उत्तर प्रदेश का उद्योग, व्यापार एवं वाणिज्य

उत्तर प्रदेश का उद्योग, व्यापार एवं वाणिज्य

उत्तर प्रदेश की आर्थिक यात्रा अब केवल पारंपरिक कृषि तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आधुनिक भारत के सबसे सशक्त औद्योगिक विकास का नया सफरनामा बन चुकी है। फिरोजाबाद की खनकती चूड़ियों, मुरादाबाद की पीतल नगरी की चमक और कानपुर के ऐतिहासिक मिलों से शुरू हुआ यह कारवां आज नोएडा की विशाल इलेक्ट्रॉनिक सिटी और लखनऊ में बन रही घातक ब्रह्मोस मिसाइलों की गूंज तक पहुंच चुका है। इस विस्तृत लेख में आपको उत्तर प्रदेश के प्रमुख उद्योग, व्यापार, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), डिफेंस कॉरिडोर, उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम और सरकार की प्रमुख औद्योगिक योजनाओं से जुड़ी पूरी और प्रामाणिक जानकारी पढ़ने को मिलेगी।
uttar-pradesh-udyog-vyapar-vanijya
उत्तर प्रदेश: उद्योग, व्यापार एवं अर्थव्यवस्था
पारंपरिक कृषि से आधुनिक औद्योगिक हब तक का सफरनामा

📊 प्रमुख आर्थिक आंकड़े (एक दृष्टि में)

📈 अर्थव्यवस्था व जीडीपी

  • राष्ट्रीय विनिर्माण में योगदान: 8%
  • यूपी विनिर्माण वृद्धि दर (2023-24): 13%
  • बजट का 22% बुनियादी ढांचा के लिए आवंटित

🤝 व्यापार सुगमता (EoDB)

  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में दूसरा (2nd) स्थान (12वें से छलांग)
  • विदेश व्यापार (2024-25): 21.98 बिलियन डॉलर
  • 8 वर्षों में निर्यात में 80% की वृद्धि

🚀 इन्फ्रास्ट्रक्चर व स्टार्टअप

  • 19 एक्सप्रेस-वे (7 संचालित) और 25 एयरपोर्ट्स
  • तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम
  • 14,000+ स्टार्टअप्स एवं 26 यूनिकॉर्न

🏭 प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक नगर एवं उनकी पहचान

📍 कानपुर (उत्तर भारत का मैनचेस्टर)

उद्योग: सूती वस्त्र, चमड़ा उद्योग, साबुन एवं डिटर्जेंट (घड़ी समूह)।

चमड़े के कुल निर्यात में 20% का योगदान।

📍 नोएडा / ग्रेटर नोएडा

उद्योग: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मोबाइल।

दुनिया की सबसे बड़ी सैमसंग मोबाइल फैक्ट्री। 3418+ स्टार्टअप्स (यूपी का शीर्ष स्टार्टअप हब)।

📍 मुरादाबाद एवं फिरोजाबाद

मुरादाबाद: विश्व प्रसिद्ध 'पीतल नगरी' (धातु हस्तशिल्प)।

फिरोजाबाद: कांच उद्योग (चूड़ी, बोतल, मोती)।

📍 लखनऊ एवं हरदोई

लखनऊ: ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण (डिफेंस कॉरिडोर), एआई सिटी।

हरदोई (संडीला): देश का सबसे बड़ा पेंट्स कारखाना (बर्जर पेंट्स - 1000 करोड़ का निवेश)।

🛡️ रक्षा औद्योगिक गलियारा (UP Defense Corridor)

यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
(विदेशी निर्भरता कम करने का लक्ष्य)
⬇
6 प्रमुख नोड्स (Nodes)
⬇
लखनऊ कानपुर झाँसी आगरा अलीगढ़ चित्रकूट
लखनऊ नोड: 11 मई 2025 को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल यूनिट का उद्घाटन।

🧵 मेगा टेक्सटाइल हब (PM MITRA योजना)

मेगा टेक्सटाइल एंड अपैरल पार्क
(1000 एकड़ - लखनऊ-हरदोई सीमा)
➔
₹10,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव
(रिलायंस, अरविंद मिल्स आदि)
➔
3 लाख रोजगार सृजन
(प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष)

📋 रैंकिंग एवं प्रमुख तुलनात्मक आँकड़े

उद्योग / क्षेत्र यूपी का स्थान महत्वपूर्ण तथ्य / प्रतिस्पर्धा
चीनी उद्योग प्रथम (1st) 2024-25 में 87.5 लाख टन उत्पादन (महाराष्ट्र को पीछे छोड़ा)। कुल 121 मिलें।
सूती वस्त्र उद्योग चतुर्थ (4th) 60 मिलें कार्यरत। पहले तीन स्थान: महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु।
एमएसएमई (MSME) प्रथम (1st) देश में सर्वाधिक 96 लाख एमएसएमई। यूपी में शीर्ष 3 जिले: 1. लखनऊ, 2. गाजियाबाद, 3. कानपुर।
स्टार्टअप हब तृतीय (3rd) शीर्ष 3 शहर: 1. नोएडा (3,418), 2. लखनऊ (1789), 3. गाजियाबाद (1,582)। 2 सूनिकॉर्न मौजूद हैं।
खिलौना उद्योग उभरता हब चित्रकूट, गोरखपुर, आजमगढ़ को फायदा। झाँसी के सॉफ्ट टॉयज ODOP में शामिल।

📜 प्रमुख सरकारी योजनाएँ (उद्योग व रोजगार)

उत्तर प्रदेश एमएसएमई नीति (2022)

सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 10-25% तक पूंजीगत अनुदान। ग्राम सभा की भूमि उद्योग निदेशालय को निःशुल्क। महिला/SC/ST उद्यमियों को 2% अतिरिक्त अनुदान।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना

18-40 वर्ष के युवाओं को उद्योग के लिए ₹25 लाख तथा सेवा क्षेत्र हेतु ₹10 लाख तक का ऋण सुविधा।

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना

पारम्परिक कारीगरों (बढ़ई, दर्जी, कुम्हार आदि) एवं हस्तशिल्पियों को स्वरोजगार व कौशल विकास हेतु प्रोत्साहन।

यूनिटी मॉल (Unity Mall)

लखनऊ, आगरा और वाराणसी में स्थापना। मुख्य उद्देश्य: ODOP, जीआई उत्पाद, और हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी तथा बिक्री।

अर्थव्यवस्था को जिन तीन क्षेत्रों (Sectors) में विभाजित किया जाता है, उनमें विकास की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण 'द्वितीयक क्षेत्र' (Secondary Sector) है। इस द्वितीयक क्षेत्र में शामिल हैं- निर्माण और विनिर्माण।
किसी देश, प्रदेश अथवा क्षेत्र को 'विकसित श्रेणी' (Developed Category) में लाने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम माना जाता हैं औद्योगिक विकास। इसके दो प्रमुख तत्वों- विनिर्माण (Manufacturing) तथा निर्माण (Construction), में रोजगार सृजन की सर्वाधिक संभावनाएं रहती हैं। यही कारण है कि आज अमेरिका, चीन और भारत जैसे विभिन्न देशों में 'मैनुफैक्चरिंग हब' बनने की होड़ लगी हुई है। अमेरिका ने इसके लिए घोषित रूप में 'टैरिफ वॉर' आरंभ कर रखा है। उत्तर प्रदेश में भी इन दिनों औद्योगिक विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है।
भारत के राष्ट्रीय विनिर्माण क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का लगभग 8 प्रतिशत योगदान है।
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में स्थिर मूल्यों पर वर्ष 2024-25 में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान लगभग 25 प्रतिशत रहा।
वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 13 प्रतिशत दर्ज की गयी।
उद्योग, व्यापार एवं वाणिज्य के विकास को गति देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचा (अवसंरचना) को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश के बजट 2025-2026 का 22 प्रतिशत भाग बुनियादी ढांचा के लिए आवंटित किया गया है। इसका परिणाम सामने आने लगा है। प्रदेश में एआई सिटी (लखनऊ), नोएडा में फिल्म सिटी, डिफेंस कॉरिडोर, टेक्सटाइल हब आदि के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है।
उत्तर प्रदेश 19 एक्सप्रेस-वे के साथ देश का सर्वाधिक एक्सप्रेस-वे वाला राज्य (7 एक्सप्रेस-वे संचालित) बन चुका है। यहां 25 एयरपोर्ट्स कार्य कर रहे हैं, जो औद्योगिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
उद्योग और कारोबार में सुगमता की दृष्टि से उत्तर प्रदेश ने हाल के दिनों में तीव्र विकास किया है। लीड्स द्वारा हाल में जारी 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of doing business) की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश ने लम्बी छलांग लगाते हुए देश के राज्यों में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। विगत वर्ष 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की इस रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश 12वें पायदान पर था। उत्तर प्रदेश ने यह उपलब्धि गुजरात, तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र जैसे अग्रणी राज्यों को पीछे छोड़कर प्राप्त की है। इस रिपोर्ट में आन्ध्र प्रदेश प्रथम स्थान पर है।
प्रदेश का एकमात्र स्टॉक एक्सचेंज कानपुर में स्थित है।

