उत्तर प्रदेश सरकार की लोककल्याणकारी योजनाएं एवं परियोजनाएं

उत्तर प्रदेश सरकार की लोककल्याणकारी योजनाएं एवं परियोजनाएं

उत्तर प्रदेश केवल आबादी के लिहाज से ही भारत का सबसे बड़ा राज्य नहीं है, बल्कि आज यह विकास, बदलाव और लोककल्याण की एक नई इबारत लिख रहा है। ग्रामीण अंचलों में पसीना बहाते किसान हों, रोजगार की राह ताकते युवा हों, या फिर सशक्तिकरण की उड़ान भरती आधी आबादी राज्य सरकार की हर पहल 'सर्वसमावेशी विकास' का एक मजबूत खाका खींच रही है। इस विस्तृत लेख में हम उत्तर प्रदेश सरकार की उन सभी प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं और बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो न सिर्फ आम जनजीवन की तस्वीर बदल रही हैं, बल्कि राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भी बेहद प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हैं।

uttar-pradesh-government-welfare-schemes-in-hindi

🚀 उत्तर प्रदेश सरकार की प्रमुख नीतियां (2024)

डिजिटल मीडिया नीति 2024

  • डिजिटल प्लेटफार्म (X, FB, YT) का विनियमन।
  • सकारात्मक कंटेंट क्रिएटर्स को प्रोत्साहन राशि।
  • फर्जी और राष्ट्र विरोधी सामग्री पर कड़ी सजा।

ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2024

  • 2028 तक 1 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य।
  • नेट जीरो लक्ष्य और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा।
  • नोडल एजेंसी: UPNEDA

सेमीकंडक्टर नीति 2024

  • पूंजीगत सब्सिडी और कर (Tax) लाभ।
  • भूमि अधिग्रहण में विशेष सहायता।
  • AI, IOT और EV उद्योगों को सीधा लाभ।

📈 ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के चरण

1. ग्राम सभा का गठन पात्र मतदाताओं की भागीदारी
➔
2. जन जागरूकता बैठकों द्वारा घोषणाएं
➔
3. चर्चा एवं समाधान सतत विकास लक्ष्यों पर मंथन
➔
4. योजना निर्माण ग्राम पंचायत को योजना सौंपना
➔
5. अधिकारी सहायता VDO द्वारा तकनीकी मदद व बजट
➔
6. जन योजना अभियान 2 अक्टूबर से 31 मार्च तक क्रियान्वयन

👩‍💼 स्वावलंबिनी: महिला उद्यमिता कार्यक्रम के 5 स्तंभ

EAP जागरूकता (2 दिन)
➔
EDP प्रशिक्षण (40 घंटे)
➔
Mentorship 6 माह का मार्गदर्शन
➔
FDP संकाय विकास कार्यशाला
➔
Rewards मान्यता एवं वित्तपोषण

🎓 मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना (वित्तीय सहायता के चरण)

बालिकाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए कुल ₹25,000 की सहायता राशि (अगस्त 2023 से संशोधित):

जन्म
₹ 5,000
➔
1 वर्ष आयु
₹ 2,000
➔
कक्षा 1
₹ 3,000
➔
कक्षा 6
₹ 3,000
➔
कक्षा 9
₹ 5,000
➔
स्नातक/डिप्लोमा
₹ 7,000

📊 योजनाओं का तुलनात्मक विवरण

1. मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना (संशोधित राशि)

मद / विवरण पुरानी व्यवस्था (₹) नई व्यवस्था (₹)
कुल व्यय (प्रति जोड़ा) ₹ 51,000 ₹ 1,00,000
कन्या के खाते में ₹ 35,000 ₹ 60,000
उपहार सामग्री ₹ 10,000 ₹ 25,000
आयोजन खर्च ₹ 6,000 ₹ 15,000

2. कृषि एवं गोवंश संवर्धन योजनाएं (एक दृष्टि में)

योजना का नाम प्रमुख उद्देश्य / प्रावधान वित्तीय लाभ / सब्सिडी
नंद बाबा दुग्ध मिशन देसी गाय पालकों को दूध का उचित मूल्य दिलाना। ₹10,000 - ₹15,000 की प्रोत्साहन राशि।
नंदिनी कृषक समृद्धि दुग्ध उत्पादन वृद्धि हेतु उच्च नस्ल की गायों की इकाई। 25 गायों की स्थापना पर 50% सब्सिडी।
खेत सुरक्षा योजना छुट्टा जानवरों से फसल को सुरक्षित रखना। खेतों की मेड़ पर 12 वोल्ट 'सोलर फेंसिंग'।
यूपी एग्रीज (UP AGREES) विश्व बैंक के सहयोग से 28 जिलों में उत्पादकता बढ़ाना। ₹4000 करोड़ का बजट (मत्स्य, पशुपालन, निर्यात हब)।
निराश्रित गोवंश सहभागिता बेसहारा पशुओं को आश्रय एवं पोषण। पशुपालक को ₹30 प्रतिदिन (प्रति पशु) की सहायता।

💼 रोजगार, शिक्षा एवं विकास की अन्य प्रमुख योजनाएं

युवा एवं रोजगार योजनाएं

  • मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन: युवाओं को अप्रेंटिसशिप पर ₹9000/माह।
  • युवा उद्यमी विकास अभियान: 1 लाख नए सूक्ष्म उद्यम हेतु ब्याज मुक्त ऋण।
  • अभ्युदय योजना: प्रतियोगी परीक्षाओं (IAS/PCS/NEET) की निःशुल्क कोचिंग।

महिला एवं बाल विकास

  • मिशन शक्ति: महिलाओं की सुरक्षा व स्वावलंबन (संबल व सामर्थ्य)।
  • लखपति महिला कार्यक्रम: 15 लाख महिलाओं की आय ₹1 लाख/वर्ष करना।
  • रोड टू स्कूल: परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का ड्राप आउट रोकना व नामांकन बढ़ाना।

स्वास्थ्य एवं कुपोषण मुक्ति

  • मुख्यमंत्री सुपोषण योजना: 3-6 वर्ष के बच्चों को प्रतिदिन पौष्टिक स्वल्पाहार।
  • ई-सुश्रुत प्रणाली: 12 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डिजिटल पर्चा/बेड सुविधा।
  • राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा: निजी अस्पतालों में ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज।

पर्यटन एवं अवसंरचना

  • ‘बफर में सफर’: टाइगर रिजर्व में इको-टूरिज्म, बरसात में भी सफारी सुविधा।
  • वंदन योजना: सांस्कृतिक व पौराणिक स्थलों का अवस्थापना विकास।
  • प्रोजेक्ट अलंकार: सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों जैसी उच्च स्तरीय सुविधाएं।

उत्तर प्रदेश डिजिटल मीडिया नीति, 2024

अगस्त 2024 में उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी नई डिजिटल मीडिया नीति की घोषणा की। इस नीति का उद्देश्य राज्य में संचालित डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म को बेहतर ढंग से विनियमित करना है।
उत्तर प्रदेश डिजिटल मीडिया नीति 2024 का लक्ष्य एक्स, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप जैसे विभिन्न प्लेटफार्म्स को बेहतर ढंग से विनियमित कर उनके उपयोग को अधिक प्रभावी बनाना है।
इस नीति के अंतर्गत नागरिकों के बीच राज्य सरकार द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों को प्रचारित करने का भी प्रावधान है।
यह नीति सार्वजनिक रूप से प्रसारित होने वाली डिजिटल सामग्री पर कड़ी निगरानी रखते हुए प्रतिबंधित कंटेंट एवं फेक न्यूज को रोकने की व्यवस्था करती है।

मुख्य विशेषताएं

  • उत्तर प्रदेश सरकार की यह नई नीति डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा की जाने वाली सामग्री, के लिए मानदण्ड निर्धारित करती है। ऐसी कोई डिजिटल सामग्री जो राष्ट्र विरोधी एवं साम्प्रदायिकता बढ़ाने वाली होगी, उसे साझा करने पर आजीवन कारावास समेत अन्य गंभीर दण्ड के प्रावधान किये गये हैं।
  • नई नीति के अनुसार उत्तर प्रदेश से संबंधित प्रभावशाली सकारात्मक डिजिटल सामग्री प्रस्तुत करने वाले निर्माताओं को विभिन्न प्रकार की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया जाएगा।
  • नई नीति के अंतर्गत सभी डिजिटल सामग्री निर्माता और उनसे जुड़े लोगों को राज्य सरकार के साथ अपने संस्थान का पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है।
  • नई नीति के अनुपालन को सुनिश्चित करने हेतु नियमित कार्यशालाएं एवं प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति, 2024

उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति, 2024 एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य राज्य में सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए सुदृढ़ इकोसिस्टम तैयार कर औद्योगिक वृद्धि के साथ रोजगार सृजन को गति देना है।
इससे भारत सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' योजना को बल मिलेगा।

आवश्यकता एवं संभावनाएं

  • न सिर्फ उत्तर प्रदेश और भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर डिजिटल अर्थव्यवस्था के केन्द्र में है। यह स्मार्टफोन एवं कम्प्यूटर से लेकर ऑटोमोबाइल (इलेक्ट्रिकल वाहन) और उन्नत औद्योगिक प्रणाली तक सभी में प्राण फूंकने का कार्य करता है। आज सब तरफ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) दूरसंचार तथा इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की चर्चा है, किन्तु इन सभी के निर्माण एवं संचलन में सेमीकंडक्टर की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
  • अवसर का लाभ उठाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर विनिर्माण (फैब) इकाइयां, नवाचार एवं अनुसंधान केन्द्र तथा परीक्षण सुविधाएं स्थापित करना चाहती है।
  • उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति, 2024 के अंतर्गत ऐसे औद्योगिक समूहों के निर्माण की परिकल्पना की गयी है, जो राज्य में सेमीकंडक्टर निर्माण हेतु पूंजी, तकनीक, विद्युत, जल समेत अन्य सभी संसाधन उपलब्ध कराने में सक्षम हों।

उपलब्ध संसाधन

  • प्रदेश में प्रतिस्पर्धी लागत पर पर्याप्त कुशल कार्यबल उपलब्ध है।
  • राज्य में कुशल शैक्षिणिक संस्थान उपलब्ध हैं, जैसे आईआईटी कानपुर एवं आईआईटी बीएचयू आदि।
  • राज्य सरकार द्वारा सेमीकंडक्टर निर्माण हेतु विभिन्न महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं, जैसे नेट जीरो, आयात संशोधित विशेष प्रोत्साह पैकेज आदि।

निवेश एवं राजकोषीय प्रोत्साहन

  • पूंजीगत सब्सिडी: राज्य सरकार द्वारा सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
  • कर लाभ: नीति के अंतर्गत निवेशकों को विभिन्न कर छूट प्रदान करने का प्रावधान है, जिसमें विशिष्ट अवधि के लिए स्टाम्प शुल्क और बिजली शुल्क में मिलने वाली छूट भी शामिल है।
  • एकल खिड़की स्वीकृति: निवेश एवं उद्यम स्थापना में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के साथ नौकरशाही संबंधी बाधाओं को दूर करने हेतु एकल खिड़की स्वीकृति की व्यवस्था की गई है।
  • भूमि अधिग्रहण सहायता: राज्य सरकार सेमीकंडक्टर संयंत्रों की स्थापना हेतु भूमि अधिग्रहण में सहायता करेगी। प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के निकट रणनीतिक स्थानों पर विकसित भूमि प्रदान की जाएगी।

उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2024

उत्तर प्रदेश सरकार ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों को कम करने की दृष्टि से स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादन के स्रोतों को प्रोत्साहित करने में लगी है। इसी क्रम में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन एवं उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2024' प्रस्तुत की गयी है।
ग्रीन हाइड्रोजन स्वच्छ ऊर्जा एवं औद्योगिक ईंधन के रूप में नेट जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है।
यह नीति अधिसूचना जारी होने की तिथि से 5 वर्षों तक अथवा इसमें संशोधन होने तक वैध रहेगी।

कार्य योजना

  • यह नीति ग्रीन हाइड्रोजन इकाइयों की सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला में उत्पादन, खपत, बाजार निर्माण और अन्य उपयोगिता का सृजन करेगी।
  • ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग परिवहन, औद्योगिक प्रक्रियाओं, ऊर्जा भण्डारण और बिजली उत्पादन आदि में होता है।
  • माना जा रहा है कि ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। राज्य में प्रारम्भिक तौर पर नाइट्रोजन उर्वरक और रिफाइनरी उद्योगों में इसके प्रयोग पर बल दिया जा रहा है।

