उत्तर प्रदेश में सुरक्षा से जुड़े मुद्दे, विभिन्न सुरक्षा बल एवं एजेंसियां
उत्तर प्रदेश: सुरक्षा मुद्दे, बल एवं एजेंसियां
राज्य में शांति और संप्रभुता बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों और एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नीचे कालेधन, साइबर सुरक्षा, और राज्य के प्रमुख सुरक्षा बलों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
कालेधन का चक्र एवं धनशोधन (Money Laundering)
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (महत्वपूर्ण धाराएं)
धारा 66
मालिक की अनुमति के बगैर कम्प्यूटर संसाधनों का उपयोग (हैकिंग)।
धारा 66 (ब) & (क)
पहचान की चोरी और प्रतिरूपण (नकल) द्वारा धोखा-धड़ी।
धारा 66 (म) & 67
शारीरिक गोपनीयता का उल्लंघन एवं अश्लील सामग्री का प्रकाशन/प्रसारण।
प्रमुख साइबर अपराध
साइबर स्टॉकिंग
ई-मेल या संदेश के माध्यम से किसी व्यक्ति को ऑनलाइन परेशान करना या छेड़खानी करना।
मैलवेयर हमला
कम्प्यूटर/सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले सॉफ्टवेयर (वायरस, स्पायवेयर, रैनसमवेयर) का उपयोग।
झूठी खबरें (Fake News)
इंटरनेट पर अफवाहें फैलाकर कानून व्यवस्था भंग करना (दंगा, मॉब लिंचिंग)।
साइबर आतंकवाद
देश की संप्रभुता भंग करने, भय पैदा करने या सरकार के खिलाफ भड़काने के लिए इंटरनेट का उपयोग।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख सुरक्षा बल
| सुरक्षा बल / एजेंसी | गठन वर्ष | मुख्य दायित्व एवं कार्य |
|---|---|---|
| UPSTF (विशेष पुलिस कार्यबल) | 1998 | खुफिया जानकारी जुटाना, डकैतों, अंतर्जिला गिरोहों और विघटनकारी तत्वों के विरुद्ध विशेष कार्रवाई। |
| ATS (आतंकवाद निरोधक दस्ता) | 2007 | आतंकवादी घटनाओं से निपटना। इसके अंतर्गत 2017 में SPOT का गठन किया गया है। |
| UPSSF (विशेष सुरक्षा बल) | 2020/2021 | CISF की तर्ज पर बैंक, मेट्रो, अदालत और महत्वपूर्ण औद्योगिक उपक्रमों की सुरक्षा (बिना वारंट गिरफ्तारी की शक्ति)। |
| RAF (रैपिड एक्शन टॉस्क फोर्स) | - | दंगा, भीड़ नियंत्रण, सांप्रदायिक हिंसा, चुनाव, और आपात स्थितियों में शांति व्यवस्था कायम करना। |
| SDRF (राज्य आपदा मोचन बल) | - | आपदा राहत, मलबे से निकालना, घायलों का उपचार और राहत सामग्री पहुंचाना। |
| PAC (प्रादेशिक आर्म्ड कांस्टेबुलरी) | 1948 | सांप्रदायिक/जातीय दुर्व्यवस्था को रोकना, वीआईपी सुरक्षा, और सेना की लगातार तैनाती से बचना। |
अयोध्या में देश का 6वां और यूपी का पहला NSG हब स्थापित किया जा रहा है। यह एन्टी-ड्रोन सिस्टम से लैस होगा और यूपी, बिहार व पूर्वांचल में आपात ऑपरेशन के लिए ब्लैक कैट कमांडो तैनात रहेंगे।
कालाधन (Black Money)
कालेधन का स्रोत
- वैधानिक गतिविधियां- जब वैधानिक गतिविधियों से अर्जित आय पर करदाता द्वारा करों की चोरी की जाती है, अर्थात् सरकार को कर भुगतान नहीं किया जाता, तो इसे कालेधन की श्रेणी में रखा जाता है।
- गैर-कानूनी गतिविधियाँ- जब गैर-कानूनी गतिविधियों, जैसे- काला बाजारी, भ्रष्टाचार, मानव तस्करी, चोरी-डकैती, घूस आदि, द्वारा धन अर्जित किया जाता है तो इसे कालेधन की श्रेणी में रखा जाता है।
धनशोधन : कालेधन को वैध बनाना
धनशोधन के तरीके
- छोटे टुकड़ों में, नकदी के माध्यम से भुगतान
- कूट लेखांकन द्वारा
- विदेशी बैंक खाता का उपयोग
- जालसाजी