उत्तर प्रदेश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक
उद्योग का नाम भार सूचकांक
2011-12 2020-21 2021-22 2022-23
खाद्य विनिर्माण 93.56 101.71 98.67 60.95
पेय उत्पाद का विनिर्माण 22.01 203.99 293.37 472.17
पेय तम्बाकू एवं तम्बाकू के उत्पाद 53.74 57.12 67.00 70.05
सूती कपड़ा 15.68 124.63 107.60 95.38
चमड़ा तथा चमड़ा उत्पाद 27.00 57.74 55.15 50.61
कागज तथा कागज उत्पाद 13.54 173.38 222.63 279.13
रसायन तथा रासायनिक उत्पाद 99.21 118.97 142.72 148.75
मूल एवं मिश्रित धातु 67.81 125.80 132.07 141.80
यातायात उपकरण एवं पुर्जे 65.02 64.95 73.61 73.90
परिधानों का उत्पादन 25.24 - 57.69 63.12
अन्य 313.06 139.58 138.26 370.61
विनिर्माण सूचकांक 809.35 117.90 125.73 -

उद्यम संख्या के आधार पर देश के शीर्ष 5 राज्य
क्र.सं. राज्य उद्यमों की संख्या
1. उत्तर प्रदेश 6700736 (11.46%)
2. महाराष्ट्र 116125902 (10.48%)
3. पश्चिम बंगाल 5901521 (10.09%)
4. तमिलनाडु 5052444 (8.64%)
5. आन्ध्र प्रदेश 4237310 (7.25%)
स्त्रोत- छठी आर्थिक गणना

सर्वाधिक रोजगार वाले देश के शीर्ष 5 राज्य
क्र.सं. राज्य उद्यमों की संख्या
1. महाराष्ट्र 14374619 (11.26%)
2. उत्तर प्रदेश 13750866 (10.77%)
3. पश्चिम बंगाल 11544664 (9.04%)
4. तमिलनाडु 10809878 (8.46%)
5. गुजरात 9063569 (7.10%)
स्त्रोत- छठी आर्थिक गणना

प्रदेश के प्रमुख उद्योग

वस्त्र, चीनी, वनस्पति एवं सीमेन्ट उद्योग की गिनती प्रदेश के महत्वपूर्ण उद्योगों में की जाती है। इन उद्योगों से लोगों को रोजगार प्राप्त होते हैं जिससे प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में वृद्धि होती है। उत्पादन बढ़ने से लोगों के दैनिक जीवन की बहुत सारी आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।

चीनी उद्योग

  • चीनी उत्पादन के क्षेत्र में विगत वर्ष उत्तर प्रदेश द्वितीय स्थान पर था किन्तु चालू वर्ष में महाराष्ट्र को पीछे छोड़कर यह प्रथम स्थान पर आ गया है।
  • वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन 87.5 लाख टन हुआ, जबकि इसी अवधि में महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन 80.06 लाख मीट्रिक टन रहा। महाराष्ट्र और कर्नाटक (39.55 लाख टन) चीनी उत्पादन में क्रमशः द्वितीय व तृतीय स्थान पर हैं।
उत्तर प्रदेश में चीनी की 121 मिलें हैं। इसके अतिरिक्त बागपत के रमाला में 5 हजार टी.सी.डी. पेराई क्षमता की नई चीनी मिल स्थापित की जा रही है।
भारत का लगभग 30.76 प्रतिशत चीनी का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। प्रदेश में चीनी की मिलें मुख्यतः मेरठ, कानपुर, शाहजहांपुर, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, गाजीपुर, लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज, बस्ती और बरेली में हैं। रमाला चीनी मिल के शुरू हो जाने पर क्षेत्र में गन्ना पेराई की क्षमता दोगुनी हो जायेगी।

सूती वस्त्र उद्योग

  • सूती वस्त्र उद्योग में उत्तर प्रदेश का देश में चतुर्थ स्थान है। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर क्रमशः महाराष्ट्र, गुजरात एवं तमिलनाडु हैं। उत्तर प्रदेश में सूती वस्त्र की 60 मिलें हैं। कानपुर में 10 सूती वस्त्र मिलें हैं, जिसके कारण इसे 'उत्तर भारत का मैनचेस्टर' कहा जाता है। इसके अतिरिक्त गाज़ियाबाद, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली, हाथरस, हरदोई, अलीगढ़, सहारनपुर, बदायूँ, प्रयागराज तथा मऊ में मोटे एवं मध्यम प्रकार के कपड़े निर्मित किये जाते हैं। यहां दुस्ती कपड़े तथा तंबू भी बनाए जाते हैं।
  • प्रदेश में वस्त्र उद्योग कृषि के बाद रोजगार उपलब्ध कराने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। यही कारण है कि स्वतंत्रता के बाद से ही प्रदेश में इसके विस्तार पर जोर दिया गया। वर्ष 1969 में उत्तर प्रदेश राज्य वस्त्र निगम की स्थापना हुई। वर्तमान में निगम द्वारा प्रदेश में 13 कताई मिलों का संचालन किया जा रहा है। इनमें 5.2 लाख तकुओं की क्षमता वाली मशीनें लगी हैं, जिनसे हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है।
  • बावजूद इसके, वर्तमान में इनमें से अधिकांश कताई मिलें पूंजी एवं आधुनिक तकनीक के अभाव में लक्ष्य के अनुसार कार्य नहीं कर पा रही हैं। अनेक मिलें बंद होने के कगार पर हैं, या काम बंद कर चुकी हैं।
  • प्रदेश में उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल संघ द्वारा 11 कताई मिलों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन इनकी वर्तमान स्थिति राज्य वस्त्र निगम की मिलों से भी अधिक खराब है। अमरोहा, कांपिल्य (फर्रुखाबाद), बुलन्दशहर, झांसी, मगहर समेत अधिकांश मिलें बंद हो चुकी हैं। बकाया की वसूली के लिए कई मिलों की जमीन कुर्क की जा चुकी है।
  • प्रदेश में दरी बनाने के केन्द्र आगरा, बरेली, इटावा, सीतापुर, मिर्जापुर, मुरादाबाद एवं शाहजहांपुर में स्थित हैं। इसके अतिरिक्त मेरठ, आगरा, हाथरस, वाराणसी, भदोही, मैनपुरी और मिर्जापुर में कालीन (Corpet) निर्माण का काम किया जा रहा है।

प्रदेश में विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)

औद्योगिकी इकाइयों को एकीकृत औद्योगिक क्षेत्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में 7 विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zones) स्थापित किये जा रहे हैं। इनके स्थान हैं- नोएडा, कानपुर, भदोही, वाराणसी, मुरादाबाद एवं पूर्व-पश्चिम परिक्षेत्र।
विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) का उद्देश्य इधर-उधर स्थापित औद्योगिक इकाइयों के लिए एक विशेष स्थान उपलब्ध कराना है, जहां उन्हें यातायात, पर्यावरण, ऊर्जा संसाधन, विपणन आदि की सुविधाएं सरलता से उपलब्ध हो सकें। इन विशेष क्षेत्रों में आर्थिक कानून अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा उदार होते हैं।
जनवरी 2024 तक की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 14 विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) संचालित हैं।
प्रदेश में कुल अधिसूचित सेज (SEZ) की संख्या 31 है, जिनमें 14 संचालित हैं।

उत्तर प्रदेश को खिलौना हब बनाने की तैयारी

देश में स्वदेशी खिलौनों की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्तर प्रदेश को खिलौना हब बनाने की तैयारी शुरू कर दी गयी है। खिलौनों का उत्पादन बढ़ाकर राज्य सरकार की योजना तीन लाख से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ने की है। इसके लिए नयी खिलौना नीति लाने की तैयारी है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में प्रदेश में ₹20 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
प्रदेश के खिलौना हब बनने से सर्वाधिक लाभ उन जिलों को होगा जो अब तक उद्योगों की दृष्टि से पिछड़े माने जाते हैं, यथा चित्रकूट, गोरखपुर और आजमगढ़। झांसी के सॉफ्ट ट्वायज को 'एक जिला-एक उत्पाद' (ODOP) में शामिल कर इस पर काम शुरू किया जा चुका है।
देश में लगभग 90 प्रतिशत खिलौने चीन और ताइवान से आयात होते हैं। खिलौनों के वैश्विक कारोबार में भारत की हिस्सेदारी मात्र 0.5 प्रतिशत है। इस स्थिति में उत्तर प्रदेश सरकार खिलौना उद्योग को रियायतें देती है तो इस क्षेत्र से जुड़ी बड़ी कम्पनियां इधर रुख करेंगी। इसका सीधा लाभ प्रदेश को मिलेगा।

