उत्तर प्रदेश का वर्तमान आर्थिक परिदृश्य, बुनियादी ढांचा एवं भौतिक संसाधनों का महत्व
उत्तर प्रदेश अर्थव्यवस्था: एक दृष्टि (2025-26)
तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
देश की GDP में 8% से अधिक योगदान। केवल महाराष्ट्र और तमिलनाडु से पीछे।
₹ 30.8 लाख करोड़
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुमानित जीएसडीपी। (12% की अनुमानित वृद्धि)
₹ 1,07,468
वर्ष 2023-24 में दर्ज (प्रचलित मूल्य पर)। अभी भी राष्ट्रीय औसत से पीछे, लेकिन वृद्धि जारी।
GSDP में सर्वाधिक योगदान देने वाले 5 शीर्ष जनपद
1. गौतमबुद्ध नगर
~10% योगदान (दिल्ली NCR का लाभ)
2. लखनऊ
~4% योगदान (तेज औद्योगीकरण/नगरीकरण)
3. आगरा
~3.5% योगदान (पर्यटन, हस्तशिल्प)
4. प्रयागराज
~3.3% योगदान (शिक्षा, प्रशासन, पर्यटन)
5. मेरठ
~3% योगदान (खेल का सामान, धातु उद्योग)
अर्थव्यवस्था की क्षेत्रवार संरचना (2023-24)
- कृषि, पशुपालन, वानिकी, मत्स्यन
- राष्ट्रीय औसत (16-18%) से काफी अधिक
- गेहूं, गन्ना, खाद्यान्न में यूपी प्रथम
- निर्माण एवं विनिर्माण
- औद्योगिक कॉरिडोर एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
- सेवा क्षेत्र (परिवहन, बैंकिंग, बीमा)
- अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान
'वन ट्रिलियन डॉलर' अर्थव्यवस्था का लक्ष्य (2029 तक)
| प्रमुख संभावनाएं (Possibilities) | प्रमुख चुनौतियां (Challenges) |
|---|---|
| राजकोषीय स्वास्थ्य प्रबंधन में अग्रणी (सूचकांक 45.9) | वार्षिक आर्थिक विकास दर को 24-26% तक ले जाना होगा (वर्तमान: 8-11%) |
| आर्थिक वृद्धि दर राष्ट्रीय दर (6.5%) से अधिक (यूपी: 12%) है। | आगामी 4-5 वर्षों में सरकार को लगभग ₹50 लाख करोड़ व्यय करने होंगे। |
| ₹45 लाख करोड़ से अधिक का भारी निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुआ। | बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य पर भारी निवेश की आवश्यकता। |
| बेरोजगारी दर 6.2% से गिरकर 2.4% हो गई है। | प्रदेश में स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) की संख्या बढ़ाना। |
उत्तर प्रदेश के मेगा प्रोजेक्ट्स एवं बुनियादी ढांचा
🎬 नोएडा फिल्म सिटी
ग्रेटर नोएडा (सेक्टर 21) में 1000 एकड़ में दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म सिटी का निर्माण। (पीपीपी मॉडल)
🤖 लखनऊ AI सिटी
नादरगंज में 40 एकड़ में देश की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी। डेटा सेंटर व टेक लैब्स।
🛣️ बाराबंकी - बहराइच डिजिटल हाईवे
यूपी का पहला डिजिटल हाईवे (101 किमी)। AI आधारित CCTV, ऑटोमैटिक सेंसर लाइट्स एवं ऑप्टिकल फाइबर।
💊 ललितपुर बल्क ड्रग पार्क
1472 एकड़ में फार्मा पार्क का निर्माण। प्रथम चरण (300 एकड़) में बुनियादी ढांचा विकास जारी।
🎥 गोरखपुर रीजनल फिल्म सिटी
भोजपुरी और क्षेत्रीय सिनेमा के लिए 100 एकड़ में 'गीडा' के पास विकास। इसके साथ ही टॉय व प्लास्टिक पार्क भी।
🛡️ यूपी डिफेंस कॉरिडोर
6 नोड्स: लखनऊ, कानपुर, झाँसी, आगरा, अलीगढ़, चित्रकूट। लखनऊ में ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का उत्पादन।
"एक्सप्रेस-वे प्रदेश": 21 एक्सप्रेस-वे का नेटवर्क
| क्रियाशील (Operational) | निर्माणाधीन (Under Construction) | प्रस्तावित (Proposed) |
|---|---|---|
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वर्तमान आर्थिक परिदृश्य
- देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 8 प्रतिशत से अधिक योगदान के साथ उत्तर प्रदेश देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन गया है।
- नीति आयोग के अनुसार (अगस्त, 2025) उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
- राज्य के बजट 2025-26 में प्रस्तुत विवरण के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) ₹30.8 लाख करोड़ रहने का अनुमान है।
- वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) ₹27 लाख 51 हजार 76 करोड़ (संशोधित) रहने का अनुमान है।
- सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में उत्तर प्रदेश से आगे मात्र दो राज्य महाराष्ट्र और तमिलनाडु हैं।
- वर्ष 2025-26 में प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 2024-25 की तुलना में प्रचलित मूल्य पर 12 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है।
- उत्तर प्रदेश की जनसंख्या लगभग 24 करोड़ है। इस हिसाब से वित्त वर्ष 2023-24 में प्रति व्यक्ति राज्य जीएसडीपी प्रचलित मूल्य पर ₹1,07,468 दर्ज की गयी।
