उत्तर प्रदेश में आर्थिक विकास : चुनौतियां एवं संभावनाएं

उत्तर प्रदेश में आर्थिक विकास : चुनौतियां एवं संभावनाएं

उत्तर प्रदेश, जिसे कभी 'बीमारू राज्य' का तमगा दिया गया था, आज नए भारत के आर्थिक उत्थान का सबसे सशक्त सारथी बन चुका है। यह लेख यूपी की उसी नई और वैभवशाली आर्थिक क्रांति का जीवंत सफरनामा है। एक्सप्रेस-वे के बिछते जाल, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की रिकॉर्ड वृद्धि और 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) की गूंज ने इस राज्य को 'लैंड ऑफ मिडनाइट सन' बना दिया है। हालांकि, तरक्की की इस सुनहरी तस्वीर के पीछे पश्चिमी यूपी बनाम पूर्वांचल का असंतुलित विकास, प्रति व्यक्ति आय का संघर्ष और अपराध जैसी जमीनी चुनौतियां भी खड़ी हैं। इस विस्तृत लेख में हम उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की वर्तमान दशा, सुनहरी संभावनाओं और राह के प्रमुख रोड़ों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
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विकास की यात्रा: बीमारू से ट्रिलियन डॉलर की ओर

बीमारू राज्य
पिछड़ापन, औद्योगिकीकरण का अभाव और निराशाजनक विकास दर
तीव्र विकास (8.9%)
भारत का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता राज्य (GSDP)
1 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य
भविष्य का 'लैंड ऑफ मिडनाइट सन' (SBI रिपोर्ट)

अर्थव्यवस्था में क्षेत्रों का योगदान

प्राथमिक क्षेत्र
27% योगदान
(कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र)
+
द्वितीयक क्षेत्र
27% योगदान
(उद्योग एवं विनिर्माण)
+
तृतीयक क्षेत्र
46% योगदान
(सेवा क्षेत्र - सर्वाधिक)

आर्थिक क्रांति के प्रमुख सारथी

बुनियादी संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर)
देश का सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क। 19 एक्सप्रेस-वे और 5 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों सहित कुल 25 एयरपोर्ट।
निवेश में ऐतिहासिक वृद्धि
4 वर्षों में 11,000 करोड़ का FDI। इन्वेस्टर्स समिट 2023 में ₹35.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव।
कारोबारी सुगमता (Ease of Doing Business)
रैंकिंग में 14वें स्थान से छलांग लगाकर देश में दूसरे (2nd) स्थान पर पहुंचा। निवेश मित्र व निवेश सारथी पोर्टल से मदद।
एक जिला, एक उत्पाद (ODOP)
स्थानीय उत्पादों को नई पहचान। प्रदेश के पास अब 74 से अधिक उत्पादों के लिए GI (Geographical Indication) टैग उपलब्ध।
रोजगार व तकनीकी कौशल (एआई प्रज्ञा)
1.5 करोड़ युवाओं को रोजगार। 'एआई प्रज्ञा' के तहत 10 लाख युवाओं को AI, मशीन लर्निंग व साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग।

4 आर्थिक क्षेत्र : असंतुलित विकास की तस्वीर

पश्चिमी क्षेत्र (30 जनपद)
उत्तर प्रदेश की कुल GDP में 50% से अधिक का योगदान। प्रति व्यक्ति आय में शीर्ष 5 में से 4 जिले इसी क्षेत्र (जैसे नोएडा) से हैं।
पूर्वी क्षेत्र / पूर्वांचल (28 जनपद)
समान जनसंख्या होने के बावजूद GDP में योगदान पश्चिमी क्षेत्र का आधा। प्रति व्यक्ति आय में सबसे पिछड़े 5 जिले यहीं स्थित हैं।
केन्द्रीय क्षेत्र (10 जनपद)
लखनऊ की प्रति व्यक्ति आय प्रदेश के औसत से लगभग 40% अधिक है।
बुन्देलखण्ड क्षेत्र (7 जनपद)
GDP में मामूली वृद्धि दर्ज, लेकिन अभी भी समग्र विकास में पीछे।