ऊनी वस्त्र उद्योग

कुछ वर्ष पहले तक उत्तर प्रदेश में बने ऊनी परिधान की विदेश तक मांग होती थी। कानपुर स्थित लाल इमली और धारीवाल मिल में बने ऊनी वस्त्रों की गुणवत्ता काफी अच्छी थी, जिससे समूचे देश और विदेशों में भी इन्हें पसन्द किया जाता था। इसके अतिरिक्त मिर्जापुर में भी ऊनी वस्त्रों की एक मिल है। सरकारी कागजों में आज भी उत्तर प्रदेश में ऊनी वस्त्र मिलों की संख्या 8 है। इनमें से 7 कताई तथा एक संयुक्त मिल है, लेकिन वास्तविकता यह कि इनमें से अधिकांश मिलें बंद हो चुकी हैं, अथवा उन्हें निजी क्षेत्र में बेचने की तैयारी चल रही है। 1876 में स्थापित कानपुर की लाल इमली और धारीवाल मिलों में दिसम्बर 2013 से उत्पादन बंद है। लगभग यही स्थिति अन्य मिलों की भी है।

सीमेन्ट उद्योग

प्रदेश में मुख्य रूप से चुनार, मिर्जापुर, रायबरेली, आगरा, प्रयागराज, कानपुर एवं लखनऊ में सीमेन्ट के कारखाने स्थित हैं। चुनार सीमेन्ट फैक्ट्री, चुनार, एम.पी. बिड़ला सीमेन्ट फैक्ट्री (कानपुर), बिड़ला सीमेन्ट फैक्ट्री (रायबरेली), अम्बुजा सीमेन्ट फैक्ट्री (प्रयागराज), श्री सीमेन्ट फैक्ट्री (कानपुर), माइसेम (Mycem) सीमेन्ट फैक्ट्री (लखनऊ) आज प्रदेश में सीमेन्ट के प्रमुख उत्पादन केन्द्र हैं। इसके अतिरिक्त आगरा में सीमेन्ट की फैक्ट्रियां हैं।

उत्तर प्रदेश में देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक सिटी

देश की सबसे बड़ी 'इलेक्ट्रॉनिक सिटी' ग्रेटर नोएडा के पास यमुना एक्सप्रेस-वे पर तैयार हो रही है। जेवर एयरपोर्ट के निकट लगभग 1700 एकड़ क्षेत्र में 'मैन्युफैक्चरिंग इलेक्ट्रॉनिक जोन' (MEZ) नाम से स्थापित होने वाली इस इलेक्ट्रॉनिक सिटी के लिए ग्रेटर नोएडा में काम आरम्भ हो चुका है। कई अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनियां यहां अपनी इकाई (Units) के लिए प्रस्ताव दे चुकी हैं। इस इलेक्ट्रॉनिक सिटी में चीन, ताइवान, सिंगापुर आदि देशों के अपने क्लस्टर (समूह) होंगे, जहां इन देशों की कम्पनियां भूमि लेकर कारखाने लगायेंगी।
प्रदेश में नोएडा-ग्रेटर नोएडा-यमुना एक्सप्रेस-वे, कानपुर-लखनऊ-उन्नाव एवं बुंदेलखंड को इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जोन के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रदेश में अभी मात्र एक इलेक्ट्रॉनिक सिटी है। वर्तमान में देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक सिटी (IT City) बंगलुरू में है। यह 903 एकड़ क्षेत्र में बनी है, जहां 156 कम्पनियां काम कर रही हैं।

चमड़ा उद्योग

कानपुर चमड़ा उद्योग के लिए जाना जाता है। देश के चमड़े एवं चमड़े से बनी वस्तुओं के कुल निर्यात में कानपुर के चमड़ा उद्योग का लगभग 20 प्रतिशत योगदान है। यहां के चमड़ा उत्पाद मुख्यतः अमेरिका और यूरोपीय देशों में निर्यात किये जाते हैं। कानपुर के अतिरिक्त मेरठ, आगरा, बरेली और लखनऊ प्रदेश में चमड़ा उद्योग के अन्य महत्वपूर्ण केन्द्र हैं।

कागज उद्योग

उत्तर प्रदेश में कागज का प्रथम कारखाना वर्ष 1879 में लखनऊ में स्थापित हुआ था। इसके अतिरिक्त मुजफ्फरनगर, मोदी नगर, मेरठ एवं सहारनपुर कागज उद्योग के केन्द्र हैं। गन्ने की खोई से कार्ड-बोर्ड बनाने का कारखाना मेरठ में है।

साबुन एवं डिटर्जेंट उद्योग

उत्तर प्रदेश का कानपुर नगर साबुन एवं डिटर्जेंट उद्योग का बड़ा केन्द्र है। यहां 50 से अधिक औद्योगिक इकाइयां प्रतिमाह 1.5 टन से अधिक डिटर्जेंट पाउडर एवं टिकिया का उत्पादन कर रही हैं। यहां का डिटर्जेंट निर्माता घड़ी समूह दुनिया की दिग्गज कम्पनियों को टक्कर दे रहा है।

दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री नोएडा में

दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री ने 10 मई, 2020 को नोएडा में निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन ने संयुक्त रूप से किया। सैमसंग की यह फैक्ट्री नोएडा के सेक्टर-81 में 35 एकड़ क्षेत्र में फैली है। यहां प्रतिवर्ष 6 करोड़ से अधिक मोबाइल फोन का निर्माण हो रहा है। मोबाइल के अतिरिक्त इस फैक्ट्री में सैमसंग के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी तैयार किये जाते हैं।  

उद्योग केन्द्र
1. पीतल के बर्तन मुरादाबाद, फर्रुखाबाद, हाथरस, मिर्ज़ापुर, वाराणसी
2. पीतल के ताले चाकू एवं कैंचियां अलीगढ़, मेरठ, मथुरा, हाथरस
3. पीतल की मूर्तियां मथुरा
4. खेल के सामान आगरा, मेरठ, बरेली
5. लकड़ी के खिलौने लखनऊ, वाराणसी
6. बंत की छड़ियां बरेली
7. लकड़ी का फर्नीचर बरेली, सहारनपुर, हाथरस, वाराणसी
8. साबुन, डिटर्जेंट कानपुर, चन्दौसी, मोदीनगर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद
9. माचिस उद्योग बरेली, सहारनपुर, प्रयागराज, मेरठ
10. कालीन भदोही, आगरा, वाराणसी, मिर्जापुर, सहारनपुर, बरेली
11. दरी आगरा, बरेली, अलीगढ़, मिर्जापुर, इटावा
12. इत्र, सुगंधित तेल कन्नौज, गाजीपुर, लखनऊ, जौनपुर, प्रयागराज
13. मिट्टी के खिलौने आगरा
14. बिस्कुट मोदीनगर, आगरा, अलीगढ़
15. सूती वस्त्र, हैंडीक्रॉफ्ट वाराणसी, मेरठ, देवबंद, टांडा
16. सिगरेट गाजियाबाद, सहारनपुर
17. रंग एवं वॉर्मिश मेरठ, कानपुर, गाजियाबाद, मोदीनगर
18. टर्च उद्योग लखनऊ
19. औषधि कानपुर, लखनऊ, झांसी, सहारनपुर
20. नल के पाइप कानपुर, प्रयागराज, लखनऊ
21. चीनी मिट्टी के बर्तन प्रयागराज, खुर्जा (बुलन्दशहर)
22. हाथ निर्मित कागज मथुरा, काल्पी, मेरठ
23. लोहे के बांट आगरा, सहारनपुर
24. पेठा उद्योग आगरा, प्रयागराज
25. प्लाईवुड नजीबाबाद, सीतापुर
26. लकड़ी पर नक्काशी सहारनपुर
27. ऊनी वस्त्र उद्योग कानपुर
28. सिरेमिक, पाटरी खुर्जा (बुलन्दशहर)
29. वनस्पति घी कानपुर देहात, आगरा
30. चीनी/खांडसारी शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर

इसके अतिरिक्त प्रदेश में चंदौसी (संभल), आगरा, मेरठ, मोदीनगर, गाजियाबाद साबुन एवं डिटर्जेंट बनाने के अन्य महत्वपूर्ण केन्द्र हैं।

इलेक्ट्रॉनिक उद्योग

प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक उद्योग तेजी से विस्तार ले रहा है। देश में बनने वाले कुल मोबाइल फोन में लगभग 65 प्रतिशत उत्पादन उत्तर प्रदेश में हो रहा है। प्रदेश में अभी तक इस उद्योग की इकाइयां नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण क्षेत्र तक सीमित हैं, किन्तु सरकार ने अब विशेष रियायतों के साथ इन्हें बुन्देलखण्ड और पूर्वांचल तक विस्तार देने की घोषणा की है।
प्रदेश सरकार ने नयी इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण नीति-2020 के तहत अगले पांच वर्षों में ₹ 40 हजार करोड़ के निवेश और ₹ 4 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर तैयार करने का लक्ष्य घोषित किया है। 