- बावजूद इसके, राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति आय के संबंध में उत्तर प्रदेश अब भी बिहार को छोड़कर देश के अन्य राज्यों में सब से पीछे है। मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय उत्तर प्रदेश से अधिक है।
- उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में वित्तीय वर्ष 2011-12 तक गिरावट की प्रवृत्ति दर्ज की गयी, किन्तु उसके बाद से इसमें निरंतर वृद्धि जारी है।
| क्षेत्रक | वृद्धि | योगदान |
|---|---|---|
| प्राथमिक क्षेत्र | 7.3 प्रतिशत | 27 प्रतिशत |
| द्वितीयक क्षेत्र | 13 प्रतिशत | 27 प्रतिशत |
| तृतीयक क्षेत्र | 4.9 प्रतिशत | 46 प्रतिशत |
- आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रदेश की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था में जहां सेवा क्षेत्र (बैंक, बीमा, परिवहन आदि) का वर्चस्व बना हुआ है, वहीं उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र की भागीदारी अपेक्षाकृत कम है। किसी अर्थव्यवस्था के 'विकासशील' (Developing) से 'विकसित' (Developed) अवस्था में पहुंचने के लिए यह स्थिति अनुकूल नहीं मानी जाती है।
- हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक गतिविधियों में जिस तरह तीव्रता आयी है, उससे संभावना व्यक्त की जा रही है कि आने वाले वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी।
यूपी की अर्थव्यवस्था (GSDP) में योगदान करने वाले 5 शीर्ष जनपद
- गौतमबुद्ध नगर: प्रदेश की जीडीपी (GSDP) में गौतमबुद्ध नगर अकेले लगभग 10 प्रतिशत योगदान करता है। दिल्ली एनसीआर का हिस्सा होने का इसे लाभ प्राप्त है।
- लखनऊ: प्रदेश की राजधानी लखनऊ के औद्योगीकरण एवं नगरीकरण में हाल के वर्षों में तेजी आई है। यह राज्य की अर्थव्यवस्था में लगभग 4 प्रतिशत योगदान करता है।
- आगरा: पर्यटन, हस्तशिल्प और विनिर्माण क्षेत्र में अग्रणी आगरा वर्तमान में राज्य की जीडीपी में लगभग 3.5 प्रतिशत योगदान कर रहा है।
- प्रयागराज: शिक्षा, प्रशासन और पर्यटन का केन्द्र प्रयागराज राज्य की जीडीपी में लगभग 3.3 प्रतिशत की भागीदारी करता है।
- मेरठ: खेल के सामान निर्माण, धातु उद्योग और व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित मेरठ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगभग 3 प्रतिशत योगदान करता है।
| उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था : एक दृष्टि में | |
|---|---|
| विवरण | आंकड़े |
| नॉमिनल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 2025-26 | ₹30.8 लाख करोड़ (अनुमानित) |
| नॉमिनल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 2024-25 | ₹27.51 लाख करोड़ (संशोधित) |
| नॉमिनल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 2023-24 | ₹23.61 लाख करोड़ (संशोधित) |
| भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में उत्तर प्रदेश का योगदान | 8 प्रतिशत (2025-26) |
| भारत की कुल जीडीपी के आकार में उत्तर प्रदेश का स्थान | तृतीय** |
| स्थिर मूल्य (आधार वर्ष 2011-12) पर राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में वृद्धि (2022-23) | 7.5 प्रतिशत |
| वर्ष 2025-26 में प्रचलित मूल्यों पर 2024-25 के सापेक्ष राज्य जीडीपी (GSDP) में वृद्धि | 12 प्रतिशत (अनुमानित) |
| प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में प्रचलित मूल्य पर क्षेत्रवार योगदान (2023-24) ❖ प्राथमिक क्षेत्र ❖ द्वितीयक क्षेत्र ❖ तृतीयक क्षेत्र |
27 प्रतिशत 27 प्रतिशत 46 प्रतिशत |
| प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में स्थिर मूल्य पर वृद्धि (2023-24): ❖ प्राथमिक क्षेत्र ❖ द्वितीयक क्षेत्र ❖ तृतीयक क्षेत्र |
7.3 प्रतिशत 13 प्रतिशत 4.9 प्रतिशत |
| वर्ष 2029 तक प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए आवश्यक विकास दर (2025-26) | 24 से 26 प्रतिशत |
| प्रचलित मूल्यों पर प्रति व्यक्ति राज्य जीडीपी (GSDP) (2023-24) | ₹ 107,468* |
| प्रचलित मूल्यों पर प्रति व्यक्ति जीएसडीपी में वृद्धि दर (2023-24) | 10.4 प्रतिशत* |
| प्रचलित मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय (2023-24) | ₹ 93,514* |
| गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही जनसंख्या | 29.43 (तेंदुलकर समिति) 26.4 प्रतिशत (2022-23) |