- बिचौलियों द्वारा हवाला, नकद तस्करी आदि के माध्यम से कालेधन को कम कठोर कानून वाले देशों (टैक्स हैवन देश) में जमा कराना।
- क्रिप्टोकरेंसी, जैसे- बिटकॉइन, इथेरियम आदि, में गुमनामी निवेश/कारोबार (anonymity) वह महत्वपूर्ण मार्ग है, जो धनशोधन के अवसर उपलब्ध कराता है।
धनशोधन रोकने के उपाय
- गैर-कानूनी गतिविधियों से अर्जित आय पर कानून को अधिक कठोर बनाना तथा उनके प्रभावी प्रवर्तन पर बल देना।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988
- लोकपाल तथा लोकायुक्त अधिनियम
- धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002
- कालाधन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015
- बेनामी लेन-देन निषेध अधिनियम, 1998
- आयकर अधिनियम, 1961
- दोहरे कराधान से बचाव समझौता (DTAA)
- कर सूचना विनिमय समझौते (TIEAs)
- कर के मामलों में पारस्परिक प्रशासनिक सहायता पर बहुपक्षीय सम्मेलन।
- भारत प्रवर्तन निदेशालय आदि, कालेधन के संबंध में निरंतर कार्रवाई करती हैं।
साइबर सुरक्षा के मूलभूत नियम
- सदैव विश्वसनीय स्रोत से एप्लीकेशन अथवा सॉफ्टवेयर डाउनलोड करना चाहिए।
- अपने मोबाइल, कम्प्यूटर आदि उपकरणों को सदैव नवीनतम ऑपरेटिंग प्रणाली (Operating System), एंटी-वायरस आदि के साथ अपडेट करना चाहिए।
- अनाधिकृत उपयोग से बचाव हेतु कम्प्यूटर/मोबाइल पर पासवर्ड द्वारा सुरक्षा लॉक लगाना चाहिए।
- नियमित तौर पर कम्प्यूटर में मौजूद फाइल, डेटा आदि का बैकअप तैयार करना चाहिए।
- इंटरनेट उपभोक्ता को सदैव 'फायरवाल' को सक्रिय रखना चाहिए।
- सर्वर, ईमेल अकाउंट आदि में बहु-कारक प्रमाणीकरण (Multi-factor Authentication) को सक्रिय रखना चाहिए।
- कम्प्यूटर में 'टास्क मैनेजर' का उपयोग कर अनचाहे प्रोग्राम की पहचान करनी चाहिए तथा अनावश्यक प्रोग्राम को हटा देना चाहिए।
- नकली, पाइरेटेड सॉफ्टवेयर को अपने उपकरण पर सक्रिय नहीं करना चाहिए।
- पासवर्ड सदैव मजबूत बनाना चाहिए।
- गैर-प्रमाणित स्रोतों से आये ULR लिंक (Link), पॉप अप (PoP up) आदि पर क्लिक नहीं करना चाहिए।
- सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करते समय सावधान रहना चाहिए। सार्वजनिक वाई-फाई को उपयोग करने हेतु वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का प्रयोग करना चाहिए, ताकि एक सुरक्षित संचार संबंध स्थापित किया जा सके।
उत्तर प्रदेश में नक्सलवाद
- गृह मंत्रालय द्वारा जारी 'वामपंथी उग्रवाद' (Left Wing Extremism) की सूची में नक्सलवाद से प्रभावित 11 राज्यों के 90 जिलों को शामिल किया गया है। इस सूची में उत्तर प्रदेश के तीन जिले शामिल हैं - चंदौली, मिर्जापुर तथा सोनभद्र।
- ध्यान देने योग्य है कि, गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 के बाद से प्रदेश में नक्सलवादी हमलों से किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
- धारा 66 - बेईमानी या धोखा-धड़ी से कम्प्यूटर संसाधनों का उसके मालिक की अनुमति के बगैर उपयोग (हैकिंग)।
- धारा 66 (ब) - पहचान की चोरी।
- धारा 66 (क) - प्रतिरूपण (नकल) द्वारा धोखा-धड़ी।
- धारा 66 (म) - शारीरिक गोपनीयता का उल्लंघन।
- धारा 67 - इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण।
सोशल नेटवर्किंग साइट्स से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताएं
- साइबर स्टॉकिंग द्वारा महिलाओं का उत्पीड़न।
- झूठी खबरों के माध्यम से सामाजिक एवं कानून व्यवस्था में व्यवधान।