कुटीर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के मानक
सामान्यतः कुटीर, सूक्ष्म और लघु उद्योगों को एक मान लिया जाता है, जबकि निर्धारित मानक के अनुसार इन तीनों की कार्यप्रणाली और निवेश में काफी भिन्नता है।
कुटीर उद्योग: कुटीर उद्योग किसी एक परिवार के सदस्यों द्वारा संचालित व्यवसाय होता है। इस उद्योग में पूंजी निवेश नाममात्र की होती है। वेतनभोगी श्रमिकों की भागीदारी नहीं होती। उत्पादन में मशीनों का प्रयोग नहीं किया जाता है। मशीनों की बजाय हाथ से उत्पादन कुटीर उद्योग की मुख्य पहचान है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) के नये मानक
(अप्रैल 2025 से लागू)
उद्योगों के प्रकार निवेश सीमा वार्षिक टर्न ओवर
1. सूक्ष्म उद्यम (M) ₹2.5 करोड़ तक ₹10 करोड़ तक
2. लघु उद्यम (S) ₹2.5 करोड़ से अधिक किन्तु अधिकतम ₹25 करोड़ तक ₹10 करोड़ से अधिक किन्तु अधिकतम ₹100 करोड़ तक
3. मध्यम उद्यम (M) ₹25 करोड़ से अधिक किन्तु अधिकतम ₹125 करोड़ तक ₹100 करोड़ से अधिक किन्तु अधिकतम ₹500 करोड़ तक
स्रोत- केन्द्रीय बजट, 2025-26
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) के लिए देश में अब तक मानक दो अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार निर्धारित किये गये थे। यह श्रेणियां थीं:
    1. विनिर्माण उद्योग
    2. सेवा क्षेत्र के उद्योग
  • नये निर्णय में दोनों श्रेणी के उद्योगों के लिए समान मानक निर्धारित किये गये हैं।

खाद्य तेल उद्योग

प्रदेश में मथुरा समेत अनेक क्षेत्रों में सरसों तथा अन्य तिलहन की अच्छी पैदावार होती है। बावजूद इसके, खाद्य तेल उद्योग में प्रदेश की भागीदारी निराशाजनक है। इसका सबसे बड़ा कारण है देश में विदेशों से सस्ते खाद्य तेल का आयात किया जाना। हाल के दिनों में देश में पाम ऑयल के बढ़ते आयात ने स्थानीय खाद्य तेल उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया है। प्रदेश में गाजियाबाद, कानपुर, आगरा एवं मोदीनगर में खाद्य तेल उद्योग की इकाइयां कार्य कर रही हैं।
लखनऊ में 11 मई, 2025 को ब्रम्होस सपुरसेनिक क्रूज मिसाइल उत्पादन यूनिट का उद्घाटन रक्षा मंत्री द्वारा किया गया।

पीतल एवं अन्य धातु उद्योग

मुरादाबाद का पीतल उद्योग पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। यहां पीतल की ढलाई और नक्काशी का काम आजादी के पहले से हो रहा है। धातु हस्तशिल्प निर्यात की बदौलत मुरादाबाद को विश्व के मानचित्र पर 'पीतल नगरी' नाम से जाना जाता है।
बावजूद इसके, नई कर व्यवस्था और लोगों की बदलती रुचि के कारण मुरादाबाद का पीतल उद्योग अपनी पहचान खोने लगा है। यहां के उद्यमी और दस्तकार पीतल का काम छोड़कर एल्युमिनियम का काम करने लगे हैं।
संत कबीर नगर जनपद का बखिरा उपनगर पीतल और काँसा उद्योग के लिए जाना जाता है। कुछ वर्ष पूर्व तक यहां लगभग हर घर में एक अनौपचारिक 'धातु कारखाना' होता था, जहाँ कारीगरों का एक समूह बेलनाकार धातु का उपयोग कर सुन्दर बर्तनों का निर्माण करता था। यहां के बर्तन देश-विदेश में काफी लोकप्रिय थे। अनेक कारणों से आज यहां का धातु उद्योग तेजी से समाप्त हो रहा है।
प्रदेश का मिर्जापुर क्षेत्र एल्युमिनियम उद्योग का केन्द्र है। यहां रेणुकूट में बॉक्साइट से एल्युमिनियम के पिंड एवं चादरें बनायी जाती हैं। इसके अतिरिक्त कानपुर, मथुरा, मेरठ, अलीगढ़ एवं आगरा में एल्युमिनियम के बर्तन बनाने की औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं।

कांच उद्योग

प्रदेश का फिरोजाबाद अपने कांच उद्योग के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां से कई देशों को कांच की चूड़ी, बोतल, ग्लास निर्मित वस्तुओं का निर्यात किया जाता है। इस शहर में कांच, चूड़ी, बोतल, ग्लास, मोती आदि का उत्पादन करने वाले लगभग 200 कारखाने हैं, जिनसे हजारों लोगों का रोजगार जुड़ा है।
फिरोजाबाद के अतिरिक्त गाज़ियाबाद, मेरठ, नैनी (प्रयागराज), शिकोहाबाद, हाथरस, लखनऊ तथा वाराणसी कांच उद्योग के केन्द्र हैं।

माचिस उद्योग

प्रदेश का बरेली शहर माचिस उद्योग के लिए जाना जाता है। यद्यपि यहां माचिस बनाने वाली सबसे बड़ी औद्योगिक फैक्ट्री आईटीसी के स्वामित्व वाली विमको (WIMCO) बंद हो चुकी है, फिर भी यहां कई छोटी औद्योगिक इकाइयां माचिस के कारोबार में संलग्न हैं। सहारनपुर, मेरठ, रामपुर, प्रयागराज और लखनऊ माचिस उद्योग से जुड़े प्रदेश के अन्य केन्द्र हैं।

उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा

लगभग 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की आवश्यकताओं के साथ भारत वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख एयरोस्पेस और रक्षा बाजार के रूप में तेजी से उभर रहा है। यह रक्षा आवश्यकताएं सैन्य विमानों, पनडुब्बियों, हेलीकॉप्टरों, भूमि प्रणालियों से लेकर हथियारों और सेंसर तक फैली हैं।
इस वर्तमान आर्थिक अवसर का लाभ उठाने के उद्देश्य एवं एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ भारत सरकार ने देश में दो रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित करने की घोषणा की है, जिसमें से एक उत्तर प्रदेश में है।

उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर

उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपी डीआईसी) एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जो भारतीय एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता को कम करने का उद्देश्य रखती है।
बीते वर्ष अलीगढ़ में आयोजित मीट में रक्षा उत्पादन में ₹3700 करोड़ से अधिक के निवेश की घोषणा के साथ यूपी रक्षा कॉरिडोर की उत्साहजनक शुरुआत हुई। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) को विभिन्न अन्य राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर इस परियोजना को पूर्ण करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।
उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा (यूपीडीआईसी) की योजना 6 क्षेत्र (नोड्स)-लखनऊ, कानपुर, झाँसी, आगरा, अलीगढ़, चित्रकूट में विस्तृत होगी। यह गलियारा उत्तर प्रदेश के मध्य, पूर्व, पश्चिम क्षेत्र में फैला और दिल्ली को जोड़ने वाले स्वर्णिम चतुर्भुज के साथ-कोलकाता एक्सप्रेस-वे के नेटवर्क द्वारा समर्थित है।
इससे जुड़े एक्सप्रेस-वे हैं:
  • यमुना एक्सप्रेस-वे
  • आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे
  • पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे
  • बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे
  • गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे
  • गंगा एक्सप्रेस-वे
आई.आई.टी. कानपुर और आई.आई.टी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से संबंधित उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना हेतु अधिकृत किया गया है।
यूपीडीआईसी के लिए नोड्स पर विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने हेतु यूपीडा और विभिन्न कंपनियों के बीच 32 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। रक्षा औद्योगिक गलियारा अलीगढ़ और कानपुर नोड्स के लिए भूमि आवंटन शुरू किया जा चुका है।
उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा हेतु अब तक ₹24,510.60 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इससे करीब 41,667 लोगों को रोजगार प्राप्त होंगे।
रक्षा मंत्रालय और निजी उद्योगों के साथ साझेदारी में अत्याधुनिक परीक्षण सुविधाओं की स्थापना के लिए ₹117.06 करोड़ अनुदान सहायता प्रदान करने की मंजूरी दी गई है।
लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस, एरियोलॉय, झांसी में भारत डायनेमिक्सलिमिटेड, आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड, टाटा टेक्नोलॉजीलिमिटेड, ग्लोबल इंजीनियर्स लिमिटेड, डब्ल्यूबी इलेक्ट्रॉनिक्सइंडिया लिमिटेड, कानपुर में अदानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीलिमिटेड, अनंत टेक्नोलॉजीज, जेनसर एयरोस्पेस और अलीगढ़ में एंकर रिसर्च लैब्स एलएलपी व एमिटेक इलेक्ट्रॉनिक्स इकाइयां इस परियोजना में साथ हैं। इन निवेशकों द्वारा या तो अपनी इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं या परियोजनाओं को चालू करने की प्रक्रिया चल रही है।
लखनऊ में 11 मई, 2025 को ब्रम्होस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल उत्पादन यूनिट उद्घाटन रक्षा मंत्री द्वारा किया गया।