ग्रीन हाइड्रोजन नीति के उद्देश्य

  • केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' और 'ग्रीन हाइड्रोजन अनुसंधान विकास और तकनीकी नवाचार' में सहयोग करना।
  • ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाइयों में निवेश को प्रोत्साहित करना।
  • ग्रीन हाइड्रोजन/अमोनिया के उत्पादन और खपत प्रौद्योगिकी में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना, जिससे लागत में कमी लायी जा सके।

लक्ष्य

वर्ष 2028 तक उत्तर प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन/अमोनिया का एक मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक उत्पादन क्षमता विकसित करना।

अन्य प्रमुख बिन्दु

  • उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UPNEDA) को इस नीति के क्रियान्वयन हेतु नोडल एजेन्सी बनाया गया है।
  • ग्रीन हाइड्रोजन की उत्पादन लागत अधिक होना इसकी सफलता में मुख्य बाधा है। समय के साथ लागत कम करने के लिए नवाचार को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश ग्राम पंचायत विकास योजना

ग्राम पंचायतों के समग्र एवं समेकित विकास हेतु ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) 'हमारी योजना, हमारी विकास' का संचालन राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में आरंभ किया गया है।
योजना का उद्देश्य ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार की गई वार्षिक कार्य योजनाओं हेतु संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर उनका अच्छा परिणाम प्राप्त करना है।
ग्राम पंचायत विकास योजना का लक्ष्य ग्राम पंचायतों को सामाजिक-आर्थिक एवं वैयक्तिक विकास की दिशा में सक्षम बनाना है।

ग्राम पंचायत विकास योजना का क्रियान्वयन

  • ग्राम सभा की बैठक के माध्यम से जनसमुदाय की आवश्यकताओं की पहचान कर उनकी प्राथमिकताएं निर्धारित की जाती हैं।
  • विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध संसाधनों को समेकित कर सहभागी नियोजन द्वारा वार्षिक एवं पंचवार्षिक कार्य योजनाएं तैयार की जाती हैं।
  • वार्षिक कार्ययोजनाओं को पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के साफ्टवेयर प्लान-प्लस पर अंकित किया जाता है।
  • योजना का क्रियान्वयन राज्य के सभी 75 जिलों के 821 ब्लाक पंचायतों एवं 59162 ग्राम पंचायतों में किया जा रहा है।

ग्राम पंचायत विकास योजना के चरण

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के निर्माण में निम्नलिखित प्रमुख चरण शामिल हैं -
  • ग्राम सभा का गठन: इस प्रक्रिया में गाँव के सभी पात्र मतदाता शामिल होते हैं।
  • जन जागरूकता और घोषणाएं: इस चरण में ग्राम सभा की बैठकों के माध्यम से योजना प्रक्रिया के बारे में जागरूकता उत्पन्न कर घोषणाएं की जाती हैं।
  • चर्चा एवं समाधान: ग्राम पंचायत स्तर पर स्थानीय सतत विकास लक्ष्यों के प्रमुख स्तंभों और विषयों पर चर्चा कर योजना से संबंधित समस्याओं का समाधान किया जाता है।
  • योजना निर्माण: ग्राम सभाएं सामुदायिक भागीदारी से योजनाएं तैयार कर उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए ग्राम पंचायतों को सौंपती हैं।
  • ग्राम विकास अधिकारी द्वारा सहायता: वीडीओ (ग्राम विकास अधिकारी) तथा अन्य विभागीय अधिकारी ग्राम पंचायतों के स्तर पर योजना के समेकन, तकनीकी सहायता, बजट, कार्यान्वयन और निगरानी में सहयोग करते हैं।
  • जन योजना अभियान: यह अभियान विकास नियोजन प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के बीच 2 अक्टूबर से 31 मार्च तक प्रतिवर्ष संचालित किया जाता है।

पंचायत प्रतिपूर्ति एवं प्रोत्साहन योजना

  • प्रदेश सरकार 1500 तक की जनसंख्या वाले ग्राम पंचायतों में रहने वाले नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वयं के संसाधन से आय आधारित 'पंचायत प्रतिपूर्ति एवं प्रोत्साहन योजना' शुरू कर रही है।
  • योजना के अंतर्गत सरकार से प्राप्त होने वाले पैसों को खर्च करने की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी उसे शासन का लौटाना नहीं होगा, जिससे जरूरत के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के काम कराए जा सकेंगे।
  • प्रदेश में वर्तमान में समय 57691 ग्राम पंचायतें हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के जुनुसार, 1000 तक की आबादी वाली 252 और 1001 से 1500 तक की जनसंख्या वाली 11835 ग्राम पंचायतें हैं। वर्तमान 1500 तक की जनसंख्या वाले ग्राम पंचायतों के लिए नयी योजना आरंभ की जा रही है।

जीरो पावर्टी अभियान

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने एक वर्ष के भीतर राज्य से अत्यधिक गरीबी (Extreme poverty) को मिटाने के लिए 'जीरो पावर्टी अभियान' शुरू किया है। अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर, 2024 को की गयी।
  • कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के सभी व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा में लाना है, यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई भी व्यक्ति पीछे न छूटे।
  • उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्धन परिवारों को भोजन, कपड़े, शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं तथा आवास जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु यह कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें प्रत्येक गांव से निर्धन परिवारों को चुना जाएगा और उन्हें कल्याणकारी कार्यक्रमों से लाभान्वित किया जाएगा।
  • प्रत्येक ग्राम पंचायत में अत्यंत गरीब परिवारों की पहचान करने के लिए एक त्रि-स्तरीय, तकनीक-संचालित और पारदर्शी प्रणाली तैयार की गई है।
  • उत्तर प्रदेश भारत में सबसे अधिक गरीबी दर वाले राज्यों में से एक है। नीति आयोग द्वारा बहुआयामी गरीबी के मामले में तैयार रिपोर्ट के अनुसार देश के 28 राज्यों में से उत्तर प्रदेश 24वें स्थान पर है।
  • बजट 2025-26 में 'जीरो पॉवर्टी अभियान' के लिए ₹250 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
  • इस अभियान के माध्यम से निर्धन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, श्रमिक कार्ड, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से जोड़ा जाना है। इस अभियान का उद्देश्य है कि हर परिवार की वार्षिक आय कम से कम ₹1.25 लाख तक पहुंच जाए।

रेशम सखी

  • उत्तर प्रदेश में महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ ही उनकी आय में वृद्धि हेतु राज्य सरकार ने 'रेशम सखी' योजना शुरू की है।
  • योजना के अंतर्गत सरकार रेशम कीट पालन के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण देगी। प्रदेश की 50 हजार महिलाओं को इस कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।
  • यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
  • योजना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और रेशम विभाग द्वारा संयुक्त रूप से शुरू की गयी है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में 50,000 महिलाओं को रेशम उत्पादन से जोड़ा जाए।
  • कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे रेशम कीट पालन की तकनीक को अच्छी तरह सीख सकें और इस क्षेत्र में कामयाब हो सकें।
  • योजना के तहत महिलाओं को दो प्रकार के रेशम पालन-शहतूत रेशम और तसर रेशम की जानकारी दी जा रही है। इसके लिए हाल ही में दो अलग-अलग एक्सपोजर विजिट आयोजित की गयी। एक टीम को कर्नाटक के मैसूर में भेजा गया, जहां उन्होंने शहतूत रेशम पालन की ट्रेनिंग ली। दूसरी टीम झारखंड के रांची गई, जहां तसर रेशम पालन के बारे में जानकारी ली गयी।
  • सवित्तीय वर्ष 2025-26 में 15 जिलों की 7500 महिलाओं को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य है।

स्वावलंबिनी: महिला उद्यमिता कार्यक्रम

  • कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने नीति आयोग के सहयोग से 'स्वावलंबिनी' नामक महिला उद्यमिता कार्यक्रम आरंभ किया है। यह महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों को बढ़ावा देने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
  • मेरठ स्थित चौधारी चरण सिंह विश्वविद्यालय में शुरू की गई यह पहल उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) में महिलाओं की उद्यमशीलता संबंधी आकांक्षाओं को पूर्ण करने हेतु महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
  • सस्वावलंबिनी का उद्देश्य युवा महिलाओं में आत्मविश्वास जगाकर उन्हें अपने उद्यम स्थापित करने और आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक साधन उपलब्ध कराना है।
  • 'स्वावलंबिनी' प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और व्यवसाय इनक्यूबेशन के लिए एक बहु-चरणीय दृष्टिकोण अपनाती है। राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (एनआईईएसबीयूडी) द्वारा नीति आयोग के सहयोग से कार्यान्वित यह पहल इस तरह कार्य करती है- 
  • उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम (ईएपी): 600 महिला, छात्राओं को उद्यमिता के मूल सिद्धांतों से परिचित कराने के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन।
  • महिला उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी): 300 चयनित प्रतिभागियों के लिए 40 घंटे का प्रशिक्षण।
  • मेंटरशिप और हैंडहोल्डिंगः छह महीने की सहायता प्रणाली, जो प्रतिभागियों को उनके विचारों को स्थायी व्यवसायों में बदलने में मदद करती है।
  • संकाय विकास कार्यक्रम द्धएफडीपीऋः नवोदित उद्यमियों को मार्गदर्षन देने के लिए संकाय के लिए पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन।
  • रिवार्ड्स इनिशिएटिव को पुरस्कारः उत्क्रष्ट महिला नेतृत्व वाले व्यावसायिक उपक्रमों को मान्यता और वित्तपोषण।

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना

उत्तर प्रदेश सरकार 'मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना' के तहत अब बेटियों के विवाह पर 51 हजार की जगह ₹1 लाख व्यय करेगी।
योजना के अंतर्गत कन्या के खाते में ₹60 हजार भेजे जाएंगे, ₹25 हजार का उपहार दिया जाएगा और ₹15 हजार आयोजन पर खर्च होंगे।
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस योजना में अब तक प्रति जोड़ा ₹51 हजार रुपये होते थे। ₹35 हजार कन्या के खाते में भेजा जाता था, जबकि ₹10 हजार की सामग्री प्रदान की जाती थी। छह हजार रुपये आयोजन पर खर्च होता था।

मिशन शक्ति

'मिशन शक्ति' उत्तर प्रदेश सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार कर उनके सशक्तिकरण के संबंध में जागरूकता बढ़ाना है।
योजना में महिलाओं की सुरक्षा, ज्ञान एवं कौशल बढ़ाने के उद्देश्य से कार्यशालाओं का आयोजन करना भी शामिल है।

कार्ययोजना

'मिशन शक्ति' महिलाओं के जीवन को सुरक्षित एवं प्रगतिशील बनाने के साथ ही एक ऐसे समाज के निर्माण का प्रयास करती है, जो समावेशी और प्रगतिशील हो।
महिलाओं, छात्राओं एवं अध्यापिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण तथा शारीरिक/मानसिक यौन शोषण के विषय में विधिक जानकारी देकर जागरूकता पैदा करना कार्ययोजना का भाग है।

उपलब्धियां

  • उत्तर प्रदेश में 'मिशन शक्ति' का आरंभ 17 अक्टूबर, 2020 को किया गया। अब तक इसके पांच चरण सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं। इसकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं-
  • राज्य के 189 नगर निकायों में 100 से अधिक गुलाबी शौचालयों का निर्माण कराया गया।
  • राज्य में 100 गुलाबी पुलिस बूथ स्थापित किए गये।
  • राज्य में हिंसा और दुर्व्यवहार की शिकार 2 लाख से अधिक महिलाओं की मिशन शक्ति के अंतर्गत सहायता की गई।
  • महिला हेल्पलाइन नं. 1090 के माध्यम से 1100 से अधिक मामलों का निस्तारण किया गया।
  • सूचना प्राप्त होने पर 700 से अधिक बाल विवाह रोके गये।
  • समग्र विकास के क्रम में आकांक्षी जिलों की 2 लाख से अधिक बालिकाओं की सहायता की गयी।
मिशन शक्ति के मुख्यतः दो घटक हैं-
  • संबल
  • सामर्थ्य
संबल में महिलाओं की सुरक्षा एवं संरक्षा पर जोर दिया गया है, जबकि सामर्थ्य उनके सशक्तिकरण पर केन्द्रित है।

मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आरंभ की गयी 'मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना' राज्य में मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
योजना का उद्देश्य राज्य में मछली पालन को प्रोत्साहित कर मत्स्य उत्पादकों की आय में वृद्धि के साथ रोजगार के नये अवसर सृजित करना है।

आवश्यकता एवं प्रावधान

  • वर्तमान में प्रचलित प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत ग्राम सभा में पट्टे पर आबंटित तालाबों पर कोई परियोजना अनुमन्य नहीं है। इस रिक्तता को भरने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2022-23 में 'मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना' आरंभ की गयी।
  • आर्थिक सहायताः योजना के अंतर्गत मत्स्य पालकों को विभिन्न प्रकार की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है, जिनमें सब्सिडी, ऋण, और प्रशिक्षण आदि शामिल है।
  • योजना के अंतर्गत मत्स्य पालकों के लिए मछली पालन से संबंधित प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे मत्स्य उत्पादन को अधिक लाभप्रद बनाया जा सके।

योजना के लाभ

  • मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि होती है। उनके जीवन स्तर में सुधार होता है।
  • प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम से मत्स्य उत्पादकों को लाभ होता है, जिससे वह अधिक कुशलतापूर्वक अपने व्यवसाय को लाभप्रद बना पाते हैं।   
  • मत्स्य पालन क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित होते हैं, जिससे राज्य में बेरोजगारी कम होती है।

मुख्यमंत्री सूक्ष्म उद्यमी दुर्घटना बीमा योजना

  • मुख्यमंत्री सूक्ष्म उद्यमी दुर्घटना बीमा योजना एक सरकारी पहल है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश में उन सूक्ष्म उद्यमियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है, जो दुर्घटनाओं या अप्रत्याशित घटनाओं का सामना कर रहे हैं।
  • यह योजना सूक्ष्म उद्यम के मालिकों और उनके पारिवारिक सदस्यों को आजीविका की सुरक्षा हेतु ₹5 लाख तक का बीमा कवरेज प्रदान करती है।
  • योजना का लाभ पाने के लिए सूक्ष्म उद्यम संचालकों को केन्द्र सरकार के उद्यमिता पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होता है।
  • दुर्घटना की स्थिति में पीड़ित परिवार को बीमा क्लेम हेतु आनलाइन आवेदन करना होता है।

उद्यमियों को प्रदत्त लाभ

  • योजना के अर्न्तगत प्रत्येक पंजीकृत सूक्ष्म उद्यमी को निम्न लाभ (क्लेम) प्राप्त होंगे-
  • दुर्घटना से मृत्यु होने पर ₹5 लाख।
  • दुर्घटना के परिणामस्वरूप स्थायी विकलांगता पर ₹5 लाख।

पात्रता

  • योजना के अंतर्गत ऐसे सूक्ष्म उद्यमियों को कवर किया जायेगा, जो जीएसटी विभाग द्वारा संचालित व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना का लाभ प्राप्त नहीं कर रहे होंगे।

उत्तर प्रदेश मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क नीति, 2024

उत्तर प्रदेश सरकार ने मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क नीति 2004 को मंजूरी दे दी, जिसका उद्देश्य राज्य में निवेश को आकर्षित कर लॉजिस्टिक क्षेत्र को बढ़ावा देना है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्कों में ₹1,000 करोड़ के न्यूनतम निवेश के साथ ₹100 करोड़ तक का विदेशी निवेश किया जा सकेगा। सरकार भूमि खरीद पर निवेशकों को 30 प्रतिशत तक की छूट प्रदान करेगी।
  • निवेश के लिए फॉर्च्यून ग्लोबल 500 अथवा फॉर्च्यून इंडिया 500 में सूचीबद्ध कंपनियों के ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
  • उत्तर प्रदेश मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क नीति, 2024 के लिए 'इन्वेस्ट यूपी' को नोडल संस्था बनाया गया है।
  • मल्टी मॉडल एक्सप्रेसवे व हाईवे से जुड़े बड़े शहरों में ही बनाए जाएंगे।

सुविधाएं

  • पार्क में फ्रेट एग्रीगेशन एवं डिस्ट्रीब्यूशन, मल्टी मॉडल फ्रेट ट्रांसपोर्ट, भंडारण एवं वेयर हाउसिंग, वस्तुओं की छंटनी, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, रिपैकेजिंग, टैगिंग, लेबलिंग, वितरण, उपभोक्ताओं को वितरण, कार्गो व कंटेनरों का स्थानांतरण, खुला व बंद भंडारण, नियंत्रित तापमान में भंडारण, कस्टम ब्रांडेड वेयरहाउस, कंटेनर फ्रेट स्टेशन, कंटेनर टर्मिनल, पार्क के अंदर वस्तुओं को लाने व रखने के लिए सुविधाएं व उपकरण उपलब्ध होंगे।

मुख्यमंत्री सुपोषण योजना

  • यह उत्तर प्रदेश को कुपोषण जैसी समस्या से मुक्त कराने की बड़ी पहल है।
  • योजना का उद्देश्य प्रदेश के गरीब और वंचित परिवार के बच्चों को कुपोषण से मुक्त करा कर उन्हें स्वस्थ बनाना है।
  • 3 मई, 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'मुख्यमंत्री सुपोषण योजना' की घोषणा करते हुए बताया कि 3 से 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों को प्रतिदिन सुबह पौष्टिक स्वल्पाहार (इतमांजि) दिया जाएगा।
  • योजना का लाभ डॉ. भीमराव अंबेडकर जीरो पॉवर्टी मिशन के अंतर्गत चिन्हित परिवार के बच्चों, आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में रहने वाले बच्चों को प्राप्त होगा।
  • योजना के अंतर्गत प्रदेश के समस्त 75 जिलों में 'टेक होम राशन' (THR) की इकाइयां (यूनिट्स) स्थापित की जाएंगी। अभी प्रदेश के 43 जिलों में इस तरह की कुल 204 यूनिट्स संचालित हैं, जिन्हें अब पूरे राज्य में बढ़ाया जाएगा।
  • 'टेक होम राशन' की इकाइयों में तैयार होने वाला राशन आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक वितरण हेतु पहुंचाया जाएगा।
  • स्थानीय खाद्य उत्पादों, जैसे प्रतापगढ़ का आंवला, मुजफ्फरनगर का गुड़ और श्रीअन्न (मिलेट्स) को खाद्य पदार्थों में शामिल किया जाएगा, जिससे स्थानीय किसानों और उत्पादकों को लाभ प्राप्त हो सके।
  • योजना का लक्ष्य कुपोषण से जुड़ी गंभीर समस्याओं, जैसे स्टंटिंग (बौनापन), अंडरवेट (कम वजन) और वास्टिंग (कमजोर शरीर) पर सतत निगरानी रखते हुए प्रदेश के बच्चों को इनसे बचाना है। यह कार्य स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप और आपसी सहयोग से किया जाएगा।
  • प्रदेश सरकार 'संभव अभियान' के माध्यम से गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की चिकित्सा और देखरेख पर पहले से काम कर रही है। अब इस नये अभियान से हजारों बच्चों को लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना

  • 'मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना' प्रदेश सरकार द्वारा हाल में आरंभ किया गया महत्वपूर्ण कार्यक्रम है।
  • जिन गरीब परिवार के पास पशु नहीं हैं, योजना के अंतर्गत उन्हें एक गाय दी जाएगी, जिससे वे दूध प्राप्त कर सकें और उनके परिवार के पोषण स्तर में सुधार हो सकें।
  • योजना का लक्ष्य प्रदेश में बेसहारा गोवंश पशुओं को आश्रय देते हुए पशु पालकों को भी लाभ प्रदान करना है।
  • कोई पशुपालक, जो बेसहारा या निराश्रित पशुओं को पालता है, उसे योजना के अन्तर्गत विभाग द्वारा प्रति दिन 30 रुपये प्रति पशु की दर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  • यह योजना राज्य को आवारा पशुओं की समस्या से छुटकारा दिलाने की बड़ी पहल है।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान

  • यह योजना वर्ष 2024-25 में आरंभ की गयी है। इसका उद्देश्य प्रदेश के शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर नए सूक्ष्म उद्योगों की स्थापना हेतु वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है।
  • योजना के अंतर्गत सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने हेतु युवाओं को गारंटी मुक्त एवं ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
  • योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 1 लाख नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना करने का लक्ष्य है।
  • उत्तर प्रदेश में वर्तमान में लगभग 96 लाख एमएसएमई इकाइयां विद्यमान हैं, जिसमें 1.65 करोड़ लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना

  • किसानों की आय में वृद्धि और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार एक बड़ी योजना पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना' की घोषणा करते हुए इसके लिए सहकारिता विभाग को विस्तृत निर्देश दिए हैं।
  • इस योजना का उद्देश्य किसानों को कम ब्याज दर पर सरलता से ऋण उपलब्ध कराना है, जिससे वह ऋण के बोझ से बाहर निकलकर समृद्धि की ओर बढ़ सकें।
  • यूपी कोआपरेटिव बैंक किसानों को दिए जाने वाले ऋण की मात्रा निरंतर बढ़ा रहा है। वर्ष 2017 में जहां यूपी कोऑपरेटिव बैंक का ऋण वितरण ₹9,190 करोड़ था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर ₹23,061 करोड़ तक पहुंच गया।

राहवीर योजना

  • सभारत सरकार द्वारा प्रस्तावित 'राहवीर योजना' उत्तर प्रदेश में लागू कर दी गई है।
  • इसमें सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने तथा दुर्घटनाओं के दौरान समय पर सहायता प्रदान करने पर बल दिया गया है।

क्या है राहवीर योजना?

  • यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को 'गोल्डन-ऑवर' (प्रथम 1 घंटे) के भीतर अस्पताल पहुंचाता है और इस तरह घायल की जान बच जाती है, तो उस मददगार को ₹25,000 का इनाम दिया जाएगा।
  • घायल को सीधे अस्पताल पहुंचाने पर अस्पताल द्वारा पुलिस को सूचना दी जाएगी और उसकी एक प्रति संबंधित नागरिक को भी सौंपी जाएगी। पुलिस द्वारा कलेक्टर को भी इस संबंध में पत्र लिखा जाएगा, जिसने बाद परिवहन विभाग द्वारा मददगार के बैंक खाते में धनराशि राशि ट्रांसफर की जाएगी।

'यूपी एग्रीज' योजना

  • उत्तर प्रदेश के 40 प्रतिशत जिलों में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने विश्व बैंक के सहयोग से ₹4000 करोड़ की 'यूपी एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज प्रोजेक्ट' (UP AGREES) योजना आरंभ की है।
  • योजना का उद्देश्य उन्नत तकनीक और बाजार को जोड़कर संबंधित जिलों की उपजाऊ भूमि का उत्पादकता में पूर्ण उपयोग करना है।
  • यूपी एग्रीज योजना राज्य में कम उत्पादकता वाले 28 जिलों पर केन्द्रित है। यहां उत्पादकता बढ़ाने के विशेष उपक्रम किये जाएंगे।
  • यूपी एग्रीज योजना पर सरकार ₹4000 करोड़ व्यय करेगी, जिसमें लगभग ₹3 हजार करोड़ विश्व बैंक द्वारा लोन के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा।
  • योजना का केन्द्र बुंदेलखंड के झांसी व चित्रकूट मंडल और पूर्वांचल के विंध्य, वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर, बस्ती व देवीपाटन मंडल होंगे।
  • उत्पादकता बढ़ाने के लिए फसलों के विविधीकरण पर जोर दिया जाएगा। उन्नत बीज उपलब्ध कराने के साथ ही उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग पर ध्यान दिया जाएगा। मत्स्य पालन एवं पशुपालन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • खेती को पूर्ण लाभप्रद बनाने के लिए कृषि उत्पादों के व्यापार पर जोर दिया जाएगा। अलग-अलग क्रॉप क्लस्टर तैयार किए जाएंगे, जहां व्यावसायिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • कृषि आधारित स्पेशल इकोनॉमिक जोन भी बनाए जाएंगे, जहां किसानों को बाजार से जोड़ने की सुविधा होगी।
  • फल, सब्जियों से लेकर परंपरागत फसलों को बाजारों से जोड़ने के लिए इंटीग्रेटेड एग्री एक्सपोर्ट हब विकसित होंगे।

