उत्तर प्रदेश : उग्रवाद के प्रसार एवं विकास के बीच संबंध
उत्तर प्रदेश में उग्रवाद का पनपना केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि यह विकास की दौड़ में पीछे छूट गए उन हाशिये के वर्गों की कहानी भी है, जिनकी आवाज मुख्यधारा तक नहीं पहुंच पाई। सोनभद्र और मिर्जापुर के घने जंगलों से लेकर चंदौली के पिछड़ेपन तक, आखिर कैसे सामाजिक-आर्थिक असमानता नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद के लिए उर्वरक का काम करती है? इस विस्तृत लेख में हम उग्रवाद और विकास के बीच के उस जटिल संबंध की गहराई से पड़ताल करेंगे, साथ ही जानेंगे कि उत्तर प्रदेश सरकार इसे जड़ से खत्म करने और मुख्यधारा में विकास लाने के लिए क्या ऐतिहासिक कदम उठा रही है।
उत्तर प्रदेश : उग्रवाद और विकास
उग्रवाद प्रसार का चक्र (कारण)
आर्थिक-सामाजिक पिछड़ापन
जनजातीय एवं उपेक्षित क्षेत्रों में विकास का अभाव
जनजातीय एवं उपेक्षित क्षेत्रों में विकास का अभाव
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बुनियादी सुविधाओं की कमी
गरीबी, बेरोजगारी और लचर स्वास्थ्य सेवाएं
गरीबी, बेरोजगारी और लचर स्वास्थ्य सेवाएं
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भ्रष्टाचार एवं कुशासन
सरकारी तंत्र द्वारा शोषण व अधिकारों की अनदेखी
सरकारी तंत्र द्वारा शोषण व अधिकारों की अनदेखी
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राज्य के प्रति असंतोष
सरकार से निराशा और विरोधी भावनाओं का जन्म
सरकार से निराशा और विरोधी भावनाओं का जन्म
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उग्रवाद का जन्म
हिंसक संगठनों एवं अवसरवादी नेताओं से जुड़ाव
हिंसक संगठनों एवं अवसरवादी नेताओं से जुड़ाव
उत्तर प्रदेश में उग्रवाद के स्वरूप एवं प्रभावित क्षेत्र
क्षेत्रीय उग्रवाद
- कारण: समाज का एक वर्ग जब विकास की मुख्यधारा से उपेक्षित रह जाता है।
- प्रभावित ज़िले: सोनभद्र, मिर्जापुर एवं चंदौली।
- भौगोलिक स्थिति: छत्तीसगढ़ व झारखण्ड (नक्सल प्रभावित राज्य) से सीमा साझा।
वामपंथ / नक्सलवादी उग्रवाद
- विचारधारा: माओवादी / साम्यवादी विचारधारा से प्रेरित सशस्त्र विद्रोह।
- उद्भव: 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से (चारू मजूमदार व कानू सान्याल)।
- मुख्य कारक: खनिज सम्पदा के दोहन हेतु जनजातियों का विस्थापन।
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) रिपोर्ट-2024 : एक दृष्टि
| क्र. | संकेतक (Indicator) | आंकड़े (Data) |
|---|---|---|
| 1 | राष्ट्रीय स्तर पर आपराधिक घटनाएं | 445.9 (प्रति एक लाख व्यक्तियों पर) |
| 2 | उत्तर प्रदेश में आपराधिक दर | 7.4 (प्रति एक लाख जनसंख्या पर) - तुलनात्मक रूप से अधिक |
| 3 | प्रमुख अपराध श्रेणियां | चोरी, डकैती, साइबर अपराध, हत्या |
| 4 | वर्ष 2022 में यूपी का आपराधिक प्रतिशत | 171.6% (राष्ट्रीय औसत 258.1% से काफी कम) |
| 5 | वर्तमान प्रवृत्ति (Trend) | गिरावट दर्ज की गई (सशक्त कानून व्यवस्था व जागरूकता के कारण) |
उत्तर प्रदेश में उग्रवाद रोकने के प्रमुख प्रयास
सुरक्षा व प्रशासनिक कदम
- ATS का गठन: वर्ष 2007 में आतंकवाद निरोधक दस्ते की स्थापना।
- पुलिस आधुनिकीकरण: तकनीक का प्रयोग व डायल 112 सेवा का विस्तार।
- सुरक्षित शहर: 16 शहरों में 5000 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी।