संभावनाएं बनाम जमीनी चुनौतियां

आर्थिक पहलू सकारात्मक परिदृश्य (संभावनाएं) जमीनी हकीकत (चुनौतियां)
अर्थव्यवस्था का आकार तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (अब दूसरी सबसे तेजी से बढ़ती)। GSDP विकास दर 8.9%। प्रति व्यक्ति आय: देश के सबसे पिछड़े राज्यों में दूसरे स्थान (बिहार के बाद) पर। 46 जिलों की आय औसत से नीचे।
क्षेत्रीय विकास नोएडा, लखनऊ, आगरा का जीडीपी में बड़ा योगदान (नोएडा अकेला 9%)। क्षेत्रीय असमानता: बलिया के मुकाबले नोएडा की प्रति व्यक्ति आय 20 गुना अधिक है।
कानून व्यवस्था अपराध पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति से निवेशकों का विश्वास बढ़ा। NCRB 2024 रिपोर्ट: प्रति व्यक्ति अपराध दर (7.4 अंक) के साथ राज्य देश में प्रथम स्थान पर है।
मानव पूंजी सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार (24 करोड़)। युवा आबादी को तकनीकी कौशल। गंभीर संकट: महिलाओं की कम कार्य सहभागिता (16.7%), गरीबी, अकुशल श्रम और शिक्षा-स्वास्थ्य की स्थिति।
  • देश की कुल जनसंख्या का लगभग 17 प्रतिशत भाग उत्तर प्रदेश में निवास करता है। लगभग 24 करोड़ जनसंख्या वाला यह राज्य देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार बन कर उभरा है। हाल के वर्षों में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) के साथ प्रति व्यक्ति आय एवं प्रति व्यक्ति उपभोग में भी वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप बाजारीकरण का तीव्र गति से विस्तार हो रहा है।
  • जनसंख्या बहुल होने के बावजूद प्रदेश में कार्य सहभागिता दर 32.9 प्रतिशत है, जो देश की कार्य सहभागिता दर 39.8 प्रतिशत से कम है। इसका मुख्य कारण प्रदेश में महिलाओं की कार्य सहभागिता दर कम (16.7 प्रतिशत) होना माना जा रहा है।
  • विभिन्न विषमताओं के बावजूद उत्तर प्रदेश उत्तरोत्तर विकास के पथ पर अग्रसर है। सरकार द्वारा किये गये प्रयास- इन्वेस्टर्स समिट, इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, डिफेन्स कॉरिडोर, ओ.डी.ओ.पी, निवेश सारथी, इन्वेस्ट यूपी इत्यादि ने आर्थिक विकास में उत्प्रेरक का कार्य किया है। वर्ष 2015-16 से राज्य की विकास दर अधिकांश वर्षों में राष्ट्रीय विकास दर से अधिक रही है।
  • वर्तमान परिदृश्य में राज्य की अर्थव्यवस्था में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 27 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 27 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का योगदान 46 प्रतिशत है। स्पष्ट है कि तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र) का योगदान प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सर्वाधिक है। लगभग यही स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था की है, जहां वर्ष 2024-25 में सम्पूर्ण जीडीपी में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 17 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 30 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का योगदान 53 प्रतिशत रहा। वास्तव में यह 'तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्था' की स्थिति है।
यूपी की अर्थव्यवस्था में क्षेत्रवार वार्षिक वृद्धि (प्रचलित मूल्यों पर)
क्षेत्र 2011-12 से 2023-24 तक
कृषि एवं पशुपालन 10.4 प्रतिशत
प्राथमिक क्षेत्र के उपखण्ड 10.5 प्रतिशत
विनिर्माण 9.9 प्रतिशत
द्वितीय क्षेत्र के उपखण्ड 10.7 प्रतिशत
तृतीयक क्षेत्र 10.9 प्रतिशत
कुल राज्य आय 11.1 प्रतिशत
प्रति व्यक्ति आय 9.3 प्रतिशत
स्रोत: राज्य आय अनुभाग, अर्थ एवं संख्या प्रभाग, उ.प्र.