'यूपी एग्रीज' प्रदेश के इन जिलों में लागू होगी
  • बुंदेलखंड: झांसी, जालौन, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा। 
  • पूर्वांचल: मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, आजमगढ़, बलिया, मऊ, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज, बस्ती, संतकबीर नगर, सिद्धार्थ नगर, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती।

वैश्विक क्षमता केंद्र नीति 2024

  • प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश को डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी बनाने हेतु 'उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) नीति 2024' को स्वीकृति दे दी है।
  • इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में आईटी, वित्त, मानव संसाधन और ग्राहक सहायता जैसे क्षेत्रों में वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) की स्थापना को बढ़ावा देना है।
  • जीसीसी, यानी Global Capability Centers वह संगठन होते हैं, जो विश्व की बड़ी कंपनियों के लिए डाटा एनालिसिस, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), अकाउंटिंग, इंजीनियरिंग सपोर्ट और कस्टमर केयर जैसे तकनीकी काम करते हैं। वर्तमान में देश में 16 लाख से अधिक लोग जीसीसी में काम कर रहे हैं।
  • उत्तर प्रदेश में जीसीसी केंद्र टियर-2 और टियर-3 शहरों, जैसे गोरखपुर, प्रयागराज, मेरठ, झांसी, बरेली, शाहजहांपुर में खोले जाएंगे। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की आय में अंतर कम होगा और संतुलित विकास को बल मिलेगा।
  • प्रदेश सरकार की इस नयी नीति से प्रदेश में एक तरफ जहां स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा वहीं इससे राज्य में निवेश के नये अवसर भी सृजित होंगे।
  • इस नीति के परिणामस्वरूप यूपी अब बेंगलुरू, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों की तर्ज पर नॉलेज इकोनॉमी का अभिन्न हिस्सा बनने की ओर बढ़ रहा है। माइक्रोसॉफ्ट तथा अन्य कई सॉफ्टवेयर कंपनियां नोएडा में पहले ही अपने केंद्र स्थापित कर चुकी हैं।
  • GCC नीति 2024 यूपी के युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का कार्य करेगी।

उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति-2024

  • प्रदेश सरकार ने राज्य में उच्च शिक्षा की उन्नति के लिए 'उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति-2024' को मंजूरी दे दी है।
  • नीति के अंतर्गत प्रदेश के 40 ऐसे जिले जहां एक भी विश्वविद्यालय नहीं है, वहां विश्वविद्यालय खोलने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इन जिलों में प्रथम निजी विश्वविद्यालय खोलने पर ₹35 करोड़ तक की सब्सिडी और स्टांप शुल्क में 50 प्रतिशत तक छूट प्रदान की जाएगी।
  • इस प्रोत्साहन की अवधि पांच वर्ष होगी।
  • असेवित जिले में प्रथम निजी विश्वविद्यालय खोलने वाली निजी संस्था को ₹50 करोड़ तक की भूमि क्रय करने पर स्टांप शुल्क में 50 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। इसके अतिरिक्त ₹50 करोड़ से 150 करोड़ तक की भूमि क्रय करने पर स्टांप ड्यूटी में 30 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
  • विश्व विद्यालय स्थापना हेतु ₹150 करोड़ से अधिक की भूमि खरीदने पर 20 प्रतिशत तक स्टांप ड्यूटी में छूट मिलेगी। ऐसे ही ₹50 करोड़ का पूंजीगत निवेश करने वाले निजी संस्था को 15 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलेगी जो अधिकतम सात करोड़ रुपये होगी।

मुख्यमंत्री बाल आश्रम योजना

  • उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के निराश्रित बच्चों के लिए 'मुख्यमंत्री बाल आश्रय योजना' लेकर आयी है। योजना के अंतर्गत अनाथ बच्चों को रहने की सुविधा देने के साथ-साथ उनके समग्र विकास पर ध्यान दिया जाएगा।
  • मुख्यमंत्री बाल आश्रय योजना के प्रथम चरण में सरकार प्रदेश के 10 जिलों में निराश्रित बच्चों के लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त आश्रय गृह बनाएगी। इन बाल आश्रय गृहों में बच्चों को न सिर्फ रहने की सुविधा मिलेगी, बल्कि उनके पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
  • महिला कल्याण विभाग की ओर से चलाई जा रही इस योजना के अंतर्गत वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ, अयोध्या, अमेठी, मथुरा, फिरोजाबाद, बस्ती, झांसी और कानपुर देहात जिलों में 100-100 बच्चों की क्षमता वाले कुल 10 बाल गृह बनाए जाएंगे। इनमें से एक बालिका गृह, एक बालक गृह, सात किशोर संप्रेक्षण गृह (जिनमें किशोर न्याय बोर्ड भी शामिल होगा) और एक 'प्लेस ऑफ सेफ्टी' गृह स्थापित होगा। इन सभी भवनों का निर्माण राज्य सरकार लगभग ₹100 करोड़ की लागत से कराएगी।

रोड टू स्कूल

  • 'रोड टू स्कूल' योजना के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का नामांकन बढ़ाने, ड्राप आउट रोकने, बच्चों में पठन-पाठन के प्रति अभिरुचि बढ़ाने, उनके स्वास्थ्य देखभाल और उन्हें खेल एवं कौशल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
  • यह एक अभिनव कार्यक्रम है, जो विद्यालयों में बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन, कक्षा में उनकी नियमित उपस्थिति और आगे की कक्षाओं में प्रवेश के लिए प्रयास करता है।
  • योजना का लक्ष्य बच्चों के बीच आधारभूत शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और कला में सुधार करना है। यह प्रोजेक्ट 'निपुण भारत मिशन' के अनुसार बुनियादी शिक्षा स्तरों में सुधार करने के में अहम भूमिका अदा करता है।
  • 'रोड टू स्कूल' सरकार द्वारा पहले चलाये जा रहे कार्यक्रम 'स्कूल चलो अभियान' का नया स्वरूप है।

‘बफर में सफर’ योजना

  • पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश वन एवं वन्यजीव विभाग ने ‘बफर में सफर’ योजना शुरू किया है।
  • यह इको-टूरिज्म के तहत आरंभ की गयी एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य प्रमुख बाघ अभयारण्यों के बफर जोन में सफारी के अनुभवों को बेहतर बनाना है।
  • योजना के अंतर्गत प्रदेश के टाइगर रिजर्वों के बफर जोन में सफारी के नये रूट विकसित किए जा रहे हैं। इस क्रम में दुधवा, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, उत्तर खीरी बफर जोन तथा सोहगीबरवा में नए सफारी रूट विकसित किये जा रहे हैं।
  • नई योजना के फलस्वरूप बफर जोन में पर्यटक अब बरसात के दिनों में भी सफरी का आनंद ले सकेंगे।
  • योजना आरंभ में प्रदेश के दुधवा, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी अभयारण्यों में शुरू की जा रही है।
  • योजना की प्रमुख विशेषता यह है कि यह पूरे वर्ष जंगल में पर्यटन का आनंद देने में सक्षम है, जिसमें मानसून का मौसम भी शामिल है।
  • ‘बफर में सफर’ योजना अन्तर्गत सामुदायिक भागीदारी पर विशेष बल दिया गया है। स्थानीय निवासियों को गाइड, कैंटीन कर्मचारी और रसोइये के रूप में रोजगार प्राप्त होगा, जिससे वे क्षेत्र की पर्यटन अर्थव्यवस्था में भागीदार बन सकेंगे।
  • योजना को अधिक लाभप्रद बनाने हेतु प्रदेश के इको-टूरिज्म सर्किट का विस्तार किया जा रहा है। इसमें सेमराई झील और नेपाल सीमा के निकट कर्तनिया घाट बफर जोन को शामिल किया जा रहा है।

खेत सुरक्षा योजना

  • आवारा-छुट्टा जानवरों से उत्पन्न परेशानी से किसानों को छुटकारा दिलाने हेतु सरकार ‘खेत सुरक्षा योजना’ लेकर आयी है।
  • योजना के अन्तर्गत खेतों की मेड़ पर सोलर फेंसिंग (सौर बाड़) लगाई जाएगी।
  • योजना के अन्तर्गत खेत की मेड़ पर ‘सोलर फेंसिंग’ लगाने का प्रावधान है, जिससे छुट्टा पशु और किसानों की फसलें, दोनों ही सुरक्षित रहेंगे।
  • ‘सोलर फेंसिंग’ जानवरों को क्षति पहुँचाये बिना खेतों से दूर रखती है। 12 वोल्ट का करंट पशु और मानव दोनों के लिए हानिकारक नहीं है। इसका झटका लगने से पशुओं पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ेगा, जिससे वह खेत की तरफ नहीं जाएंगे। पशु द्वारा सोलर फेंसिंग को छूते ही सायरन बजेगा।
  • तमिलनाडु एवं हिमाचल प्रदेश के किसान बड़े पैमाने पर इस तरह की योजना से लाभान्वित हो रहे हैं, जहां इसे लागू किया गया है।
  • उत्तर प्रदेश में आवारा छुट्टा पशुओं (नीलगाय, अवारापशु, बंदर, सुअर आदि) द्वारा फसल को नुकसान पहुँचाना बड़ी समस्या बन चुकी है। इससे पूर्व आवारा जानवरों से फसलों को बचाने के लिए किसानों ने खेतों के किनारे कंटीले तार लगाने शुरू किए तो सरकार ने इस पर रोक लगा दी। सरकार का मानना है कि इससे जानवर, विशेषकर गोवंश, घायल हो रहे हैं।

उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना

राज्य में जनभागीदारी के माध्यम से गांवों को विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना’ आरंभ किया है।
‘उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना’ का मुख्य उद्देश्य राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करना है। इस योजना के माध्यम से नागरिकों को गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास के विभिन्न कार्यों में प्रत्यक्ष भागीदारी प्रदान की जाएगी।
राज्य सरकार परियोजना की कुल लागत का 40 प्रतिशत वहन करेगी, जबकि शेष 60 प्रतिशत व्यय इच्छुक लोगों द्वारा वहन किया जाएगा। इसके बदले में इच्छुक व्यक्ति परियोजना का नाम अपने माता/पिता या रिश्तेदारों के नाम पर रख सकते हैं।
योजना के माध्यम से अपनी मातृभूमि से लगाव रखने वाले नागरिकों को विकास कार्यों में वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। बदलें में परियोजना का नाम इच्छुक व्यक्ति के परामर्श पर उनके पूर्वजों अथवा पारिवारिक सदस्य के नाम पर रखा जा सकेगा।

मुख्य विशेषताएं

योजना के माध्यम से नागरिकों को अपनी मातृ भूमि (गांव) में बुनियादी ढांचे संबंधी विकास के विभिन्न कार्यों में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर मिलेगा।
इच्छानुसार सहयोग करने वाले व्यक्ति के प्रस्ताव के अनुसार उनके पूर्वजों अथवा अन्य नाम पर परियोजना का नामकरण किया जाएगा।
व्यक्ति को परियोजना का मात्र 60 प्रतिशत व्यय पर उसका पूरा क्रेडिट प्राप्त हो सकेगा।
इस योजना के माध्यम से गांवों में स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी, पुस्तकालय, स्टेडियम, व्यायामशाला, ओपन जिम, पशु नस्ल सुधार केंद्र, अग्निशमन सेवा केंद्र आदि स्थापित किए जा सकते हैं।

नंद बाबा दुग्ध मिशन योजना

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने पशुपालकों को प्रोत्साहित कर उनकी आय बढ़ाने हेतु 6 जून, 2023 को ‘नंद बाबा दुग्ध मिशन’ योजना की शुरूआत है।
  • गांवों में नयी दुग्ध में नयी सहकारी समितियां गठित कर दुग्ध उत्पादकों को दूध का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से यह योजना एक हजार करोड़ व्यय के साथ शुरू की गयी है।
  • योजना के तहत देसी नस्ल की गाय पालने वाले पशुपालकों को ₹10 से 15 हजार की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
  • योजना के अंतर्गत आठ से 12 लीटर तक दूध देने वाली गाय के पालकों को ₹10 हजार की राशि दी जाएगी। यह राशि एक पशुपालक को अधिकतम दो गायों के लिए प्रदान की जाएगी।
  • योजना में प्रावधान के अनुसार दूध मापने के लिए आवेदक की गाय का दिन में चार बार दूध निकालकर मापा जाएगा। यह क्रम दो दिन तक चलेगा। इसके बाद योजना की तमाम प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पशुपालकों के खाते में प्रोत्साहन राशि भेज दी जाएगी।
  • साहीवाल, गंगा तीरी, गिर और थार पारकर गाय को नंद बाबा दुग्ध मिशन योजना में शामिल किया गया है।