विकासात्मक व सामाजिक कदम
- बुनियादी ढांचा: पिछड़े जिलों में मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय व सड़कों का निर्माण।
- रोजगार सृजन: बुनियादी सुविधाओं से निवेश आकर्षण व युवाओं को रोजगार।
- सामुदायिक जागरूकता: नक्सल क्षेत्रों में प्रशिक्षण व कल्याणकारी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन।
उग्रवाद (Extremism)
- 'उग्रवाद' शब्द का प्रयोग सामान्यतः उन अतिवादी गतिविधियों के संदर्भ में किया जाता है, जिनका प्रयोग राज्य के संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक ढांचे का विरोध करने तथा अपनी विचारधारा के अनुरूप राज्यव्यवस्था स्थापित करने हेतु किया जाता है।
- उग्रवादी अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हिंसात्मक क्रियाओं एवं माध्यमों का उपयोग करते हैं।
- उग्रवाद राज्य की शांति और सुरक्षा, मानवाधिकारों तथा सतत् विकास की प्रक्रियाओं को कमजोर करता है।
उग्रवाद प्रसार के कारण
- किसी क्षेत्र का आर्थिक-सामाजिक पिछड़ापन उग्रवाद के पनपने एवं उसके प्रसार का मुख्य आधार और कारण बनता है।
- अविकसित, मुख्यतः जनजातीय बाहुल्य अथवा पिछड़े क्षेत्रों में लोगों के अंदर यह भावना उत्पन्न होती है कि सरकार उनकी आवश्यकताओं एवं परंपराओं की अनदेखी कर रही है। इससे निवासियों में राज्य के प्रति असंतोष की भावना उत्पन्न होती है।
- पिछड़े क्षेत्रों में गरीबी, बेरोजगारी, लचर स्वास्थ्य सुविधाएं जैसी समस्याएं पायी जाती हैं। प्राथमिक स्तर पर इन सुविधाओं को प्रत्येक व्यक्ति एवं हर क्षेत्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार की मानी जाती है, अतः इनकी कमी संबंधित क्षेत्र के निवासियों में सरकार के प्रति आक्रोश का कारण बनती है।
- गरीब एवं अशिक्षित लोगों में प्रायः अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता की कमी होती है, अतः इसका लाभ सरकारी तंत्र में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों तथा कर्मचारियों द्वारा उठाया जाता है। उनके द्वारा लोगों का उत्पीड़न किया जाता है, जिससे क्षेत्रीय जनता में शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोश उत्पन्न होता है।
- पिछड़ेपन के कारण राज्य के प्रति उत्पन्न असंतोष की भावनाएं जब कुशासन, अक्षम तथा भ्रष्ट शासन के साथ मिलती हैं, तो यह उग्रवाद के प्रसार हेतु प्रमुख कारण बन जाती है।
- उग्रवाद के समर्थक समूह पहले से असंतुष्ट चल रहे लोगों के अंदर विरोधी भावनाओं को अधिक गहरा करते हैं तथा उन्हें यह विश्वास दिलाने का प्रयत्न करते हैं कि उनकी सभी परेशानियों की जड़ राज्य है।
- इस तरह किसी क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन तथा समावेशी विकास की कमी वहां उग्रवाद के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उत्तर प्रदेश में उग्रवाद के प्रसार एवं विकास के बीच संबंध
जब किसी क्षेत्र में विकास की बुनियादी जरूरतों को पूर्ण करने में सरकार विफल रहती है तो लोग उसके विरुद्ध हो जाते हैं। यह नाराजगी उस वर्ग में अधिक होती है, जो सरकारी तंत्र की उपेक्षा के कारण विकास की मुख्य धारा से दूर रह जाता है।
यदि समय के साथ इस वर्ग तक सरकार की पहुँच नहीं बन पाती अथवा उनकी समस्या पर शासन-प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जाता तो इससे जुड़े लोग सरकार से धीरे-धीरे निराश हो जाते हैं। उनके मन में सरकार के विरुद्ध उग्र विचार आ जाते हैं, जो बाद में उग्रवाद का कारण बनता है।
