उत्तर प्रदेश में निवेश : मुद्दे एवं प्रभाव

उत्तर प्रदेश में निवेश : मुद्दे एवं प्रभाव

उत्तर प्रदेश अब केवल आस्था और संस्कृति का केंद्र नहीं रहा, बल्कि यह भारत की आर्थिक प्रगति का नया स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है। कभी 'बीमारू' राज्यों की कतार में खड़े इस प्रदेश का औद्योगिक कायाकल्प एक अद्भुत सफरनामा है, जिसमें 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' और 'डिफेंस कॉरिडोर' जैसे महाप्रोजेक्ट्स की गूंज साफ सुनाई दे रही है। इस विस्तृत लेख में हम उत्तर प्रदेश में निवेश के उभरते मॉडल्स, विदेशी और घरेलू निवेशकों के बढ़ते आकर्षण, नई नीतियों के प्रभाव, असीम संभावनाओं और धरातल पर मौजूद चुनौतियों का गहराई से प्रामाणिक विश्लेषण करेंगे।

निवेश (Investment)

निवेश का अर्थ है, 'भविष्य में आय को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किसी परिसंपत्ति, उपक्रम अथवा वस्तु में धन लगाना।'
निवेश के परिणामस्वरूप परिसंपत्ति अथवा वस्तु के अधिमूल्यन (मूल्य वृद्धि) एवं उत्पादन क्षमता में सुधार की संभावना रहती है।
अर्थव्यवस्था के विकास में निवेश ईंधन का काम करता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़ी जनसंख्या वाले राज्य में यह बहुउपयोगी साबित हो रहा है।

निवेश मॉडल

निवेश के तीन प्रमुख मॉडल हैं:
  • सार्वजनिक निवेश
  • निजी निवेश
  • सार्वजनिक निजी-भागीदारी (PPP)

सार्वजनिक निवेश मॉडल (Public Investment Model)

  • सार्वजनिक निवेश मॉडल के अंतर्गत ऐसे निवेश आते हैं, जो स्थानीय, राज्य सरकारों, केंद्र सरकार अथवा उसके अधीन उपक्रमों एवं निगमों द्वारा किए जाते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, जीडीपी के 1 प्रतिशत के बराबर किया गया सार्वजनिक निवेश जीडीपी में 2.7 प्रतिशत एवं रोजगार के अवसरों में 1.2 प्रतिशत की वृद्धि करता है।
  • अवसंरचना क्षेत्र में किया गया सार्वजनिक निवेश अर्थव्यवस्था में गुणात्मक प्रभाव उत्पन्न करता है। यह अपने साथ निजी निवेश को भी आकर्षित करता है।

निजी निवेश मॉडल (Private Investment Model)

  • अर्थव्यवस्था की निवेश आवश्यकताओं की पूर्ति मात्र सार्वजनिक संसाधनों द्वारा संभव नहीं, अतः निवेश के अन्य स्रोतों का उपयोग भी आवश्यक हो जाता है। ऐसा ही एक स्रोत है- 'निजी निवेश'।
  • लाभ प्राप्ति के उद्देश्य से किसी व्यक्ति, संस्थान अथवा मान्यता प्राप्त निवेशकों द्वारा किये गये निवेश को इस श्रेणी में रखा जाता है।
Private-Investment-Model

निजी निवेश दो प्रकार के हो सकते हैं:
  • घरेलू निवेश: जब घरेलू/निजी निवेशक अपने ही देश में निवेश करते हैं।
  • विदेशी निवेश: इस प्रकार के निवेश में निवेशक किसी दूसरे देश में निवेश करते हैं।

घरेलू निवेश (Domestic Investment)

  • घरेलू निवेश मॉडल स्थानीय, राज्य, संघ सरकार और उनके उद्यम या निगम द्वारा निवेश किए जाने को संदर्भित करता है।
  • आईएमएफ के अनुसार घरेलू निवेश को जीडीपी का 1 प्रतिशत बढ़ाने पर आर्थिक विकास में 2 प्रतिशत तक वृद्धि होती है।
  • अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश का परिणाम अर्थव्यवस्था में गुणक प्रभाव उत्पन्न करता है। यह क्राउडिंग-इन इफ़ेक्ट की ओर जाता है। यह निजी निवेश को आकर्षित करता है।

विदेशी निवेश (Foreign Investment)