'लैंड ऑफ मिडनाइट सन'

  • भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने हाल में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के स्तर पर पहुंचाने में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
  • रिपोर्ट में यूपी को भविष्य का 'लैंड ऑफ मिडनाइट सन' बताया गया है। इसके अनुसार उत्तर प्रदेश विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर है और राष्ट्रीय प्रगति में एक सारथी के रूप में पूर्ण भूमिका निभा रहा है।

विकास की राह

  • यह तथ्य अनेक विशेषज्ञों को आश्चर्यचकित करने वाला है कि हाल के वर्षों तक 'बीमारू राज्य' की श्रेणी में गिना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर से कदम ताल करता हुआ तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब महाराष्ट्र और गुजरात के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन चुका है। अब यह एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की ओर अग्रसर है।
  • अगस्त 2025 में भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) अब 5.5 प्रतिशत से बढ़कर 8.9 प्रतिशत हो गयी है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश में दूसरा सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य बन गया है।
  • प्रथम स्थान पर तमिलनाडु है, जिसकी GSDP दर वर्तमान में 11.19 प्रतिशत है।

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था वर्तमान दशा और दिशा

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था वर्तमान में देश की सबसे तीव्र गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसकी विकास दर राष्ट्रीय विकास दर से भी अधिक है।
उत्तर प्रदेश की इस आर्थिक प्रगति को निम्नलिखित प्रयासों एवं कार्यक्रमों का प्रतिफल माना जा सकता है:

निवेश में वृद्धि

प्रदेश सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं के परिणामस्वरूप राज्य में निवेश तीव्र गति से बढ़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार बीते चार वर्षों में उत्तर प्रदेश में 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है। यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 में ही ₹35.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव उत्तर प्रदेश को प्राप्त हुए थे।

बुनियादी संरचना का सुदृढ़ीकरण

प्रदेश सरकार ने बीते 8 वर्षों में सर्वाधिक ध्यान बुनियादी संरचना के विकास एवं उसके सुदृढ़ीकरण पर दिया है। इसका परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज देश के सबसे बड़े सड़क नेटवर्क के साथ-साथ सर्वाधिक एक्सप्रेस-वे (19) वाला राज्य बन गया है। राज्य में 25 एयरपोर्ट हैं, जिनमें 5 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं।

रोजगार में वृद्धि

प्रदेश में निवेश बढ़ने और औद्योगीकरण के विस्तार से रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है। सरकार का दावा है कि वर्ष 2023 के यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के परिणामस्वरूप जो निवेश आये उससे राज्य के 1.5 करोड़ युवाओं को रोजगार प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त हाल में राज्य के 1.54 लाख युवाओं को पुलिस भर्ती के माध्यम से रोजगार प्रदान किये गये।

प्रदेश के चार आर्थिक क्षेत्र एवं संबंधित जनपद

समग्र आर्थिक विकास सूचकांक के आधार पर उत्तर प्रदेश को राज्य नियोजन विभाग द्वारा 4 आर्थिक क्षेत्रों में विभाजित किया गया है:
  • पूर्वी क्षेत्र: इसमें 28 जनपद सम्मिलित हैं। इनके नाम हैं- अम्बेडकर नगर, अयोध्या, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, बलिया, संत रविदास नगर, वाराणसी, जौनपुर, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, कौशाम्बी, बलरामपुर, गोंडा, चन्दौली, श्रावस्ती, बहराइच, सुल्तानपुर, गाजीपुर, प्रतापगढ़ एवं अमेठी।
  • केन्द्रीय क्षेत्र: इसमें 10 जनपद सम्मिलित हैं। इनके नाम हैं- लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी, लखनऊ, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, रायबरेली एवं फतेहपुर।
  • पश्चिमी क्षेत्र: इसमें 30 जनपद सम्मिलित हैं। इनके नाम हैं-एटा, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, फिरोजाबाद, आगरा, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, रामपुर, बदायूं, मथुरा, मैनपुरी, बागपत, मेरठ, अमरोहा, मुरादाबाद, गौतमबुद्धनगर (नोएडा), गाजियाबाद, बुलंदशहर, हाथरस, अलीगढ़, कन्नौज, फर्रुखाबाद, औरैया, इटावा, कासगंज, हापुड़, संभल एवं शामली।
  • बुन्देलखण्ड क्षेत्र: इसमें 7 जनपद सम्मिलित हैं। इनके नाम हैं- महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, बांदा, जालौन, झांसी एवं ललितपुर।
राज्य में नगरीकरण, बाजारीकरण एवं पर्यटन केन्द्रों के विकास से हजारों व्यक्तियों को रोजगार मिले हैं। रोजगार में वृद्धि प्रदेश की आर्थिक समृद्धि को गति दे रहा है।