क्षेत्रीय उग्रवाद
शासन-प्रशासन के विभिन्न प्रयासों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन के बावजूद समाज का कोई वर्ग अथवा क्षेत्र खुद को विकास की मुख्यधारा से बिल्कुल पीछे अथवा उपेक्षित पाता है तो वह उग्रवादी संगठनों अथवा अवसरवादी नेताओं के साथ जुड़ जाता है। यह स्थिति क्षेत्रीय उग्रवाद का कारण बनती है।
इस तरह के उग्रवाद से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, मिर्जापुर एवं चंदौली जिले लंबे समय तक प्रभावित रहे हैं।
वामपंथ समर्थित उग्रवाद
- उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों में मुख्यतः वामपंथ (साम्यवाद) समर्थित उग्रवाद का प्रभाव है।
- इस तरह का उग्रवाद न सिर्फ देश-प्रदेश की आन्तरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के बुनियादी मूल्यों और बहुलवादी राजनीतिक व्यवस्था के लिए भी खतरा उत्पन्न करती है।
- वामपंथ समर्थक उग्रवादी सशस्त्र विद्रोह में विश्वास रखते हैं। अपने अधिकार की प्राप्ति के लिए यह हर तरह के हिंसक कार्रवाई के लिए तैयार रहते हैं।
- वामपंथ समर्थित उग्रवाद के पीछे भी शासन-सत्ता द्वारा 'विकास में उपेक्षा' को ही मुख्य कारण माना जाता है। इसके समर्थक रूस अथवा चीन की साम्यवादी विचारधारा से प्रभावित होते हैं।
उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न हिस्सों में उग्रवाद के मुख्यतः दो स्वरूप दिखायी देते हैं-
- नक्सलवादी उग्रवाद
- माओवादी उग्रवाद
भारत में नक्सलवादी उग्रवाद का जन्म 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव में एक किसान विद्रोह के रूप में हुआ। आरम्भ में यह आन्दोलन जमींदारों के विरूद्ध था, किन्तु आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी व्यवस्था के विरूद्ध सशस्त्र विद्रोह में बदल गया। इसके नेताओं में चीनी नेता माओत्से तुंग की विचारधारा से प्रभावित चारू मजूमदार एवं कानू सान्याल के नाम प्रमुख थे।
वामपंथ समर्थित उग्रवाद सरकार के विकास सम्बन्धी प्रयासों को क्रियान्वित होने से रोकता है, जबकि दूसरी तरफ आम जनता को सरकार के विरुद्ध भड़काने का कार्य भी करता है।
हिंसक अतिवाद और रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2022 में एक प्रस्ताव को स्वीकृत किया, जिसके अनुसार प्रत्येक वर्ष 12 फरवरी को 'हिंसक अतिवाद की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस' के रूप में मनाया जाएगा।
विकास और उग्रवाद के बीच सम्बन्ध
- कोई देश जब आर्थिक विकास की राह पर अग्रसर होता है तो उस विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों एवं क्षेत्र तक पहुंचना चाहिए। यदि विकास के बावजूद समाज का अल्पसंख्यक अथवा जनजाति वर्ग बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह जाता है, तो उनसे जुड़े लोगों में सरकार अथवा शासन-प्रशासन के विरूद्ध नाराजगी बढ़ती है। इससे सामूहिक विद्रोह अथवा उग्रवाद का जन्म होता है।
- उग्रवाद उन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत बनाता है, जहाँ शोषित, वंचित एवं हाशिये पर खड़े समुदाय (विशेषकर जनजाति वर्ग) की संख्या अधिक है।