उत्तर प्रदेश को ‘टेक्सटाइल हब’ बनाने की तैयारी

प्रदेश के लखनऊ-हरदोई सीमा पर 1000 एकड़ क्षेत्र में पीएम मित्र योजना के तहत मेगा टेक्सटाइल एंड अपैरल पार्क की स्थापना की जा रही है। मार्च 2025 में इस संबंध में 700 करोड़ के दो एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये।
प्रदेश के इस मेगा टेक्सटाइल पार्क को घरेलू कपड़ा और परिधान कंपनियों से ₹10,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
यूपी के इस मेगा टेक्सटाइल पार्क में इकाइयां स्थापित करने की इच्छुक कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, अरविंद मिल्स, वर्धमान और आहूजा टेक्सटाइल मिल्स आदि शामिल हैं।
टेक्सटाइल पार्क में लगभग 400 बड़े और छोटे वस्त्र निर्माण और प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने की योजना है। इनकी स्थापना से लगभग ₹15,000 करोड़ का निवेश आने का अनुमान है।
संभावना व्यक्त की जा रही है कि प्रदेश में मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना से तीन लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
भारत ने आगामी पांच वर्षों में 100 बिलियन डॉलर के परिधान निर्यात का लक्ष्य रखा है। यूपी टेक्सटाइल पार्क इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगा।
टेक्सटाइल पार्क में न केवल विनिर्माण और प्रसंस्करण इकाइयां शामिल होंगी, बल्कि सम्पूर्ण टेक्सटाइल मूल्य श्रृंखला स्थापित करने की योजना है।
यह सुविधा प्रशिक्षण, विपणन, डिजाइनिंग, पैकेजिंग, जनशक्ति, परामर्श और निर्यात सेवाएं प्रदान करेगी।
उत्तर प्रदेश में वाराणसी, लखनऊ, भदोही और गोरखपुर परंपरागत रूप से कपड़ा उत्पादन केन्द्र हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को परिधान एवं सिलाई में कौशल प्रशिक्षण देने के लिए रेमंड कंपनी के साथ समझौता किया है।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख निर्यात जोन व उत्पाद
जोन उत्पाद
नोएडा रत्न और आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक, परिधान, चमड़ा, सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, कम्प्यूटर
आगरा हस्तशिल्प सामान, बैग, कलात्मक सामान, संगमरमर उत्पाद, सिल्क, कालीन
मुरादाबाद बोन ज्वैलरी, कलात्मक आभूषण, आर्ट मेटल वेयर
लखनऊ केमल बोन कर्विंग मिनियेचर, फ्लोरी कल्चर, आयुर्वेदिक/हर्बल औषधि
कानपुर तेल, परफ्यूम, मसाले, फार्मास्यूटिकल, हैंडलूम, रसायन, सॉफ्टवेयर, चमड़ा उत्पाद
वाराणसी लकड़ी के खिलौने, रेशम, ऊनी, हस्तशिल्प
हरदोई प्रदेश के पहले आयुर्वेदिक दवा उद्योग की स्थापना न्यू इंडिया फार्मास्यूटिकल के नाम से यहां की गई है।

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक पार्क व क्षेत्र
औद्योगिक पार्क क्षेत्र
• निर्यात संवर्द्धन पार्क ग्रेटर नोएडा
• एपैरेल पार्क ट्रोनिका सिटी, गाजियाबाद
• लेदर पार्क आगरा
• चर्म प्रौद्योगिकी पार्क बन्थर, उन्नाव
• एग्रोपार्क हापुड़, बाराबंकी, वाराणसी एवं सहारनपुर
• इलेक्ट्रॉनिक सिटी नोएडा एवं आगरा
• प्लास्टिक सिटी कानपुर देहात एवं औरैया
• सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क नोएडा, कानपुर, लखनऊ एवं प्रयागराज
• निकिडा सिटी कानपुर एवं उन्नाव
• औद्योगिक पार्क आगरा एवं नोएडा
• ट्रान्स गंगा परियोजना कानपुर एवं उन्नाव
• मेगा लेदर क्लस्टर सण्डीला (हरदोई) एवं रमईपुर (कानपुर)

उत्तर प्रदेश में बनेंगे 30 औद्योगिक कॉरिडोर

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) ने प्रदेश में 5 एक्सप्रेस-वे के किनारे 30 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तैयार करने की कार्य योजना तैयार की है। कुछ कॉरिडोर पर कार्य आरंभ किये जा चुके हैं।
प्रदेश में यह 30 औद्योगिक गलियारे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे बनाए जा रहे हैं।
प्रदेश के 12 जिलों को जोड़ने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे पर 11 जगहों को इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए चिन्हित किया गया है। इनका कुल क्षेत्रफल 1522 हेक्टेयर है। इस पर करीब ₹2300 करोड़ व्यय होने का अनुमान है।
प्रदेश में 10 जिलों से गुजरने वाले आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर 5 स्थलों का चयन औद्योगिक गलियारा निर्माण हेतु किया गया है। इनका कुल क्षेत्र 532 हेक्टेयर है। इनके विकास पर लगभग ₹650 करोड़ व्यय होने हैं।
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के किनारे 2 स्थानों को औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के लिए चुना गया है। कुल 345 हेक्टेयर में फैले इन दो कॉरिडोर के विकास पर ₹320 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे औद्योगिक गलियारा

उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना 'पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे औद्योगिक गलियारा' अपने अंतिम स्वरूप में लगभग तैयार है। इस योजना के अन्तर्गत पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर 341 किमी दूरी में लखनऊ से गाजीपुर के बीच छह औद्योगिक गलियारा विकसित करने की प्रक्रिया आरंभ की जा चुकी है। इसके लिए स्थान चिन्हित कर लिए गए हैं। संबंधित जिले के राजस्व अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी गई है।
अयोध्या-प्रयागराज हाईवे और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे क्रॉसिंग पर 410 हेक्टेयर भूमि में औद्योगिक गलियारा विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की ओर से भूमि चिन्हित की गई है।
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे औद्योगिक गलियारा (पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर) की स्थापना से एक तरफ जहां औद्योगिक विकास के साथ आर्थिक रूप से पिछड़े पूर्वांचल क्षेत्र में विनिर्माण इकाइयां स्थापित होंगी, वहीं इससे स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे ।

बुंदेलखंड इंडस्ट्रियल सिटी

बुंदेलखंड के विकास को गति देने के उद्देश्य से झांसी के निकट नोएडा की तर्ज पर एक औद्योगिक शहर और प्राधिकरण के विकास का कार्य किया जा रहा है।
बुंदेलखंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीडा) द्वारा झांसी के 33 गांवों की भूमि पर 35000 एकड़ क्षेत्र में 'बुंदेलखंड औद्योगिक सिटी' बसाने की प्रक्रिया आरंभ की गयी है ।

लखनऊ, आगरा और वाराणसी में यूनिटी मॉल

भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के लखनऊ, आगरा और वाराणसी में यूनिटी मॉल खोलने की प्रक्रिया आरंभ की गयी है। यूनिटी मॉल में राज्य द्वारा अपने 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP), जीआई उत्पादों, हस्तशिल्प उत्पादों तथा अन्य राज्यों के ओडीओपी उत्पादों की प्रदर्शनी तथा बिक्री की व्यवस्था की जाएगी।
लखनऊ में पहले से संचालित हो रहे अवध शिल्प ग्राम में ही यूनिटी मॉल का संचालन शुरू किया जाएगा।
पहले चरण में अवध शिल्प ग्राम में पूर्व से निर्मित 34 वातानुकूलित दुकानों में यूनिटी मॉल को संचालित करने की योजना है, जबकि दूसरे चरण में अवध शिल्पग्राम में यूनिटी मॉल के लिए डिजाइन व डीपीआर तैयार किया जा रहा है।
यूनिटी मॉल का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकीकरण, मेक इन इंडिया, ओडीओपी प्रयासों को बढ़ावा देना तथा स्थानीय हस्तशिल्प उत्पाद एवं रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।

