
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उत्पादकता व दक्षता
नए उत्पादों का निर्माण
नए उत्पादों का निर्माण
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आर्थिक व सामाजिक परिवर्तन
तीव्र विकास व लाभ
तीव्र विकास व लाभ
यूपी नवाचार इकोसिस्टम: एक नज़र में
🏢 देश का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम
UP 2024 में देश का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप राज्य बना। यहां 14,000+ स्टार्टअप और 26+ यूनिकॉर्न मौजूद हैं।
💰 फंडिंग और सपोर्ट
सरकार द्वारा ₹1000 करोड़ का 'एंजल फंड' और ₹400 करोड़ का 'यूपी इनोवेशन फंड' स्थापित किया गया है।
🚀 प्रमुख इन्क्यूबेटर्स
कुल 63 मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर्स। लखनऊ में भारत का सबसे बड़ा इन्क्यूबेटर स्थापित किया जा रहा है।
नवाचार के प्रमुख उद्देश्य
यूपी स्टार्टअप नीति 2022 के लक्ष्य
- सभी 75 जिलों में कम-से-कम एक इन्क्यूबेटर सहित कुल 100 इन्क्यूबेटर्स की स्थापना।
- नवाचार प्रोत्साहन हेतु 1 मिलियन स्क्वायर फीट भूमि की उपलब्धता।
- 10,000 से अधिक नए स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना।
- आधुनिकतम तकनीक से युक्त 3 उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना।
- आईटी व इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग का नोडल एजेंसी के रूप में कार्य।
विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार के उदाहरण
🛡️ रक्षा क्षेत्र
IIT कानपुर के सेंटर ने रक्षा नवाचार संगठन (DIO) के साथ MOU किया। 'आईडेक्स एण्ड प्राइम' के तहत AI, सुरक्षित संचार में स्टार्टअप्स को ₹10 करोड़ तक की सहायता।
⚕️ स्वास्थ्य
IIT कानपुर के 'NOCC ARC-रोबोटिक्स' ने 90 दिन में उच्च गुणवत्ता का सस्ता वेंटिलेटर (NOCC ARC-V310) बनाया।
♻️ पर्यावरण व वहनीयता
'हेल्प अस ग्रीन' (टाटा ट्रस्ट समर्थित) फूलों के कचरे से धूपबत्ती व पशु-मुक्त चमड़ा बना रहा है। AKTU ने 'ग्रीन स्टार्टअप्स' को प्रोत्साहन दिया है।
💻 तकनीकी विकास (AI)
लखनऊ को देश की पहली 'एआई सिटी' के रूप में विकसित किया जा रहा है। 40 एकड़ भूमि नादरगंज में चिन्हित।
नवाचार के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
- केंद्रीकरण: 4500 स्टार्टअप्स केवल नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ में केंद्रित हैं।
- अवसंरचना: टियर-2/टियर-3 शहरों में निर्बाध विद्युत और इंटरनेट की कमी।
- ब्रेन-ड्रेन: कुशल और योग्य मानव संसाधन का प्रदेश से बाहर पलायन।
- मानसिकता: पारंपरिक पीढ़ी में जोखिम उठाने की कमी और नए कार्यों को हतोत्साहित करना।
- नीति क्रियान्वयन: नीतियों का जमीनी स्तर पर पूर्ण रूप से लागू न हो पाना।
उत्तर प्रदेश एमएसएमई नीति-2022: पूंजीगत अनुदान
| औद्योगिक क्षेत्र | सूक्ष्म (Micro) | लघु (Small) | मध्यम (Medium) |
|---|---|---|---|
| बुंदेलखंड और पूर्वांचल | 25% | 20% | 15% |
| मध्यांचल और पश्चिमांचल | 20% | 15% | 10% |
| विशेष छूट (SC/ST/महिला उद्यमी) | उपरोक्त सभी श्रेणियों में 2% अतिरिक्त अनुदान (अधिकतम ₹4 करोड़) | ||
*सूक्ष्म उद्योगों को 5 वर्ष तक 50% ब्याज अनुदान (SC/ST/महिलाओं को 60%) भी देय है।
- नवाचार का संबंध नवीनता से है। किसी कार्य क्षेत्र, उत्पाद, सेवा, विचार अथवा प्रक्रिया की दक्षता अथवा प्रभावशीलता में नयी विधि अपनाकर वृद्धि करना 'नवाचार' है। यह प्रयासपूर्ण किया जाने वाला कार्य है।
- अर्थव्यवस्था और विज्ञान प्रौद्योगिकी समेत विकास के विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार एक आंतरिक और मूलभूत आवश्यकता है। इससे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में विकास के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा उत्पन्न होती है।