‘वंदन’ योजना

प्रदेश के सांस्कृतिक, पौराणिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के स्थलों पर अवस्थापना तथा अन्य सुविधाओं के विकास के उद्देश्य से प्रदेश में ‘वंदन’ योजना आरंभ की गयी है। योजना 10 अक्टूबर, 2023 को शुरू हुई।
योजना का उद्देश्य प्रदेश की नगर पालिका एवं पंचायतों में स्थित सांस्कृतिक, पौराणिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं, आगंतुकों के लिए मूलभूत अवस्थापना संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
योजना के तहत परियोजनाओं के चयन हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में चयन समिति गठित की जाएगी, जो प्रति वर्ष दो स्थानों का चयन करेगी। विशेष परिस्थितियों में मंत्री की संस्तुति से दो से अधिक स्थानों का चयन करने पर विचार किया जा सकता है।
योजना की प्रगति की समीक्षा के लिए विशेष सचिव, नगर विकास विभाग की अध्यक्षता में बैठक की जाएगी।

आकांक्षी नगर योजना

  • प्रदेश सरकार ने राज्य के 20 हजार से एक लाख तक की जनसंख्या वाले 100 छोटे शहरों/नगर निकायों में ‘आकांक्षी नगर योजना’ के माध्यम से सुविधाओं का विकास करने का कार्यक्रम तैयार किया है।
  • यह योजना 12 सितंबर, 2023 को आरंभ हुई।
  • योजना के माध्यम से मूलभूत शहरी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक संरचना आदि के क्षेत्र में सुधार करते हुए रोजगार के नए अवसरों का सृजन किया जाएगा।
  • आकांक्षी नगर योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे शहरों में रहने वालों को नए आर्थिक अवसर उपलब्ध कराकर उनके पलायन को रोकना है।
  • चयनित 100 नगर निकायों/छोटे शहरों में आकांक्षी नगर योजना 31 मार्च, 2026 तक संचालित होगी, जिसकी मॉनीटरिंग डैशबोर्ड के माध्यम से मार्च, 2028 तक की जाएगी।
  • मार्च 2026 के पश्चात् योजना के अंतर्गत नये 100 नगर निकायों/छोटे शहरों का चयन किया जाएगा।
  • योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में ₹100 करोड़ की व्यवस्था की गई थी। इसमें सांसद तथा विधायक निधि व अन्य संस्थाओं से सहयोग प्राप्त कर परियोजनाओं को चलाया जाएगा।
  • ‘थ्री-सी’ अर्थात कनवर्जेंस, कोलेबेरेशन और कंपटीशन का प्रयोग कर योजना को सफल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना

  • प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए ‘मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना’ शुरू की गयी है।
  • योजना के अंतर्गत डिप्लोमा धारकों के साथ-साथ सभी विधाओं के स्नातक डिग्री धारकों को कौशल विकास कार्यक्रम के माध्यम से रोजगार से जोड़ने की पहल की जाएगी।
  • योजना के अंतर्गत राज्य के नौजवानों को विभिन्न तकनीकी संस्थानों और उद्योगों से जोड़ा जाएगा, जिसके लिए उन्हें कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
  • योजना में अभियांत्रिकी व तकनीकी क्षेत्र के डिप्लोमा व डिग्री धारकों को अप्रेंटिसशिप करने पर मानदेय के रूप में ₹9,000 प्रति माह प्रदान किए जाएंगे।
  • मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना का लाभ अभी तक अभियांत्रिकी व तकनीकी क्षेत्र के डिप्लोमा और डिग्री धारकों को मिल रहा था। अब 22 अगस्त, 2023 से योजना का लाभ बीए, बीएससी, बीकॉम इत्यादि डिग्री और डिप्लोमा धारक युवा भी प्राप्त कर सकेंगे।
  • वर्ष 2023-24 में इस योजना पर ₹100 करोड़ व्यय किये गये।
  • मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना का मुख्य उद्देश्य सभी शिक्षित युवाओं को रोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकास प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) उपलब्ध कराना।
  • योजना के अंतर्गत युवाओं को प्रशिक्षण के साथ प्रतिमाह ₹9,000 उनके बैंक खाते में भेजे जाएंगे, जिसका उपयोग कर वह अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर सकेंगे। वित्तीय सहयोग के लिए उन्हें किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

नंदिनी कृषक समृद्धि योजना

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने पशुपालकों एवं किसानों के लिए सितंबर, 2023 में नंदिनी कृषक समृद्धि योजना आरंभ की।
  • योजना के तहत पशुपालक और खेतों में काम करने वाले किसानों को अच्छी नस्ल की 25 गायें दी जाएंगी। इससे अगले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होने की संभावना है।
  • योजना के प्रथम चरण में पशुपालकों को 25 गायों की 35 इकाइयां 50 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध करायी जाएंगी।
  • योजना के तहत लाभार्थी को साहीवाल, गंगातीरी, गिर, थारपरकर नस्ल की गायें प्रदान की जाएंगी।
  • नंदिनी कृषक समृद्धि योजना का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के साथ किसानों की आय में वृद्धि करना है।
  • योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित किसान के पास गोपालन का न्यूनतम तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए। इसके अतिरिक्त यूनिट स्थापित करने हेतु न्यूनतम आधा एकड़ तथा पशुओं के भोजन हेतु न्यूनतम डेढ़ एकड़ भूमि होनी चाहिए।
  • प्रदेश सरकार का लक्ष्य नंद बाबा मिल्क मिशन एवं नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के माध्यम से राज्य में नयी दुग्ध क्रांति लाना है।
  • यह योजना उच्च गुणवत्तायुक्त अच्छी नस्ल की दुधारू गायों के पालन को प्रोत्साहित कर राज्य में किसानों, महिलाओं और बच्चों के आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है।
  • राज्य सरकार इसके माध्यम से पशुपालन को आर्थिक रूप से अधिक लाभप्रद बनाना चाहती है।
  • योजना को कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से देशी गायों की नस्ल में सुधार करके डेयरी उद्योग को बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है।

मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना शुरू की गयी है। इसके अंतर्गत पशुपालकों और किसानों को आर्थिक सहायता के रूप से ₹11 लाख 80 हजार तक का अनुदान दिये जाने का प्रावधान है।
यह अनुदान 10 स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायों की इकाई स्थापित करने के लिए गो पालकों को दो चरणों में दिया जाएगा।
मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के अंतर्गत पशुपालकों के लिए लाभार्थी अंश 15 प्रतिशत, बैंक ऋण 35 प्रतिशत तथा इकाई लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाता है।
योजना के अंतर्गत साहिवाल, गिर एवं थारपारकर प्रजाति की 10 गायों की परियोजना की कुल अनुमानित लागत 23 लाख 60 हजार निर्धारित की गई है।
योजना के तहत इकाई की स्थापना हेतु लगभग 0.20 एकड़ भूमि तथा चारा उत्पादन हेतु 0.80 एकड़ भूमि स्वयं की अथवा पैतृक या न्यूनतम 7 वर्षों के लिए अनुबंधित, होनी चाहिए।
पूर्व में संचालित नंदिनी कृषक समृद्धि योजना अथवा मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना का लाभ लेने वाले व्यक्ति इस योजना के पात्र नहीं माने जाएंगे।

उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने ज्वार, बाजरा, कोदो, सावां तथा रागी/मडुआ जैसे मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 'उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम' आरंभ किया है।
  • बीते वर्ष मनाए गए 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स' के मद्देनजर आरंभ की गई इस नई योजना के अन्तर्गत आगामी 5 वर्षों में प्रदेश सरकार ने ₹18,626.50 लाख खर्च करने की योजना बनाई है।
  • कार्यक्रम का प्रमुख लक्ष्य मिलेट्स (माटे अनाज) की खेती को बढ़ावा देते हुए उसके आच्छादन क्षेत्र, उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि कर किसानों की आय बढ़ाना है। इसके लिए वैल्यू एडीशन और मार्केटिंग के जरिए मिलेट्स को आम जनता की थाली तक पहुंचाया जाएगा, जिससे उन्हें संतुलित आहार को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।
  • योजना के संचालन, पात्रता के लिए मापदंड, अनुदान के लिए भुगतान के मानक और समय-समय पर योजना की समीक्षा हेतु कृषि निदेशक की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय परियोजना स्क्रीनिंग कमेटी गठित की गयी है।
  • उत्तर प्रदेश में कुछ वर्ष पहले तक मोटे अनाजों की खेती वृहत्त स्तर पर की जाती थी, लेकिन किन्ही कारणों से यह सिमटती चली गई। अब इसकी खेती के साथ-साथ प्रसंस्करण और उपभोग को दोबारा मिशन मोड में लाने की योजना है।

मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने 'मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना' के तहत राज्य के समस्त 403 विधान सभा क्षेत्र में पर्यटन स्थलों के विकास का कार्यक्रम तैयार किया है। प्रदेश सरकार की नयी पर्यटन नीति के तहत इस योजना को लागू किया जा रहा है।
  • इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में एक या उससे अधिक पर्यटक स्थल को विकसित किया जाएगा।
  • योजना के अंतर्गत विधान सभा क्षेत्र में एक या उससे अधिक सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थल का चयन कर वहां पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • सहभागिता आधारित इस योजना के तहत न्यूनतम ₹25 लाख तथा अधिकतम 5 करोड़ तक के प्रस्तावों पर व्यय कर एक विधान सभा में कोई व्यक्ति, संस्था अथवा जन प्रतिनिधि पर्यटक स्थलों का विकास करा सकेंगे।
  • योजना के तहत चयन हेतु पर्यटन स्थलों का धार्मिक, सांस्कृतिक, पौराणिक अथवा ऐतिहासिक एवं पर्यटन की दृष्टिकोण से सार्वजनिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण होना चाहिए।
  • चयनित पर्यटन स्थल का प्रस्ताव जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा पर्यटन विभाग के सूचीबद्ध आर्किटेक्ट से तैयार कराया जाएगा।
  • विकास परियोजना का 50 प्रतिशत धन राज्य सरकार तथा शेष 50 प्रतिशत प्रस्तावक (व्यक्ति/संस्था/जनप्रतिनिधि) द्वारा व्यय किया जाएगा।

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना

कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, कुपोषण आदि जैसी स्थितियों से बचा कर बालिकाओं को उच्च शिक्षा एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने कन्या सुमंगला की शुरुआत की है।

योजना का मुख्य उद्देश्य इस प्रकार है-
  • प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या को समाप्त करना।
  • प्रदेश में स्वास्थ्य एवं शिक्षा की स्थिति को सुदृढ़ करना।
  • प्रदेश में समान लिंगानुपात स्थापित करना।
  • बालविवाह की कुप्रथा को रोकना।
  • योजना के अंतर्गत पुत्री के जन्म से लेकर उसकी स्नातक तक की शिक्षा पूरी होने तक अभिभावकों को चरणबद्ध ढंग से ₹25 हजार की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
वित्तीय सहायता 6 चरणों में उपलब्ध कराई जाती है, जो इस प्रकार है-
  • पुत्री के जन्म लेने पर ₹5 हजार।
  • एक वर्ष की आयु होने पर ₹2 हजार।
  • पहली कक्षा में जाने पर ₹3 हजार।
  • छठी कक्षा में जाने पर ₹3 हजार।
  • नौवीं कक्षा में जाने पर ₹5 हजार।
  • डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स या स्नातक में जाने पर ₹7 हजार।
  • योजना का संचालन महिला कल्याण विभाग द्वारा किया जा रहा है।
  • योजना की शुरुआत 1 अप्रैल, 2019 को हुई। योजना के अंतर्गत अभी तक ₹15 हजार की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती थी, जिसे अगस्त, 2023 में बढ़ाकर ₹25 हजार कर दिया गया।