  • विदेशी कंपनियों, संस्थाओं द्वारा किसी दूसरे देश के उद्योग/व्यापार अथवा शेयर बाजार में किए जाने वाले निवेश को 'विदेशी निवेश' कहते हैं।
  • शासन-प्रशासन एवं कानून व्यवस्था में सुधार के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में विदेश से होने वाले निवेश में बड़ी वृद्धि हुई है। भारत सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश ने पिछले पांच वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त करने में 22 राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। वर्ष 2001 से 2017 के मध्य 17 वर्षों में यहां जितना विदेशी निवेश आया, उसका लगभग 4 गुना, वर्ष 2019 से 2023 के बीच, मात्र 5 वर्षों में आया है।
  • उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) तथा भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2000 से 2017 के मध्य उत्तर प्रदेश में मात्र ₹3 हजार करोड़ का विदेशी निवेश आया था, जबकि 2019 से 2023 के मध्य लगभग ₹11 हजार करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त करने के संबंध में उत्तर प्रदेश का स्थान देश के विभिन्न राज्यों में 11वां है। इससे ऊपर मात्र महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, झारखंड, राजस्थान तथा प. बंगाल हैं।
  • विदेशी निवेश में उत्तर प्रदेश ने पंजाब, आंध्र प्रदेश, केरल, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, गोवा तथा छत्तीसगढ़ को पीछे छोड़ दिया है।
  • हाल के दिनों में इस दिशा में उत्तर प्रदेश के पक्ष में कुछ अन्य उत्साहजनक परिणाम भी सामने आए हैं, जैसे-निर्यात तैयारी सूचकांक में उत्तर प्रदेश को 6ठा स्थान मिला है तथा DPIIT की ‘लॉजिस्टिक ईज डूइंग रैंकिंग (LEADS 2020) में उत्तर प्रदेश ‘अचीवर्स’ श्रेणी (लैण्ड लॉक प्रदेशों में) में स्थान बनाने में सफल रहा है।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership)

  • विश्व बैंक के अनुसार, 'सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) सरकार के लिए एक ऐसी प्रणाली है, जिसके द्वारा वह निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता व संसाधन का प्रयोग कर सार्वजनिक अवसंरचनाओं तथा सेवाओं की खरीद तथा स्थापना कर सकती है।'
  • इस प्रणाली में किसी सार्वजनिक परिसंपत्ति या सेवाओं के विकास एवं वाणिज्यिक उपयोग हेतु सरकार तथा निजी इकाई के बीच एक दीर्घकालिक अनुबंध होता है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के साथ निजी क्षेत्र प्रबंधन संबंधी जिम्मेदारियों व इससे जुड़ी आशंकाओं को वहन करते हुए अपने कार्य के अनुरूप निर्धारित भुगतान प्राप्त करने को तैयार होता है।

उत्तर प्रदेश में निवेश के प्रयास एवं परिणाम

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते वर्ष लखनऊ में तीन दिवसीय 'यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, 2023' का आयोजन किया, जिसमें ₹ 33.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।
  • राज्य सरकार द्वारा 19 फरवरी, 2024 को 'ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (GBC 4.0) के माध्यम से लखनऊ में लगभग ₹ 10 लाख करोड़ के निवेश से 14 हजार से अधिक परियोजनाएं आरंभ की गयीं।

गोरखपुर में प्लास्टिक पार्क के लिए ₹70 करोड़ का निवेश

  • गोरखपुर शहर के निकट गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण-GIDA) में गोरखपुर-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस-वे के पास भगवानपुर गांव में करीब ₹70 करोड़ की लागत से 88 एकड़ क्षेत्र में प्लास्टिक पार्क स्थापित किया जा रहा है। इसकी स्वीकृति भारत सरकार के रसायन एवं पेट्रो रसायन विभाग ने दे दी है। पार्क बनने से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 5000 लोगों को रोजगार प्राप्त होने की संभावना है।
  • प्लास्टिक पार्क के भूमि विकास व आधारभूत संरचना (भूमि मूल्य के अतिरिक्त) पर ₹69.58 करोड़ खर्च होंगे। इसमें ₹34.79 करोड़ केंद्र सरकार और ₹34.79 करोड़ प्लास्टिक पार्क के स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) द्वारा वहन किया जाना है। प्लास्टिक पार्क के संचालन के लिए एसपीवी (विशेष प्रयोजन वाहन) का गठन किया जा रहा है।
  • प्लास्टिक पार्क में 92 औद्योगिक भूखंड होंगे। यहां 92 फैक्ट्रियां लगेंगी। साथ ही प्रशासनिक भवन, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, यूटिलिटी शॉप्स और भंडारण इकाइयां भी संचालित होंगी।
  • भारत में अब तक कुल छह प्लास्टिक पार्क स्थापित किये जा चुके हैं। इससे पूर्व मध्य प्रदेश के तामोट गांव, मध्य प्रदेश में ही ग्वालियर के बिलौआ गांव, ओडिशा में जगतसिंहपुर के पास प्रदीप गांव, असम के गेल्लापुखुरी, झारखंड के देवीपुर, तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के वायलूर में प्लास्टिक पार्क बनाए गए हैं।