- प्रतिस्पर्धा के फलस्वरूप विभिन्न संस्थान भूमि, श्रम एवं पूँजी जैसे संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हैं, जिससे वह नए उत्पादों का विकास व निर्माण कर अपनी पूँजी व लाभ में वृद्धि कर सकें।
- नवाचार से संस्थान की उत्पादकता व दक्षता में वृद्धि होती है, जिससे उनका तीव्र विकास संभव होता है। इस प्रकार भौतिक अथवा परोक्ष रूप में अपनायी गई नई युक्तियाँ आर्थिक व सामाजिक परिवर्तन की वाहक बनाती हैं।
उत्तर प्रदेश में नवाचार- इकोसिस्टम से जुड़े प्रमुख तथ्य
उत्तर प्रदेश में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त 63 इन्क्यूबेटर्स (स्टार्टअप स्थापित करने में मददगार संस्थाएं) हैं। यहां उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) में पंजीकृत 10 हजार से अधिक स्टार्टअप संचालित हैं।
भारत का सबसे बड़ा इन्क्यूबेटर लखनऊ में स्थापित किया जा रहा है।
नोएडा, गाजियाबाद तथा लखनऊ देश में सर्वाधिक स्टार्टअप वाले गंतव्य बन कर उभरे हैं।
सरकार द्वारा ₹ 1,000 करोड़ से 'एंजल फंड' की स्थापना की गई है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में अधिकाधिक स्टार्टअप की शुरुआत एवं उनके प्रबंधन में सहयोग करना है।
स्टार्ट अप की वित्तीय सहायता के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने ₹ 400 करोड़ की राशि से 'उत्तर प्रदेश इनोवेशन फण्ड' स्थापित किया है।
इनोवेशन हब
- उत्तर प्रदेश में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के 'सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज' (CAS) में 'इनोवेशन हब' स्थापित किया गया है।
- इनोवेशन हब की स्थापना प्रदेश में दक्ष एवं सफलता की योजना रखने वाले स्टार्टअप के निर्माण व नवाचार में लगे स्टार्टअप को 'इन्क्यूबेशन सपोर्ट सिस्टम' उपलब्ध कराने की रणनीतिक पहल के रूप में की गई है।
- इनोवेशन हब का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं में उद्यमिता का विकास कर उन्हें सामाजिक परिवर्तन का ध्वजवाहक बनाना है।
- यह स्टार्टअप इकोसिस्टम के क्षेत्र में उत्कृष्टता बढ़ाने वाले केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इससे प्रत्येक स्टार्टअप को नवाचार हेतु प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे उच्च उद्यमिता का प्रयास सफल होगा।
- यह प्रत्येक विचार को धरातल पर उतारने का महत्वपूर्ण साधन बनेगा।
नवाचार उद्देश्य एवं प्रभाव
- उद्यमिता का विकास
- क्षमता प्रबंधन में कुशलता
- रोजगार में वृद्धि
- तकनीकी विकास
- आर्थिक विकास
- सामाजिक परिवर्तन
उत्तर प्रदेश स्टार्टअप पालिसी
- उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर नवाचार संस्कृति के प्रसार का कार्य किया जा रहा है, जिससे राज्य में स्टार्टअप, यूनिकार्न एवं सूनिकार्न की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।
- प्रदेश में विश्व स्तरीय स्टार्टअप इकोसिस्टम उपलब्ध कराने व नवाचार संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2022' तैयार की है।
स्टार्ट नीति के प्रमुख उद्देश्य
- 'स्टार्टअप-इंडिया' द्वारा जारी की जाने वाली 'राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग' में उत्तर प्रदेश को शीर्ष-तीन राज्यों में स्थान प्राप्त हुआ है।
- सभी जिलों में कम-से-कम एक इन्क्यूबेटर सहित प्रदेश में कुल 100 इन्क्यूबेटर्स की स्थापना करना।
- स्टार्टअप के लिए नवाचार/त्वरण प्रोत्साहन हेतु 1 मिलियन स्क्वायर फीट भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- प्रदेश में 10,000 से अधिक स्टार्टअप हेतु वातावरण तैयार करना।
- आधुनिकतम तकनीक से युक्त 3 उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना।
- देश के सबसे बड़े इन्क्यूबेटर की लखनऊ में स्थापना करना।