- हनी ट्रैप- सेना के जवानों तथा अन्य महत्वपूर्ण अधिकारियों एवं व्यापारियों से संवेदनशील सूचनाएं प्राप्त करने हेतु विदेशी खुफिया एजेंसियों द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइट्स के माध्यम से हनी ट्रैपिंग के प्रयास किये जाते हैं।
- ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन- आतंकवादी संगठन, जैसे- आईएसआईएस (ISIS), द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को संवेदनशील मुद्दों पर वीडियो, चित्र, पठन सामग्री आदि भेज कर बरगलाने/बहकाने का प्रयास किया जाता है।
- आतंकवादी संगठन, 'उग्रवाद' के फैलाव हेतु सोशल नेटवर्किंग साइट्स का प्रयोग करते हैं।
साइबर अपराध (Cyber Crimes)
- मैलवेयर एक ऐसा कम्प्यूटर प्रोग्राम (सॉफ्टवेयर) होता है, जिसे विशेष रूप से किसी कम्प्यूटर और उसकी सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है।
- साइबर अपराधी इंटरनेट का उपयोग कर पीड़ित व्यक्ति के कम्प्यूटर में मैलवेयर इंस्टॉल करते हैं, जिसकी सहायता से वह डाटा चोरी, ब्लैकमेल, जासूसी आदि जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।
- कम्प्यूटर वायरस, स्पायवेयर, ट्रोजन तथा रैनसमवेयर आदि जैसे सॉफ्टवेयर, मैलवेयर की श्रेणी में आते हैं।
- सोशल मीडिया के युग में झूठी खबरें सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन कर उभरी हैं। इंटरनेट के माध्यम से तेजी से फैलायी जाने वाली झूठी खबरों के कारण दंगा, वैमनस्य, मॉब लिंचिंग आदि जैसी घटनाएं होती हैं, जिससे समाज में कानून व्यवस्था के लिए चुनौती उत्पन्न होती है।
- साइबर स्टॉकिंग
- वित्तीय अपराध
- मैलवेयर हमला
- पाइरेसी
- झूठी खबरें
- साइबर आतंकवाद
साइबर आतंकवाद (Cyber Terrorism)
पाइरेसी (Piracy)
- जब साइबर अपराधियों द्वारा इंटरनेट अथवा साइबर माध्यम से कॉपीराइट उल्लंघन या साहित्यिक कलात्मक चोरी आदि जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जाता है, तो इसे पाइरेसी कहते हैं।
- संगीत, फिल्मों, साहित्य आदि का अनधिकृत रूप से प्रसार या वाणिज्यिक उपयोग पाइरेसी की श्रेणी में आता है।
साइबर अपराध की रोकथाम हेतु उत्तर प्रदेश में पहल
- प्रदेश सरकार द्वारा 28 फरवरी, 2024 को प्रदेश में 57 साइबर क्राइम थाने आरंभ किए गए। इससे पूर्व राज्य के 18 जिलों में साइबर क्राइम थाने मंडल स्थापित किए गए थे।
- प्रदेश के सभी 1523 थानों में साइबर सेल का गठन किया गया है।
- प्रदेश के समस्त थानों में साइबर हेल्प डेस्क (हेल्पलाइन नं. 1930) की स्थापना की गई है।
- परिक्षेत्रीय मुख्यालयों पर बेसिक साइबर फॉरेंसिक लैब एवं पुलिस मुख्यालय पर एडवांस्ड डिजिटल साइबर फॉरेंसिक लैब की स्थापना की जा रही है।
वित्तीय अपराध (Financial Crime)
सूचना प्रौद्योगिकी से सुरक्षा के लिए चुनौतियां
संचार नेटवर्क
- सूचना प्रौद्योगिकी के प्रसार में संचार नेटवर्क की अहम भूमिका है। इन्ही नेटवर्कों के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है।
- कम्प्यूटर नेटवर्क, इंटरनेट, दूरसंचार नेटवर्क 5G नेटवर्क आदि संचार नेटवर्क के उदाहरण हैं।
- डिजिटल सुविधाओं से जुड़ी सेवाओं का संचार नेटवर्क से जुड़ा होना आवश्यक होता है, अतः संचार नेटवर्क पर हमला कर देश की अनेक सेवाओं को ठप किया जा सकता है।
- वर्तमान में हॉस्पिटल, रेलवे, पावर प्लांट इत्यादि लगभग सभी महत्वपूर्ण संस्थाएं संचार नेटवर्क से जुड़ी होती हैं, अतः संचार नेटवर्क के ठप होने से यह सेवाएं प्रभावित हो जाती हैं।