निवेशकों के आकर्षण का केन्द्र बना उत्तर प्रदेश
  • ब्रिटिश समूह 'ट्राफलगर स्क्वायर कैपिटल' उत्तर प्रदेश के अयोध्या में अत्याधुनिक रक्षा विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने हेतु ₹75 हजार करोड़ का निवेश करेगा। इस संबंध में कंपनी और स्थानीय अधिकारियों के बीच वर्ष 2024 में पांच समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गये।
  • यह देश में किसी एक जिले में एक साथ होने वाला सबसे बड़ा विदेशी निवेश है।
  • उत्तर प्रदेश में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) नीति के तहत पांच बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने निवेश के प्रस्ताव दिए हैं। इनमें हांगकांग की कंपनी टौशन इंटरनेशनल ग्रुप, आरजी ग्रुप, आस्टिन कंसल्टिंग ग्रुप, कॉसिस ग्रुप, इंडो यूरोपियन चेंबर ऑफ स्मॉल एण्ड मीडियम एंटरप्राइजेज, ब्रिटेन का ट्राफलगर स्क्वायर कैपिटल ग्रुप, एबीसी क्लीनटेक और यूनिकॉर्न एनर्जी (जर्मनी) शामिल हैं।
  • उत्तर प्रदेश में निवेश हेतु ब्रिटेन की ट्राफलगर स्क्वायर ने पांच और जर्मनी की यूनिकॉर्न एनर्जी ने दो एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। ट्राफलगर स्क्वायर अयोध्या में डिफेंस विनिर्माण इकाइयां लगाएगी। इन पर ₹75 हजार करोड़ का निवेश किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार ट्राफलगर स्क्वायर के अयोध्या में निवेश से लगभग 26 हजार नए रोजगार सृजित होंगे।
  • डिफेंस क्षेत्र में यह निवेश डिफेंस कॉरीडोर के बाहर किया जा रहा है।
  • जर्मनी की यूनीकॉर्न एनर्जी दो प्रोजेक्ट के माध्यम से लखनऊ और जौनपुर में प्रवेश करेगी। दोनों प्रोजेक्ट में लगभग ₹42 हजार करोड़ का निवेश किया जाएगा। यह दोनों प्रोजेक्ट सौर ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित होंगे। इनसे लगभग 2200 लोगों को रोजगार मिलेगा।
  • इसी क्रम में जीएमआर समूह ने सौर ऊर्जा में निवेश के लिए ₹40 हजार करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर किया है। इसके द्वारा परियोजना हेतु अभी स्थान का चुनाव नहीं किया गया है।
  • उत्तर प्रदेश में आदित्य बिड़ला ग्रुप ने ₹25 हजार करोड़ के निवेश संबंधी नए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। समूह प्रदेश में टेक्सटाइल और रेडीमेड वस्त्रों की बड़ी इकाई लगाएगा।
  • हिंदुजा समूह ने उत्तर प्रदेश में अशोक लीलैंड के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) का समझौता फाईनल करने के बाद फिल्म, मीडिया और सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी ₹25 हजार करोड़ का निवेश करने की घोषणा की है। इन दोनों ही कंपनियों ने परियोजना के लिए अभी स्थान का चुनाव नहीं किया है।
  • नेशनल थर्मल पॉवर कॉर्पोरेशन ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में 6 एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। कॉर्पोरेशन ₹74 हजार करोड़ से झांसी, सोनभद्र और प्रयागराज में प्लांट लगाएगा।

नोएडा में प्लास्टिक पार्क

  • प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) नोएडा में प्लास्टिक पार्क स्थापित किया जा रहा है। यह निर्माण यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा 100 एकड़ क्षेत्र में किया जा रहा है।
  • यीडा के सेक्टर 10 में प्रस्तावित प्लास्टिक पार्क में 20 से अधिक निवेशकों ने निवेश करने संबंधी प्रस्ताव दिए हैं। इन निवेशकों ने यहां मेडिकल उपकरण, कृषि संबंधी उपकरण, पीवीसी पाइप, पैकेजिंग तथा प्लास्टिक फर्नीचर आदि बनाने की योजना प्रस्तुत की है।