स्टेट अर्बन डिजिटल मिशन

  • 'नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन' की तर्ज पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 29 मार्च, 2023 को 'स्टेट अर्बन डिजिटल मिशन' (SUDM) की घोषणा की है। इसके माध्यम से शहरी स्थानीय निकायों का डिजिटलीकरण करते हुए तमाम शहरी नागरिक सुविधाओं को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सुलभ बनाया जाएगा।
  • स्टेट अर्बन डिजिटल मिशन (SUDM) राज्य सरकार के अधीन एक ऐसी संस्था होगी जिसका लक्ष्य शहरी नागरिकों को समस्त म्युनिसिपल सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध करा कर उनका जीवन सुगम बनाना होगा।
  • SUDM शहरी, स्थानीय निकायों में ऑनलाइन सुविधा स्थापित करने हेतु नोडल एजेंसी होगी, साथ ही यह इस दिशा में श्रेष्ठ क्रियाविधियों को अपनाने, परस्पर सीखने व ज्ञान के केन्द्र के रूप में कार्य करेगी।
  • आरंभ में 17 नगर निगमों का डिजिटलीकरण किया जाएगा तथा उसके बाद क्रमबद्ध रूप से अन्य शहरी निकायों को कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।

आरोहिनी पहल प्रशिक्षण कार्यक्रम

प्रदेश की बालिकाओं को स्वावलंबी और सक्षम बनाने के उद्देश्य से राज्य के सभी 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 'आरोहिनी पहल प्रशिक्षण कार्यक्रम' आरंभ किया गया है।
यह योजना वंचित वर्ग की बालिकाओं को अपनी सुरक्षा में सक्षम बनाएगी, साथ ही उन्हें अपने अधिकार हेतु आवाज उठाने को प्रेरित करेगी।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षकों को लैंगिक समानता की महत्ता व अन्य बालिका सशक्तिकरण माध्यमों की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसे वह विद्यार्थियों को सिखा सकेंगे।

यह कार्यक्रम 3 चरणों में संचालित होगा-
  • प्रथम चरण : शिक्षकों का प्रशिक्षण
  • द्वितीय चरण : प्रत्येक कस्तूरबा विद्यालय के 2 शिक्षक अपनी छात्राओं को जागरुक करेंगे।
  • तृतीय चरण : यह अभियान सामुदायिक स्तर पर चलाया जाएगा।

ई-सुश्रुत हॉस्पिटल मैनेजमेण्ट सिस्टम 

  • प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को ई-गवर्नेंस के माध्यम से प्रभावी बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के 12 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को 'ई-सुश्रुत' नामक हॉस्पिटल मैनेजमेण्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HOMIS) से जोड़ने की पहल की गयी है।
  • इस कार्यक्रम हेतु चिकित्सा शिक्षा विभाग ने C-DAC संस्था से अनुबंध किया है।
  • इस नई प्रणाली के अंतर्गत मरीज के पंजीकरण, भर्ती, डिस्चार्ज, एम्बुलेंस, खाना, दवाएं, उपलब्ध डॉक्टरों का विवरण आदि हैं।
  • संबंधी जानकारियां 'ई-सुश्रुत' पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध होंगी।

लखपति महिला कार्यक्रम

  • प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक उन्नयन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नवंबर, 2022 में 'लखपति महिला कार्यक्रम' की शुरुआत की गई है। इसके अंतर्गत आरंभिक 3 वर्ष में 15 लाख महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • कार्यक्रम का संचालन 'उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन' के अंतर्गत किया जाएगा।
  • स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ऐसा प्रयास किया जाएगा, जिससे समूहों से जुड़ी महिलाओं की वार्षिक पारिवारिक आय ₹1 लाख से ऊपर पहुंच जाए।
  • आरंभ में यह योजना प्रदेश के 11 जिलों में लागू की जा रही है।
  • योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं निगरानी हेतु जिला व विकास खण्ड स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जो प्रगति की मासिक समीक्षा करेंगी।

मिशन निरामय

  • उत्तर प्रदेश में नर्सिंग तथा पैरामेडिकल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, कॅरियर काउंसिलिंग व नौकरी दिलाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने 8 अक्टूबर 2022 को मिशन निरामयः की शुरुआत की।
  • मिशन के अंतर्गत नर्सिंग व पैरामेडिकल पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण में आधुनिक तकनीक को अपनाया जाएगा, संस्थानों की अवसंरचना व शिक्षकों की उपलब्धता की जाँच कर पारदर्शिता लायी जाएगी।
  • मिशन में 'मेंटोर-मेंटी माडल' को लागू किया जाएगा, जिसमें श्रेष्ठ कार्य प्रदर्शन वाले निजी व सरकारी संस्थान, अन्य नर्सिंग संस्थानों का मार्गदर्शन करेंगे।
  • इस मिशन में नर्सिंग व पैरामेडिकल संस्थानों की रेटिंग भी की जाएगी।
  • दिसंबर, 2022 तक 12 प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों ने मिशन निरामय: हेतु मेंटर के रूप में कार्य करने पर सहमति व्यक्त की है।

उत्तर प्रदेश में नई पर्यटन नीति को मंजूरी

उत्तर प्रदेश सरकार ने 16 नवंबर, 2022 को राज्य की नई पर्यटन नीति, 2022 को मंजूरी प्रदान की, जिसमें ऐतिहासिक स्थलों पर स्थित महलों तथा पुरानी हवेलियों को हेरिटेज होटल में बदलने का निर्णय लिया गया है।
प्रदेश की नई पर्यटन नीति 2022 का लक्ष्य उत्तर प्रदेश के स्थानीय लोगों में समावेशी पर्यटन विकास की भावना उत्पन्न कर स्थानीय जीवन्त शहरों, पर्यटन आकर्षणों, प्रकृति, विरासत, हस्तशिल्प आदि में पर्यटन के अनुभवों का इष्टतम उपयोग करना है।

उत्तर प्रदेश की नई पर्यटन नीति में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय सम्मिलित हैं-
  • पर्यटन स्थलों पर पुराने घरों को 'विलेज स्टे' योजना के तहत नया स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
  • गांवों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन नीति में अनेक नई व्यवस्थाएं की गई हैं। गांव के इच्छुक लोग अपने घरों को होटल अथवा लॉज के रूप में विकसित कर सकेंगे।
  • पर्यटन स्थलों पर स्टेडियम बनाने की मंजूरी प्रदान की गई है।
  • नई पर्यटन नीति में होटल उद्योग को विस्तार देने हेतु निवेश आधारित सब्सिडी की व्यवस्था की गई है। इसके अंतर्गत ₹10 करोड़ तक के निवेश पर ₹2 करोड़ तथा ₹500 करोड़ से अधिक निवेश पर ₹40 करोड़ तक सब्सिडी देने का प्रावधान है।
  • नई पर्यटन नीति में रामायण व महाभारत सर्किट के साथ ही साहसिक पर्यटन गतिविधियों पर जोर दिया गया है। रोजगार सृजन से संबंधित नई इकाइयों की स्थापना पर सब्सिडी का प्रावधान इस नीति में सम्मिलित है।
  • नई नीति में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दिया गया है।
  • आध्यात्मिक और वाइल्ड लाइफ के साथ ईको टूरिज्म सर्किट से आगरा को जोड़ा जाएगा।
  • नई पर्यटन नीति में आध्यात्मिक सर्किट के अंतर्गत आगरा के बटेश्वर को सम्मिलित किया गया है। यमुना किनारे निर्मित शिव मंदिरों की श्रृंखला के साथ स्थानीय शौरीपुर स्थित जैन मंदिर को जोड़ा गया है।
  • नई नीति में चंबल सेन्चुरी और सूर सरोवर पक्षी विहार को ईको टूरिज्म का केन्द्र बनाने की बात कही गयी है। यहां सर्दियों में प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियां आती हैं। चंबल सेन्चुरी में मगरमच्छ, घड़ियाल, डॉल्फिन आदि पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनते हैं।
  • क्राफ्ट सर्किट में आगरा का मार्बल, इनके कार्य तथा जरदोजी से संबंधित सजावट को सम्मिलित किया गया है। आगरा आने वाले पर्यटक मार्बल से बने ताजमहल के मॉडल तथा अन्य सामान पसंद करते हैं। आगरा से प्रतिवर्ष ₹1500 करोड़ का हैंडीक्राफ्ट निर्यात होता है।

राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना

प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 21 जुलाई, 2022 को पं. दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना की शुरुआत की है।
यह योजना कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्यों को सम्मिलित रूप से ₹5 लाख तक का इलाज निजी अस्पतालों में, जबकि बिना किसी सीमा के सरकारी अस्पतालों में, कैशलेस रूप से कराने की सुविधा प्रदान करती है। इस उद्देश्य हेतु कर्मचारी को एक 'कैशलेस कार्ड' प्रदान किया जाएगा, जो उसे आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना में शामिल निजी/सरकारी अस्पतालों में कैशलेस इलाज हेतु भर्ती होने में मदद करेगा।

प्रोजेक्ट अलंकार

प्रदेश के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ शैक्षिक वातावरण, स्कूल-अवसंरचना आदि में व्यापक सुधार लाकर उन्हें निजी स्कूलों जैसा सुविधा संपन्न बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'अलंकार प्रोजेक्ट' की शुरुआत की गई है।
प्रोजेक्ट का संचालन माध्यमिक शिक्षा विभाग करेगा।
प्रोजेक्ट अलंकार हेतु बजट 2023-24 में ₹500 करोड़ की व्यवस्था की गई है।

इस प्रोजेक्ट में तीन श्रेणियों में व्यय व्यवस्था की गई है -
  • शैक्षणिक व्यय- कक्षा, वाचनालय, पुस्तकालय, प्रयोगशाला आदि का निर्माण (वाई-फाई, स्मार्ट क्लास, फर्नीचर आदि की खरीद पर व्यय)।
  • गैर-शैक्षणिक व्यय- इसके अंतर्गत खेल मैदान का निर्माण, ओपन जिम, बहुद्देशीय हाल, बैण्ड व साउण्ड सिस्टम आदि की व्यवस्था की जा सकती है।
  • अवसंरचनात्मक अन्य व्यय- इस मद में छात्र/छात्राओं हेतु पृथक शौचालय, पेयजल, बाउण्ड्री वाल आदि का निर्माण होता है। आरंभ में सरकार द्वारा 450 विद्यालयों का चयन इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत किया गया है।

मुख्यमंत्री बुनकर सौर ऊर्जा परियोजना

  • प्रदेश के बुनकरों को सौर ऊर्जा का लाभ दिलाने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 नवंबर, 2022 को इस योजन की घोषणा की। यह योजना अगले 5 वर्ष तक संचालित होगी।
  • इस योजना की नोडल एजेंसी यूपीनेडा है। योजना के अंतर्गत सामान्य वर्ग के बुनकरों को सोलर पैनल हेतु 50 प्रतिशत (लागत का) तथा अनुसूचित जाति/जनजाति लूम बुनकरों को कुल लागत का 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
  • योजना के अंतर्गत 10 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं होंगी।
  • योजना में किसी भी प्रकार का संशोधन का अधिकार मुख्यमंत्री के पास होगा।
  • योजना से लगभग 50 हजार बुनकर लाभान्वित होंगे, जबकि लगभग 75 हजार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

रोजगार संबंधी योजनाएं

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना

प्रदेश सरकार ने राज्य के शिक्षित युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कराने के उद्देश्य से 15 फरवरी, 2021 को 'अभ्युदय योजना' का शुभारंभ किया।
'अभ्युदय योजना' के माध्यम से प्रतियोगी युवाओं को आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, पीसीएस सहित मेडिकल, आईआईटी, एनडीए, सीडीएस समेत अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध करायी जायेंगी।

नवीन छतरी रोजगार योजना

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 18 जुलाई, 2020 को नवीन छतरी रोजगार योजना का शुभारम्भ किया गया। इस योजना के माध्यम से 1 करोड़, 25 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदान कर स्वावलम्बी बनाया जाएगा। प्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं गरीब वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिये यह योजना लागू की गई है, जिससे समाज में आर्थिक एवं सामाजिक संतुलन स्थापित हो सके।
  • इस योजना के तहत दीन दयाल उपाध्याय स्वरोजगार योजना के 3484 लाभार्थियों को ₹ 17.42 करोड़ का ऑनलाइन स्थानान्तरण किया गया।
  • प्रत्येक बैंक शाखा को यह लक्ष्य दिया गया है कि इस योजना में वे कम से कम दो एससी/एसटी और महिला लाभार्थियों को अनिवार्य रूप से ऋण प्रदान करेंगे।