- प्रदेश में स्टार्टअप वातावरण के विकास हेतु 'आईटी व इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग' नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश देश का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम वाला राज्य
- उत्तर प्रदेश वर्ष 2024 में देश का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम वाला राज्य बन गया।
- उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विस्तार के साथ स्टार्टअप्स, 'यूनिकॉर्न' और 'सूनिकॉर्न' की संख्या तीव्र गति से बढ़ रही है। वर्ष 2025 के आरंभिक महीनों में यहां 14 हजार स्टार्टअप्स और 26 यूनिकॉर्न विद्यमान थे।
- अनुकूल औद्योगिक और निवेश नीतियों के चलते उत्तर प्रदेश में न केवल नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि कई स्टार्टअप्स अब यूनिकॉर्न बनने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। यूनिकॉर्न बनने की ओर तीव्र गति से अग्रसर स्टार्टअप्स को 'सूनिकॉर्न' कहते हैं।
- उत्तर प्रदेश में स्थापित पे-टीएम, पे-टीएम मॉल, इंडिया मार्ट, इनोवेसर, मोगलिक्स, पाइन लैब्स, इंफो एज और फिजिक्स वाला जैसे अनेक प्रसिद्ध स्टार्टअप्स हैं, जो देश के प्रसिद्ध 'यूनिकॉर्न' स्टार्टअप्स में शुमार हैं।
- 'यूनिकॉर्न' वह स्टार्टअप होता है, जिसकी वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर से अधिक हो। फिलहाल देश में 111 यूनिकॉर्न विद्यमान हैं।
- उत्तर प्रदेश में दो यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स कार्य कर रहे हैं, जिनके नाम 'क्लास प्लस' व 'इनशॉर्ट्स' हैं।
- उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में स्टार्टअप्स की उपस्थिति है और 49 प्रतिशत स्टार्टअप्स टियर 2 व टियर 3 शहरों से संबंधित हैं।
- प्रदेश में स्टार्टअप्स इकोसिस्टम को प्रोत्साहन मिलने का प्रभाव यह है कि यहां एक लाख से अधिक रोजगार सृजन के अवसर उपलब्ध हुए हैं।
नवाचार के विभिन्न क्षेत्र
रक्षा क्षेत्र
आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप इन्क्यूबेशन तथा इनोवेशन सेंटर ने रक्षा नवाचार संगठन (DIO) के साथ हाल में एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किया, जिससे यह आई-डेक्स एवं प्राइम (IDEX & Prime) कार्यक्रम का सहयोगी इन्क्यूबेटर बन गया।
'आईडेक्स एण्ड प्राइम' रक्षा क्षेत्र के विभिन्न आयामों- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एडवांस इमेजिंग, सेंसो सिस्टम, सुरक्षित संचार आदि, में नवाचार में लगे घरेलू स्टार्टअप्स को ₹10 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
स्वास्थ्य
कोविड-19 महामारी के दौरान तथा बाद में भी आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप इन्क्यूबेशन एण्ड इनोवेशन सेन्टर के अधीन 'NOCC ARC-रोबोटिक्स' नामक स्टार्टअप ने उच्च गुणवत्ता युक्त सस्ते वेण्टीलेटर का निर्माण कर आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं को सरल एवं सर्वसुलभ बनाने का कार्य किया।
इस वेण्टीलेटर की 'परिकल्पना से निर्माण तक' का कार्य मात्र 90 दिन में पूरा किया गया।
वर्तमान में यह उत्पाद NOCC ARC-V310 के नाम से विभिन्न अस्पतालों में उपयोग किया जा रहा है।
शिक्षा
उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग ने राज्य द्वारा संचालित सभी विद्यालयों में नवाचार व सर्वोत्तम प्रथाओं (best practices) हेतु एक 'सार संग्रह' (compendium) का विकास किया है।
इस 'सार-संग्रह' का निर्माण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के सहयोग से किया गया है।
प्रदेश के सभी 70 डायट्स (DIETs) द्वारा प्रस्तुत सुझावों में सर्वोत्तम - चार का प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन किया गया है।
पर्यावरण