- संचार नेटवर्क में अनेक प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, जैसे- सेमीकंडक्टर चिप, राउटर इत्यादि का प्रयोग होता है। दुश्मन देश इन उपकरणों के माध्यम से जासूसी कर संवेदनशील सूचनाओं को प्राप्त कर सकते हैं।
- अतः स्पष्ट है, वर्तमान डिजिटल युग की आधारशिला 'संचार नेटवर्क' की सुरक्षा, राज्य के हितों से सीधे तौर पर जुड़ी है।
उत्तर प्रदेश में विभिन्न सुरक्षा बल
- उत्तर प्रदेश विशेष पुलिस कार्यबल (UPSTF)
- आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS)
- उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (UPSSF)
- रैपिड एक्शन टॉस्क फोर्स (RAF)
- राज्य आपदा मोचन बल (SDRF)
- प्रादेशिक आर्मड कांस्टेबुलरी (PAC)
उत्तर प्रदेश विशेष पुलिस कार्यबल
- उत्तर प्रदेश विशेष पुलिस कार्यबल (UPSTF) का गठन 4 मई 1998 को हुआ। उत्तर प्रदेश पुलिस में इस यूनिट का गठन विशेष कार्यों को पूरा करने के लिए किया गया है।
- यूपीएसटीएफ का उद्देश्य प्रदेश में आंतरिक शांति सुरक्षा हेतु विभिन्न स्रोतों से खुफिया जानकारी जुटाना और विघटनकारी तत्वों के विरुद्ध कार्य योजना तैयार करना है।
- एसटीएफ की टीमें राज्य पुलिस की सहायता से राज्य के बाहर भी कार्य करती हैं। डकैतों के गिरोह तथा अन्य तत्वों के विरुद्ध, विशेषकर अंतर्जिला गिरोह के खिलाफ, कारवाई करने में इनकी विशेष भूमिका होती है।
- स्पेशल टॉस्क फोर्स का नेतृत्व एक महानिदेशक रैंक का अधिकारी करता है, जिसकी सहायता पुलिस महानिरीक्षक द्वारा की जाती है।
- यह फोर्स अलग-अलग टीमों में काम करती है, जिसका नेतृत्व डिप्टी एसपी या एडिशनल एसपी रैंक के अधिकारी करते हैं।
आतंकवाद निरोधक दस्ता
- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आतंकवादी घटनाओं से निपटने के लिये वर्ष 2007 में आतंकवाद निरोधक दस्ता का गठन किया गया। इसका मुख्यालय लखनऊ में स्थित है।
- उत्तर प्रदेश में इसकी अनेक आपरेशन टीम एटीएस मुख्यालय के साथ-साथ फील्ड यूनिट्स के रूप में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कार्य करती हैं।
- एटीएस मुख्यालय पर विशिष्ट इकाइयों द्वारा दूसरे ऑपरेशन टीम एवं फील्ड यूनिट्स को सहयोग प्रदान किया जाता है।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में आतंकवाद निरोधक दस्ता के अन्तर्गत 'विशेष पुलिस ऑपरेशन टीम' (Special Police Operations Team-SPOT) का गठन किया। इस टीम को विशेष प्रशिक्षण देते हुए आधुनिक तकनीक एवं हथियारों से लैस किया गया है।
- वर्तमान में उत्तर प्रदेश में SPOT की 5 टीमें सक्रिय हैं, जो आतंकवाद एवं नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने का कार्य कर रही हैं।
उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल
- केंद्रीय सुरक्षा बल सीआईएसएफ (CISF) की तर्ज पर यूपीएसएसएफ (UPSSF) का गठन उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल अधिनियम, 2020 के अन्तर्गत किया गया है। इसकी परिकल्पना 'उच्चस्तरीय कौशल से युक्त पेशेवर पुलिस बल' के रूप में की गई है, जो प्रांतीय सशस्त्र पुलिस बल (PAC) पर पड़ने वाले भार को कम करता है।
- 'उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स' (UPSSF) का गठन जून, 2021 में किया गया। योजना के प्रथम चरण में यूपीएसएसएफ की 5 बटालियन तैयार की गयी है, जिसमें लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज, मथुरा और सहारनपुर बटालियन शामिल हैं। इन बटालियन में कुल मिलाकर 9,919 जवान शामिल किये गए हैं।