उत्तर प्रदेश में देश का प्रथम टेक्सटाइल मशीन पार्क

उत्तर प्रदेश में कानपुर के निकट देश का प्रथम टेक्सटाइल मशीन पार्क स्थापित किया जा रहा है। वर्तमान में टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़ी मशीनें चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया, यूरोप आदि से आयात की जाती हैं। टेक्सटाइल मशीन पार्क की स्थापना से इन मशीनों का निर्माण देश में ही हो सकेगा। इन मशीनों के आयात पर अभी 40 हजार करोड़ से अधिक खर्च हो रहे हैं, जिसके पांच साल में बढ़कर 4 लाख करोड़ हो जाने की संभावना है।
टेक्सटाइल मशीनों को 'मेक इन इंडिया' के तहत बनाने के लिए पीपीपी मोड पर भोगनीपुर, कानपुर के निकट, में टेक्सटाइल मशीन पार्क बसाया जा रहा है, जहां से ₹30 हजार करोड़ की मशीनों के निर्यात की योजना है।
वस्त्र उत्पादन क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ऊंची छलांग की तैयारी में है। लखनऊ के पास पीएम मित्र पार्क सहित प्रदेश के दस जिलों में नए टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना की जा रही है।
वर्ष 2030 तक वस्त्र बाजार लगभग 350 अरब डॉलर का होने का अनुमान है। इसके लिए करीब ₹4 लाख करोड़ की मशीनों की आवश्यकता होगी। यह संख्या अगले पांच वर्षों में 10 गुना बढ़ जाएगी। मशीनों के साथ उनके रखरखाव के लिए तकनीकी एक्सपर्ट की जरूरत पड़ेगी।   प्रदेश का टेक्सटाइल मशीन पार्क लगभग 1.5 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करेगा।
इस पार्क को सुबोध अग्रवाल और रवि भूषण अरोड़ा के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर विकसित किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम
क्र.सं. उपक्रम जिला
1. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड लखनऊ
2. अपट्रॉन डिजिटल सिस्टम लिमिटेड लखनऊ
3. अपट्रॉन केपीसिटर लिमिटेड लखनऊ
4. स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड लखनऊ
5. मॉडर्न बेकरीज कानपुर
6. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड कानपुर
7. भारतीय चमड़ा रंगाई तथा जूता संस्थान कानपुर
8. कृत्रिम अंग निर्माण निगम कानपुर
9. उर्वरक कारखाना गोण्डा
10. इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज, मनकापुर गोण्डा
11. उर्वरक कारखाना गोरखपुर
12. डीजल लोकोमोटिव फैक्ट्री वाराणसी
13. उर्वरक कारखाना प्रयागराज
14. भारत पंप एण्ड कम्प्रेसर्स, नैनी प्रयागराज
15. इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज, नैनी प्रयागराज
16. त्रिवेणी स्ट्रक्चरल, नैनी प्रयागराज
17. सिंगरौली कोयला खान, सिंगरौली सोनभद्र
18. राष्ट्रीय ताप बिजली निगम, सिंगरौली सोनभद्र
19. सीमेन्ट कारखाना, डाला सोनभद्र
20. हिन्दुस्तान एल्युमीनियम कॉर्पोरेशन, रेणुकूट मिर्जापुर
21. सीमेन्ट कारखाना, चुर्क मिर्जापुर
22. आयुध उपस्कर कारखाना, हजरतपुर फिरोज़ाबाद
23. ट्रांसफॉर्मर फैक्ट्री झांसी
24. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड गाजियाबाद
25. तेलशोधक कारखाना मथुरा
26. इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज रायबरेली

देश का सबसे बड़ा पेंट्स कारखाना हरदोई में

  • बहुराष्ट्रीय कंपनी बर्जर पेंट्स ने 1000 करोड़ का निवेश कर उत्तर प्रदेश के हरदोई स्थित संडीला में देश का सबसे बड़ा पेंट उत्पादन प्लांट स्थापित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में इस कारखाना का उद्घाटन किया।
  • यह एशिया की चौथी सबसे बड़ी पेंट उत्पादक इकाई है।
  • कंपनी के अनुसार लगभग 1200 श्रमिक इस फैक्ट्री में काम करेंगे।
  • यहां प्रति माह 33 हजार मीट्रिक टन रंग का उत्पादन होगा।
  • यह भारत में बर्जर का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं। इसमें ₹1000 करोड़ का निवेश किया गया है। इसके लिए वर्ष 2020 में कोविड काल के दौरान एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसे मात्र 30 महीनों में चालू किया गया है।
  • बर्जर समूह की यह फैक्ट्री 37 एकड़ में बनी हुई है। यहां पेंट के अतिरिक्त पुट्टी एवं अन्य सामग्रियों का भी उत्पादन किया जाएगा।

प्रदेश में औद्योगिक संस्थान

प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए अनेक औद्योगिक संस्थायें कार्यरत हैं। इनमें पिकअप, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम, उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम, उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम, उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम, उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम इत्यादि उल्लेखनीय हैं। इनके अतिरिक्त भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक, इंडस्ट्रियल फाइनेन्स कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ इण्डिया तथा इंडस्ट्रियल क्रेडिट एवं इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया जैसी अखिल भारतीय संस्थायें भी प्रदेश में उद्योगों के विकास में सहयोग प्रदान कर रही है।
पिकअप: पिकअप (Pradeshiya Industrialand Investment Corporation of UP Ltd.-PICUP) की स्थापना कम्पनी अधिनियम 1956, के अन्तर्गत राज्य सरकार की कम्पनी के रूप में वर्ष 1972 में की गयी। निगम की वर्तमान अंश पूंजी ₹150 करोड़ है एवं निगम की चुकता अंश पूंजी ₹135.57 करोड़ है।
पिकप का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के औद्योगिक विकास हेतु वृहद एवं मध्यम उद्योगों को दीर्घकालीन ऋण सहायता उपलब्ध कराना तथा प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना है। यह राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन अभिकर्ता के रूप में करती है।
  • उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम (UPFC): प्रदेश में सर्वांगीण औद्योगीकरण हेतु लघु एवं मध्यम उद्योगों के स्थापनार्थ इकाइयों को भूमि, भवन एवं यंत्र-संयत्र हेतु दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम की स्थापना राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 के अन्तर्गत वर्ष 1954 में की गयी। इसका मुख्यालय कानपुर में है।

माइक्रोसॉफ्ट का उत्तर प्रदेश में बड़ा निवेश

दिग्गज आईटी कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट उत्तर प्रदेश में बड़ा निवेश करने जा रही है। कंपनी प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में 4000 लोगों की क्षमता का कैम्पस बनाएगी। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया ने प्रदेश में विश्वस्तरीय टेक्नोलॉजी हब बनाने पर अपनी सहमति दी है।
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया का हैदराबाद और बेंगलुरू में कैम्पस है। कंपनी ने हैदराबाद में 5000 और बेंगलुरू में 2000 लोगों की क्षमता का कैम्पस बनाया है।

इन्वेस्ट यूपी

उत्तर प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन्वेस्ट यूपी एजेंसी का गठन किया गया है। एजेंसी के गठन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की एक बैठक में मंजूरी दी गयी।
इस एजेंसी के अध्यक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ होंगे। इस एजेंसी के जरिए प्रदेश में निवेश करने वाली कम्पनियों को कम समय में तमाम सुविधाएं, एनओसी मिल सकेंगी। इसका एक फायदा यह भी होगा कि निवेश की जटिल प्रक्रियाएं आसान होंगी।

उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लि. (UPSIDC):

उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लि. की स्थापना वर्ष 1961 में औद्योगिक अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु की गयी थी। निगम की अधिकृत पूंजी ₹4000 लाख एवं चुकता पूंजी ₹2407.51 लाख है, जिसमें सम्पूर्ण योगदान उत्तर प्रदेश सरकार का है।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (UPSIDC) का विलय उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) में कर दिया गया है।

औद्योगिक विकास से सम्बन्धित संचालित योजनाएं

प्रदेश में औद्योगिक विकास एवं रोजगार सृजन से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका प्रदेश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।

भारत सरकार के सहयोग से संचालित योजनाएं

सूक्ष्म, लघु उद्यम क्लस्टर विकास योजना: योजनान्तर्गत भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा संचालित क्लस्टर विकास योजना के माध्यम से क्षेत्र विशेष (कलस्टर) को भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा उस क्षेत्र में कॉमन फैसिलिटी सेन्टर स्थापित कराने हेतु (कम-से-कम 20 सदस्य) सहायता उपलब्ध करायी जाती है। सामान्यतः वित्त पोषण परियोजना लागत का 70 प्रतिशत तक अनुदान के रूप में दिया जाता है।

एस्पायर योजना: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित एस्पायर योजनान्तर्गत संस्थाओं को एल.बी.आई (लिवलीहुड बिजनेस एक्यूबेशन सेन्टर) एवं टी.यू.आई. (टेक्नालॉजी एक्यूबेशन सेन्टर) स्थापित करने हेतु अनुदान स्वीकृत किया जाता है। यह अनुदान मात्र मशीनरी के मद में अधिकतम ₹1 करोड़ तक दिया जाता है।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाएं

प्रदेश सरकार द्वारा संचालित कुछ प्रमुख योजनाएं इस प्रकार हैं:

औद्योगिक आस्थानों में सुविधाओं का विस्तार: प्रदेश के वृहद् औद्योगिक आस्थानों में स्थापित औद्योगिक इकाइयों को विभिन्न अवस्थापना सुविधाएं (सड़क, नाली, ड्रेनेज आदि) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उच्चीकरण योजना संचालित की जा रही है।