यूपी को फार्मा एवं बायो टेक्नोलॉजी का हब बनाने की तैयारी

  • उत्तर प्रदेश को देश में फार्मा एवं बायो टेक्नोलॉजी क्षेत्र का सबसे बड़ा हब बनाने की योजना साकार होती दिखायी दे रही है।
  • प्रदेश सरकार पीलीभीत, ललितपुर और जेवर में देश के सबसे बड़े फार्मा पार्क को विकसित कर रही है।
  • उत्तर प्रदेश, भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना 'नई फार्मा पालिसी-23' के तहत बायो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की योजना पर गंभीरता से प्रयास कर रहा है।
  • राज्य सरकार जेवर एयरपोर्ट के पास 350 एकड़ क्षेत्र में चिकित्सा उपकरण निर्माण क्षेत्र में अत्याधुनिक मेडिटेक पार्क विकसित कर रही है, जहां 100 से अधिक उद्योग स्थापित होंगे। इसी तरह बल्क ड्रग्स स्टार्टिंग मैटेरियल और एक्टिव फार्मास्यूटिकल के निर्माण हेतु ललितपुर में दो हजार एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक 'फार्मा पार्क' को विकसित किया जा रहा है।
  • 'मेडिटेक' एवं 'फार्मा पार्क' के निर्माण से भारत एक तरफ जहां अन्य देशों से आयात होने वाले उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा, वहीं उपकरण और दवाओं का निर्यात भी कर सकेगा।
  • प्रदेश सरकार पीलीभीत में अत्याधुनिक बायोटेक पार्क विकसित रही है। इसके निर्माण से देश फर्मेटेशन पर आधारित वस्तुओं के आयात को कम कर सकेगा।
  • प्रदेश सरकार द्वारा बायोटेक टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के विकास, स्किल डेवलपमेंट एवं इंक्यूबेशन के लिए बायोटेक पार्क में विंग स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसमें 400 फार्मेसी और बायो टेक्नोलॉजी संस्थान के छात्रों को रोजगार और स्वरोजगार मिलने की संभावना है।

यूपी में निवेश बढ़ाने के नये प्रयास

  • उत्तर प्रदेश को 'निवेश हब' बनाने के उद्देश्य से 'सिंगल विंडो सिस्टम' मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 10 खरब (वन ट्रिलियन) डॉलर तक पहुंचाने के लिए सरकार ने 'इन्वेस्ट यूपी' की पुनर्संरचना का निर्णय लिया है।
  • प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने मई 2025 में 'सिस्टम एग्रीगेटर' प्रक्रिया की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य अलग-अलग विभागों के डाटा को एक स्थान पर लाकर उनसे जुड़ी समस्याओं का निराकरण करना है।
  • 'इन्वेस्ट यूपी' के तहत लैंड यूज परिवर्तन प्रक्रिया का धारा-80 के अनुसार 6 माह के भीतर पूरी तरह डिजिटलीकरण किया जा रहा है।
  • 'उत्तर प्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, 2023' की मेजबानी के बाद राज्य सरकार ने एक वर्ष के भीतर लगभग ₹10 लाख करोड़ के अनुमानित निवेश के साथ 14 हजार से अधिक परियोजनाएं शुरू की हैं, जिनसे 33.50 लाख रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं।
  • निवेश की सफलता और इसे अधिक गति देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 19 फरवरी से 21 फरवरी, 2024 तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में ग्राउंडब्रेकिंग सेरेमनी (GBC4.0) का आयोजन किया, जिसे विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में मील का पत्थर माना गया।
  • लगभग 7 वर्ष पूर्व तक उत्तर प्रदेश में बैंकों में जो पैसा जमा हो रहा था, वह लगभग 35 प्रतिशत था। यह आंकड़ा बढ़कर अब 60 प्रतिशत हो चुका है। इससे प्रदेश की बढ़ती संवृद्धि का पता चलता है। इस तरह के आंकड़े निवेशकों को उत्तर प्रदेश की तरफ आकर्षित करते हैं।
  • कृषि विभाग की नीतियां तथा नवाचार संबंधी कार्यक्रम भी निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। प्रदेश में जैविक खेती पर जोर दिया जा रहा है, जिससे कृषि निर्यात में वृद्धि हुई है।
  • प्रदेश में पूंजी निवेश के लिए 'निवेश मित्र' और 'निवेश सारथी' जैसे पोर्टल काम कर रहे है। सिंगल विंडो काफी कारीगर साबित हुआ है।
  • 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन तेजी से ऊपर आया है, जिससे प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदल रही है।