अपराध पर जीरो टॉलरेंस

प्रदेश सरकार ने राज्य में माफियाओं एवं अन्य अपराधियों के विरुद्ध जो प्रभावी कार्रवाई की है, उसका परिणाम सबके सामने है। अधिकांश माफिया एवं अराजक तत्व या तो पुलिस के हाथों मार दिये गये अथवा जेलों में हैं। इस स्थिति का सकारात्मक प्रभाव राज्य के निवेश और विकास पर पड़ा है।

तकनीक से कारोबार

प्रदेश सरकार राज्य में कारोबार एवं औद्योगीकरण के विस्तार हेतु तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा दे रही है, जिसके परिणामस्वरूप निवेश एवं औद्योगिक विकास में तेजी आयी है। निवेश मित्र, इन्वेस्ट यूपी एवं निवेश सारथी जैसे सिंगल विंडो पोर्टल से राज्य में नया कारोबार शुरू करना सरल हुआ है।

कारोबारी सुगमता में छलांग

कारोबारी सुगमता (इज ऑफ डूइंग) में उत्तर प्रदेश वर्ष 2016-17 में 14वें पायदान पर था, जो अब दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। इससे निवेशकों एवं कारोबारियों का उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में विश्वास बढ़ा है।

एक जिला, एक उत्पाद (ODOP)

प्रदेश सरकार ने राज्य के प्रत्येक जिले में विशेष स्थानीय उत्पाद की पहचान कर 'एक जिला, एक उत्पाद' कार्यक्रम आरंभ किया है। इससे स्थानीय कारोबारियों एवं उद्यमियों को अपनी पहचान बनाने एवं विस्तार का नया अवसर प्राप्त हुआ है।
प्रदेश सरकार ने स्थानीय विशिष्ट उत्पादों को जीआई टैग उपलब्ध कराने में तत्परता दिखायी है, जिससे औद्योगिक विकास को बल मिला है। आज स्थानीय उत्पादों के 74 से अधिक जीआई टैग उत्तर प्रदेश के पास हैं।

वोकल फॉर लोकल

राज्य में स्थानीय उत्पादों की खरीद और उनके प्रयोग पर बल दिया जा रहा है। इससे स्थानीय/क्षेत्रीय कारोबार को नयी गति मिली है।

प्रदेश में आर्थिक विकास के समक्ष चुनौतियां

  • सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के आकार की दृष्टि से उत्तर प्रदेश देश की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है, किन्तु प्रति व्यक्ति आय में यह आज भी सबसे पीछे के राज्यों में दूसरे स्थान पर (प्रथम स्थान पर बिहार) आता है।
  • प्रति व्यक्ति आय में कमी से राज्य के नागरिकों की खरीद क्षमता (Purchasing Power) नीचे है, जो आर्थिक समृद्धि के लिए नकारात्मक पक्ष माना जाता है। इस स्थिति में निवेशक एवं उद्यमी यहां आने से बच रहे हैं।
  • राज्य सरकार यद्यपि 'अपराध के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस' का दावा बढ़-चढ़ कर करती है, किन्तु सरकारी आंकड़े इस बात की गवाही स्वयं देते हैं कि अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश आज भी देश के राज्यों में शीर्ष पर है।
  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने वर्ष 2024 के अपराधों के आंकड़े हाल में जारी किये, जिसमें बताया गया है कि 7.4 अंक (प्रति व्यक्ति अपराध दर) के साथ उत्तर प्रदेश देश के राज्यों में प्रथम स्थान पर है।
  • एनसीआरबी के अनुसार प्रति व्यक्ति अपराध दर के हिसाब से राज्यों में द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ स्थान पर क्रमशः अरुणाचल प्रदेश (5.8 अंक), झारखंड (5.3 अंक) तथा मेघालय (5.1 अंक) हैं।
  • उत्तर प्रदेश में गरीबी, अकुशल मानव पूंजी, बच्चों एवं महिलाओं में स्वास्थ्य समस्या तथा कम उपयोगी शिक्षा का संकट चरम पर है। इन कारणों से राज्य के आर्थिक विकास में रुकावटें आ रही हैं।