कौशल सतरंग योजना-2021

नगरों तथा गाँवों में निवास करने वाले प्रशिक्षित युवाओं को उनकी दक्षता के अनुसार रोजगार प्रदान करने हेतु उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महत्वाकांक्षी 'कौशल सतरंग योजना' शुरू की गई। इसमें 7 नई योजनाओं को शामिल किया गया है, जो इस प्रकार हैं -
  1. सीएम युवा हब योजना
  2. सीएम अप्रैंटिसशिप प्रमोशन योजना
  3. जिला कौशल विकास योजना
  4. तहसील स्तर पर कौशल पखवाड़ा योजना
  5. प्रशिक्षण पश्चात रोजगार
  6. रिकग्निशन और प्रॉयर लर्निंग (RPL)
  7. प्लेसमेंट एजेंसी के साथ 3 एमओयू
योजना के अन्तर्गत प्रत्येक जनपद के सेवायोजन कार्यालय में मेगा जाब फेयर का आयोजन किया जायेगा।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना

राज्य में बेरोजगारी को कम करने तथा शिक्षित युवा बेरोजगारों को स्वावलम्बी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना आरम्भ की गयी है। इसके अंतर्गत बेरोजगार युवक/युवतियों को उद्योग स्थापित करने हेतु ₹ 25 लाख तक ऋण प्रदान किया जाएगा।
  • सेवा क्षेत्र में संबंधित इकाई (रेस्टोरेन्ट, कम्प्यूटर सेन्टर, कैटरिंग सर्विस आदि) स्थापित करने के लिये ₹ 10 लाख तक का ऋण न्यूनतम ब्याज पर प्रदान किया जाएगा।
  • योजना के अन्तर्गत 18-40 वर्ष आयु वर्ग के हाईस्कूल उत्तीर्ण या इससे अधिक योग्यता वाले युवा पात्र होंगे।

मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना

उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को प्रशिक्षित कर स्वरोजगार की राह पर लाने के लिये वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट में 'मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना' की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण के साथ 1 वर्ष तक वित्तीय सहायता के रूप में ₹ 2500 दिया जायेगा। इसमें ₹ 1500 राज्य सरकार का तथा शेष ₹ 1000 केन्द्र सरकार का अंशदान होगा। इसके जरिये 10वीं, 12वीं तथा ग्रेजुएशन के विद्यार्थियों को विभिन्न तकनीकी संस्थाओं और उद्योगों से जोड़ा जाएगा।

बाबा साहेब अम्बेडकर रोजगार प्रोत्साहन योजना

  • प्रदेश सरकार द्वारा 11 नवम्बर, 2019 को ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को स्थानीय स्तर पर संसाधनों को विकसित कर सतत रोजगार प्रदान करने तथा उनमें उद्यमिता का विकास करने हेतु 'बाबा साहेब अम्बेडकर रोजगार प्रोत्साहन योजना' की शुरुआत की गई है। यह योजना उत्तर प्रदेश ग्राम विकास विभाग द्वारा संचालित अम्बेडकर विशेष रोजगार योजना का परिवर्तित रूप है।
  • योजना के अंतर्गत ₹50 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत अनुसूचित जाति/ जनजाति/ दिव्यांग को प्रति इकाई लागत का 35 प्रतिशत या ₹70,000 अधिकतम (जो कम हो) तक ऋण अनुदान प्रदान किया जायेगा।
  • सामान्य जाति के लिये यह ऋण 25 प्रतिशत या ₹50,000 अधिकतम होगा।

आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान

  • जून, 2020 में प्रधानमंत्री द्वारा 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान' का आरम्भ किया गया, जिसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी के दौरान जारी लॉकडाउन के दौरान प्रदेश में वापिस लौटे प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना है।
  • योजना प्रदेश के 31 जिलों में प्रारंभ की गई, जिससे 25,000 से भी अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ।
  • योजना में 1.25 करोड़ कामगारों के नियोजन का लक्ष्य है।

उत्तर प्रदेश कामगार एवं श्रमिक आयोग

उत्तर प्रदेश कामगार एवं श्रमिक आयोग का गठन 16 जून, 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया गया। इसका उद्देश्य निजी और गैर सरकारी क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर श्रमिक एवं कामगारों को उनकी कार्यक्षमता तथा कौशल के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराना है।
इस आयोग के अध्यक्ष मुख्यमंत्री या उनके द्वारा नामित कोई कैबिनेट मंत्री होंगे। श्रम योजना मंत्री इसके संयोजक तथा औद्योगिक विकास मंत्री, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री और निर्यात प्रोत्साहन मंत्री इसके उपाध्यक्ष होंगे।
आयोग के राज्य स्तरीय बोर्ड की अध्यक्षता औद्योगिक विकास आयुक्त करेंगे।

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना

प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों एवं हस्तशिल्पियों (सुनार, लोहार, बुनकर, बढ़ई, दर्जी आदि) के आजीविका को सुदृढ़ करने के लिये 24 जनवरी, 2019 को उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना' का आरम्भ किया गया।
  • योजना के अन्तर्गत प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों तथा दस्तकारों को ₹10 हजार से लेकर ₹10 लाख तक आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है।

कृषि सम्बन्धी योजनाएं

आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना

  • आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना 2021 को आरंभ करने की घोषणा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कर दी गई है, प्रदेश में कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने हेतु आत्मनिर्भर कृषक समन्वित योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा ₹100 करोड़ की धनराशि प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है।
  • योजना का उद्देश्य राज्य के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए उनकी आय को दोगुना करना है।
  • उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना किसानों की आय को बढ़ाने हेतु जारी की गई योजना है।
  • आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के अंतर्गत किसानों को आर्थिक सहयोग प्रदान करने हेतु सरकार द्वारा चालू वित्त वर्ष के लिए ₹100 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
  • इस योजना का लाभ मात्र उत्तर प्रदेश के किसानों को ही प्राप्त होगा।

उत्तर प्रदेश कृषि उपकरण योजना 2022

  • उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने प्रदेश के किसानों को कम मूल्य दर पर कृषि दर में प्रयोग होने वाले उपकरणों की खरीद में सहायता के लिए 'उत्तर प्रदेश कृषि उपकरण सब्सिडी योजना 2022' आरम्भ किया है। इसके अंतर्गत सब्सिडी के रूप में कृषि उपकरण क्रय करने हेतु कृषि विभाग द्वारा अनुदान राशि प्रदान की जायेगी। यह सुविधा लघु सीमांत एवं पिछड़े वर्ग से सम्बन्धित किसानों को उपलब्ध करायी जानी है।
  • योजना के अंतर्गत प्रदेश में कृषि उत्पादन को बढ़ाने तथा कृषकों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से किसानों को कृषि उपकरण की खरीद में 50 प्रतिशत तक का अनुदान (सब्सिडी) देने की योजना है।

किसान कल्याण मिशन-2022

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किसानों की आय में वृद्धि हेतु जनवरी, 2021 में 'उत्तर प्रदेश किसान कल्याण मिशन-2022' की शुरुआत की गयी है। योजना के अंतर्गत किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किसान मेले आयोजित किए जाएंगे, जिनमें किसानों को सामुहिक रूप में खेती में उपयोग होने वाली नई तकनीकी जानकारी प्रदान करने के साथ नई योजनाओं के बारे में भी सूचनाएं दी जायेंगी।

पीएम किसान योजना

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) योजना का शुभारम्भ किया। योजना के अंतर्गत चयनित लाभार्थी किसानों को ₹6,000 प्रतिवर्ष तीन किस्तों में प्रदान किए जायेंगे।
  • धनराशि किसानों के बैंक खातों में सीधे भेजी जायेगी।
  • योजना में प्रत्येक चार माह के पश्चात कृषक को ₹2,000 की सहायता राशि प्रेषित की जायेगी। माना जा रहा है कि यह योजना किसानों की आय बढ़ाकर उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उत्तर प्रदेश किसान उदय योजना

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने सीमांत किसानों के लिए उदय योजना आरंभ किया है। योजना के अंतर्गत किसानों को पम्प सेट प्रदान किए जायेंगे, जिससे वे अपने खेतों की समय की सिंचाई कर सकें।
  • सरकार द्वारा किसान उदय योजना के माध्यम से किसानों के सिंचाई पम्प सेट को निःशुल्क 5 और 7.5 बीएचपी क्षमता के एनर्जी एफिशिएंट पम्प से बदला जा रहा है। इससे पम्प के बिजली बिलों में 33 प्रतिशत तक की कमी आयेगी।
  • उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2022 तक प्रदेश के 10 लाख किसानों को निःशुल्क एनर्जी एफिशिएंट पम्प उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना

राज्य के कृषकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने हेतु, 22 जनवरी, 2020 को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना आरम्भ की गयी।

प्रमुख तथ्य
  • योजना के अंतर्गत कृषि कार्य के दौरान कृषकों की दुर्घटना, मृत्यु या अपंगता की स्थिति में उसे अथवा उसके परिवार को ₹ 5 लाख तक ही सहायता राशि (बीमा कवर) प्रदान की जाएगी।
  • प्रदेश में योजना 14 सितंबर, 2019 से प्रभावी है। इसका 100 प्रतिशत वित्त पोषण प्रदेश सरकार द्वारा किया जाएगा।
  • योजना का लाभ 18-70 वर्ष तक की आयु के किसानों को प्राप्त होगा।
  • खातेदार किसान तथा सह खातेदार किसान के साथ उनकी पत्नी, पुत्र-पुत्री, पौत्र-पौत्री एवं बटाईदार किसान इसके लाभार्थी होंगे।
  • यह योजना जिलाधिकारी के माध्यम से संचालित होगी। दुर्घटना के 75 दिनों के पश्चात प्रस्तुत किये गये आवेदन पर विचार नहीं किया जायेगा।

उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मंडी संशोधन अध्यादेश-2020

किसानों की आय में बढ़ोत्तरी एवं बाजार को प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के लिये 6 मई, 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मंडी संशोधन अध्यादेश' प्रस्तुत किया गया।

प्रमुख प्रावधान
  • योजना के अंतर्गत 46 फलों और सब्जियों के व्यापार पर किसी भी प्रकार का कोई मंडी शुल्क नहीं देय होगा।
  • कृषक अपने उत्पादों को सीधे उपभोक्ता, व्यापारियों एवं प्रसंस्करण इकाई को बेचने हेतु स्वतंत्र होंगे।
  • फल-सब्जी मंडी को विकेन्द्रीकृत कर कृषि उपज को डोर स्टेप तक पहुंचाने की व्यवस्था होगी। यह अध्यादेश फल एवं सब्जी का व्यापार समूचे प्रदेश में निर्बाध रूप से सुनिश्चित करेगा।

‘द मिलियन फॉर्मर्स स्कूल’ कार्यक्रम

कृषकों की आय को दोगुना करने के लिये ‘द मिलियन फॉर्मर्स स्कूल कार्यक्रम’ की शुरुआत 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गयी। यह एक प्रकार की कृषकों की पाठशाला है, जिसमें 10 लाख से अधिक कृषकों को प्रगतिशील खेती का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

कृषक समृद्धि आयोग

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कृषकों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने हेतु कृषक समृद्धि आयोग का गठन किया गया है। यह आयोग उन विचारों एवं सुझाव पर बल देगा जो वर्ष 2022 तक किसान की आय को दोगुना कर सकें।
  • इस आयोग की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे तथा राज्य कृषि मंत्री और नीति आयोग के सदस्य इसके उपाध्यक्ष होंगे। प्रदेश के मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त आयोग के सदस्य होंगे।

महिला एवं बाल विकास से संबंधित योजनाएं

मिशन शक्ति अभियान

  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बलरामपुर जनपद के देवी पाटन शक्ति पीठ से 17 अक्टूबर, 2020 को इस अभियान का आरम्भ किया गया।
  • अभियान का उद्देश्य महिलाओं, बालिकाओं और बच्चों की सुरक्षा, गरिमा तथा स्वावलंबन को बढ़ावा देना है।
  • बलरामपुर में बलात्कार के पश्चात मृत एक 22 वर्षीय दलित महिला के सम्मान में 'मिशन शक्ति' अभियान को प्रारंभ किया गया।