सण्डीला में ₹1000 करोड़ के निवेश से आरंभ हुआ देश का सबसे बड़ा पेंट्स कारखाना

  • बहुराष्ट्रीय कंपनी बर्जर पेंट्स ने ₹1000 करोड़ का निवेश कर उत्तर प्रदेश के हरदोई स्थित संडीला में देश का सबसे बड़ा पेंट उत्पादन प्लांट स्थापित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मार्च 2023 में इस कारखाने का उद्घाटन किया।
  • यह एशिया की चौथी सबसे बड़ी पेंट उत्पादक इकाई है।
  • कंपनी के अनुसार लगभग 1200 श्रमिक इस फैक्ट्री में काम करेंगे। यहां प्रति माह 33 हजार मीट्रिक टन रंग का उत्पादन होगा।
  • यह भारत में बर्जर का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट है।

देश का सर्वाधिक एक्सप्रेस-वे वाला राज्य

  • उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक एक्सप्रेस-वे वाला राज्य बन गया है। यहां 6 एक्सप्रेस-वे क्रियाशील (संचलन आरम्भ हो चुका है) और 7 निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 6 नये एक्सप्रेस-वे बनाये जाने की घोषणा की गयी है। इस तरह उत्तर प्रदेश सर्वाधिक 19 एक्सप्रेस-वे वाला देश का प्रथम राज्य बन जा रहा है।
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी सूचना के अनुसार प्रयागराज - वाराणसी एक्सप्रेस-वे 110 किलोमीटर, मेरठ से हरिद्वार एक्सप्रेस-वे 110 किमी, गंगा एक्सप्रेसवे से शाहजहांपुर बरेली होते हुए रामपुर रुद्रपुर उत्तराखंड सीमा तक, चित्रकूट से प्रयागराज, झांसी लिंक एनएच-27 से बुंदेलखंड और विंध्य एक्सप्रेसवे चित्रकूट से मिर्जापुर का निर्माण कराया जाएगा।

प्रदेश में 25 हवाई अड्डे

  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश में पांच नए हवाई अड्डे शुरू करने की घोषणा की है। इससे राज्य में हवाई अड्डों की संख्या बढ़कर 25 हो गयी है।
  • अयोध्या में महर्षि वाल्मिकी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन दिसंबर 2013 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया।
  • प्रदेश में वर्ष 2024 में आरंभ होने वाले हवाई अड्डे आजमगढ़, अलीगढ़, मुरादाबाद, चित्रकूट और श्रावस्ती में स्थित हैं।

छवि और माहौल बदलने से बढ़ा विदेशी निवेश

निवेश को किसी राज्य की प्रगति और सामाजिक-राजनीतिक माहौल का सूचक माना जाता है। जिस राज्य की छवि कम अपराध दर, राजनीतिक स्थिरता और उद्योगों को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां वाली होगी, वहां निवेश की गति तीव्र और अधिक होगी। विदेशी निवेश के संबंध में यह मानक अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील होते हैं।
बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश की छवि और माहौल सुधरने से यहां आने वाली एफडीआई में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में बीते 4 वर्षों में ₹11 हजार करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है।
उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) तथा भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2000 से 2017 के मध्य उत्तर प्रदेश में जहां मात्र ₹3 हजार करोड़ का विदेशी निवेश आया था, वहीं 2019 से 2023 के मध्य लगभग ₹11 हजार करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ।

नोएडा में फिल्म सिटी

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 21 में एक हजार एकड़ क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म सिटी का निर्माण किया जा रहा है।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) से हो रहे इस निर्माण कार्य हेतु यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने 30 सितंबर, 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बिड जारी किया था, जिसमें सबसे अधिक बोली फिल्म निर्माता बोनी कपूर और रियल स्टेट डेवलपर भूटानी समूह समर्थित बेव्यू प्रोजेक्ट्स ने लगायी है। निर्माण कार्य शीघ्र आरंभ होने की संभावना है।

रीजनल फिल्म सिटी गोरखपुर में
गोरखपुर में उत्तर भारत की प्रथम 'रीजनल फिल्म सिटी' स्थापित की जा रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल से भोजपुरी फिल्म उद्योग को सफलता का नया आयाम प्राप्त होगा, ऐसा विशेषज्ञों का मानना है।

लखनऊ में एआई सिटी

लखनऊ के नादरगंज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिटी का विकास किया जा रहा है। यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएलसी) ने 'यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति (यूपीईएमपी)' के अंतर्गत इस प्रोजेक्ट पर कार्य आरम्भ किया है।
योजना के प्रथम चरण में 40 एकड़ के लैंड पार्सल में एआई बेस्ड साइबर सिटी का निर्माण किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर

देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने और रक्षा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। इसके अंतर्गत ब्राह्मोस मिसाइल्स से लेकर विभिन्न प्रकार के रक्षा उपकरण की मैन्युफैक्चरिंग की जाएगी।
उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा (यूपीडीआईसी) की योजना 6 क्षेत्र (नोड्स)-लखनऊ, कानपुर, झाँसी, आगरा, अलीगढ़, चित्रकूट में विस्तृत होगी।