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स्रोत: उत्तर प्रदेश बजट 2025-26, आर्थिक सर्वेक्षण, 2024-25 *उत्तर प्रदेश बजट 2025-26 के अनुसार, **उत्तर प्रदेश सरकार की वेबसाइट INVEST UP के अनुसार अर्थव्यवस्था के संदर्भ में देश के राज्यों में उत्तर प्रदेश का स्थान तृतीय है, यद्यपि बजट सत्र 2025-26 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे देश की द्वितीय अर्थव्यवस्था वाला राज्य बताया है। |
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प्रति व्यक्ति आय
- सिक्किम
- दिल्ली
- गोवा।
ऋण भार
- प्रदेश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के साथ ही राज्य पर ऋण का भार भी बढ़ रहा है। हाल में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश पर ₹8.16 लाख करोड़ से अधिक का ऋण भार रहा, जिसके वर्ष 2025-26 में ₹9,03,924.54 होने करोड़ का अनुमान है।
- राज्य में प्रति व्यक्ति औसत ऋण वर्ष 2024-25 में ₹31,147 था, जिसके वर्ष 2025-26 में लगभग ₹36 हजार (औसत) होने की संभावना है। इस ऋण भार को कम करने हेतु राज्य सरकार बाजार से ऋण, अल्पबचत, पॉवर बॉण्ड, वित्तीय संस्थाओं से कर्ज, भारत सरकार से ऋण तथा भविष्य निधि व पेंशन निधियों आदि के माध्यम से धन एकत्र करती है।
- उत्तर प्रदेश पर ऋण का भार वर्ष 2016-17 में ₹4.08 लाख करोड़ था, जो बढ़कर 2024-25 में ₹8.16 लाख करोड़ हो गया।
- दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश में अन्य राज्यों की अपेक्षा प्रति व्यक्ति ऋण आज भी कम है। गुजरात, हरियाणा, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में प्रति व्यक्ति ऋण उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत अधिक है।
| वित्तीय दर | स्थायी भावों पर | प्रचलित भावों पर | ||
|---|---|---|---|---|
| प्रति व्यक्ति आय | प्रतिशत वृद्धि | प्रति व्यक्ति आय | प्रतिशत वृद्धि | |
| 2012-13 | 32908 | 2.8 | 35,812 | 11.9 |
| 2013-14 | 34044 | 3.5 | 40,124 | 12.0 |
| 2014-15 | 34583 | 1.6 | 42,267 | 5.3 |
| 2015-16 | 36973 | 6.9 | 47,118 | 11.5 |
| 2016-17 | 40847 | 10.5 | 52,671 | 11.8 |
| 2017-18 | 41832 | 2.4 | 56,861 | 8.0 |
| 2018-19 | 43670 | 4.4 | 62,652 | 10.2 |
| 2019-20 | 44618 | 2.2 | 65,704 | 4.9 |
| 2020-21 | 39298 | -8.6 | 61,374 | -6.6 |
| 2021-22 | 42525 | 8.2 | 68,810 | 15.3 |
| 2022-23 | 47066 | - | 84,126 | - |
| 2023-24 | - | - | 93,514 | 13.1 |
राजकोषीय घाटा (Fiscal deficit)
- उत्तर प्रदेश बजट के अनुसार वर्ष 2025-26 में राज्य का राजकोषीय घाटा ₹91,400 करोड़ रहने का अनुमान है, जो कुल जीएसडीपी का 2.97 प्रतिशत होगा। वर्ष 2024-25 में संशोधित अनुमान के अनुसार प्रदेश का राजकोषीय घाटा ₹86,530.51, अर्थात जीएसडीपी का 3.46 प्रतिशत था।
- राजकोषीय घाटा एक वित्तीय वर्ष में सरकार के कुल व्यय और आय के मध्य अंतर को प्रदर्शित करता है। इस तरह होने वाले घाटे की पूर्ति सरकार ऋण लेकर अथवा सरकारी संपत्तियों को बेच कर (विनिवेश) पूरा करती है।
अर्थव्यवस्था की क्षेत्रवार वृद्धि
प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector)
- अर्थव्यवस्था के प्राथमिक क्षेत्र में कृषि, पशुपालन, वानिकी, मत्स्यन तथा खनन-उत्खनन उपक्षेत्र को शामिल किया जाता है।
- उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि एवं संबंधित क्षेत्र का योगदान लगभग 27 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर बीते कई वर्षों से यह 16 से 18 प्रतिशत के मध्य बना हुआ है।
- प्रदेश का खाद्यान्न उत्पादन जो वर्ष 2016-17 में 557 लाख मीट्रिक टन था, 2023-24 में बढ़कर 668 लाख मीट्रिक टन हो गया। सरकार ने इस बीच राज्य के लघु एवं सीमांत किसानों के ₹36,000 करोड़ के ऋण माफ किए तथा लम्बे समय से लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण किया।
- उत्तर प्रदेश में कृषि जोत का औसत आकार 0.76 हेक्टेयर, अर्थात राष्ट्रीय औसत 1.15 हेक्टेयर से काफी कम है। बावजूद इसके, यह (यूपी) कुल खाद्यान्न, गेहूं, गन्ना तथा सब्जियों आदि के उत्पादन में देश के राज्यों में प्रथम स्थान पर है।
अर्थव्यवस्था के क्षेत्र
- कृषि
- वानिकी
- पशुपालन
- खनन एवं उत्खनन
- मत्स्यन
- निर्माण एवं विनिर्माण
- बैंकिंग
- बीमा
- परिवहन एवं संचार
- भंडारण
- व्यापार
- सामुदायिक सेवाएं आदि
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) क्या है?