- राज्य सरकार ने 13 सितंबर, 2020 को उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (Uttar Pradesh Special Security Force-UPSSF) गठित करने का निर्णय लिया था।
- यूपीएसएसएफ का नेतृत्व अतिरिक्त महानिदेशक स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाता है। इसमें एक महानिरीक्षक, (IG), उप-महानिरीक्षक (DIG) तथा कमांडेंट शामिल होते हैं।
- इसका उद्देश्य प्रदेश सरकार द्वारा अधिसूचित किसी निकाय, व्यक्ति या आवासीय परिसर को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है।
- उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल को प्रशासनिक कार्यालयों, बैंकों, मेट्रो, विधानमंडल परिसर, औद्योगिक उपक्रमों एवं अदालतों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है।
- उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल मजिस्ट्रेट के वारंट के बिना तलाशी एवं गिरफ्तारी कर सकती है, यद्यपि ऐसा करने के लिये सुरक्षा बल के पास पुख्ता सबूत होने चाहिए।
रैपिड एक्शन टॉस्क फोर्स
- रैपिड एक्शन टॉस्क फोर्स का दायित्व प्रदेश में शांति एवं कानून व्यवस्था स्थापित करना है।
- रैपिड एक्शन टॉस्क फोर्स दंगा और भीड़ नियन्त्रण की स्थितियों से निपटने में सहयोग करती है।
- आरएएफ भारत के केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल जैसी एक विशेष त्वरित प्रतिक्रिया सुरक्षा इकाई है।
- उत्तर प्रदेश में साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन में भी रैपिड एक्शन टॉस्क फोर्स सहयोग करती है।
- आपातकाल में त्वरित कार्रवाई हेतु प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार आरएएफ अपना योगदान देती है, जैसे- बाढ़ नियंत्रण, त्योहार, चुनाव, सांप्रदायिक हिंसा और आंदोलन से निपटने के लिये।
- आरएएफ सरकार के मानवीय चेहरे को पेश करने का काम करती है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़, भूकंप, चक्रवात, और महामारी आदि प्रकोप के दौरान त्वरित बचाव और राहत अभियान चलाकर यह जनता के साथ संबंध बनाए रखती है।
राज्य आपदा मोचन बल
- उत्तर प्रदेश में राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) का गठन किसी प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को त्वरित एवं प्रभावी ढंग से निष्पादित किये जाने के उद्देश्य से किया गया है।
- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एसडीआरएफ की 6 कम्पनियों के अंतर्गत कुल 1029 पदों का सृजन किया गया है। इस क्रम में वर्तमान में यहां 656 अधिकारी/कर्मचारी कार्यरत हैं।
- आपदा सम्भावित क्षेत्रों में संकट से निपटने हेतु तैयार रहना।
- आपदा के पश्चात घटना स्थल से मलबे को हटाकर मृत एवं घायल व्यक्तियों को बाहर निकालना।
- घायलों का अस्पतालपूर्व उपचार करते हुए पीड़ितों एवं प्रभावित लोगों का मनोबल बढ़ाना।
- स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत सामग्री आपदा पीड़ितों तक पहुंचाना।
- आपदा क्षेत्र में कार्य करने वाली अन्य संस्थाओं के साथ सामंजस्य बैठाना।
- पीड़ितों का मनोबल ऊँचा करते हुये पुनर्निर्माण संबंधी कार्यों में सहायता देना।
- राज्य आपदा बचाव में लगे अन्य सेवा दल के सदस्यों के साथ समन्वय स्थापित करना।
प्रादेशिक आर्म्ड कांस्टेबुलरी