फूजी सिल्वरटेक प्लांट

जापान की फूजी सिल्वरटेक कंपनी ने उत्तर प्रदेश में बड़े व्हीकल्स बनाने संबंधी निवेश के तहत वर्ष 2023 में संयंत्र स्थापना हेतु प्रदेश सरकार के साथ अनुबंध किया है। प्रदेश में नई एफडीआई नीति का लाभ पाने वाली यह पहली कंपनी बन गयी है।
यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण इस प्रोजेक्ट के लिए 25 एकड़ भूमि उपलब्ध करा रहा है।
फूजी सिल्वरटेक कंपनी विशिष्ट प्रकार के बड़े कॉन्क्रीट मिक्सर व्हीकल्स बनाती है। यह उत्तर प्रदेश में तीन चरणों में संयंत्र का विकास करेगी।

अशोक लेलैंड ई-बस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट

देश के सबसे बड़े कमर्शियल व्हीकल निर्माता कंपनियों में शामिल अशोक लेलैंड द्वारा लखनऊ में ई-बस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की स्थापना की जा रही है।
सितंबर 2023 में कंपनी के अधिकारियों ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर प्लांट लगाने के लिए एमओयू हासिल किया था। इसके तहत 70 एकड़ क्षेत्र में प्लांट स्थापित किया जाएगा।
वर्ष 2025 में लगने वाले महाकुंभ के लिए इस प्रोजेक्ट के तहत राज्य सरकार को 5000 ई-बसें उपलब्ध करानी हैं।

उत्तर प्रदेश में निवेश की चुनौतियां, संभावनाएं एवं प्रयास

कुछ वर्ष पूर्व तक निवेश के संदर्भ में उत्तर प्रदेश की गणना सबसे पीछे के राज्यों में की जाती थी, लेकिन 'रिफॉर्म, परफॉर्म तथा ट्रांसफॉर्म' के मंत्र से उत्तर प्रदेश आज निवेशकों की पसंद बन चुका है।
उत्तर प्रदेश में विश्व के 25 से अधिक देशों के उद्योगपतियों ने निवेश किया है, जो प्रदेश की बदलती छवि और अनुकूल माहौल का परिणाम है।

चुनौतियां
  • सरकार द्वारा आरंभ किये गये विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में निवेश की दशा और दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को प्राप्त हो रहे हैं, किन्तु इसे संभावनाओं के अनुरूप आज भी पूर्णतः संतोषजनक नहीं माना जा सकता। निवेश संबंधी सरकार की तमाम घोषणाएं एवं संभावनाएं अधूरी पड़ी हैं।
  • प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 अप्रैल, 2025 को इन्वेस्ट यूपी के कार्यों की समीक्षा करते हुए निवेश कार्यक्रमों को पुनर्नियोजित करने के निर्देश दिये हैं।
  • निवेश बढ़ने से प्रदेश की आर्थिक-सामाजिक तस्वीर बदल रही है, किन्तु अभी भी चुनौतियां कम नहीं हैं।
  • विशेषज्ञों के अनुसार हाल के वर्षों में माहौल सुधरने से उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं, किन्तु निवेश को वास्तविकता के धरातल पर उतारने में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
  • वर्ष 2018 में प्रदेश में हुए इन्वेस्टर्स समिट में ₹4.68 लाख करोड़ के एमओयू साइन होने का दावा सरकार द्वारा किया गया था। बाद में घोषित किया गया कि साइन किए गये 75 प्रतिशत से अधिक एमओयू धरातल पर उतारे जा चुके हैं। बावजूद इसके, सरकार की तरफ से आज तक यह नहीं बताया गया की ₹4.68 लाख करोड़ के एमओयू के तहत कितने निवेशकों को, किस जिले में, कितनी जमीन उद्यम स्थापित करने के लिए आवंटित की गयी। यह जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई कि कितने निवेशकों ने अपना उद्यम स्थापित करने की पहल की।
  • प्रदेश के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में ₹33.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इसके लिए किस जिले में निवेशकों को देने के लिए सरकार के पास कितनी भूमि है, यह भी आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया।
  • कौशल विकास स्किल डेवलपमेंट और स्थानीय उद्योगों पर आधारित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने संबंधी अनेक कठिनाइयां सामने आ रही हैं।