- C = निजी उपभोग व्यय
- I = सकल निवेश (सकल घरेलू पूंजी निर्माण)।
- G = सरकारी उपयोग व्यय।
- X = निर्यात M = आयात
- X-M = निवल विदेशी निवेश।
नॉमिनल जीडीपी
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की गणना जब वस्तुओं और सेवाओं के प्रचलित मूल्य (At current prices) के आधार पर की जाती है, तो यह नॉमिनल जीडीपी (नाममात्र जीडीपी) कही जाती है।
वास्तविक जीडीपी
- जब सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की गणना वस्तुओं और सेवाओं के स्थिर मूल्य (At Constant Price) पर की जाती है, तब इसे रियल (वास्तविक) जीडीपी (Real GDP) कहा जाता है।
सकल मूल्य वर्धन (GVA)
- प्रति व्यक्ति आय = प्रदेश की कुल आय / प्रदेश की जनसंख्या
द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector)
- द्वितीयक क्षेत्र में मुख्यतः विनिर्माण और निर्माण कार्यों को शामिल किया जाता है। बजट 2025-26 के अनुसार प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में द्वितीयक क्षेत्र का योगदान 27 प्रतिशत, अर्थात कृषि क्षेत्र के बराबर, है।
- विकास की दृष्टि से अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश की वर्तमान औद्योगिक भागीदारी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। एक विकसित अर्थव्यवस्था के लिए सही स्थिति यह मानी जाती है कि उसमें कृषि और तृतीयक क्षेत्र की भागीदारी कम, जबकि औद्योगिक क्षेत्र का योगदान अधिक हो। विश्व के लगभग समस्त विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों में यही स्थिति पायी जाती है।
- उत्तर प्रदेश में विगत कुछ वर्षों से औद्योगिक कॉरिडोर और बुनियादी ढांचा को सुदृढ़ करने पर निरंतर काम किया जा रहा है। इस बदली कार्यप्रणाली का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश ने निवेशकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है।
तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector)
उत्तर प्रदेश की आय बनाम राष्ट्रीय आय तुलनात्मक अध्ययन
- राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में प्रचलित मूल्यों पर प्राथमिक तथा द्वितीयक क्षेत्र का योगदान क्रमशः 17.7 प्रतिशत एवं 27.6 प्रतिशत था। इस अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर तृतीयक क्षेत्र का योगदान 54.7 प्रतिशत दर्ज किया गया।
- उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में वर्ष 2023-24 में प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों क्षेत्रों का योगदान 27 प्रतिशत (प्रत्येक) रहा, जबकि तृतीयक क्षेत्र का योगदान 46 प्रतिशत दर्ज किया गया। वर्ष 2024-25 में भी राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की प्रधानता बनी हुई है।
- वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश की आर्थिक विकास दर 11.6 प्रतिशत थी, जबकि इसी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर उससे कम 9.6 प्रतिशत दर्ज की गयी।
बुनियादी ढांचा एवं भौतिक संसाधन
- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आर्थिक विकास के क्रम में सर्वाधिक जोर बुनियादी ढांचा (अवसंरचनात्मक विकास) एवं भौतिक संसाधनों के विकास पर दिया जा रहा है। इस प्रयास का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज भारत का सबसे अधिक एक्सप्रेस-वे वाला राज्य बन गया है। यहां 7 क्रियाशील (चालू) और 6 निर्माणाधीन एक्सप्रेस-वे हैं।
- देश का सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क उत्तर प्रदेश में है।
- प्रदेश सरकार ने 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग प्राधिकरण' के गठन को मंजूरी दे दी है। इससे सस्ता जल परिवहन एवं जल पर्यटन की सुविधा उपलब्ध होगी।
- दिल्ली और मेरठ के मध्य देश का पहला 12 लेन का एक्सप्रेस-वे चालू हो चुका है। इन दोनों शहरों के बीच देश की पहली रैपिड रेल सेवा शुरू की गयी है।
- प्रदेश के छह शहरों में मेट्रो परिवहन संचालित है।
- देश का पहला जलमार्ग वाराणसी और हल्दिया के बीच शुरू हो चुका है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर
- ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC)
- वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC)
- यह 351 किमी लंबा है, जिसे 1839 किमी तक तैयार किया जाना है। इसका 57 प्रतिशत भाग (1058 किमी) उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। इससे प्रदेश के छोटे-बड़े सभी उद्योगों को लाभ मिलेगा। प्रयागराज में इसका ऑपरेशनल कंट्रोल सेन्टर बनाया गया है।
- ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) से कानपुर, कन्नौज, कानपुर देहात, औरैया, फतेहपुर, इटावा, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़ समेत अनेक औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ होगा।
- केन्द्र सरकार 1504 किमी लंबे वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) का निर्माण करा रही है। इसे ग्रेटर नोएडा के दादरी से आरंभ कर मुम्बई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश का बड़ा हिस्सा इसके अन्तर्गत आएगा।
- ईस्टर्न डेडिकेटेड (EDFC) और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) को आपस में जोड़ने के लिए दादरी और खुर्जा के मध्य एक अलग खण्ड का निर्माण किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश बजट 2025-26
- बजट का 22 प्रतिशत भाग बुनियादी ढांचा के विकास हेतु आवंटित किया गया है।