प्रदेश के डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय के इनोवेशन हब ने एक नई पहल के तहत 'ग्रीन - स्टार्टअप' को प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है, जो पर्यावरण संरक्षण हेतु कार्यरत हैं। इनोवेशन हब इन्हें नीति-निर्माताओं से जोड़ने में सहायता प्रदान करेगा।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत 5 स्टार्टअप्स का चयन किया गया है, जो अपने उत्पाद/सेवाओं की सतता (sustainability) का प्रदर्शन करेंगे।
'ग्रीन स्टार्टअप्स' द्वारा अनेक नवाचार तकनीक व समाधानों का प्रयास किया जा रहा है। उदाहरण-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का एल्गी द्वारा निर्माण, कार्बन फुटप्रिंट में कमी, दक्ष ऊर्जा संसाधन, पुनर्प्रयुक्त होने योग्य जल संसाधन पर कार्य आदि।
वहनीयता (Sustainability)
उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप 'कानपुर फ्लावर साइकिलिंग प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा पशु-मुक्त वहनीय चमड़े का निर्माण, नदियों एवं मंदिरों में फेंके गये अपशिष्ट फूलों द्वारा धूपबत्ती, अगरबत्ती, वर्मीकंपोस्ट आदि का निर्माण किया जा रहा है।
'हेल्प अस ग्रीन' नामक इस अभियान को टाटा ट्रस्ट द्वारा समर्थन प्राप्त है। इस नवाचार हेतु संस्था को 'तकनीकी स्टार्टअप' श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
तकनीकी विकास
उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ, कानपुर, नोएडा, वाराणसी तथा प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों को AI एवं IT हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
लखनऊ को भारत के प्रथम 'एआई सिटी' के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उभरती नई तकनीक के प्रसार व प्रोत्साहन हेतु राज्य सरकार 'AI पार्क' व 'उत्कृष्टता केंद्रों' का निर्माण कर प्रदेश में नवाचार तकनीकी वातावरण के विस्तार का प्रयास कर रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने आधिकारिक स्टार्टअप पोर्टल 'स्टार्टअप-यूपी' लांच किया है, जो प्रदेश में स्टार्ट अप्स के विषय में सभी आवश्यक जानकारी व सूचना उपलब्ध कराने का कार्य करता है।
प्रदेश में नवाचार वातावरण के समक्ष चुनौतियाँ
- प्रदेश में पंजीकृत 10 हजार स्टार्टअप्स में से 4500 स्टार्टअप्स मात्र 3 शहरों नोएडा, गाजियाबाद एवं लखनऊ में केंद्रित हैं।
- यद्यपि सरकार द्वारा अधिकांश नीतियां स्टार्टअप के पक्ष में, उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाई गई हैं, पर उनका सफल क्रियान्वयन पूर्ण रूप से नहीं हो पा रहा है।
- भरोसेमंद व निर्बाध विद्युत आपूर्ति में कमी, इन्टरनेट कनेक्टिविटी का अभाव तथा अन्य अवसंरचनात्मक बाधाएं मुख्यत: टियर-2 व टियर-3 शहरों में स्टार्टअप्स के संचालन में समस्याएं बन रही हैं।
- प्रदेश के नवाचार वातावरण के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है योग्य व कुशल मानव संसाधन का अभाव।
- 'ब्रेन-ड्रेन' अर्थात रोजगार संबंधी अवसरों की तलाश में प्रदेश से बाहर जाने वाले योग्य व कुशल श्रम बल को रोक कर रखना एक बड़ी चुनौती है।
- परंपरागत पीढ़ी में जोखिम उठाने संबंधी साहस में कमी तथा नए कार्य को हतोत्साहित करने की आम प्रवृत्ति का होना प्रदेश के नवाचार वातावरण में बड़ी बाधा बन रही है।
लखनऊ में देश की प्रथम AI सिटी
- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में देश की प्रथम एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-AI) सिटी विकसित करने की कार्य योजना तैयार की गई है, जिसे क्रियान्वित करते हुए यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPLc) ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