सूक्ष्म एवं लघु उद्योग तकनीकी उन्नयन योजना: प्रदेश की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयों को प्रदेश सरकार द्वारा तकनीकी उन्नयन के तहत पुनर्निर्मित कर प्रोत्साहित किये जाने की व्यवस्था की गयी है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक से विभिन्न क्षेत्रों (उत्पाद गुणवत्ता सुधार, ऊर्जा दक्षता, अच्छी पैकेजिंग एवं कम्प्यूटरीकृत गुणवत्ता नियंत्रण आदि) में बढ़ावा देना है। इस योजना का क्रियान्वयन निम्नवत किया जाता है-
  • पूंजी उत्पादन सहायता: तीन वर्ष से संचालित एवं कार्यरत सूक्ष्म एवं लघु औद्योगिक इकाइयों को तकनीकी विकास हेतु पूंजी उपादन, प्लांट मशीनरी एवं उपकरण खरीद पर 50 प्रतिशत, अधिकतम ₹5 लाख तक की सहायता दी जाती है।
  • ब्याज सहायता: मशीनों के क्रय हेतु लिये गये ऋण पर 5 वर्ष तक ब्याज का 50 प्रतिशत, ब्याज उपादान के रूप में देने का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹1 लाख (प्रतिवर्ष) है।

हस्तशिल्प पेंशन योजना: योजनान्तर्गत चयनित हस्तशिल्पियों को प्रतिमाह ₹ 2,000 पेंशन प्रदान किये जाने की व्यवस्था की गयी है। यह पेंशन हस्तशिल्पी को चयनोपरान्त शेष जीवनकाल तक उपलब्ध करायी जाती है। योजना हेतु शिल्पकार की न्यूनतम आयु 50 वर्ष अवश्य होनी चाहिए।

हस्तशिल्प विपणन प्रोत्साहन योजना: हस्तशिल्पियों द्वारा तैयार किये गये माल के विपणन में सहायता के लिए इस योजना को संचालित किया जा रहा है।
प्रदेश के हस्तशिल्पियों को अपने उत्पादों के विपणन हेतु विभिन्न मेलों में भाग लिये जाने के क्रम में परिवहन व्यय एवं स्टाल के किराये में हुए व्यय की प्रतिपूर्ति हेतु अधिकतम ₹20 हजार की धनराशि राज्य सहायता के रूप में प्रदान की जाती है।

मुख्यमंत्री हस्तशिल्प पेंशन योजना: इस योजना में चयनित हस्तशिल्पी को ₹500 प्रतिमाह पेंशन दी जाती है। पात्र हस्तशिल्पियों की न्यूनतम आयु 60 वर्ष या इससे अधिक होनी चाहिए।

हस्तशिल्प कौशल विकास उन्नयन योजना: यह योजना प्रदेश के हस्तशिल्प बाहुल्य जिलों में संचालित है, जिसके अन्तर्गत 18 से 35 वर्ष के आयु वर्ग के व्यक्ति पात्र होते हैं।

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना: उत्तर प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के पारम्परिक कारीगरों - बढ़ई, दर्जी, टोकरी बुनकर, नाई, सुनार, लोहार, कुम्हार, हलवाई आदि स्वरोजगारियों तथा पारम्परिक हस्तशिल्पियों को प्रोत्साहित करने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना' संचालित की जा रही है।

जिला उद्योग आधुनिकीकरण योजनाः जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्रों को कॉर्पोरेट लुक देते हुए जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्रों के आधुनिकीकरण एवं उच्चीकरण की योजना प्रारम्भ की गयी है।

एकल मेज व्यवस्था एवं उद्योग बन्धुः प्रदेश में उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण तथा उद्यमों की स्थापना को सुगम (फैसिलिटेट) करने हेतु त्रिस्तरीय उद्योग बन्धु की बैठकों की व्यवस्था की गयी है।
योजना के तहत मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय प्राधिकृत समिति तथा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय उद्योग बन्धु समिति का गठन किया गया है।
मण्डल स्तर पर मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में 'मण्डलीय उद्योग बन्धु' एवं जिले स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 'जिला उद्योग बन्धु' की बैठकों का आयोजन होता है।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना

प्रदेश के शिक्षित युवा बेरोजगारों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना का संचालन किया जा रहा है।
योजनान्तर्गत उद्योग स्थापना हेतु ₹25 लाख तथा सेवा क्षेत्र हेतु ₹10 लाख तक का ऋण बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है।
इस योजना हेतु हाईस्कूल उत्तीर्ण 18-40 आयु वर्ग के उत्तर प्रदेश के ऐसे मूल निवासी पात्र हैं, जो किसी वित्तीय संस्थान द्वारा डिफॉल्टर घोषित न किए गए हों।

भारत सरकार के सहयोग से संचालित कार्यक्रम

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम

  • 18 वर्ष से अधिक आयु के बेरोजगारों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से इस योजना का भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSMEs) द्वारा संचालन किया जा रहा है।
  • योजनान्तर्गत, विनिर्माण क्षेत्र की ₹50 लाख तथा सेवा क्षेत्र की
  • ₹20 लाख तक की परियोजना लागत वाली नई इकाइयों को स्थापित करने हेतु चिन्हित बैंकों से वित्तपोषण कराकर सरकारी सहायता के रूप में 15 से 35 प्रतिशत तक मार्जिन मनी का अनुदान प्रदान किया जाता है।
  • उत्तर प्रदेश में इस योजना का क्रियान्वयन खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड तथा जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्रों द्वारा किया जा रहा है।
  • योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत सरकार से उत्तर प्रदेश में 4854 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना हेतु ₹146.93 करोड़ मार्जिन मनी लक्ष्य के सापेक्ष 6129 लाभार्थियों को ₹191.65 करोड़ मार्जिन मनी वितरित की गयी, जो लक्ष्य के सापेक्ष 130.44 प्रतिशत है।
  • वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में 5,772 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना हेतु ₹167.39 करोड़ मार्जिन मनी के लक्ष्य के सापेक्ष दिसंबर 2022 तक 2,666 लाभार्थियों को लाभान्वित कर ₹87.39 करोड़ धनराशि वितरित की गई।

स्फूर्ति योजना

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार द्वारा संचालित स्फूर्ति योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक ढंग से काम कर रहे उद्योगों एवं उनके कारीगरों का सामूहिक रूप से कौशल विकास करना है।
  • योजना के अंतर्गत कारीगरों की आय बढ़ाने हेतु कॉमन फैसिलिटी सेंटर, प्रौद्योगिक उन्नयन, प्रशिक्षण, उत्पाद विकास, नवाचार, विपणन क्षमता, बेहतर पैकेजिंग आदि जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

उत्तर प्रदेश में 14 हजार स्टार्टअप्स, 26 यूनिकॉर्न

  • उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विस्तार के साथ स्टार्टअप्स, यूनिकॉर्न और 'सूनिकॉर्न' की संख्या तीव्र गति से बढ़ रही है। स्टार्टअप इकोसिस्टम 2025 के अनुसार देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में उत्तर प्रदेश का तीसरा स्थान है। यहां 14,000 से अधिक स्टार्टअप्स और 26 यूनिकार्न हैं।
  • अनुकूल औद्योगिक और निवेश नीतियों के चलते उत्तर प्रदेश में न केवल नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि कई स्टार्टअप्स अब यूनिकॉर्न बनने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। यूनिकॉर्न बनने की ओर तीव्र गति से अग्रसर स्टार्टअप्स को 'सूनिकॉर्न' कहते हैं।
  • उत्तर प्रदेश में स्थापित पे-टीएम, पे-टीएम मॉल, इंडिया मार्ट, इनोवेसर, मोगलिक्स, पाइन लैब्स, इंफो एज और फिजिक्स वाला जैसे अनेक प्रसिद्ध स्टार्टअप्स हैं, जो देश के प्रसिद्ध यूनिकॉर्न में शुमार हैं।
  • 'यूनिकॉर्न' वह स्टार्टअप होता है, जिसकी वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर से अधिक हो। फिलहाल देश में 111 यूनिकॉर्न विद्यमान हैं।
  • उत्तर प्रदेश में दो सूनिकॉर्न स्टार्टअप्स कार्य कर रहे हैं, जिनके नाम क्लास प्लस व इनशॉर्ट्स हैं।
  • उत्तर प्रदेश फिलहाल देश में तीसरा सबसे बड़ा 'स्टार्टअप ईकोसिस्टम' वाला प्रदेश बन चुका है। यहां सभी 75 जिलों में स्टार्टअप्स की उपस्थिति है और विशेष बात यह है कि 49 प्रतिशत स्टार्टअप्स टियर 2 व टियर 3 शहरों से संबंधित हैं।
  • उत्तर प्रदेश में 10 'स्टार्टअप हब सिटी' हैं, जिनमें नोएडा प्रथम स्थान पर है। नोएडा में वर्तमान में (2025) 3,418 स्टार्टअप्स हैं। इस सूची में दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर क्रमशः लखनऊ (1789), गाजियाबाद (1,582) तथा कानपुर (586) हैं।
  • प्रदेश में स्टार्टअप्स ईकोसिस्टम को प्रोत्साहन मिलने का असर यह है कि यहां एक लाख से अधिक रोजगार सृजन के अवसर उपलब्ध हुए हैं।
  • कृषि आधारित (एग्री टेक बेस्ड) स्टार्टअप्स उत्तर प्रदेश में अब अपनी सार्थक पहचान बना रहे हैं। इनके माध्यम से न केवल लोगों को रोजगार मिल रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं के विकास में मदद भी मिल रही है।