- वर्ष 1948 में उत्तर प्रदेश सैन्य पुलिस व उत्तर प्रदेश राज्य सशस्त्र पुलिस को मिलाकर 'प्रादेशिक आर्म्ड कांस्टेबुलरी' (PAC) नामक सुरक्षा बल का गठन किया गया।
- प्रदेश में किसी स्थान पर कानून व्यवस्था की स्थिति गंभीर अथवा संवेदनशील हो जाने और उसे संभाल न पाने की स्थिति में सेना की लगातार तैनाती से बचने के उद्देश्य से पीएसी का गठन किया गया।
- विगत वर्षों में पीएसी ने सांप्रदायिक, धार्मिक, जातीय और क्षेत्रीय दुर्व्यवस्था से प्रभावी तौर पर निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।
- वर्तमान में पीएसी आतंकवाद विरोधी अभियान, अति विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा, आपदा राहत एवं बचाव अभियानों में सक्रिय है।
- पीएसी अपने सदस्यों को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में योगदान देने हेतु शिक्षित कर रही है। मानवाधिकार, विकास और पर्यावरण से संबंधित कार्यक्रमों के लिए गांवों को गोद लेने से इसकी शुरुआत हो चुकी है।
- वर्तमान में पीएसी 3 जोन, 7 अनुभाग एवं 33 वाहिनियों में विभाजित है। पीएसी की 33 वाहिनियों में कुल 273 दल स्वीकृत हैं, यद्यपि वर्तमान में 225 दल विद्यमान हैं।
- प्रत्येक वाहिनी में एक सेनानायक, एक उप-सेनानायक, 3 सहायक सेनानायक, एक शिविरपाल एवं 8 या 9 दलनायक नियुक्त हैं। प्रत्येक दल में 3 प्लाटून और प्रत्येक प्लाटून में 3 सेक्शन होते हैं।
- पीएसी महानिरीक्षक कार्यालय, मुख्यालय लखनऊ में है। पीएसी का पूर्वी जोन प्रयागराज, मध्य जोन लखनऊ तथा पश्चिमी जोन मुरादाबाद में स्थित है।
- वर्तमान में पीएसी में एक इंडिया रिजर्व (आई.आर.) वाहिनी, 48वीं वाहिनी, सोनभद्र एवं रैपिड रिस्पान्स (आर.आर.एफ.) की छठवीं वाहिनी, मेरठ में है। 4 कमांडो दल ए.के. 47 रायफलों से युक्त हैं।
- उत्तर प्रदेश में उपर्युक्त सुरक्षा बल राज्य को सुरक्षित बनाने में लगे हैं, जिससे आपराधिक घटनाओं को रोककर शांति व्यवस्था स्थापित करने में सफलता प्राप्त हुई है।
अयोध्या में प्रदेश का प्रथम एनएसजी हब
- राज्य में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए अयोध्या में एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) हब बनाया जा रहा है। यह यूपी का प्रथम और देश का छठा एनएसजी (NSG) हब होगा। इसके लिए अयोध्या के कैंटोनमेंट एरिया में 8 एकड़ भूमि प्रदेश सरकार द्वारा गृह मंत्रालय (MHA) को 99 वर्ष की लीज पर दी गयी है।
- वर्तमान में देश के अंदर एनएसजी की यूनिट मात्र मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद और गांधीनगर में है। अब अयोध्या में यूनिट स्थापित होने से उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वांचल के अन्य हिस्सों में आपात स्थित में तुरंत ऑपरेशन और सुरक्षा बलों की तैनाती संभव हो सकेगी।
- अयोध्या का एनएसजी हब अत्याधुनिक हथियारों, एन्टी-ड्रोन सिस्टम और तकनीकी निगरानी संयंत्रों से लैस होगा। इसमें फायरिंग रेंज और रूटीन ट्रेनिंग की व्यवस्था होगी, जिससे कमांडो प्रत्येक असामान्य स्थिति से निपटने के लिए सक्षम हो सकेंगे।
- एनएसजी हब में ट्रेनिंग के साथ ब्लैक कैट कमांडो की तैनाती भी होगी।
- अयोध्या का एनएसजी हब गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज से लेकर बिहार तक किसी भी आपात स्थिति में ऑपरेशन के लिए तैयार रहेगा।
दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

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