उत्तर प्रदेश में निवेश का प्रभाव
  • कुछ वर्ष पूर्व तक उत्तर प्रदेश की गणना देश के अल्पविकसित और 'बीमारू राज्य' के रूप में की जाती थी। यह सरकार के निवेश संबंधी प्रयासों का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन गया है।
  • निवेश अर्थव्यवस्था के प्राथमिक क्षेत्र (कृषि, पशुपालन आदि), द्वितीयक क्षेत्र (निर्माण/विनिर्माण) एवं तृतीयक क्षेत्र (सेवा) सभी के विकास हेतु समान रूप से महत्वपूर्ण होता है।
  • अर्थव्यवस्था में निवेश के परिणामस्वरूप वस्तु एवं सेवा की समग्र मांग में वृद्धि होती है। इससे जहां औद्योगिक विकास को गति मिलती है, वहीं उपभोक्ता बाजार के साथ-साथ बाजारीकरण का भी विस्तार होता है।
  • निवेश पूंजी निर्माण को गति प्रदान करता है। इससे बुनियादी संरचना (अवसंरचना) का विकास होता है, जिससे परिवहन के साधनों, बिजली आपूर्ति आदि की उपलब्धता बढ़ती है।
  • उत्तर प्रदेश में बीते कुछ वर्षों के भीतर एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट्स, औद्योगिक कॉरिडोर्स, फिल्म सिटी आदि का जिस तरह विस्तार हुआ, वह सब देश-विदेश से प्राप्त निवेश का ही परिणाम है।

निवेश की संभावनाएं

  • निवेशक पैसा वहीं लगाते हैं, जहां सुरक्षा व लाभ की गारंटी दिखाई देती है। यूपी में संसाधन पहले भी थे, लेकिन उनकी क्षमताओं को पहचान कर अवसरों में बदलने का कार्य अब ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर किया जा रहा है।
  • निवेशक किसी राज्य में निवेश करने से पहले चार चीजें देखते हैं- दूरदर्शी नेतृत्व, संसाधन, अच्छा बुनियादी ढांचा और व्यापार करने में सुगमता। यह सारी चीजें उत्तर प्रदेश में आज दिखायी दे रही हैं, जिससे यह निवेशकों एवं कारोबारियों की गंतव्य प्राथमिकताओं में शामिल हो चुका है।
  • हाल के दिनों में जापान, इजराइल, चीन, अमेरिका, फ्रांस, सिंगापुर, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, रूस तथा यूएई में आयोजित 'इंटरनेशनल ट्रैवल व ट्रेड एक्सपो' में 'ब्रांड यूपी' आक्रामक रूप से छाया रहा है।
  • उत्तर प्रदेश को 'ब्रांड यूपी' तथा 'मोस्ट फेवरेट टूरिस्ट डेस्टिनेशन' (पर्यटकों का सर्वाधिक मनपसंद गंतव्य) के रूप में देश-दुनिया में प्रस्तुत करने का जो मास्टर प्लान तैयार किया गया है, उसमें इंटरनेशनल ट्रेड शो, ट्रैवल फेयर्स व एक्सपो की प्रमुख भूमिका है।
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने हेतु हाल के दिनों में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट समेत कई कार्यक्रम आयोजित किये गये, जिनके अच्छे परिणाम भी सामने आए।
  • ब्रिटेन के लंदन, मैनचेस्टर, बर्मिंघम व ग्लासगो, स्पेन के मैड्रिड, बिलबाओ, बार्सिलोना, इटली के रोम, मिलान व जर्मनी के बर्लिन, म्यूनिख, फ्रैंकफर्ट में इंटरनेशनल रोड शो का आयोजन किया जा रहा है। इसी प्रकार पुर्तगाल के लिस्बन, नॉर्वे के ओस्लो, स्वीडन के स्टॉकहोम, फ्रांस के पेरिस, नीदरलैंड के हेग व फिनलैंड के हेलसिंकी में भी रोड शो आयोजित किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के चलते एफडीआई लिस्ट में उत्तर प्रदेश 11वें स्थान पर आ गया है।

इन्वेस्ट यूपी
उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेश में वृद्धि के उद्देश्य से 'इन्वेस्ट इंडिया' की तर्ज पर 'इन्वेस्ट यूपी' तैयार किया है।
इन्वेस्ट यूपी का काम राज्य में पूंजी निवेश को आकर्षित करना, निवेशकों को प्रोत्साहित करना तथा निवेश के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करना है।
इन्वेस्ट यूपी के पदेन अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री होंगे। इसके अतिरिक्त प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री एवं निर्यात प्रोत्साहन एवं निवेश मंत्री संस्था के उपाध्यक्ष होंगे।
प्रदेश में निवेश का कार्य वर्षों से देख रही संस्था 'उद्योग बंधु' का इन्वेस्ट यूपी में विलय कर दिया गया है।