- जब किसी क्षेत्र में सुशासन की कमी, भ्रष्टाचार में वृद्धि, अपर्याप्त शिकायत निवारण तंत्र, भेदभाव, सामाजिक न्याय की कमी होती है तो वहां उग्रवाद जन्म लेता है।
- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, मिर्जापुर जैसे जनजातीय क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में खनिज सम्पदा एवं प्राकृतिक संसाधन विद्यमान है। इन खनिज संसाधनों के दोहन हेतु यहां जनजातीय लोगों को उनके घरों एवं जंगलों से बेदखल कर दिया जाता है, जिससे लाखों की संख्या में जनजातीय लोग विस्थापित होकर सड़क पर आ जाते हैं। इससे उनकी प्राचीन परंपराओं पर भी संकट उत्पन्न होता है। यह स्थिति वामपंथ समर्थित उग्रवाद के विस्तार में उर्वरा भूमि जैसा कार्य करती है।
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो रिपोर्ट-2024
- भारत सरकार की संस्था राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जनवरी 2025 में जारी (वर्ष 2024 की आपराधिक घटनाओं पर आधारित) रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति एक लाख व्यक्तियों पर 445.9 आपराधिक घटनाएं दर्ज की गयीं, जिनमें सर्वाधिक घटनाएं उत्तर प्रदेश से हैं। यहां आपराधिक दर 7.4 (प्रति एक लाख जनसंख्या पर) रही, जो देश के अन्य राज्यों से काफी अधिक है।
- उत्तर प्रदेश में इस दौरान चोरी, डकैती, साइबर अपराध, हत्या आदि से जुड़ी घटनाएं सर्वाधिक दर्ज की गयीं।
- बावजूद इसके, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 में हुई आपराधिक घटनाएं 171.6 प्रतिशत रहीं जो राष्ट्रीय औसत 258.1 प्रतिशत से काफी कम है।
- एनसीआरबी (NCRB) रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में आपराधिक मामलों में गिरावट की प्रवृत्ति पायी गयी है, जो अधिक पुलिस बलों की तैनाती, कानून का बेहतर क्रियान्वयन एवं जनजागरुकता में वृद्धि का परिणाम है।
उत्तर प्रदेश में उग्रवाद
- उत्तर प्रदेश में उग्रवाद प्रभावित प्रमुख तीन जिले हैं- चंदौली, मिर्जापुर एवं सोनभद्र। यह तीनों जिले छत्तीसगढ़ एवं झारखण्ड से सीमाएं साझा करते हैं, जो जनजाति बहुल एवं नक्सल प्रभावित राज्य हैं। यह क्षेत्र नक्सलियों द्वारा घोषित 'लाल गलियारा' का भाग है।
- उत्तर प्रदेश के यह क्षेत्र भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से नक्सल आंदोलन के अनुकूल हैं। यहाँ सामाजिक न्याय की कमी, अत्यधिक गरीबी, बेरोजगारी एवं अपर्याप्त बुनियादी संरचना जैसी समस्याएं विद्यमान हैं, यद्यपि हाल के वर्षों में यहां विकास संबंधी कार्यों में तेजी आयी है।
- विगत 20 वर्षों में उत्तर प्रदेश के भीतर कोई नक्सली घटना देखने को नहीं मिली, किन्तु सोनभद्र, चंदौली एवं मिर्जापुर अभी भी नक्सल प्रभावित क्षेत्र माने जाते हैं। पुलिस-प्रशासन द्वारा यहां सतत निगरानी रखी जाती है।
उत्तर प्रदेश में उग्रवाद प्रसार के कारण
सामाजिक-आर्थिक स्थिति
उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है। यहाँ देश के सर्वाधिक गरीब व्यक्ति निवास करते हैं। उच्च जनसंख्या घनत्व, बढ़ती बेरोजगारी तथा औसत साक्षरता दर जैसी समस्याएं इस क्षेत्र में नक्सलवादी विचारधाराओं के पनपने का कारण बनती हैं।
राजनीतिक कारण
बड़ी जनसंख्या के कारण उत्तर प्रदेश का देश की राजनीति में बड़ा दखल है। देश के सर्वाधिक 80 लोकसभा सदस्य तथा 31 राज्य सभा सदस्य उत्तर प्रदेश से चुने जाते हैं। ऐसे में व्यक्तिगत लाभ के लिए विभिन्न राजनीतिक दल समाज को जाति-धर्म के आधार पर बांट कर अपना वोट बैंक तैयार करने का प्रयास करते हैं। इससे जातीय एवं साम्प्रदायिक हिंसा में बढ़ोतरी होती है। ऐसे अवसर उग्रवाद के प्रसार हेतु अनुकूल होते हैं।