- लखनऊ को एआई सिटी बनाने के क्रम में यूपीएलसी द्वारा 'यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति' (यूपीईएमपी) के अंतर्गत दिग्गज रियल स्टेट डेवलपर कंपनियों व एजेंसियों से डिजाइन, विकास व संचालन के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के जरिए आवेदन मांगा गया है।
- माना जा रहा है कि लखनऊ में एआई सिटी बनने से यहां आईटी कंपनियों के लिए ग्रेड-ए सर्टिफाइड कमर्शियल स्पेस, स्टेट ऑफ द आर्ट डाटा सेंटर, ग्रेड-ए फ्लेक्सिबल वर्क प्लेस एवं टेक लैब्स के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।
- लखनऊ में एआई सिटी बनाने के क्रम में आईटी व इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग ने शहर के प्रमुख स्थानों पर संभावित लैंड पार्सल की पहचान की है। इस क्रम में आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के स्वामित्व वाले 40 एकड़ भूमि पार्सल को एआई सिटी के लिए संभावित विकास स्थल के रूप में चिन्हित किया गया है।
- लखनऊ एआई सिटी की भूमि नादरगंज औद्योगिक क्षेत्र के प्रमुख स्थान पर स्थित और लखनऊ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 3 किलोमीटर दूरी पर है। भूमि क्षेत्र तक दो-लेन की सड़क के माध्यम से पहुंचा जा सकता है।
- लखनऊ-कानपुर राजमार्ग से निकटता, उत्तम कनेक्टिविटी, प्राइम लोकेशन बेस तथा अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होने के कारण इस क्षेत्र को एआई सिटी की स्थापना हेतु उपयुक्त माना गया है।
- लखनऊ में 'एआई सिटी' के विकास हेतु सरकार द्वारा आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहनों के माध्यम से डेवलपर को वित्तीय सहायता भी दी जाएगी, जिसमें आईटी पार्क के लिए एकमुश्त 25 प्रतिशत से लेकर ₹20 करोड़ तक का कैपेक्स सपोर्ट और आईटी सिटी के लिए ₹100 करोड़ तक का कैपेक्स समर्थन सम्मिलित है।
- इसके अतिरिक्त आईटी और आईटीईएस नीति 2022 के अनुसार 100 प्रतिशत स्टांप शुल्क में छूट, गैर-वित्तीय सहायता, लीज रेंटल, क्लाउड सेवा लागत, बिजली शुल्क और बैंडविड्थ खर्च के लिए भी वित्तीय व गैर-वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
- एआई सिटी में प्रतिष्ठित अत्याधुनिक संरचना के विकास की योजना तैयार की गयी है, जिसके अन्तर्गत प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित ग्रेड-ए एलईईडी प्रमाणित कार्यालय का निर्माण किया जाएगा।
- इसके अतिरिक्त इनक्यूबेटरों, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट के लिए ग्रेड-ए कार्यालय स्थान के साथ एक टावर का विकास, एआई परीक्षण और प्रोटोटाइप सुविधाओं के लिए एक समर्पित क्षेत्र का भी विकास किया जाएगा, जो अनुसंधान केंद्रों और शीर्ष प्रौद्योगिकी शैक्षणिक संस्थानों के लिए स्थान उपलब्ध कराएगा।
- उत्तर प्रदेश में नोएडा पहले से आईटी हब के रूप में विख्यात है। लखनऊ के आईटी हब व एआई सिटी के तौर पर विकास से देश समेत प्रदेश भर में टियर-2 शहरों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
- लखनऊ में आज बीपीएम सहित 800 से अधिक संपन्न तकनीकी-संबंधित व्यवसायों और 200 से अधिक प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स की उपस्थिति है।
रोजगार सृजन व आर्थिक - सामाजिक विकास में नवाचार की भूमिका
- नवाचार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में नए उत्पाद व सेवा निर्माण के माध्यम से नए बाजार एवं उपभोक्ता वर्ग तैयार किए जा सकते हैं। इस प्रकार रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, साथ ही आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
- परंपरागत ज्ञान आधारित उद्योगों के संरक्षण व पुनर्विकास में नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। नवाचार पद्धतियों द्वारा इन उत्पादों को ग्लोबल आपूर्ति श्रृंखला में शामिल कर लाभप्रद बनाया जा सकता है। उदाहरण-'वन डिस्ट्रिक्ट - वन प्रोडक्ट', 'जीआई टैग' आदि पहल द्वारा ऐसा किया जा रहा है।