उत्तर प्रदेश भाग्यलक्ष्मी योजना

  • उत्तर प्रदेश भाग्यलक्ष्मी योजना के माध्यम से प्रदेश सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को जन्म के समय से शादी तक आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके अतिरिक्त बेटी की मां को भी ₹5100 की धनराशि प्रदान की जाती है।
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भाग्यलक्ष्मी योजना आरम्भ करने का उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति हो रहे भेद-भाव को समाप्त करना और बेटियों की भ्रूण हत्या को रोकना है।
  • इस योजना का लाभ राज्य के आर्थिक रूप से गरीब परिवार की बेटियों को प्रदान किया जाएगा।
  • उत्तर प्रदेश भाग्यलक्ष्मी योजना 2021 के तहत बेटी के जन्म होने पर उसके खाते में ₹50,000 का बॉण्ड जमा किया जाएगा और माँ को ₹5100 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
  • जब बालिका 21 वर्ष की आयु में पहुंच जाएगी तब ₹2 लाख सरकार द्वारा उसके माता-पिता को दिये जाएंगे।
  • इस योजना के अंतर्गत एक ही परिवार की मात्र दो बेटियों को लाभ प्रदान किया जाएगा।

पात्रता
  • आवेदक के परिवार की वार्षिक आय ₹2 लाख से कम होनी चाहिए।
  • उत्तर प्रदेश भाग्यलक्ष्मी योजना 2021 के तहत लड़की का विवाह 18 वर्ष से कम उम्र में नहीं होना चाहिए।
  • माता-पिता उत्तर प्रदेश के मूल निवासी होने चाहिए।

निर्भया : एक पहल

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा महिलाओं में उद्यमिता कौशल को प्रोत्साहित करने के लिए 'निर्भया: एक पहल' 29 सितंबर, 2021 को आरम्भ किया गया।
  • महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा, स्वाभिमान एवं स्वावलंबन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मिशन 'शक्ति' प्रारंभ किया गया था। इस मिशन के तीसरे चरण में अब 'निर्भया : एक पहल' अभियान प्रारंभ किया गया है।
  • इसके अन्तर्गत राज्य के प्रत्येक जिले से लगभग 1000-1000 महिलाओं, अर्थात कुल 75000 महिलाओं को प्रशिक्षण किट वितरित किये जायेंगे। इस तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण अभियान का क्रियान्वयन राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (MSME) द्वारा किया जाएगा, जिसमें उन्हें यह बताया जाएगा कि केंद्र और राज्य सरकार की कौन-कौन सी योजनाओं का लाभ उन महिलाओं को मिल सकता है, जो अपना उद्यम शुरू करना चाहती हैं।
  • योजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री द्वारा हेल्पलाइन नंबर 18002126844 के अतिरिक्त वेबसाइट https://msmemissionshakti.in एवं एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है, जिससे महिला उद्यमियों को उद्यमिता संबंधित सभी सूचनाएं एक ही जगह प्राप्त हो सकें।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना

  • प्रदेश सरकार द्वारा 29 मई, 2021 को 'उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना' की घोषणा की गई। इस योजना की शुरुआत जुलाई, 2021 में की गई। योजना के अंतर्गत 0-18 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चे पात्र होंगे।
  • योजना का लाभ उन बच्चों को प्राप्त होगा, जिनके माता-पिता / माता या पिता/विधिक अभिभावक / आय अर्जित करने वाले अभिभावक की मृत्यु कोविड-19 संक्रमण के कारण 1 मार्च, 2020 के बाद हो गई है।
  • योजना के तहत बच्चे के वयस्क होने तक सरकार उनके अभिभावक/ देखभालकर्ता को प्रतिमाह ₹4000 की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।

किशोरी बालिका योजना (SAG)

किशोरियों से संबंधित किशोरी बालिका योजना [Scheme for Adolescent Girl (SAG)] की शुरुआत 21 फरवरी, 2019 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई।
  • यह योजना 11-14 वर्ष की ऐसी किशोर बालिकाओं को लाभान्वित करता है, जिनकी किसी वजह से पढ़ाई छूट गई हो।
  • राज्य सरकार इस योजना के तहत बालिकाओं को खाने के लिये बाजरा, अरहर दाल, मोटे अनाज तथा देशी घी प्रदान करेगी।
  • इसके तहत पूरे प्रदेश में वीरांगना दल का गठन किया गया है।
  • प्रदेश की आंगनवाड़ियों में प्रत्येक माह 8 तारीख को 'किशोरी दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है।

मुखबिर योजना

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कन्या भ्रूण हत्या को रोकने एवं लिंगानुपात में वृद्धि करने कि लिये 24 जून, 2017 को मुखबिर योजना शुरू की गई। इसके तहत कन्या भ्रूण हत्या की जानकारी देने वाले व्यक्ति को ₹2 लाख का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। उसके अन्तर्गत मुखबिर को ₹60,000 तथा उसके सहायक को ₹40,000 तथा सूचना देने वाले ग्राहक को एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जायेगी।

बीसी सखी योजना

उत्तर प्रदेश सरकार ने 22 मई, 2020 को महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिये बीसी यानी बैंकिंग कॉरेस्पान्डेन्ट सखी योजना आरंभ की है।
इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में बैंकिंग सेवाओं को सर्वसुलभ बनाने के लिये बीसी सखी की नियुक्ति की जाएगी। इसमें कार्य करने वाली महिलाओं को ₹4000 प्रति माह की दर 6 महीने तक वेतन का भुगतान किया जाएगा।

बाल श्रमिक विद्याधन योजना

बाल श्रमिक विद्याधन योजना का आरम्भ अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर 12 जून, 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया गया। इसका मुख्य लक्ष्य मजदूरी करके जीविका चलाने वालों के बच्चों को शिक्षित करना है।
इस योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों के शिक्षा पर होने वाला व्यय राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। 8-18 वर्ष आयु के बच्चे इस योजना के पात्र होंगे।
बालक तथा बालिका को प्रति माह क्रमशः ₹1000 और ₹1200 की राशि प्रदान की जाएगी। इसके अलावा 8, 9 और 10वीं कक्षा में उत्तीर्ण होने पर इन विद्यार्थियों को प्रत्येक वर्ष ₹6000 की अतिरिक्त सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

नया सवेरा योजना

  • श्रमिक बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कर उनके सामाजिक, शैक्षणिक एवं नैतिक विकास हेतु जून, 2017 में श्रम विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा नया सवेरा योजना आरम्भ की गयी।
  • बाल श्रम से सर्वाधिक प्रभावित 20 जिलों के चिन्हित हॉट स्पॉट में बाल श्रम मुक्ति हेतु डोर-टू-डोर सर्वेक्षण किया जाएगा।
  • इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ब्लॉक स्तर पर बाल अधिकार संरक्षण समिति तथा जिला स्तर पर जनपदीय बाल श्रम उन्मूलन समिति का गठन किया जाएगा।

निर्माण एवं अवसंरचना

स्वामित्व योजना

  • स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को उनके आवासीय संपत्ति के अभिलेख (घरौनी) के वितरण कार्यक्रम का आरम्भ किया गया है। यह योजना 12 फरवरी, 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गयी।
  • स्वतंत्रता के बाद पहली बार ग्रामीणों को उनके आवासीय सम्पत्ति के स्वामित्व को दर्शाने वाले किसी सरकारी अभिलेख की सुविधा प्राप्त होगी।
  • माना जा रहा है कि इस अभिलेख के मिलने के बाद गांवों में आवासीय सम्पत्ति को लेकर होने वाले विवादों में कमी आयेगी। घरौनी को बैंक में रखकर आसानी से ऋण लिया जा सकेगा और आवासीय संपत्ति को आसानी से बेचा भी जा सकेगा।

मेजर ध्यान चंद विजयपथ योजना

  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 29 अगस्त, 2020 को मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर मेजर ध्यान चंद विजय पथ योजना का आरम्भ किया गया। इसका प्रमुख उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तरीय खिलाड़ियों के घर तक पक्की सड़क का निर्माण करना है।
  • इसके तहत राज्य के 19 अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के घर तक पक्की सड़क का निर्माण किया जाएगा, जिसमें 2017-20 तक के स्वर्ण पदक विजेता भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री समग्र ग्राम विकास योजना

  • मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना की शुरुआत जनवरी, 2018 में की गई।
  • इस योजना के अंतर्गत थारू, मुसहर, वनटांगिया बाहुल्य क्षेत्रों का विकास किया जाएगा।
  • योजना के अंतर्गत गौरव पथ का निर्माण किया जाएगा।
  • देश के लिए जान देने वाले शहीदों के ग्रामों को शहीद ग्राम घोषित किया जाएगा।

गंगा हरितिमा योजना

  • उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के तट पर बसे 27 जनपदों (बिजनौर से बलिया तक) में गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त कर नदी के जल प्रवाह क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने हेतु अप्रैल, 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना को प्रारंभ किया गया।
  • योजना के अंतर्गत 'एक व्यक्ति, एक वृक्ष' के नारे के साथ गंगा के किनारों पर वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • यह वृक्षारोपण उत्तर प्रदेश वन विभाग और मनरेगा की मदद से किया जाएगा।

मिशन वृक्षारोपण-2020

  • मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश द्वारा 5 जुलाई, 2020 को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 'मिशन वृक्षारोपण-2020' को आरम्भ किया गया। इस मिशन के तहत प्रदेश में 25 करोड़ से भी अधिक वृक्षारोपण किया गया।
  • गंगा, यमुना, राप्ती, घाघरा समेत कई नदियों के दोनों तरफ फलदार वृक्ष लगाए गये।
  • इस मिशन के तहत कृषकों को निःशुल्क पौधे प्रदान किये गये, जिनकी देख-भाल हेतु 3 वर्षों तक मानदेय भी प्रदान किया जायेगा।

उत्तर प्रदेश प्रसंस्कृत तिल निर्यात नीति (2018-23)

प्रदेश में नई तिल निर्यात नीति 'उत्तर प्रदेश प्रसंस्कृत तिल निर्यात नीति को मंजूरी दी गयी है। यह नीति वर्ष 2023 तक प्रभावी रहेगी।
  • इस नीति के तहत तिल निर्यातकों को मंडी शुल्क एवं विकास सेस से छूट प्रदान की जाएगी।
  • प्रदेश से निर्यात किये जाने वाले प्रसंस्कृत तिल तथा प्रसंस्कृत उत्पादों में प्रयुक्त होने वाले तिल की खरीद में किसानों या उत्पादकों को 2 प्रतिशत मंडी शुल्क एवं ½(आधा) प्रतिशत विकास सेस (Cess) से छूट प्रदान की जाएगी।

उत्तर प्रदेश कतिपय श्रम विधियों से अस्थायी छूट अध्यादेश

उत्तर प्रदेश सरकार ने 'उत्तर प्रदेश कतिपय श्रम विधियों से अस्थायी छूट अध्यादेश, 2020' को मंजूरी प्रदान की है।
  • इस नियम के तहत उत्तर प्रदेश में वर्तमान में लागू श्रम अधिनियमों से आगामी 3 वर्ष की छूट प्रदान की जायेगी, जो प्रदेश के सभी कारखानों व विनिर्माण अधिष्ठानों पर लागू होगी।
  • इस अध्यादेश के बावजूद कुछ अधिनियमों के प्रावधान मसलन बंधुआ श्रम प्रथा (उत्पादन) अधिनियम 1976, कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवा शर्तें विनियमन) अधिनियम, 1996 तथा वेतन संदाय अधिनियम, 1936 की धारा 5 अंतर्गत वेतन भुगतान के प्रावधान लागू रहेंगे।

वर्मी कमपोस्ट इकाई स्थापना योजना

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापना योजना को संचालित करने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य भूमि की उर्वरता को बनाये रखते हुये अधिकतम उत्पादन करना एवं रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव से बचना है।
  • कृषकों के हितों को ध्यान में रखते हुये उनके आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने हेतु प्रत्येक राजस्व ग्राम में एक वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

Tags:

Comments

Comment करें

Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UPPSC, UPSSSC, UP Police, UP Lekhpal, RO/ARO और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।