बुनियादी संरचना एवं विकास का अभाव
स्वतंत्रता के पश्चात उत्तर प्रदेश में पश्चिम एवं मध्य क्षेत्र का जहां अधिक विकास हुआ, वही पूर्वांचल, बुन्देलखण्ड एवं दक्षिण पूर्वी क्षेत्र आज भी विकास के लाभ से दूर हैं। ऐसे में क्षेत्रीय अलगाववाद की भावना उत्पन्न होती है, जो नक्सलवादियों के काम आती है।
विधि और कानून व्यवस्था सम्बन्धी कारक
प्रदेश सरकार राज्य के भीतर कई क्षेत्रों में कानून व्यवस्था प्रभावी ढंग से स्थापित करने में विफल रही है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में समाज के सबल लोगों द्वारा आज भी कमजोर एवं एससी/एसटी वर्ग का शोषण किया जाता है। ऐसे में जब पीड़ित लोगों को पुलिस प्रशासन से न्याय नहीं मिल पाता, तो वह उग्रवादियों की शरण में चले जाते हैं। उग्रवादी समूह ऐसे लोगों को न्याय दिलाने का आश्वासन देकर अपने साथ मिलाने का कार्य करते हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से निकटता
उत्तर प्रदेश की सीमा नेपाल से लगी हुई है। नेपाल के साथ भारत की खुली सीमा होने के कारण संगठित अपराधियों के लिए उत्तर प्रदेश में प्रवेश करना सरल होता है। कई बार इस मार्ग से उग्रवादियों को विदेश से हथियारों की आपूर्ति की जाती है।
उत्तर प्रदेश में उग्रवाद रोकने के प्रयास
आतंकवाद निरोधक दस्ते का गठन
प्रदेश सरकार द्वारा उग्रवादी एवं आतंकवादी समूहों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के लिए वर्ष 2007 में आतंकवाद निरोधक दस्ते का गठन किया गया। यह उत्तर प्रदेश पुलिस की एक विशेष इकाई है, जो आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सामुदायिक जागरूकता
- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उग्रवाद एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को सजग एवं सतर्क किया जा रहा है।
- प्रदेश सरकार द्वारा पिछड़े एवं उपेक्षित जिलों, विशेषकर जनजाति बहुल क्षेत्र, में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, मेडिकल कालेजों एवं विश्वविद्यालयों की स्थापना, सड़क निर्माण आदि पर जोर दिया जा रहा है। विकास सम्बन्धी विभिन्न परियोजनाओं के संचालन से उग्रवाद/चरमपंथी विचारधाराओं में कमी आ रही है।
- प्रदेश सरकार द्वारा पिछड़े क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास से राज्य में निवेश आकर्षित हो रहा है। ऐसे में संबंधित क्षेत्र में युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं, जिससे वह उग्रवाद से दूर हो रहे हैं।
- प्रदेश सरकार द्वारा केन्द्र सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिससे उग्रवादी समूह हतोत्साहित हुए हैं।
पुलिस का आधुनिकीकरण
- प्रदेश सरकार द्वारा पुलिस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक एवं कुशल प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।
- उत्तर प्रदेश में डायल 112 सेवा से उग्रवादी घटनाओं को रोकने में मदद मिली है।
- सुरक्षित शहर निगरानी व्यवस्था के तहत प्रदेश के 16 शहरों में 5000 सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं।
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