- प्रदेश में चार नये एक्सप्रेस-वे के निर्माण हेतु ₹1511 करोड़ तथा धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए ₹480 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
- स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत 58 नगर निगमों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा।
- राज्य स्मार्ट सिटी योजना के लिए ₹400 करोड़ आवंटित किये गये हैं।
- नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए ₹200 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
- हरित सड़क अवसंरचना विकास (शहरी) के लिए ₹800 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
- शहरी बाढ़ एवं वर्षा जल निकासी योजना के लिए ₹1000 करोड़ आवंटित किये गये हैं।
- कान्हा गौशाला एवं आवारा पशु आश्रय स्थलों के लिए ₹450 करोड़ की घोषणा की गयी है।
- नई शहरी बुनियादी ढांचा सेवाओं के लिए ₹50 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
- राज्य में 8 नए डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जाएंगे।
- अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा।
- शहरी जलापूर्ति बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए अमृत 2.0 योजना हेतु ₹4,100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के अंतर्गत 39 लाख नए पेयजल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं।
राज्य की प्रथम एकीकृत हरित शहरी सड़क
- उत्तर प्रदेश की पहली एकीकृत हरित शहरी सड़क मेरठ में बनाने की घोषणा की गयी है। सड़क का निर्माण मुख्यमंत्री हरित सड़क अवसंरचना विकास योजना (CM-GRIDS) के अंतर्गत किया जा रहा है।
- यह हरित सड़क 2.15 किमी से अधिक लंबी होगी। इस परियोजना के जून 2026 तक पूर्ण होने की संभावना है।
- परियोजना की अनुमानित लागत 40 करोड़ रुपये है।
- मुख्यमंत्री हरित सड़क अवसंरचना विकास योजना (CM-GRIDS) को 10 मीटर से 45 मीटर की चौड़ाई वाले सड़क खंडों पर लागू किया जाएगा।
बल्क ड्रग फार्मा पार्क
- ललितपुर में बल्क ड्रग फार्मा पार्क का निर्माण किया जा रहा है। 5 गांवों के 1472 एकड़ क्षेत्र में फैले बल्क ड्रग फार्मा पार्क में दो चरण का कार्य आरंभ है।
- प्रथम चरण के अन्तर्गत 300 एकड़ क्षेत्र में डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट, मैपिंग, सॉयल सैंपलिंग और बुनियादी ढांचा विकास की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
नोएडा में फिल्म सिटी
- ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 21 में एक हजार एकड़ क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म सिटी का निर्माण किया जा रहा है।
- सार्वजनिक - निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) से हो रहे इस निर्माण कार्य हेतु यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने 30 सितंबर, 2023 को अन्तर्राष्ट्रीय बिड जारी की थी, जिसमें सबसे अधिक बोली फिल्म निर्माता बोनी कपूर और रियल स्टेट डेवलपर भूटानी समूह समर्थित बेव्यू प्रोजेक्ट्स ने लगायी है। निर्माण कार्य शीघ्र आरंभ होने की संभावना है।
- नोएडा फिल्म सिटी के निर्माण प्रक्रिया में लॉजिस्टिक्स पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, डाटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स में निवेशकों को भूमि आवंटन की प्रक्रिया आरंभ की जा चुकी है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में दिग्गज कंपनियों को संयंत्र स्थापित करने के लिए भूमि आवंटन और अन्य प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है।
- यहां डेडिकेटेड एमएसएमई एपेरल, हैंडीक्राफ्ट टॉय पार्क में इंडस्ट्रीयल व कामर्शियल स्पेसेस के विकास की प्रक्रिया यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा आरंभ की गयी है।
रीजनल फिल्म सिटी गोरखपुर में
- गोरखपुर में उत्तर भारत की प्रथम 'रीजनल फिल्म सिटी' स्थापित की जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहमति प्राप्त होने के बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ने फिल्म सिटी के लिए 100 एकड़ जमीन चिन्हित करने का प्रयास शुरू कर दिया है।
- उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल से भोजपुरी फिल्म उद्योग को सफलता का नया आयाम प्राप्त होगा।
- भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री लगभग ₹2000 करोड़ की है। गोरखपुर मे रीजनल फिल्म सिटी स्थापित होने से भोजपुरी के साथ ही उत्तर प्रदेश में अवधी, बुंदेलखण्डी, बृज और दूसरी क्षेत्रीय सिनेमा को भी विकास का अवसर प्राप्त होगा।
- रीजनल फिल्म सिटी की स्थापना में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ गोरखपुर के सांसद और प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता रवि किशन की मुख्य भूमिका मानी जाती है।
- गोरखपुर में रीजनल फिल्म सिटी की स्थापना से यूपी, बिहार और नेपाल के लाखों कलाकार और सिने कर्मियों को रोजगार का अवसर प्राप्त होगा।
- उत्तर प्रदेश में भोजपुरी फिल्में काफी संख्या मे बनती हैं। वर्तमान समय में लगभग 70 प्रतिशत भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग यूपी के गोरखपुर तथा निकटवर्ती क्षेत्रों में हो रही है। स्थानीय फिल्म निर्माताओं एवं कलाकारों को स्टूडियों से लेकर तमाम तकनीकी कार्यों के लिए मुंबई पर निर्भर रहना पड़ता है। अब यूपी में ही उन्हें यह सारी सुविधाएं रीजनल फिल्म सिटी के माध्यम से प्राप्त होनी शुरू हो जाएंगी। इससे फिल्मों का खर्च भी कम होगा।