निवेश मित्र
'निवेश मित्र' एक एकल खिड़की पोर्टल है। यह राज्य में उद्यमियों और व्यवसाय के लिए अनुमोदन, आवेदन पत्र, समेकित शुल्क भुगतान तथा निगरानी की स्थिति की पेशकश करने के दायित्व का निर्वाह करता है।
यह पोर्टल आवश्यक प्रमाण-पत्र, अनुमोदन, लाइसेंस ऑनलाइन प्रमाण-पत्र प्रदान करने का भी कार्य करता है।
इसके माध्यम से स्टार्टअप, उद्यमी, फर्म तथा कंपनियां अपने आवश्यक प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं।
यह प्री-इंस्टॉलेशन तथा प्री-ऑपरेशन क्लीयरेंस अथवा अनुमोदन के लिए आवेदन हेतु कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म (CAF) का प्रावधान करता है।

निवेश बढ़ाने के सुझाव
  • प्रदेश में कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) पर विशेष ध्यान देना होगा। बाहर से कंपनियां निवेश लेकर तो आएंगी, लेकिन कुशल कर्मचारी उत्तर प्रदेश में ही तैयार करने होंगे।
  • कंपोनेंट पर स्थानीय स्तर पर काम करना होगा। उदाहरण- मोबाइल में 150 से अधिक कंपोनेंट प्रयुक्त होते हैं। इन्हें बनाने के लिए कुशल एमएसएमई प्रदेश में ही तैयार करने होंगे।
  • राज्य स्तर पर 'प्लग एंड प्ले सिस्टम' विकसित करने की आश्यकता है। छोटी इकाइयों के लिए 'केवल मशीन लाइए और उत्पादन शुरू कर दीजिए' की अवधारणा लानी होगी।
  • अधिक से अधिक मेगा इकाइयों को प्रदेश में लाने की आवश्यकता है, जिससे औद्योगिकीकरण को तीव्र गति प्राप्त हो सके।
  • बड़ी इकाइयों के परिसर में ही आवासीय सुविधा देने की आवश्यकता हैं। इसके लिए उद्यमियों को सस्ती भूमि उपलब्ध करानी होगी।
  • 'प्रोजेक्ट डेवलपमेंट' के लिए डिजाइन कंपनी लाने के लिए अधिक इंसेंटिव देने की आवश्यकता है।
  • गांव से पलायन रोकने के लिए बुनियादी ढांचा सुधार कर रोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर तैयार करने होंगे।
  • उत्तर प्रदेश दुनिया में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का सबसे बड़ा मैन्यूफैक्चरिंग सेंटर बनने जा रहा है। सैमसंग कंपनी द्वारा दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल बनाने वाली फैक्ट्री नोएडा में स्थापित की गई है।
  • पहले भारत में बिकने वाले 90 प्रतिशत मोबाइल फोन आयात होते थे। आज 70 प्रतिशत मोबाइल फोन यूपी में बनते हैं।
  • यहां से 12 अरब डॉलर के मोबाइल निर्यात भी हो रहे हैं। लगभग 50 प्रतिशत टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीनों का निर्माण अब यूपी में किया जा रहा है।

निवेश सारथी

उत्तर प्रदेश में निवेशकों को इंसेंटिव्स पाने के लिए विभागों के चक्कर न लगाने पड़े और सारी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर ली जाए, इसके लिए सरकार ने 'निवेश सारथी' पोर्टल शुरू किया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय निवेश सारथी के माध्यम में एमओयू की सीधी मॉनीटरिंग कर रहा है।
निवेश सारथी पोर्टल को इस तरह विकसित किया गया है कि यह स्वतः व्यापार की प्रवृत्ति को समझ कर संबंधित विभाग की नीति के तहत मिलने वाले इंसेंटिव्स के लिए आवेदन करने का अवसर देता है।

लेटर ऑफ कंफर्ट
  • पोर्टल से 'लेटर ऑफ कंफर्ट' (LOC) भी जारी किया जा रहा है। नोडल एजेंसियों, प्रशासनिक विभागों, संबंधित विभागों तथा सरकार से संबंधित अधिकारियों के लिए पोर्टल पर अलग से लॉग-इन की सुविधा दी गयी है।
  • यह पोर्टल निवेशकों के लिए इंसेंटिव्स से जुड़ी सभी समस्याओं हेतु 'वन स्टॉप सॉल्यूशन' का काम कर रहा है। अलग-अलग विभागों के 35 नोडल अधिकारी इस पोर्टल पर निवेशकों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।

दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

Tags:

Comments

Comment करें

Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UPPSC, UPSSSC, UP Police, UP Lekhpal, RO/ARO और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।