उत्तर प्रदेश में 'ब्रह्मोस' का निर्माण

भारतीय प्रतिरक्षा की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि करने वाली ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्माण उत्तर प्रदेश में आरंभ हो गया है। इसके प्लांट का निर्माण लखनऊ-कानपुर रोड स्थित डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा ₹300 करोड़ की लागत से किया गया है, जिसका उद्घाटन 11 मई, 2025 को केंद्रीय रक्षा मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप से किया।
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के निर्माण, विकास और मार्केटिंग का दायित्व ब्रह्मोस एयरोस्पेस कंपनी पर है। यह भारत सरकार के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) तथा रूस की सरकारी कंपनी NPOM का एक संयुक्त उपक्रम है, जिसमें भारत की 50.5 प्रतिशत और रूस की 49.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
उत्तर प्रदेश के इस कॉरिडोर में प्रत्येक वर्ष नई पीढ़ी की 100 से 150 ब्रह्मोस मिसाइलें निर्मित की जाएंगी। नई पीढ़ी की ये मिसाइलें ब्रह्मोस की पुरानी पीढ़ी से वजन में हल्की और तकनीक में बेहतर होंगी।
उत्तर प्रदेश में निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल का वजन 2,900 किग्रा से घटाकर 1,290 किग्रा किया गया है। इसकी रेंज 300 किमी से अधिक होगी।
देश में तमिलनाडु के बाद उत्तर प्रदेश दूसरा राज्य है, जहां एक समर्पित रक्षा गलियारा स्थापित किया है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा रक्षा उत्पादन में राज्य की भूमिका को मजबूत करता है।

उत्तर प्रदेश एमएसएमई नीति, 2022

देश में सर्वाधिक 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) वाले उत्तर प्रदेश में नई इकाइयों की स्थापना संबंधी संभावनाओं की जमीन पुख्ता करने के उद्देश्य से 'उत्तर प्रदेश एमएसएमई नीति, 2022' प्रस्तुत की गयी है, जिसे 27 सितंबर, 2023 को कैबिनेट द्वारा स्वीकृति भी प्रदान कर दी गयी।
एमएसएमई नीति, 2022 के अन्तर्गत प्रदेश में विद्यमान लैंड बैंक की समस्या को समाप्त करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं। इसके अनुसार ग्राम सभा की 5 एकड़ या इससे अधिक भूमि को पुनर्ग्रहित कर उद्योग निदेशालय को निःशुल्क स्थानांतरित की जाएगी।
उद्योग निदेशालय संबंधित भूखण्ड को विकसित कर डीएम सर्किल रेट पर एमएसएमई इकाइयों की स्थापना हेतु आवंटित करेगा।
नई एमएसएमई नीति के तहत स्थापित होने वाले नए सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 10 से 25 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान दिया जाएगा।
बुंदेलखंड और पूर्वांचल में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयां लगाने पर अनुदान की सीमा क्रमशः 25 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 15 प्रतिशत होगी। इसी प्रकार मध्यांचल और पश्चिमांचल में यह सीमा क्रमशः 20 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 10 प्रतिशत होगी।
अनुसूचित जाति, जनजाति एवं महिला उद्यमियों को दो प्रतिशत अधिक अनुदान प्रदान किया जाएगा। अनुदान की अधिकतम सीमा चार करोड़ रुपये प्रति इकाई होगी।

सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों में लखनऊ शीर्ष पर, गाजियाबाद द्वितीय स्थान पर

आर्थिक विकास में तीव्रता के साथ ही उत्तर प्रदेश की औद्योगिक तस्वीर में भी तेजी से बदलाव आ रहा है। कुछ समय पहले तक औद्योगिक नगरी के रूप में पहचान रखने वाले कानपुर को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयों की संख्या के मामलों में लखनऊ और गाजियाबाद जैसे नगरों ने पीछे कर दिया है।
केंद्रीय एमएसएमई विभाग द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार यूपी में सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों की संख्या सबसे अधिक लखनऊ में हो गई है। दूसरे स्थान पर गाजियाबाद तथा तीसरे स्थान पर कानपुर हैं।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कुल 19.32 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं।
पश्चिम और मध्य उत्तर प्रदेश के जिले औद्योगिक विकास में आज भी काफी समृद्ध हैं। पूर्वांचल और बुंदेलखंड इस मामले में पीछे हैं। बावजूद इसके, औद्योगिक रूप से पिछड़े पूर्वांचल में उद्योग-धंधों की संख्या तीव्र गति से बढ़ रही है।
देवरिया जैसे जिले में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों की लगभग 25 हजार इकाइयां विद्यमान हैं। यह संख्या झांसी, बाराबंकी, हापुड़ और रायबरेली जैसे जिलों से भी अधिक है। बलरामपुर, मऊ, गोंडा, बलिया और चंदौली में भी एमएसएमई की संख्या औसतन 15 हजार से अधिक हैं।
नए सूक्ष्म उद्योग के लिए पूंजीगत ब्याज अनुदान ऋण पर वार्षिक ब्याज का 50 प्रतिशत, अधिकतम ₹25 लाख, प्रति इकाई पांच वर्षों के लिए दिया जाएगा।
अनुसूचित जाति, जनजाति एवं महिला उद्यमियों को 60 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाएगा।

अन्य लाभ
  • एमएसएमई इकाइयों को अधिक-से-अधिक स्रोतों से क्रेडिट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ऐसी सभी इकाइयों को लिस्टिंग व्यय के 20 प्रतिशत (अधिकतम पांच लाख रुपये) की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
  • दस एकड़ से अधिक के एमएसएमई पार्क स्थापित करने हेतु भूमि खरीद पर 100 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क में छूट और लिए गए ऋण पर सात वर्षों तक 50 प्रतिशत ब्याज अनुदान (अधिकतम दो करोड़ रुपये) उपलब्ध कराया जाएगा।
  • एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ पांच किलोमीटर के दायरे में औद्योगिक आस्थानों का विकास कर एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • औद्योगिक क्लस्टरों में कामन एफलुएंट ट्रीटमेंट प्लांट के लिए ₹10 करोड़ तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
  • भौगोलिक संकेतक (जीआइ रजिस्ट्रेशन)/पेटेंट आदि कराने के लिए दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  • क्लीन एंड ग्रीन तकनीक को अपनाने के लिए एमएसएमई इकाइयों को अधिकतम ₹20 लाख तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
  • उद्यमिता विकास संस्थान को 'सेंटर आफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के विदेश व्यापार में 80 प्रतिशत वृद्धि

  • केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश का विदेश व्यापार 21.98 बिलियन डॉलर पहुंच गया। आठ वर्ष पूर्व, 2017-18 में प्रदेश का अधिकतम निर्यात 13.80 बिलियन डॉलर तक पहुंचा था।
  • विभिन्न स्तरों पर वैश्विक तनावों के बावजूद उत्तर प्रदेश ने विदेश व्यापार में तीव्र वृद्धि की है। दुनियाभर में यहां के उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
  • उत्तर प्रदेश से वर्ष 2019-20 में 16.99 एवं 2020-21 में 16.39 बिलियन डॉलर मूल्य के सामान विदेश भेजे गये। वर्ष 2021-22 में 20.94 तो 2022-23 में 21.69 बिलियन डॉलर का सामान उत्तर प्रदेश से निर्यात किया गया। वर्ष 2023-24 में इसमें गिरावट आई और वर्ष भर में 20.57 बिलियन डॉलर का सामान विदेशों को भेजा गया।

सर्वाधिक निर्यात होने वाली वस्तुएं
  • उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक इंजीनियरिंग, गारमेंट्स, लेदर, इलेक्ट्रॉनिक और डेयरी उत्पादों को विदेश भेजा गया। सर्वाधिक इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद 2024-25 में भेजे गये, जिनका मूल्य 5.26 बिलियन डॉलर था। इसी तरह डेयरी उत्पाद का कारोबार इस वर्ष 2.47 बिलियन डॉलर का रहा।
  • वर्ष 2024-25 में राज्य से 2.22 बिलियन डॉलर के रेडीमेड गारमेंट्स और 1.20 बिलियन डॉलर मूल्य के लेदर उत्पाद निर्यात किए गए।

विदेश में बढ़ी यूपी के उत्पादों की मांग
  • भारतीय निर्यात परिषद के अनुसार उत्तर प्रदेश के उत्पादों की मांग व आपूर्ति दुनिया भर में बढ़ रही है। आठ वर्षों में इसमें 80 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
  • विदेश व्यापार में प्रदेश के कानपुर, नोएडा, मुरादाबाद, आगरा, वाराणसी, भदोही, गाजियाबाद जैसे शहरों का प्रमुख योगदान है। इन शहरों से चमड़ा, कालीन, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक, पीतल, हैंडलूम, हस्तकला के उत्पाद विदेशों में भेजे जाते हैं।

दोस्तों, हमें उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही और सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट WWW.UPGK.IN पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

Tags:

Comments

Comment करें

Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UPPSC, UPSSSC, UP Police, UP Lekhpal, RO/ARO और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।