लखनऊ में एआई सिटी
- नागरिक उड्डयन
- जैव ईंधन Biofuels
- पर्यटन केन्द्रों का विकास
- इलेक्ट्रॉनिक एवं खिलौना उत्पाद
- भण्डारण लॉजिस्टिक्स
- नगरीकरण, मेट्रो विस्तार
- सूचना तकनीक
- सड़क परिवहन (एक्सप्रेस-वे)
- डिफेंस कॉरिडोर एआई सिटी
'वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था' बनाने का लक्ष्य संभावनाएं एवं चुनौतियां
- उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2029 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को 'वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था' बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके अनुसार आगामी चार वर्षों में प्रदेश का सकल घरेलू राज्य उत्पाद (GSDP) ₹100 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा।
- प्रदेश सरकार अपने निर्धारित लक्ष्य को समय से हासिल करने में गंभीरता से लगी है, जिसके सकारात्मक परिणाम भी दिखायी देने लगे हैं।
- उत्तर प्रदेश का सकल घरेलू राज्य उत्पाद (GSDP) वर्ष 2021-22 में ₹16.45 लाख करोड़ था, जिसके वर्ष 2025-26 में लगभग दो गुना, ₹30.8 लाख करोड़ होने का अनुमान है।
- भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 8 प्रतिशत योगदान के साथ उत्तर प्रदेश देश का तृतीय सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन चुका है।
- अर्थव्यवस्था के स्तर पर अनेक बड़ी उपलब्धियां हासिल करने वाले उत्तर प्रदेश के लिए तमाम अर्थशास्त्री और विशेषज्ञ मानने लगे हैं कि वर्ष 2029 तक इसके वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।
- राजकोषीय स्वास्थ्य प्रबंधन में उत्तर प्रदेश देश का 'अग्रणी राज्य' बन गया है। राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2014-2019 के 37.0 अंक से बढ़कर 2022-23 में इसका अंक 45.9 हो गया है।
- उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर मौजूदा समय में स्थिर मूल्य पर 7.5 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय वृद्धि दर से अधिक है।
- प्रचलित मूल्यों पर विगत पाँच वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था में औसतन 14 प्रतिशत की दर से वृद्धि देखी गयी है।
- वर्ष 2024-25 में प्रचलित मूल्यों पर उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर 12 प्रतिशत रही, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर देश की विकास दर इसी अवधि में 6.5 प्रतिशत दर्ज की गयी।
- वर्ष 2022-23 में स्थायी मूल्यों पर राष्ट्रीय वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही, जबकि उत्तर प्रदेश में यह 8.3 प्रतिशत दर्ज की गई।
- माना जाता है कि निवेश आर्थिक विकास को गति देने में ईंधन का कार्य करता है। इस वास्तविकता को समझते हुए प्रदेश सरकार ने बीते वर्ष लखनऊ में तीन दिवसीय 'यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट- 2023' का आयोजन किया, जिसमें ₹33.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त 19 फरवरी, 2024 को 'ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (GBC 4.0) के माध्यम से लखनऊ में लगभग ₹10 लाख करोड़ के निवेश से 14 हजार से अधिक परियोजनाएं आरंभ की गयीं।
- अर्थशास्त्रियों का मानना है कि एक वर्ष के अंदर प्रदेश में जिस तरह लगभग ₹45 लाख करोड़ रुपये के निवेश की स्थिति बनी है, इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2027 तक राज्य के लिए 'वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था' बनने के लक्ष्य को प्राप्त करना संभव होगा।
- यह सर्वमान्य धारणा है कि बुनियादी ढांचा (अवसंरचना) तथा पूंजीगत व्यय में वृद्धि से अर्थव्यवस्था को उड़ान के नये पंख मिलते हैं। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं:
- उत्तर प्रदेश 19 एक्सप्रेस-वे के साथ देश का सर्वाधिक एक्सप्रेसवे वाला राज्य बन गया है।
- प्रदेश 19 हवाई अड्डों वाला राज्य बन गया है, जिसमें 5 निर्माणाधीन हैं। यहां 5 अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट है।
- लखनऊ में 'एआई सिटी' और नोएडा में 'फिल्म सिटी' के निर्माण पर कार्य चल रहा है।
- गेहूँ, गन्ना, खाद्यान्न, सब्जियां, फल, चीनी तथा दूध उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश के राज्यों में शीर्ष पर है।
- नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट (2024) के अनुसार गरीबी और गरीबों की संख्या कम करने में भारत के राज्यों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन उत्तर प्रदेश ने किया है।
- प्रदेश में बेरोजगारी दर वर्ष 2017-18 में 6.2 प्रतिशत थी, जो आज गिरकर 2.4 प्रतिशत पर आ चुकी है। इसके साथ ही महिला श्रम बल में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। वर्ष 2017-18 में यह 13.5 प्रतिशत थी, जो आज 31.2 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है।
- देश में सबसे बड़ा एमएसएमई सेक्टर उत्तर प्रदेश में है।
- पर्यटन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश सर्वाधिक पर्यटक आगमन वाला राज्य हो गया है। वर्ष 2023-24 में प्रदेश में 31.8 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ। वाराणसी, मथुरा, अयोध्या और आगरा इसके प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। आने वाले दिनों में इसमें उत्तरोत्तर विकास की संभावना है।
- वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए उत्तर प्रदेश को अपनी वार्षिक आर्थिक विकास दर 24 से 26 प्रतिशत तक बढ़ानी होगी। वर्तमान में प्रदेश की विकास दर 8 से 11 प्रतिशत के मध्य है।
- आगामी 4 से 5 वर्षों के भीतर सरकार को लगभग ₹50 लाख करोड़ व्यय करने होंगे, जिससे प्रदेश 100 लाख करोड़ की जीडीपी वाला राज्य बन सके।
- बुनियादी संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली तथा औद्योगिक क्षेत्र पर अधिक व्यय करना होगा।
- प्रदेश में 'सेज' की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है, जिसे बढ़ाना होगा।
उत्तर प्रदेश बना देश का सर्वाधिक एक्सप्रेस-वे वाला राज्य
- उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक एक्सप्रेस-वे वाला राज्य बन गया है। यहां 7 एक्सप्रेस-वे क्रियाशील (संचलन आरम्भ हो चुका है) और 6 निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 6 नये एक्सप्रेस-वे बनाये जाने की घोषणा की गयी है। इस तरह उत्तर प्रदेश सर्वाधिक 21 एक्सप्रेस-वे वाला देश का प्रथम राज्य बन रहा है।
- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी सूचना के अनुसार प्रयागराज - वाराणसी एक्सप्रेस-वे 110 किमी, मेरठ से हरिद्वार एक्सप्रेस-वे 110 किमी, गंगा एक्सप्रेस-वे से शाहजहांपुर, बरेली होते हुए रामपुर, रुद्रपुर उत्तराखंड सीमा तक, चित्रकूट से प्रयागराज, झांसी लिंक एनएच-27 से बुंदेलखंड और विंध्य एक्सप्रेस-वे चित्रकूट से मिर्जापुर का निर्माण कराया जाएगा।
- गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना के तहत प्रथम चरण में मेरठ से प्रयागराज तक ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण का काम स्वीकृत है।
- उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों हरिद्वार, प्रयागराज व वाराणसी को एक्सप्रेस-वे के माध्यम से जोड़ा जाएगा।
- द्वितीय चरण में हरिद्वार व प्रयागराज से वाराणसी तक ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे निर्माण करने का प्रस्ताव है।
- एक्सप्रेस-वे पर यातायात में वृद्धि के लिए गंगा एक्सप्रेस-वे से शाहजहांपुर, बरेली होते हुए रामपुर, रूद्रपुर उत्तराखंड सीमा तक एक एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराए जाने का प्रस्ताव है।
- चित्रकूट से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के मध्य बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा चुका है।
- प्रयागराज-वाराणसी एक्सप्रेस-वे, 110 किमी
- मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेस-वे, 110 किमी
- गंगा एक्सप्रेसवे से शाहजहांपुर, बरेली होते हुए रामपुर, रूद्रपुर उत्तराखंड सीमा
- चित्रकूट से प्रयागराज एक्सप्रेस-वे
- झांसी लिंक एनएच-27 से बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे
- विंध्य एक्सप्रेस-वे, चित्रकूट से मिर्जापुर
- गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे, 91 किमी
- यमुना एक्सप्रेस-वे, 165 किमी
- नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे, 25 किमी
- आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, 302 किमी
- दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे, 90 किमी
- पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, 341 किमी
- बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, 296 किमी
- गंगा एक्सप्रेस-वे, 594 किमी
- लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे, 63 किमी
- गाजियाबाद-कानपुर एक्सप्रेस-वे, 380 किमी
- गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे, 519 किमी
- दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेस-वे, 210 किमी
- गाजीपुर-बलिया-मांझीघाट एक्सप्रेस-वे, 117 किमी
उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक
- प्रथमा बैंक
- आर्यावर्त बैंक
- बड़ौदा यूपी बैंक
प्लास्टिक और टॉय पार्क
उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर
- यमुना एक्सप्रेस-वे
- आगरा - लखनऊ एक्सप्रेस-वे
- पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे
- बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे
- गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे
- गंगा एक्सप्रेस-वे
प्रदेश का पहला डिजिटल हाईवे बाराबंकी से बहराइच तक
- उत्तर प्रदेश का पहला डिजिटल हाईवे बाराबंकी से बहराइच के मध्य निर्मित किया जा रहा है। यह 101 किलोमीटर लंबा होगा।
- इस परियोजना के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सर्वेक्षण कार्य शुरू कर दिया है।
- इसमें ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाएगी, जिससे यात्रियों को 24 घंटे नेटवर्क की सुविधा प्राप्त होगी।
- एनएचएआई के अनुसार इस हाईवे में एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का प्रयोग किया जाएगा। कोई भी ड्राइवर गलत साइड से गाड़ी ड्राइव नहीं कर पाएगा। पूरे हाईवे पर एक भी कट नहीं होगा। मात्र हाईवे के नीचे से यू-टर्न के कट दिए जाएंगे।
- पूरा हाईवे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से लैस सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगा। किसी तरह की दुर्घटना अथवा अन्य संदिग्ध गतिविधियों की स्थिति में स्क्रीन पर स्वतः पॉप-अप आ जाएगा।
- सभी स्ट्रक्चर वाले निर्माण क्षेत्र में सेंसर आधारित लाइट की व्यवस्था होगी, जो वाहन के गुजरते ही जल उठेंगी और पुनः स्वतः बंद हो जाएंगी।