एआई प्रज्ञा

राज्य को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में अग्रणी बनाने हेतु उत्तर प्रदेश सरकार ने 'एआई प्रज्ञा' कार्यक्रम आरंभ किया है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 10 लाख युवाओं को AI, साइबर सुरक्षा, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स जैसी नवीनतम तकनीकों में प्रशिक्षण एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किये जाएंगे।
इसके अन्तर्गत राज्य में AI आधारित स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के साथ तकनीकी रूप से दक्ष मानव संसाधन का निर्माण किया जाएगा। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

प्रदेश में असंतुलित विकास : बड़ी समस्या

  • उत्तर प्रदेश के अर्थ एवं संख्या विभाग ने हाल में जीडीपी से सम्बन्धित जो जिलावार आंकड़े जारी किए हैं उससे पता चलता है कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के विकास में भारी असमानता है। प्रदेश के इस असंतुलित विकास को सम्पूर्ण प्रगति की राह में बड़ी समस्या मानी जा रही है।
  • आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में तीन वर्षों में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय वाले 5 जिलों में 4 पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं। एटा जिले की प्रति व्यक्ति आय राजधानी लखनऊ से भी अधिक है।
  • प्रदेश के अर्थ एवं संख्या विभाग ने वर्ष 2021-22 के लिए जो जिलेवार जीडीपी के आंकड़े जारी किए हैं, उसके अनुसार उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2016-17 में ₹52,671 थी। यह 2021-22 में बढ़कर ₹70,792 हो गयी है। वर्ष 2020-21 की तुलना में इसमें लगभग 15.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के बावजूद क्षेत्रीय असमानता को दूर करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुयी है। सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय वाले 5 जिलों में लखनऊ पांचवें स्थान पर है, जबकि एटा का स्थान तीसरा है। इस सूची में सबसे पिछड़े 5 जिले पूर्वांचल के हैं। क्षेत्रीय असमानता की खाई इतनी गहरी है कि बलिया के मुकाबले गौतमबुद्धनगर (नोएडा) की प्रति व्यक्ति आय लगभग 20 गुना अधिक है।
  • उत्तर प्रदेश की कुल जीडीपी में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान पश्चिमी उत्तर प्रदेश का है। दूसरी तरफ लगभग समान जनसंख्या होने के बाद भी जीडीपी में पूर्वांचल का योगदान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अपेक्षा लगभग आधा है। वर्ष 2021-22 के मुकाबले बुंदेलखंड के योगदान में मामूली वृद्धि अवश्य हुई है, किन्तु प्रति व्यक्ति आय में नोएडा सबसे आगे है।
  • लखनऊ की प्रति व्यक्ति आय उत्तर प्रदेश की औसत प्रति व्यक्ति आय से लगभग 40 प्रतिशत अधिक है। बीते तीन वर्षों में लखनऊ की प्रति व्यक्ति आय में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रदेश में 7 जनपद ऐसे हैं, जिनकी प्रति व्यक्ति आय ₹ 90 हजार या इससे अधिक है। दूसरी तरफ 46 जिलों की प्रति व्यक्ति आय उत्तर प्रदेश की औसत प्रति व्यक्ति आय से नीचे है।
  • प्रदेश में यह असंतुलित विकास बड़ी समस्या बनी हुई है। प्रदेश की जीडीपी में नोएडा का योगदान 9 प्रतिशत से अधिक है। इसके बाद लखनऊ, आगरा, प्रयागराज, मेरठ और कानपुर ऐसे 5 जिले हैं, जिनका उत्तर प्रदेश की जीडीपी में योगदान 3 से 4 प्रतिशत तक है।

दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UPPSC, UPSSSC, UP Police, UP Lekhpal, RO/ARO और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।