- नवाचार अर्थव्यवस्था में विविधता लाने का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। इससे समाज में सृजनात्मकता को बढ़ावा मिलता है। लोग 'नौकरी
- माँगने वालों की श्रेणी' से निकल कर 'नौकरी देने वालों की श्रेणी में' आ सकते हैं।
- नवाचार आखिरी छोर तक उत्पाद/सेवा की आपूर्ति को अधिक दक्ष व विश्वसनीय बनाता है। उदाहरण- उमंग, जोमैटो, ओला ऐप आदि।
- नवाचार भ्रष्टाचार से लड़ने में सहायता देने के साथ ही गुड-गवर्नेंस का मार्ग प्रशस्त करता है। उदाहरण-'जनधन - आधार-मोबाइल' (JAM) का प्रयोग।
- शिक्षा, स्वास्थ्य आदि जैसे सामाजिक क्षेत्रों में नवाचार द्वारा सरकारी कार्यक्रमों के लाभों को पिछड़े व दुर्गम क्षेत्रों तक सरलता से पहुँचाया जा सकता है। उदाहरण- टेली मेडिसिन, आनलाइन शिक्षा आदि।
- कृषि क्षेत्र में नवाचार द्वारा कृषकों को सशक्त कर उन्हें नई तकनीक से सुसज्जित किया जा सकता है। उदाहरण - पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन, ड्रोन तकनीक आदि।
उत्तर प्रदेश की एमएसएमई नीति-2022
- देश में सर्वाधिक 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) वाले उत्तर प्रदेश में नई इकाइयों की स्थापना संबंधी संभावनाओं की जमीन पुख्ता करने के उद्देश्य से 'उत्तर प्रदेश एमएसएमई नीति 2022' प्रस्तुत की गयी है। इसे 27 सितंबर 2023 को कैबिनेट द्वारा स्वीकृति भी प्रदान की गयी।
- एमएसएमई नीति 2022 के अन्तर्गत प्रदेश में विद्यमान लैंड बैंक की समस्या को समाप्त करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं। इसके अनुसार ग्राम सभा की 5 एकड़ या इससे अधिक भूमि को पुनर्ग्रहित कर उद्योग निदेशालय को निःशुल्क स्थानांतरित की जाएगी।
- उद्योग निदेशालय द्वारा संबंधित भूखण्ड को विकसित कर डीएम सर्किल रेट पर एमएसएमई इकाइयों की स्थापना हेतु आवंटित किया जाएगा।
- नई एमएसएमई नीति के तहत स्थापित होने वाले नए सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 10 से 25 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान दिया जाएगा।
- बुंदेलखंड और पूर्वांचल में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयां (MSME) लगाने पर अनुदान की सीमा क्रमशः 25 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 15 प्रतिशत होगी। इसी प्रकार मध्यांचल और पश्चिमांचल में यह सीमा क्रमशः 20 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 10 प्रतिशत होगी।
- अनुसूचित जाति, जनजाति एवं महिला उद्यमियों को दो प्रतिशत अधिक अनुदान प्रदान किया जाएगा। अनुदान की अधिकतम सीमा चार करोड़ रुपये प्रति इकाई होगी।
- नए सूक्ष्म उद्योग के लिए पूंजीगत ब्याज अनुदान ऋण पर वार्षिक ब्याज का 50 प्रतिशत, अधिकतम ₹25 लाख प्रति इकाई पांच वर्षों के लिए दिया जाएगा।
- अनुसूचित जाति, जनजाति एवं महिला उद्यमियों को 60 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाएगा।
- एमएसएमई इकाइयों को अधिक-से-अधिक स्रोतों से क्रेडिट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्टाक एक्सचेंज पर लिस्टिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ऐसी सभी इकाइयों को लिस्टिंग व्यय का 20 प्रतिशत (अधिकतम पांच लाख रुपये) की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
- दस एकड़ से अधिक के एमएसएमई पार्क स्थापित करने हेतु भूमि खरीद पर 100 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क में छूट और लिए गए ऋण पर सात वर्षों तक 50 प्रतिशत ब्याज अनुदान (अधिकतम दो करोड़ रुपये) उपलब्ध कराया जाएगा।
- एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ पांच किलोमीटर के दायरे में औद्योगिक स्थानों का विकास कर एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

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