- डिजिटल हाईवे बनने से बाराबंकी, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर के लोगों को यात्रा में सुविधा होगी। इससे नेपाल जाने वाले यात्रियों को भी लाभ होगा।
- यह लखनऊ-अयोध्या नेशनल हाईवे-27 से जुड़ेगा।
- एनएचएआई ने बाराबंकी से बहराइच के बीच 101 किलोमीटर लंबे फोर लेन हाईवे की परियोजना स्वीकृत की है। परियोजना के पहले चरण में बाराबंकी से जरवल तक 51 किलोमीटर हाईवे का निर्माण किया जाएगा।
- दूसरे चरण में घाघरा नदी पर एक किलोमीटर लंबे पुल का निर्माण किया जाएगा। तीसरे चरण में जरवल से बहराइच तक 49 किलोमीटर लंबे हाईवे का निर्माण किया जाएगा। इसके निर्माण पर ₹2500 करोड़ व्यय होंगे।
प्रदेश में 25 हवाई अड्डे
- चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, लखनऊ
- नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, जेवर
- लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी
- कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, कुशीनगर
- महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, अयोध्या
पूर्वांचल इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर
- उत्तर प्रदेश में 5 एक्सप्रेस-वे के किनारे 5800 हेक्टेयर क्षेत्र में 30 इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर का विकास किया जा रहा है।
- उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की तरफ से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे तथा गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे इन कॉरिडोर्स का विकास किया जाना है।
- पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के किनारे 5 साइट्स की 1586 हेक्टेयर भूमि पर ₹2300 करोड़ की लागत से पूर्वांचल इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर का विकास होना है।
- गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे 11 साइट्स की 1522 हेक्टेयर भूमि पर ₹2300 करोड़ की लागत से, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के किनारे 6 साइट्स की 1884 हेक्टेयर भूमि पर ₹1500 करोड़ की लागत से, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के किनारे 5 साइट्स की 532 हेक्टेयर भूमि पर ₹650 करोड़ की लागत से और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के किनारे 2 साइटों की 345 हेक्टेयर भूमि पर ₹320 करोड़ की लागत से इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर्स के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विकसित उत्तर प्रदेश @2047
- प्रदेश सरकार ने वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए राज्य को लगातार 16 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। इस विजन के अंतर्गत प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में प्रदेश का योगदान लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंचेगा।
- नई योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2047 तक राज्य में प्रति व्यक्ति आय को ₹26 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, वर्तमान में यह ₹1,08,572 है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नियोजन विभाग एक विस्तृत रोडमैप तैयार कर रहा है, जिसमें जनसंख्या और विकास योजनाओं को शामिल किया जाएगा।
- वर्तमान में उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
- विकसित उत्तर प्रदेश @2047 के अनुसार वर्ष 2047 में जब देश स्वतंत्रता की शताब्दी वर्ष मनाएगा तब तक उत्तर प्रदेश के हर व्यक्ति की वार्षिक आय आज से 26 गुणा अधिक होगी। सरकार ने 22 वर्ष बाद यूपी की प्रति व्यक्ति आय को ₹26 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसे हासिल करने के लिए रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
- वर्ष 2017-18 में उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत की तुलना में जो 50.30 प्रतिशत रह गई थी, वह वर्ष 2024-25 में बढ़कर राष्ट्रीय औसत की तुलना में 52.90 प्रतिशत हो गई है। इन आठ वर्षों में राष्ट्रीय औसत की तुलना में उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में 2.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
- वर्ष 2017-18 में देश की प्रति व्यक्ति आय ₹1,15,224 थी तब यूपी की प्रति व्यक्ति आय जब ₹57,944 पर थी, नवीनतम आंकड़े जो वर्ष 2024-25 के हैं, उसमें प्रति व्यक्ति आय का राष्ट्रीय औसत ₹2,05,324 हैं जबकि यूपी की प्रति व्यक्ति आय ₹1,08,572 है।
- उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय को ₹26 लाख तक ले जाने का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इसमें 22 वर्ष बाद राज्य की जनसंख्या क्या होगी, इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश के विकास की योजना बनाई जा रही है।
बोइंग का वितरण केन्द्र खुर्जा में
- अमेरिका की एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी 'बोइंग' ने उत्तर प्रदेश के खुर्जा क्षेत्र में अपना वितरण केन्द्र खोलने की घोषणा की है।
- भारत में बोइंग का यह प्रथम वितरण केन्द्र होगा।
- भारत समेत दुनिया में आठ वितरण केंद्र कंपनी द्वारा खोले जा रहे हैं।
- बोइंग कंपनी खुर्जा स्थित अपने केन्द्र और गोदाम में स्पेयर पार्ट्स रखेगी और उसे आगे सप्लाई करेगी।
दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

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